उम्र के साथ हम समझ जाते हैं, ज़िन्दगी में कुछ लड़ाइयाँ लड़ने के लायक नहीं होतीं

उन बातों या लोगों के लिए जद्दोजेहद न करें जो लड़ने लायक नहीं थे। हमें सिर्फ ऐसी बातों के लिए संघर्ष करना चाहिए जो हमारी ज़िन्दगी में खुशियाँ लाती हैं।
उम्र के साथ हम समझ जाते हैं, ज़िन्दगी में कुछ लड़ाइयाँ लड़ने के लायक नहीं होतीं

आखिरी अपडेट: 21 दिसम्बर, 2018

जैसे-जैसे वक्त बीतता है, हम महसूस कर लेते हैं, कुछ लड़ाइयाँ वाकई लड़ने के काबिल नहीं होती हैं। युवावस्था के अपने ख़्वाबों, यहाँ तक कि कुछ लोगों के बारे में हम बहुत से विवाद आखिर छोड़ देते हैं।

इन तथ्यों को किसी क्षति के तौर पर देखने के बदले हमें उन्हें ऐसे देखना चाहिए जो वे वास्तव में हैं: ऐसी बातें जिनमें हमने बहुत सी उम्मीदें झोंक दी थी, बाद में महसूस किया, वे इतनी जद्दोजेहद के लायक नहीं थीं।

वक्त बीतने के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास, परिपक्वता और जीवन में आगे बढ़ने का अनुभव करना किसी कमोबेश शानदार पहेली के टुकड़ों को इकट्ठे रख देने जैसा है। वास्तव बड़े परिप्रेक्ष्य में यही अहम है।

ज़िन्दगी के एक ख़ास मोड़ पर अक्सर हम गलत खानों में असंभव टुकड़ों को फिट करने की कोशिश ही करते हैं।

सिर्फ वक्त और दूरदर्शिता ही अंततः हमारे सामने सच को खोल पाते हैं। ये दिखाते हैं कि ऐसी चीजें और लोग हैं जो हमारे अपने मैप से जुदा मानचित्रों में ही फिट होते हैं।

नीचे हम जो कहने जा रहे हैं, हमारी सलाह है कि कृपया उस पर थोड़ा गौर करें। यह आपकी ज़िन्दगी के लिए बहुत अहम है।

जो लड़ाइयाँ लड़ने लायक नहीं, कई बार उनमें हारना अच्छा  होता है

लड़ाइयाँ जो लड़ने के लायक नहीं होतीं

युवावस्था में अनचाहे ही कई चीजें  हमारे रास्ते में आ जाती हैं। ऐसा लगता है जैसे आप उफ़नती नदी में वाटर राफ्टिंग कर रही हैं, नर्वस लेकिन ज़िन्दगी से भरपूर।

जवानी के इन भटकावों में से एक यह है कि, जो पहला इंसान हमसे टकराता है, हम उसके प्यार में पड़ जाते हैं और वह हमें तार-तार करके गुजर जाता है।

दूसरी मिसाल यह है कि हम लोगों से दोस्ती सिर्फ इसलिए कर लेते हैं कि वे हमसे अक्सर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, वे क्लासमेट या दोस्तों के दोस्त हो सकते हैं।

उन्हें दोस्त के रूप में स्वीकार कर लेना उस स्थिति की तरह है, जब आपको वैसा भोजन दिया गया है जो आपको पसंद नहीं, लेकिन बनाने वाले का ख़याल करके आप उसे खा लेते हैं।

ज़िन्दगी के इस मोड़ पर हम ऐसा व्यवहार इसलिए करते हैं, कि हमारा सिर्फ एक लक्ष्य होता है: एक समुदाय के साथ जुड़ना। दूसरे शब्दों में उसमें फिट हो जाना।

तरुण लोग ज़िन्दगी का अपना पहला कदम दूसरों के अनुमोदन से उठा सकते हैं। इसमें दूसरों के कहने और उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का अनुसरण करना शामिल है।

हालांकि, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, चीजें बदलती हैं। ऐसा दिन आता है जब दोस्तों या लड़ी जाने वाली लड़ाइयों का चुनाव करते समय हम बहुत सतर्क हो जाते हैं। दूसरे शब्दों में, हम जानते हैं, हमें वास्तव में क्या चाहिए औरज़िन्दगी में हम क्या नहीं चाहते।

संख्या से ज्यादा गुणवत्ता की अहमियत

कुछ लड़ाइयाँ लड़ने के लायक नहीं होतीं गुणवत्ता

आखिरकार वह दिन आता है जब हमारे पास कई दिखावटी दोस्तों की बजाय कुछ सच्चे दोस्त होते हैं।

अपनी भावनाओं का आकलन करते समय हम पीछे मुड़कर देखते हैं। जबकि सच तो यह है कि दिल क्या कह रहा है, उस पर ध्यान दें। क्योंकि इससे कुछ चीजों को पहचानने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए:

आखिरकार हमें एहसास होता है, जीवन में ऐसे पहलू थे जिन्हें हमने सबसे अहम माना, लेकिन अब हम जान रहे हैं कि वे बिलकुल ही इस लायक नहीं थे।

