दूरियाँ अपनों को गले लगाने से रोक सकती हैं, पर भावनाओं को नहीं

02 अक्टूबर, 2018
दूरियाँ आपके रिश्तों को बिगाड़ सकती हैं। प्रेम से जुड़े रिश्तों को बचाए रखने के लिए ज़रूरी है कि दोनों प्रेमियों के बीच भरोसा हो और प्यार में शर्तें न हों।

एक दूसरे से प्यार करने वाले दो लोगों के बीच की दूरियाँ एक धागे की तरह होती हैं। ये दो दिलों को आपस में पिरो कर रखती हैं। इनकी तुलना एक गॉसमर थ्रेड से की जा सकती हैं जो दो दिलों को एक साथ जोड़ता है। दोनों तरफ भावनाएँ तो होती हैं, लेकिन एक डर हमेशा सताता है- ये दूरियाँ एक दूसरे को सराहने वाले लोगों के बीच फ़ासले पैदा कर देंगी।

हम सबके जीवन में कभी न कभी वह क्षण आता है जब हमें अपनों से दूर होना पड़ता है। वजह कुछ भी हो सकती है। कई बार हम अपने प्रेमी से बिछड़ जाते हैं, तो कई बार अपने बच्चों से दूर हो जाते हैं।

अक्सर इन अनचाहे फ़ासलों की वजह हमारा काम होता है। हो सकता है, ये फ़ासले अस्थाई हों, लेकिन ये रिश्तों में चुनौतियाँ खड़ी करने की ताकत रखते हैं।

आपके मन में अपने साथी के लिए डर, शंका और ललक उत्पन्न होनी शुरू हो जाती है।

लेकिन निष्कपट भावनाएँ और समझदार सोच ऐसी जटिल परिस्थितियों को आसानी से पार कर लेती हैं। इन कठिन लमहों में एक बात हमेशा याद रखें। दूरियाँ केवल शारीरिक संपर्क में बाधा बन सकती हैं, भावनाओं को नहीं रोक सकतीं।

आज हम आपको इस विषय पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

दूरियाँ जो आपकी आत्मा को अलग कर दें

जब दो लोग रिश्ते में बंधते हैं, तो वे उस रिश्ते में तय किये जाने वाले सफ़र से अनजान होते हैं। इसलिए आप जब भी किसी के साथ अपना रिश्ता कायम करें तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • यदि प्यार करना है, तो प्रयास करना आना चाहिए। किसी भी रिश्ते में प्रयास बहुत महत्व रखते हैं।
  • किसी से प्यार करना हमेशा जोख़िम भरा होता है।
  • एक स्थिर और सोचा-समझा रिश्ता वह है, जो हर मुश्किल का सामना कर सके। ऐसी मुश्किलें जिनके बारे में आप कभी सोचते भी नहीं हैं।

आज के बदलते समय की कुछ अपनी ज़रूरतें हैं। कई बार अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने या आगे बढ़ने के उद्देश्य से आपको अपनों से दूरियाँ झेलनी पड़ती हैं।

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इन चुनौतियों का डंट कर सामना किया जाना चाहिए। लेकिन कई बार ऐसा कर पाना संभव नहीं होता है। ऐसे में कई परेशनियाँ खड़ी हो जाती हैं। आज हम ऐसी परेशानियों को समझने की कोशिश करेंगे।

दूरियाँ मन की शंका को बढ़ा सकती हैं

दूरियाँ स्नेह कम होने के डर को बढ़ावा देती हैं

संदेह, डर और अविश्वास की भावना किसी भी रिश्ते को खत्म कर सकती है। जब आप अपनों से दूर हों, तब इस तरह की नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।

  • रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए आपको अपने पार्टनर को स्वीकार करना होता है। आपको सामंजस्य भी बनाना पड़ता है। ऐसे में यदि आपका साथी आपसे दूर हो जाए, तो उसे खोने की चिंता आपको घेर सकती है।
  • दूरियाँ आपके मन में शंका पैदा कर सकती हैं। आपको लगने लगता है, इन दूरियों की वजह से आपका साथी आपको पहले की तरह नहीं चाहेगा।
  • आप अपने साथी का ज़्यादा से ज़्यादा समय और ध्यान पाने की कोशिश में लग जाते हैं।
  • कई अपेक्षाएँ, जैसे कि ज़्यादा फ़ोन कॉल, मैसेज और मिलने की चाहत बढ़ने लगती है। जबकि दूर होते समय आपको ज़्यादा संयम और धैर्य से काम लेने की आवश्यकता होती है।

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कैसे लोग दूरियाँ सहन कर सकते हैं और कैसे नहीं

विशेषज्ञों का ऐसा मानना है, हर व्यक्ति दूरी सहन करने के लिए तैयार नहीं होता।

  • ऐसे लोग जो ख़ुद पर कम विश्वास रखते हों, दूरियाँ नहीं सह सकते। ये लोग हमेशा डर और असुरक्षा की भावना के साथ जीते हैं। ये आपसे हमेशा परवाह और प्रेम की चाहत रखेंगे।
  • जो लोग हमेशा हीन भावना से ग्रस्त हों, वे ज़्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे लोगों के अन्दर जलन और अविश्वास का भाव भी जन्म ले लेता है। इस तरह के व्यक्ति भी दूरियाँ नहीं सह सकते हैं।
  • दूसरी तरफ, ऐसे लोग जो सकारात्मक सोच और भावनाओं को लेकर परिपक्व विचार रखते हों, दूरियाँ सह सकते हैं।
  • ऐसा नहीं है कि इन्हें घर की याद कुछ कम सताती है। लेकिन ये अपनों से दूरियाँ सह ले जाते हैं।

जब आप किसी को पूरे दिल से चाहते हैं और सकारात्मक सोच रखते हैं, तब दूरियाँ आपके लिए कोई मायने नहीं रखती हैं।

Beck, U., & Beck-Gernsheim, E. (2012). Amor a distancia: nuevas formas de vida en la era global. Grupo Planeta (GBS).