किसी इंसान की महानता उसके छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी होती है

कभी-कभी छोटे-छोटे बारीक ब्यौरे उन बड़े-बड़े कारनामों से कहीं ज्यादा अहम बन जाती हैं जो दिल से नहीं किये गये होते हैं। ये छोटे-छोटे हावभाव हैं जो आपके अस्तित्व को ऊँचा बढ़ा देते हैं।
किसी इंसान की महानता उसके छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी होती है

आखिरी अपडेट: 28 नवम्बर, 2018

रोजाना के छोटे-छोटे व्यवहार उन चीजों में से हैं जो मजबूत इमोशनल बांड बनाने का काम करती हैं।

ये व्यवहार, एक इशारे से दूसरे तक, आपके दिल को एक दोस्ती या रोमांटिक रिश्ते बनाने में मदद करते हैं।

किसी इंसान की महानता को समझने के लिए, उनके रूप-रंग को देखना काफी नहीं है। मौका आने पर तो उनके शब्द उनके व्यवहार या उनकी बातों के पीछे की सच्चाई को सामने लेने में नाकाम रहते हैं।

एक इंसान की असली पहचान उसके रोजाना के लगभग सभी छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी होती है। इसमें कोई शक नहीं है कि आप उन सभी गुणों को परखने के माहिर हैं।

असल में, यह कहा जा सकता है कि एक टिकाऊ और मजबूत रिश्ता बनाने के लिए, यह जरूरी है कि आप उन सभी छोटी-बड़ी बातों को जानें। यही वह जगह है, जहां एक इंसान की असली जड़ें होती हैं।

यही कारण है, हम सुझाव देते हैं कि आप हमारे साथ इस विषय पर चर्चा करें जो आपके आपसी रिश्तों में एक बड़ी भूमिका निभाती है।

हमें पूरा यकीन है कि यह आपके लिये फायदेमंद होगा।

छोटे-छोटे व्यवहार और ब्यौरे, दिल की जुबाँ रखते हैं

बचपन से ही हम समाजिक कायदे-कानून सीखते हैं। वे सम्मान, शिष्टाचार और उस तरह के व्यवहार पर बने होते हैं जिनसे हम एक सम्मान पाने लायक माहौल बनांते हैं (या बनाने की कोशिश करते हैं) जहाँ हम एक-दूसरे के साथ रहेंगे।

लेकिन शिष्टाचार के नियमों से बढ़कर, “प्लीज”, “थैंक यू” या “गुड मॉर्निंग” कहने की सीमा से पहले, यह अंदरूनी जागरूकता वह जगह है जहां एक भरोसेमंद पर्सनलिटी बनती है

आमतौर पर, कोई आदमी मददगार और विनम्र हो सकता है; लेकिन उसके इस चेहरे के पीछे कोई स्वार्थ भी छिपा हो सकता है।

दूसरी ओर, ऐसे लोग हैं जो उन छोटे-छोटे व्यवहार पर गौर नहीं करते हैं। ऐसे में वे यह नहीं जान पाते कि कोई इंसान अच्छा है या बुरा। वे बस दूसरे तरह के व्यवहारों को ही अहमियत देते हैं।

चलिये इस बारे में थोड़ा और जान लेते हैं।

बड़े काम और छोटी बातें

छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी महानता

कुछ लोगों का मानना है कि प्यार को बड़े-बड़े कामों के जरिये साबित किया जाता है, सही मायने में कहें तो “सब-कुछ या कुछ भी नहीं”।

  • हालांकि, ज्यादा संतुष्ट और खुश रिश्ते तभी बनते हैं जब वे हर दिन अपने बंधन को नयापन देते हैं।
  • वे गिफ्ट के लिये इनकार नहीं करते या किसी हीरो जैसी हरकत करने से नहीं बचते हैं। लेकिन उन्हें वास्तव में जो चाहिए वह है आपसी तालमेल जहां हर चीज सच्ची हो, जहां उनके प्यार को दिखाई भी दे और समझा भी जाये।

आपका दिन कैसा रहा” और “आप मुझे बहुत खुश कर देते हैं” जैसे छोटे-छोटे व्यवहार हैं जो आपको या आपके साथी को हमेशा खुश कर सकती हैं, वे चीजें जो आपको महंगे से महंगे गिफ्ट से भी कहीं ज्यादा खुशियाँ देती हैं।

आपकी महानता आपके छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी होती है

आपकी महानता आपके छोटे-छोटे व्यवहार में छुपी होती है

कभी-कभी आप खुद को ऐसे लोगों से घिरा हुआ पाते हैं जिनकी नजरें आप पर तो होती हैं लेकिन असल में वे आपको नहीं देख रहे होते हैं। आपके कई ऐसे दोस्त या रिश्तेदार हो सकते हैं जो आपको सुनते तो हैं, लेकिन असल में उनका ध्यान आप पर नहीं होता है।

