घर की इकलौती बेटी होने के चार बड़े नुकसान
जन्म से ही, एक इकलौती बेटी घर की दुलारी और मम्मी-पापा की नन्ही राजकुमारी (little princess) हो सकती है। नतीजतन, उसके माता-पिता ओवर-प्रोटेक्टिव हो सकते हैं। वे उसकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक बहुत ज्यादा मेहनत कर सकते हैं, क्योंकि वह उनके जीवन की सबसे कीमती चीज है।
भाई या बहनों के नहीं होने से, इकलौती बेटियाँ अपने कंधों पर एक बहुत बड़ा बोझ लिए होती हैं। एक बार जब वे बड़ी हो जाती हैं, तो उन्हें अपने माता-पिता के निवेश (investment) को चुकाने की जिम्मेदारी महसूस हो सकती है। यह उनके विकास को प्रभावित कर सकता है और अंदरूनी द्वन्द्व (conflicts) का कारण बन सकता है।
चुनौतियाँ जिनका एक इकलौती बेटी को सामना करना पड़ता है (The Challenges an Only Daughter Has To Face)
1. दूसरों से जुड़ने में कठिनाई (Difficulty Relating To Others)
एक इकलौती बेटी के लिए, कभी-कभी दूसरे लोगों से ताल-मेल बैठाना थोड़ा मुश्किल होता है।
इकलौती बेटियों को अक्सर केवल अपनी खुद की ज़रूरतों पर ध्यान देने की आदत होती है। ऐसे में, उनके लिए दूसरे लोगों के लिए सहानुभूति महसूस करना आसान नहीं रहता है। इससे उन्हें टीम में रहकर काम करने में परेशानी महसूस हो सकती है और यह उनके द्वारा दूसरे लोगों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने का कारण बन सकता है।
इसका सबसे अच्छा उदाहरण है जब वे पहली बार स्कूल जाते हैं और वहां उन पर कोई विशेष ध्यान नहीं देता है। यह अनुभव उन्हें फिर से वहाँ नहीं जाने का इच्छुक बना सकता है।
2. टकराव को सुलझाना (Managing Conflict)
समस्याएं जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन, एक इकलौती बेटी के लिए, ये समस्यायें शायद ही कभी होती हैं क्योंकि उनके कोई भाई या बहन नहीं हैं। इसलिए, उन्हें टकराव (conflict) को सुलझाने की अपनी स्किल को विकसित करने का मौका नहीं मिल पाता है।
इसके अलावा, उनके लिये उनके माता-पिता लगातार उनकी समस्याओं को हल करते रहते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें उन चीजों के लिए लड़ना नहीं पड़ता है जिन्हें वे चाहती हैं और हर चीज बहुत आसानी से उन तक पहुँच जाती है। वे भी कभी-कभी बहुत बुरी तरह हारे हुए इंसान बन जाते हैं।
3. स्वार्थ (Selfishness)
आमतौर पर, 10 और 12 वर्ष की आयु के सभी बच्चे स्वार्थी और केवल अपने बारे में सोचने वाले होते हैं। मगर, जिन बच्चों के भाई या बहन हैं, वे आगे बढ़ने में सक्षम हैं क्योंकि वे शेयर करने के लिए मजबूर होते हैं।
इकलौती बेटियों को रोज़ाना चीज़ें शेयर करने का मौका नहीं मिलता है, खासकर तब जब उनके माता-पिता के पैसे का इस्तेमाल उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए होता है। परिणामस्वरूप, वे इस बात पर विश्वास रखती हैं कि वे जो चाहते हैं उसे पाना उनका अधिकार हैं बिना दूसरों के बारे में सोचे।
4. एक-दूसरे पर निर्भरता (Mutual Dependence)
उनकी उम्र को दरकिनार करते हुये, माता-पिता की सारी उम्मीदें अपनी एक इकलौती बेटी पर टिकी होंगी। यह दबाव उन्हें ऐसा महसूस कराता है कि उन्हें परफेक्ट (perfect) बनना होगा और अपने माता-पिता की उम्मीदों और महत्वकांक्षाओं के लिए जीना होगा।
एक बार जब वे बड़ी हो जाती हैं, तो वे परिवार का केंद्र हो सकती हैं। यह एक निर्भरता पैदा कर सकता है, जिसके तहत उन्हें अब अपने माता-पिता की देखभाल करने की जरुरत होती है।
क्योंकि वह एक इकलौती बेटी है, कई माता-पिता चाहेंगे कि वह हमेशा उनके करीब रहे। यह, परिणामस्वरूप, बेटी को दोषी महसूस कराएगा अगर वह दूर जाती है।
जीवन के अगले पड़ाव में पहुँचने पर यह उसके विकल्पों को बहुत ज्यादा सीमित कर सकता है।
इकलौती बेटी होने के सकारात्मक पहलू (The Positive Side of Being an Only Daughter)
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कम उम्र में मेच्योर हो जाना (Early Maturity)
एक इकलौती बेटी अपना ज्यादातर वक्त अपने माता-पिता के साथ ही बिताएगी।
इसका मतलब है कि वह ज्यादा से ज्यादा एडल्ट एक्टिविटीज (adult activities) में भाग लेगी। यह उसे पढ़ने, ड्राइंग का मज़ा लेने या उन कामों को करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिसमें एकाग्रता और शांति की जरूरत होती है। इन सबका मतलब यह है कि वह अपनी उम्र के बाकी बच्चों की तुलना में जल्दी मिच्योर होगी।
एक विकसित कल्पना-शक्ति (A Developed Imagination)
अगर उसके माता-पिता उसके साथ मौजूद नहीं होते हैं, तो एक इकलौती बेटी को अपने लिये कुछ भाई, बहन, दोस्त या यहां तक कि पालतू जानवरों खोजने होंगे।
इस तरह, ऐसे खेल बना सकती है जिन्हें वह अकेले भी खेल सकती है, बस टाइम पास करने के लिए। स्वाभाविक रूप से, यह उनकी सूझ-बूझ और कल्पनाशक्ति को विकसित करने का एक शानदार तरीका है।
जिम्मेदारी का अहसास (A Sense of Responsibility)
जैसे-जैसे वह बड़ी होती जाती है, एक इकलौती बेटी होने के नाते उसे घर के कई काम-काज करने पड़ेंगे क्योंकि उसके पास उन्हें शेयर करने के लिए कोई नहीं है। ऐसे में, अगर वह किसी चीज को तोड़ती है या कोई ग़लती करती है तो उसके पास दोष देने किए लिये भी कोई दूसरा नहीं है। इस प्रकार, उसकी खुद की जिम्मेदारी लेने की भावना बढ़ेगी।
इकलौती बेटी होने का मतलब एक बहुत ही विशिष्ट समूह से संबंध होना है। इन लड़कियों के पास भाई-बहनों वाले बच्चों और उनके जीवन के बारे में बहुत सारे सवाल हो सकते हैं।
माना कि उनकी जिंदगी को समझना आसान नहीं है, लेकिन बड़े हो जाने पर जो कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) इकलौती बेटियों को उनके माता-पिता से मिलती है वह बहुत मजबूत होती है, और एक आपसी विश्वास पैदा करती है।
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