उनके बगीचे में फूल न रोपें जो उन्हें कभी नहीं नहीं सींचेंगे

04 जून, 2018
यदि आप अपना वक्त और श्रम ऐसे इंसान का साथ और सम्मान पाने में लगाते हैं जो आपकी कद्र नहीं करता, तो आपको इसी समय अपनी कोशिशें रोक देनी चाहिए। आपको अपना समय और शक्ति किसी और दिशा में लगानी चाहिए। आपको उन लोगों के बगीचों में फूल नहीं रोपना चाहिए जो कि आपके फूलों की रक्षा नहीं कर सकते या उन्हें सींच नहीं सकते।

हम सब अक्सर दूसरों के बगीचे में फूल लगाने के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसा हम इसलिए करते हैं क्योंकि हम उन्हें चाहते हैं। आखिरकार यही बर्ताव उन व्यक्तियों के साथ हमारे परस्पर संबंधों और रिश्तों को बनाए रखने में सहायक होता है जो हमारे लिए महत्त्व रखते हैं और जिन पर हम विश्वास करते हैं।

परन्तु कई बार हम गलत चुनाव कर लेते हैं और उदारता, लगन, प्रेम और समय के अपने बगीचे के अमूल्य बीजों को गलत आदमी के बगीचे में बो देते हैं।

हमसे यह गलती इसलिए होती है क्योंकि हम अपने कार्यों को सही ढंग से पहचान नहीं पाते। समाज में ऐसे इंसान हैं जो आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और यह भूल जाते हैं कि रिश्तों को सही प्रकार से निभाने के लिए परस्पर सहयोग एवं सामंजस्य की आवश्यकता होती है। यहाँ बात मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक परिपक्वता के बारे में हो रही है जहां पर दोनों सम्मिलित पक्ष जीतते हैं, और कोई भी हारता नहीं है।

लेकिन हमेशा ही यह संभव नहीं होता कि हम अपने आसपास मौजूद व्यक्तियों से मधुर सम्बन्ध बनाए रख सकें। कुछ ऐसे लोग होते हैं जो हमें नज़रंदाज़ करते हैं, हमें हारा हुआ देखना चाहते हैं या फिर हमें बीच मझदार में छोड़ देते हैं।

हमें यह कभी भी नहीं भूलना चहिये कि दूसरों की चिंता करना या उनका भला सोचना और हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देना कोई बुरी बात नहीं है। यह महानता की निशानी है।

फिर भी आपको एक बात याद रखनी चाहिए कि किसी भी हालत में हमें अपने बगीचे के सबसे खूबसूरत फूल को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए। वह है हमारा आत्म-सम्मान और इसे कभी भी गलत व्यक्ति के बगीचे में नहीं बोना चाहिए। यदि हम ऐसा करते हैं तो हमें बाद में पछताना पड़ सकता है।

इस बात पर कुछ और गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है।

कैसे जानें कि कौन से लोग आपके समय और स्नेह के लायक हैं

दुर्भाग्यवश ऐसा कोई जादुई फार्मूला नहीं है जिससे आप यह पता लगा सकें कि सामने वाला व्यक्ति इतना भरोसेमंद है या नहीं, जीवन के हर उतार-चढ़ाव में आपका साथ देगा या नहीं, या फिर वह हमें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करेगा या नहीं।

रिश्ते हमेशा ही समय के साथ निखरते हैं, भले ही वे रूमानी रिश्ते हों या फिर पारिवारिक। रिश्ते उन पलों के साथ और प्रगाढ़ होते हैं जिसमे कि उनका भरोसा परखा जाता है।

रिश्तों एवं व्यक्तियों की सही परख उन परिस्थितियों में होती है जब हमें उस व्यक्ति और उस रिश्ते की ज़रूरत होती है। उस वक्त आपको समझ आएगा कि वह व्यक्ति आपके समय और भावनाओं की कद्र करता है या नहीं।

हालांकि कुछ ऐसे संकेत हैं जिससे आपको इस सवाल का उत्तर काफी हद तक मिल सकता है।

उनके बगीचे में फूल बोयें जिनसे भावनात्मक अनुकूलता हो

किसके बगीचे में फूल लगाएं

भावनात्मक अनुकूलता का अर्थ दो व्यक्तियों में स्थापित उस मनोवैज्ञानिक संतुलन से है जिसके ज़रिये हम सामने वाले व्यक्ति को भरोसा दिलाते हैं कि हम हमेशा उनके साथ हैं और हर परिस्थिति में उनका साथ निभायेंगे।

हम सभी ऐसे व्यक्तियों को जानते हैं जो परिस्थिति के अनुसार व्यवहार करते हैं। ऐसी कई परिस्थितियाँ आती हैं जिनमें वे व्यक्ति मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं और कई ऐसी परिस्थितियाँ होती हैं जिनमें हमारा साथ बिलकुल भी नहीं देते और हमें उस परिस्थति में अकेला छोड़ देते हैं।

भावनात्मक रूप से प्रतिकूल व्यक्तियों के बगीचों में फूल लगते समय, उनसे सम्बन्ध बनाते समय हमें विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि वे कभी भी हमारा साथ छोड़ सकते हैं और हमारे लिए गंभीर परिस्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति धूप-छांव की भांति होते हैं। कभी यह ऐसा व्यवहार करेंगे कि हमसे अधिक अपना इनके लिए पूरे विश्व में कोई नहीं हैं, और कभी वे हमें एकदम भुला देंगे।

