मां-बेटी का इंटिमेट और इमोशनल बॉन्ड

14 दिसम्बर, 2018
मां-बेटी के बीच के इमोशनल बॉन्ड में साइकोलॉजिकल घटक तो होता ही है, उसका वैज्ञानिक स्पष्टीकरण भी है जो लिम्बिक सिस्टम से संबंधित है, जिस कारण उनके प्रतिक्रिया तंत्र एक से होते हैं।

मां-बेटी का इमोशनल बॉन्ड पढ़ाई, प्यार और जिस माहौल में आप बड़े होते हैं और आपस में इंटरैक्ट करते हैं, उनके संबंधों से कहीं ज्यादा दूर तक जाता है।

साइंस डेली  में प्रकाशित एक स्टडी में विचित्र तथ्य सामने आया जिसे ध्यान में रखना चाहिए। ब्रेन का वह ढांचा जो भावनाओं को नियंत्रित करता है, मां से बेटी में ट्रांसमिट हो सकता है।

इस कारण, अब न्यूरोलॉजिस्ट, साइकियेट्रिस्ट और साइकोलॉजिस्ट के लिए कई बातों को ज्यादा अच्छी तरह समझने का आधार मौजूद है। उदाहरण के लिए एक विशिष्ट चरित्र या करैक्टर ट्रेट विकसित करने का कारण।  यह डिप्रेशन के ज्यादा या कम जोखिम का अनुभव करने के पूर्व कारणों की भी व्याख्या दे सकता है।

हमें पता होना चाहिए, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की इस स्टडी से यह संकेत नहीं मिलता कि अगर आपकी मां में एंग्जायटी अटैक की प्रवृत्ति थी या है, तो यह आपको भी होगी। इसका मतलब यह है कि एक जोखिम, एक संभावना है।

इसके अलावा, दिलचस्प बात यह है कि समस्याओं का मुकाबला और जटिल हालातों का सामना करते समय महिलाओं में अप्रत्याशित ताकत दिखाने की क्षमता भी एक ऐसी चीज है जो इस स्त्री लिंक के माध्यम से ट्रांसमिट होती है।

यह एक अद्भुत और असाधारण बात है।

मां-बेटी का अदृश्य बंधन

आज आप जानते हैं, कुछ बीमारियों में “लिंग” अहम होता है। माइग्रेन, फाइब्रोमायल्जिया और डिप्रेशन पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करते हैं।

ऐसा लगता है, न्यूरल नेटवर्क या सेंट्रल नर्वस सिस्टमएक के साथ महिला के ब्रेन स्ट्रक्चर, जो फाइब्रोमायल्जिया के मामले में दर्द को बढ़ा सकता है, में मादा जेनेटिक्स मौजूद है।

अभी तक विज्ञान यह जान नहीं पाया है कि ऐसा क्यों है।

लेकिन जब बात भावनाओं की आती है, तो ऐसा लगता है, कुछ माताओं और बेटियों के “इमोशनल अटैचमेंट” को शेयर करने के रहस्य के कुछ जवाब हैं जो पॉजिटिव और बहुत कॉम्प्लेक्स भी हो सकते हैं।

आइये इसे और विस्तार से देखें।

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लिम्बिक सिस्टम (Limbic System)

हम पहले आपके ब्रेन के अंदर के एक स्ट्रक्चर के बारे में बात करना चाहते हैं जो उतना ही अहम है जितना ताकतवर है। यह है लिम्बिक सिस्टम। आप इसे अपनी भावनाओं का आर्टिस्ट कह सकते हैं।

