बच्चों के लिए सजा के पांच विकल्प

18 फ़रवरी, 2019
आपको अपने बच्चे के साथ बातचीत करने से यह जाने में मदद मिलेगी कि वह फ्रेंडली हैं और अपने सारे ज़रूरी काम करते हैं। सजा देने के बारे में सोचने से पहले, उनके साथ बैठकर समस्याओं के बारे में बात करने की सोचिए, उसका हल निकालने की कोशिश कीजिये। इस आर्टिकल को पढ़िए और अपने बच्चे को सही तरीके से समझाइए।
 

क्या आप जानते हैं, बच्चे को सबक सिखाने का इकलौता तरीका सजा देना नहीं है? सजा की बजाय दूसरे विकल्प मौजूद हैं जो बच्चे के अच्छे विकास को बढ़ावा देते हैं।

बहुत से साइकोलॉजिस्ट इस बात से सहमत हैं कि डांटना और मारना सिर्फ थोड़े समय के लिए ही काम करता है। क्योंकि यह बच्चे के व्यवहार को नहीं बदल पाता, और उनके भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डालता है। इस आर्टिकल में, सज़ा देने के 5 विकल्पों के बारे में जानिये जो आपके बच्चे को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करेंगे।

क्या आपको याद है, उस समय कैसा महसूस होता था जब आपके मम्मी या पापा आप पर अपने खिलौनों को दूर नहीं रखने पर चिल्लाते थे? और जब आपको शारीरिक तौर पर सजा दी गई और उस समय जब आप रोए? बिल्कुल यही आपका बच्चा महसूस करता है जब आप उसको डांटकर या शारीरिक रूप से गुस्सा दिखाकर सजा देते हैं।

आपका इरादा अपने बच्चे के व्यवहार को बदलना है, लेकिन इस तरह की सजा देने से उन्हें केवल अपमान महसूस होता है। ऐसे में, वे कभी भी उस अच्छे व्यवहार को नहीं सीख पाएंगे जो आप उन्हें सिखाना चाहते हैं। वे सिर्फ डांट से बचने के लिये काम करेंगे और मारपीट को ही परेशानियों का हल समझेंगे।

सजा देने के सबसे अच्छे विकल्प क्या हैं? (best alternatives to punishment)

बच्चों के गलत व्यवहार को सुधारने के लिए सजा देने के सबसे अच्छे विकल्पों में से एक उनसे बात करना है।  हालांकि, कई बार यह काफी नहीं होता है। आपको उन्हें शिक्षित करने वाले विकल्पों के साथ-साथ पॉजिटिव सोच को भी इस्तेमाल में लाना चाहिए जिससे बच्चा यह समझ सके कि उनका व्यवहार गलत क्यों है और उसको बदल सकें।

बच्चे को सजा देना

कुछ लोग डांटने की अलग तरकीब आजमाने की सलाह देते हैं, जैसे कि उनसे उनकी पसंदीदा चीज़ें छीन लेना। हालांकि, इस तरह की सजाएं भी पिटाई जितना ही असर दिखाती हैं।

 

हकीकत में, सजा देने के सबसे असरदार तरीके वे हैं जो बच्चे को उनकी गलतियों से सीखने में मदद करते हैं, स्वस्थ तरीके से उनका विकास करते हैं।

पॉजिटिव व्यवहार जब तक प्यार और आपसी सम्मान की बुनियाद पर टिका रहे, यह माता-पिता और बच्चे के रिश्तों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अपने बच्चे को हर बात की आजादी दे देनी चाहिए, बल्कि यह बच्चे पर जरूरत से ज्यादा हावी भी नहीं होने के लिये है। यह एक माता पिता के रूप में आपकी और आपके बच्चे की जरूरतों और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए थोड़ा झुकने के बारे में है।

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1. अपने बच्चे से बात करें और उसकी समस्या को हल करें

कई माता-पिता के लिए बिना बहस किए अपने बच्चों से बात करने में बहुत मुश्किल होती है। ऐसा अक्सर तब होता है जब बच्चे को मदद की जरूरत होती है लेकिन वह अपने माता-पिता से इस बारे में बात नहीं करना चाहता।

सजा देने का एक विकल्प अपने बच्चे को सुनना और उसे अपनी बात ठीक से कहने का मौका देना है। आप खुद आगे बढ़कर उन्हें यह न बोलें कि आप जानते हैं, उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। बहुत सी बातें इस बहस में ही ख़त्म हो जाती हैं क्योंकि माता-पिता बच्चों से पहले ही बोलना शुरू कर देते हैं। बच्चों को लगता है, वे अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाये।

यहाँ तक कि, अगर आपको पता भी हो कि आपके बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है, तो भी जो वे आपको बता रहे हैं उनके बारे में उत्सुकता जाहिर करें। इस तरह से, वह आत्मविश्वास से भर उठेगा और जो भी हो रहा है उसके बारे में आपसे बात करने के लिए तैयार हो जायेगा। एक बार वह आपसे खुल जाए, तो आप दोनों मिलकर परेशानी का हल निकाल पाएंगे