  • अचानक कोई आता है जो आपके छोट-छोटे हाव-भावों की मदद से आपको एक खुली किताब की तरह पढ़ सकता है और जो आपमें अपनी सच्ची दिलचस्पी दिखाता है।
  • ये छोटे-छोटे व्यवहार आपको एक इंसान की स्वाभाविक अच्छाइयों के बारे में बताते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हम सबके अन्दर एक कंपास होता है जो बताता है कि कोई आदमी ईमानदार है या नहीं है।
  • वह आदमी जो उन छोटी-छोटी बातों को अहमियत देता है, उनके पीछे के इरादों और इमोशन को पहचानता है।

“अगर मैं आपसे पूछूं कि आप कैसे हैं, तो ऐसा इसलिये क्योंकि मैं वाकई जानना चाहता हूं। मैं आपकी तरफ होना चाहता हूं क्योंकि मुझे सच में जरूरत महसूस होती है और मैं जानना चाहता हूं कि आप वहां सुरक्षित पहुंचते हैं। “

ये छोटी-छोटी चीजें हैं जो उन लोगों का हर दिन खुशियों से भर देती हैं जिन्हें हम प्यार करते हैं।

खुशी सबसे छोटी बातों में होती है

छोटे-छोटे व्यवहार में छिपी है सबसे बड़ी खुशी

सबसे बढ़कर खुशियों का मतलब है, डर का नहीं होना। यह शांति और संतुलन की एक स्थिति है जो मानसिक और भावनात्मक दोनों तरह से होती, जब आप अपने आस-पास की हर चीज को अपनाना सीख जाते हैं।

  • एक मुस्कान, एक हंसी, एक ईमानदार नज़र, कोई सरप्राइज़ जिसकी उम्मीद न की हो… ये छोटी-छोटी बातें आपको वे सब खुशियों पाने में मदद करती हैं जो किसी जख्म को भरने, किसी भी दुःख या निराशा को भूलने में मददगार होती है।
  • जब आप बड़े लक्ष्यों को पाने की ठान लेते हैं, तो अपने लिये एक नामुमकिन सा लक्ष्य बना लेते हैं और नतीजा यह होता है कि आपको केवल हार और मायूसी का सामना करना पड़ता है।
  • खुश होने के लिए किसी ऊंची चोटी पर चढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। कभी-कभी आप बस एक शांत घाटी में रह सकते हैं और आसमान की तारीफ कर सकते हैं।
  • यही वह जगह है जहां आप खुशियों तक पहुँचने के लिए सच्चा गाइड पा लेंगे, जो छोटी-छोटी और सुनहरी बातों से सजा होगा, जहां से आखिरकार आप सेल्फ-रियलाइजेशन तक पहुंच जाएंगे।
  • चलिये ऐसा बनते हैं। चलिए उन सम्मानित सा-स्थिति को बनायें जो उन छोटी-छोटी चीजों को अहमियत देने की काबिलियत रखती है। चलिये विनम्रता और सम्मान का व्यवहार करें, खुद की और अपने आस-पास के लोगों की अहमियत समझें।

एक बात समझ लें कि बार-बार “मैं तुमसे प्यार करता हूं” कहना आपके प्यार को और ज्यादा ईमानदार नहीं बनाता है। कभी-कभी अपने प्यार को ईमानदारी के साथ जताने के लिये यह तरीका बिना शब्दों वाली सहमति की तुलना में ज्यादा बेहतर होता है।

यह आपकी रुचि हो सकती है ...
विनम्रता की अद्भुत अहमियत
स्वास्थ्य की ओरइसमें पढ़ें स्वास्थ्य की ओर
विनम्रता की अद्भुत अहमियत

अनगिनत पुस्तकें और सेल्फ-हेल्प गुरु हमें विनम्रता का महत्व सिखाने और यह प्रयत्न करने के लिए समर्पित हैं कि हम बेहतर व्यक्ति कैसे बनें। वे हमें आत्म-चेतना, आंतरिक ध्यान और बेहतर आत्मसम्मान की प्रैक्टिस करने की सलाह देते हैं।



  • Sánchez Santa-Bárbara, E. (1999). RELACIÓN ENTRE LA AUTOESTIMA PERSONAL, LA AUTOESTIMA COLECTIVA Y LA PARTICIPACIÓN EN LA COMUNIDAD. Anales De Psicología / Annals of Psychology, 15(2), 251-260. Recuperado a partir de https://revistas.um.es/analesps/article/view/30141
  • Valdez Medina, José Luis y Mondragón, Jesús Antonio y González Arratia López Fuentes, Norma Ivonne y González Escobar, Sergio (2004). Significado psicológico de respeto entre adolescentes. Revista Internacional de Ciencias Sociales y Humanidades, SOCIOTAM, XIV (1), 113-129. [Fecha de Consulta 24 de Enero de 2021]. ISSN: 1405-3543. Disponible en: https://www.redalyc.org/articulo.oa?id=654/65414106
  • Paula Ruiz Torres (2019). Profesionales, directivas y riesgos psicosociales: efectos de la era digital y de la falta de corresponsabilidad real y la autoexigencia en el trabajo. Noticias CIELO, ISSN-e 2532-1226, Nº. 9. https://dialnet.unirioja.es/servlet/articulo?codigo=7159551