मिसाल के लिए शायद आप पहले कामयाब सामाजिक जीवन बनाए रखने और ढेर  सारे दोस्त होने को अहमियत देते थे। जबकि अब आप छोटे सार्थक ग्रुप की ज्यादा कद्र करते हैं।

पहले आपके दिमाग में जुनून भरे कई प्रोजेक्ट इकट्ठे ठूसे रहते थे। अब आप एक वक्त पर एक ही टार्गेट पर फोकस करते हैं।

संभव है, शायद आपने ऐसी लड़ाइयाँ लड़ी जिन्होंने दर्द दिया। उदाहरण के लिए, आपने चाहा कि एक ऐसा इंसान हो जो प्यार करे, परिवार में पहचान मिले, आप सबको दिखा दें कि आप क्या कुछ कर सकती हैं। लेकिन इनमें कामयाबी नहीं मिली।

अब आपने उन लड़ाइयों को छोड़ दिया है। क्योंकि अब आप ज्याद बुद्धिमान और सुलझे हुए हैं। इसके अलावा, अब आप अपने दिल की बात भी सुनते हैं, जो वैसी लड़ाइयों से आपको दूर करता है जिसके कारण आप अपने वास्तविक वजूद से भटक जाते हैं।

आपको बस एक इंसान को ही यह दिखाना है कि आप क्या कुछ कर सकते हैं। वह इंसान आप खुद हैं। अगर कुछ लोग आपको प्यार नहीं करते हैं, तो प्यार का आग्रह वह आख़िरी चीज होगी जो आपको उनसे मांगना है।

परिपक्व होने का अर्थ व्यक्तिगत विकास को महसूस करना है

ऐसी लड़ाइयां हैं जिनके लिए लड़ना बिलकुल निरर्थक है। उनमें जूझना अपने आपका विरोध करना है।

जब हम परिपक्व होते हैं, तो हम जान लेते हैं, ऐसे रास्ते हैं जिन पर कभी नहीं चलना चाहिए। इनमें वे रास्ते भी हैं जिन पर चलने के लिए हमें दूसरे लोग कहते हैं जो और वे हमारे अपने वजूद के खिलाफ जाते हैं।

आखिरकार व्यक्तिगत विकास हमें सक्षम बनाता है कि हम खुलकर कह सकें, हमें क्या चहिये और क्या नहीं चहिये, बिना इस डर ​​के कि दूसरे लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे।

अपने चुने हुए रास्ते पर पर आगे बढ़ना हमसे कुछ लोगों से सम्बन्ध तोड़ने, कुछ संपर्कों को छोड़ने की माँग करता है। इसका मतलब है, आँसू देने वाली लड़ाइयों को छोड़ देना।

वह ज्यादा महत्वपूर्ण चीज जिसके लिए हम ऐसा करते हैं: गरिमा

लड़ाइयाँ लड़ने के लायक, गरिमा

इस किस्म के व्यक्तिगत कदम उठाना आसान नहीं है। मिसाल के तौर पर, अभी भी बहुत से लोग हैं जो ऐसे चीजों के खिलाफ असंभव लड़ाइयों को लड़ रहे हैं जो उन्हें और उनके आत्मविश्वास को नष्ट करती हैं।

न लड़ने लायक लड़ाइयों से बाहर कैसे निकलें

सबसे पहली बात पहले बता दें, यह कोई आसान काम नहीं है। इन निजी युद्धक्षेत्रों से बाहर निकलना बहुत ही कठोर प्रयास की मांग करता है।

दुर्भाग्य से कभी-कभी हम सोचते हैं, असंभव रिश्तों के लिए लड़ाई जारी रखना ही सम्मानजनक विकल्प है।

मिसाल के तौर पर, ऐसे दोस्त हैं जिनके साथ हम चिपके रहते थे लेकिन जो बार-बार हमें धोखा देते रहे हैं। कई बार हम खुद से कहते हैं, एक अच्छी बेटी, भतीजी या चचेरे भाई की तरह हमें अपने परिवार को सबकुछ देना चाहिए।

हालांकि, इनमें से कई लड़ाइयां पहले ही हारी हुई हैं, क्योंकि वे सिर्फ तकलीफ लेकर ही आती हैं, क्योंकि वे लोग कभी भी बदलने वाले नहीं हैं, भले ही हम ऐसा जितना भी क्यों न सोचें।

यह तकलीफदेह होने पर भी ठीक है, कि कभी-कभी अपने जीवन से कुछ लोगों को अलग कर देना और उस “जहरीले वातावरण” से बाहर निकलना ही अच्छा होता है जो हमारे आत्मविश्वास को नष्ट करता है। ध्यान रहे, जो आपको सबसे ज्यादा तकलीफ देते हैं, वे आपको प्यार कतई नहीं करते।

याद रखें कि बिंदास लोग कुछ पाए बिना अपना सारा प्रयास किसी एक ही चीज में नहीं झोंक देते।

इसके बजाए, वे जीवन में लड़ने लायक सच्ची लड़ाइयों में ही तमाम ऊर्जा खपाने में सक्षम होते हैं: अपनी खुशी और प्रियजनों को खुशी देने वाली लड़ाइयों में।

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