  • लिम्बिक सिस्टम आपकी इमोशनल दुनिया को रेगुलेट और प्रोसेस करने के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा यही वह जगह है जहां आपकी इमोशनल मेमोरी होती है और जहां आपकी पर्सनालिटी के पैटर्न विकसित होते हैं।
  • लिम्बिक सिस्टम बदले में अन्य स्ट्रक्चर से बनता है, जैसे हिप्पोकैम्पस और अमिगडाला, जो डर जैसी भावनाओं और यादों को व्यवस्थित करने की आपकी क्षमता के लिए भी जिम्मेदार हैं।
  • इस स्टडी के डायरेक्टर साइकिएट्रिस्ट फ्यूमिको होफ्ट चाइल्डहुड और अडोलसेंस के एक स्पेशलिस्ट थीं। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना था कि रिश्तेदारों (मां और बेटी, पिता और पुत्र, और इसी तरह …) के बीच ब्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में समानताएं थीं या नहीं।
  • उन्होंने विभिन्न गैर-आक्रामक एमआरआई टेस्ट्स के माध्यम से जो पता किया वह यह है कि माताओं और बेटियों के लिम्बिक सिस्टम का आकार एक ही था और न्यूरोकेमिकल एक्टिविटी भी समान थी। हमने पहले बताया है, यह क्षेत्र भावनाओं की दुनिया से काफी करीब से जुड़ा हुआ है।

एक ही इमोशनल समस्याओं से पीड़ित होने की प्रवृत्ति है

हम एक बार फिर से कहना चाहते हैं, यह प्रवृत्ति कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं है लेकिन एक रिस्क, एक संभावना ज़रूर है।

इन कारणों की वजह से यह जानकारी मेडिसिन के क्षेत्र में इतनी अहम साबित हुई है:

  • स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी कोई भी इमोशनल समस्या उसी न्यूरोकेमिकल एक्टिविटी पर आधारित होती हैं जिसमें डोपामाइन, नोरेपिनेफ्रीन, एपिनेफ्रीन वगैरह के बीच उतार-चढ़ाव होते हैं।
  • यदि मातायें और बेटियां एक ही ब्रेन एक्टिविटी, लिम्बिक सिस्टम में उतार चढ़ाव साझा करती हैं, तो इसका मतलब है, एक ही उत्तेजना, हालात या समस्याओं का सामना करते समय उनकी प्रतिक्रिया भी समान हो सकती है।

यह डेटा निश्चित रूप से इस जेनेटिक कारक के आधार पर कुछ प्रकार की साइकोलॉजिकल बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है।

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बेटी अपनी मां की कॉपी नहीं होती

यह मुमकिन है कि कुछ लोग यह सोचने लगें, बेटियां अपनी मां की कॉपी होती हैं।

यह सच नहीं है। मां-बेटी के बॉन्ड और रिश्ते को समझने के लिए, उदाहरण के तौर पर इन पहलुओं पर विचार करें: यदि आपकी मां हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डीप वेन थ्रोम्बोसिस से पीड़ित हैं या मोटी हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको भी यही समस्याएं होने की 100% संभावना है।

  • आपको इस जानकारी को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है।  यह एक तथ्य है जिसे कुछ चीजों को रोकने के लिए ध्यान में रखना चाहिए।
  • एक बेटी कभी अपनी मां की कॉपी नहीं होगी। उसके पर्सनल हालात अलग हैं, और उसकी पढ़ाई, पर्सनलिटी, एटीच्यूड और मूल्य भी व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं।
  • कभी-कभी जब कोई बच्चा अपनी मां को अपने कमरे में अलग-अलग रहते हुए, अपनी डार्क साइड का सामना करते हुए, उसके अकेलेपन और उसकी भावनात्मक जटिलता को देखकर बड़ा होता है तो वह कुछ ऐसे पहलुओं से अवगत हो सकता है जिनसे वह वास्तव में कल बचना चाहेगा।
  • हर किसी का पर्सनल फोकस अलग होगा। हालांकि यह रुझान मौजूद हो सकता है, बड़े होते समय आपके अनुभव आपको लचीलापन विकसित करने, ज्यादा मजबूत बनने और वैसे ही डिप्रेसिव डिसऑर्डर से बचने के लिए सही रणनीतियां देंगे।

संक्षेप में, वर्तमान स्टडी से पिताओं से जुड़े तथ्यों का भी पता चला है। मातृ-विरासत जहाँ इमोशनल दुनिया से जुड़ी हुई है, बायोलॉजिकल पिता बच्चों में डिस्लेक्सिया या ऑटिज़्म के रुझान से संबंधित हो सकता है।