प्रतिबद्धता

प्रतिबद्धता एक सतत प्रयास है जिससे एक अच्छी और प्रगाढ मित्रता या रिश्तेदारी को बनाए रखा जा सकता है। प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि हम एक-दूसरे का विश्वास और साथ कभी न छोड़ेंगे और इस रिश्ते को समय के साथ मजबूत बनाते जाएँ।

प्रतिबद्धता कई मायनो में झलकती है:

  • जब हम किसी विकट परिस्थिति में फंस जाते हैं तो हम इन रिश्तों और व्यक्तियों पर निर्भर कर सकते हैं।
  • प्रतिबद्धता साथ में अपने भविष्य की कल्पना और उसके लिए योजनायें बनाने से भी दर्शाई जाती है।
  • आपको परिस्थितिवश समान वस्तुओं में दिलचस्पी दिखानी होगी। अगर आप स्वयं को ऐसी परिस्थिति में पाते हैं जिसमें आपको एक ही कार्य बार-बार करना पड़े, तो यह प्रतिबद्धता वास्तविक नहीं है।

बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति

किसके बगीचे में फूल लगाएं

हम सब की कुछ बुनियादी आवश्यकताएं होती है। इनकी पूर्ति करना अति-आवश्यक होता है। ज्यादातर समय हम दूसरों में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी इन बुनियादी जरूरतों को नज़रंदाज़ कर देते हैं और यह भूल जाते है कि  हमें भी देखभाल, ध्यान, और पहचान की आवश्यकता है।

कुछ बुनियादी आवश्यकताएं जो कि संबंधों में महत्व रखती है, नीचे दी गयी हैं

  • स्नेह
  • समर्थन
  • परस्पर विश्वास और स्नेह
  • सम्मान
  • अहमियत जिससे हमें लगे कि हम महत्त्वपूर्ण हैं और हमारी राय भी महत्व रखती है
  • साहचर्य
  • सकारात्मक और समृद्ध पलों को साझा करना

समस्याओं को हल करने, हालात को ठीक करने और माफ़ करने की क्षमता

बगीचे में फूल

हम सभी गलतियां करते हैं। इसी कारण हमें यह क्षमता विकसित करनी चाहिए जिससे कि हम उन लोगों की गलतियों को क्षमा कर सकें जिनसे हम अपने रिश्ते निभाना चाहते हैं। यह क्षमता न केवल उन्हें सुधरने का मौका देगी, बल्कि हमें हमारे रिश्ते को और प्रगाढ़ बनाने में मदद करेगी।

  • हालांकि ऐसे लोग भी होते हैं जो कि “सब कुछ या कुछ नहीं” के सिद्धांत पर जीते हैं। अर्थात, वे हर परिस्थिति का इस प्रकार सामना करते हैं कि वे ही सर्वोपरि हैं और किसी की गलतियों और नादानियों को माफ़ नहीं करते।
  • इसके अतिरिक्त, ऐसे व्यक्ति कभी किसी के साथ समझौता नहीं करते और समस्याओं को बातचीत से सुलझाने में अक्षम होते हैं।

ऐसे व्यक्ति बातचीत के ज़रिये अपने विचारों, संदेहों, और त्रुटियों को साझा नहीं कर पाते। इसी कारण वे समस्याओं के समाधान ढूंढने में असमर्थ होते हैं। यह रिश्तों में दरार डाल सकता है। अन्य शब्दों में वह अपने बगीचों में फूल को नहीं सींच सकते।

इस प्रकार के व्यक्ति रिश्तों को पुनर्जीवन देने में सक्षम नहीं होते। वे परिस्थितियों को ठीक करने में अक्षम होते हैं जो कि एक रिश्ते को बचाने और उसे प्रगाढ़ बनाने के लिए आवश्यक है। ऐसे व्यक्ति से रिश्त्ते निभाने का सीधा सा अर्थ यह है कि आप खुशियों की जगह हमेशा दुःख ही पायेंगे।

अंत में हम यही कहना चाहेंगे कि यदि आप किसी व्यक्ति से रिश्ते निभाने के इच्छुक है तो इन छोटी किन्तु अहम बातों को ध्यान में रखें। इससे आप यह जान सकेंगे कि क्या वह व्यक्ति इस लायक है कि आप उनके बगीचे में फूल लगाएं?

  • Canevello, A., & Crocker, J. (2010). Creating Good Relationships: Responsiveness, Relationship Quality, and Interpersonal Goals. Journal of Personality and Social Psychology. https://doi.org/10.1037/a0018186

  • Hallam, R. S., & Hinchcliffe, R. (1991). Emotional stability; Its relationship to confidence in maintaining balance. Journal of Psychosomatic Research. https://doi.org/10.1016/0022-3999(91)90037-O

  • Fuller-Iglesias, H. R., Webster, N. J., & Antonucci, T. C. (2013). Adult Family Relationships in the Context of Friendship. Research in Human Development. https://doi.org/10.1080/15427609.2013.786562

  • Carbery, J., & Buhrmester, D. (1998). Friendship and need fulfillment during three phases of young adulthood. Journal of Social and Personal Relationships. https://doi.org/10.1177/0265407598153005