2. उन्हें उनकी गलतियों के नतीजे बतायें

शब्दों से फर्क पड़ता है। “अगर तुम ऐसा करते हो, तो मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं”, अपने बच्चों से ऐसी बातें बोलना केवल उनमें आपके लिए डर पैदा करेगा, ना कि आपके लिए सम्मान। इसके अलावा, ये बातें उन्हें यह नहीं सिखाती कि उन्हें अपना कौन-सा व्यवहार कैसे बदलना होगा।

अपने बच्चे से बात करें। उन्हें समझाएं कि वे जो काम करते हैं उनके क्या नतीजे हैं। उन्हें समझाएं कि वे नतीजे उनके आसपास के लोगों पर भी असर डाल सकते हैं।

अपनी माँ को इग्नोर करता हुआ बच्चा
 

आपको स्पष्ट और मजबूत होना होगा। इसके साथ ही, आपको अपने बच्चों के साथ नरम भी होना पड़ेगा। जब आपके बच्चे ठीक से व्यवहार करते हैं तो उन्हें बधाई देना ना भूलें, ताकि वे जान सकें कि आगे बढ़ने का सही रास्ता क्या है। परिवार के साथ खेलने के समय उन्हें इनाम दें।

3. उनसे घर के कुछ और काम भी करवायें

सज़ा देने का एक विकल्प यह भी है कि, जब भी आपका बच्चा गलत बर्ताव करे, उससे घर के कुछ और काम करवायें। यह उन्हें बिना आवाज़ ऊँची किये और बिना मारे-पीटे अनुशासन में रखने का एक तरीका है।

4. उनसे माफ़ी मांगने को कहें (Ask them to apologize)

जब आपके बच्चे गलत बर्ताव करते हैं तो आप जरूर उन्हें “मुझे माफ कर दीजिये” कहने के लिए जोर देते होंगे। लेकिन क्या आपने कभी इन शब्दों की असली ताकत के बारे में सोचा है? कभी-कभी, एकदम से माफी मांगना व्यवहार करने का सही तरीका नहीं होता है।

सबसे पहले आपके बच्चे को अपने बर्ताव और अपनी दिक्कतों को समझने की जरूरत है। उन्हें उनके बर्ताव और उससे दूसरे लोगों की भावनाओं पर पड़ने वाले असर के बारे में सोचने के लिए थोड़ा समय दें। एक बार जब आपका बच्चा शांत हो जाए, तब जो कुछ भी हुआ उसके बारे में उनसे बात करें, उन्हें उन दूसरे लोगों के बारे में सोचने के लिए कहें जो शायद उनके बर्ताव से दुखी हुए हों।

जब आपका बच्चा उस स्थिति के बारे में सोचेगा, तो आप देखेंगे कि वह अपने आप ही माफी मांग लेगा। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि तुरंत माफी मांगने के बजाय इसमें ज्यादा ईमानदार होगी।

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5. उन्हें विकल्प दें और चुनने दें कि वे अपने गलत बर्ताव की कीमत कैसे चुकाना चाहेंगे

बच्चों के लिये उनकी गलतियों के हिसाब से, सज़ा के अलग-अलग तरीके चुने। उन्हें समझने दें और फैसला करने दें कि कौन सा विकल्प उनके लिये सबसे सही है। सज़ा के तरीकों में उनके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के इस्तेमाल को कम करने से लेकर घर के बहुत सारे काम कराने तक शामिल हो सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से खेलता हुआ बच्चा
 

जब आप अपने बच्चे को जबरन सजा देते हैं, तो वह आपसे निराशा महसूस करेगा। हो सकता है, आपके लिए उसके मन में गुस्सा और नाराजगी आ जाए। लेकिन अगर आप उन्हें उनकी हरकतों के नतीजे समझाते हैं, तो वे समझ पाएंगे कि उनके लिये अच्छा सबक सीखने का बेहतर तरीका क्या है

निष्कर्ष

सज़ा देने के गलत नतीजे होते हैं इसलिये हर मां-बाप को इससे बचना चाहिए। उदाहरण के लिए, सजा देने से बच्चा उस सजा का इस्तेमाल दूसरों के लिये करना सीखता है।

क्या आपको लगता है, रात के खाने के साथ मीठा न खाने देना और उन्हें कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से रोकना किसी भी तरह से फायदेमंद होगा?

इससे यह भी हो सकता है कि जब वे खीझ जायें तो दूसरों पर अपना गुस्सा निकालें।

इससे बच्चे को पछतावा होता है। कुछ माता-पिता एक बार बच्चे का रोना शुरू होते ही सज़ा को रोक देते हैं। ऐसे में, वे बच्चे को उसकी गलती का एहसास होने का मौका नहीं देते। इसके बजाय वे बच्चे में सज़ा का डर पैदा कर देते हैं।

 
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