भावनात्मक रूप से ज़ख्मी उस बच्चे के लिए एक पत्र जो जताता है कि सबकुछ ठीक है

अगस्त 10, 2018
घबरायें नहीं! आप इस समय जो एक डरे हुए बच्चे हैं, एक मजबूत और लचीले व्यक्तित्व वाला वयस्क बनकर बड़े हो जाएंगे। उस वयस्क को मालूम होगा, कैसे एक मुस्कुराहट के बल पर हालातों के बीच अपने लिए रास्ता हासिल किया जाता है। आपको पता होगा, ज़िन्दगी के सबसे मूल्यवान पलों से अपने लिए सबसे ज्यादा उपहार कैसे हासिल किये जाएँ।

मुझे एहसास है, आप जिन हालातों से गुजर रहे हैं, वे बेहद कठिन हैं। आप सिर्फ 8 साल के बच्चे हो, लेकिन आपने कई तरीकों से अपनी भावनाओं को छिपाना और मजबूती बनाये रखना सीख लिया है।

आप आत हो, एक जख्मी आत्मा वाले बच्चे। इन तमाम तकलीफ़ों की वजह दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों की पूरी श्रृंखला है जिसका सामना करने के लिए इस छोटी सी उम्र में आपको मजबूर कर दिया गया है।

हो सकता है, आपके माता-पिता के बीच आपसी रिश्ता बहुत मधुर नहीं है। शायद आपने उनके विवादों और एक-दूसरे के लिए उनकी घृणा को देख लिया है। उन्होंने शायद आपको अपने वैवाहिक संबंधों की लड़ाई में अनचाहे भागीदार के रूप में घसीट लिया है।

हो सकता है, उनके पास आपके लिए समय न हो, या उनकी कुछ दूसरी प्राथमिकतायें हैं जिन्हें वे अपने बच्चे से ऊपर मानते हों, मसलन करियर या आराम।

इस कारण वे आपको, अपने बच्चे को दादा-दादी के साथ छोड़ देते हैं, और बड़े दुर्लभ अवसरों पर ही वे आपके साथ होते हैं। वे आपके साथ खुशनुमा वक्त नहीं बिताते जिसकी आपको सख्त ज़रूरत है।

भावनात्मक रूप से चोटिल बच्चे के घाव लगातार चुभते रहते हैंभावनात्मक रूप से चोटिल बच्चे

इन सब के बावजूद, कोई भी नहीं समझता कि आपके आसपास क्या कुछ ऐसा हो रहा है जो आप पर बुरी तरह से हावी है।

बहुत से लोग मानते हैं, बच्चे वर्तमान क्षणों में जीते हैं, और बड़ी आसानी से चीजों या दर्दनाक हालात को भूल जाते हैं। वे दावा करते हैं, आप “अपनी खुद की दुनिया” में जीते हैं।

हालांकि आप जानते हैं, ये दर्द आपको बड़ी गहराई तक चुभते हैं। भले ही इस जख्म और दर्द के परिणाम इस वक्त न दिख रहे हों, लेकिन अभी या बाद में वे निश्चित रूप से प्रकट होंगे।

आप तकलीफ में हैं; आप एक जख्म से पीड़ित हैं जो चुभता है और लगातार बद से बदतर होता जाता है, क्योंकि कोई भी इस जख्म को भरने में आपकी मदद नहीं करेगा। आप नहीं जानते, इसे कैसे ठीक करना है। आपके पास ऐसा करने के ज़रूरी औज़ार नहीं हैं। आखिरकार ज़िन्दगी के इस खेल गेम में आप नए और अनुभवहीन भी तो हैं।

कभी-कभी आप रोते हैं। रोते हैं, जब आप बिस्तर पर जाते हैं, कभी अंधेरे में, और कभी किसी दीवार के पीछे अपने माता-पिता को विवाद में उलझे देखकर।

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आप बड़ों जैसा एक इमोशनल मास्क पहन लेते हैं जो आपको दर्द सहने में मदद करता है

भावनात्मक रूप से जख्मी बच्चे

इतने भ्रम और दर्द के शिकार होकर, दुनिया जिसे अनदेखा कर देगी, आप बड़ों की तरह एक वयस्क भावनात्मक मास्क पहन लेते हैं। आप सार्वजनिक रूप से नहीं रोते। सबके सामने कभी कोई शिकायत नहीं करते। न ही आप अपना दुख कभी किसी को दिखाते हैं…।

आसपास क्या कुछ हो रहा है, आप केवल उसे दर्द भरी नज़रों से देखते हैं, और वर्तमान स्थिति में खुद को छोड़ देते हैं। दुर्भाग्य से, आप कुछ भी नहीं कर सकते। क्योंकि कोई भी आपको गंभीरता से नहीं लेगा। आप अभी बहुत छोटे हो, लेकिन इसके साथ ही हालात ने आपकी युवावस्था को लूट लिया है और वयस्क व्यवहार को बाहर धकिया दिया है।

कोई भी आपको नहीं समझता, और कोई भी नहीं देख सकता कि आप वास्तव में कैसे हैं। आप ऐसा सोचना शुरू कर देते हैं, हर किसी की धारणा इस आधार पर तय होती है कि आप बाहर से कैसा दीखते हैं। वे केवल बाहरी चीजों की फ़िक्र करते हैं।

हालांकि, आपके परिवार को आपको जानना और समझना चाहिए। उन्हें मालूम होना चाहिए, आप महज दिखावा कर रहे हैं कि सबकुछ ठीक है। जबकि भीतर सबकुछ उल्टा-पुल्टा है।

उन्हें आपके बारे में फिक्रमंद होना चाहिए, वाकई होना चाहिए! उनहोंने इस भयानक परिस्थिति को आप पर टूट पड़ने ही क्यों दिया? इसके लिए कुछ किया क्यों नहीं?

अंत में, आप शक करना शुरू कर देते हैं, कि हर कोई सिर्फ अपने बारे में सोचता है। वे अपना ही फायदा देखते हैं, और अपनी ही निराशा में डूबे हुए हैं। वे आसपास उन सब लोगों को भी नजरअंदाज करते हैं जो उनकी तरह से ही पीड़ित हैं।

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सभी अनुभव, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, उनका एक उद्देश्य है

 चोटिल बच्चे: अनुभव

आपका बचपन चाहे जितना भी मुश्किल या दुर्भाग्यपूर्ण क्यों न हो, इस अनुभव का हर पहलू आपके लिए लाभदायक होगा।

आप परिपक्व हो जाएंगे और सीखेंगे। इससे भी अहम है, कि आप ऐसे व्यक्ति बन जाएंगे जो पीड़ा का जहर निगलकर उसे अमृत में बदल देता है। यह ऐसा है, जो आपको सकारात्मक भविष्य की ओर आगे बढ़ाता रहेगा।

वाकई, आप चारित्रिक लचीलापन हासिल कर पायेंगे। अपनी भावनाओं को साफ़-साफ़ पहचानने और उसे व्यक्त करने का महत्व समझेंगे। आप सीखेंगे, उनसे कैसे निपटा जाता है। और सबसे बड़ा तजुर्बा होगा, कि आप क्षमा करना सीख जायेंगे।

सौभाग्य से, आप अपने माता-पिता को माफ कर देंगे, क्योंकि उन्हें नहीं पता था, वे उन हालातों में उससे बेहतर क्या कुछ कर सकते थे जो उन्होंने किया। इसके अलावा, आप उन लमहों के लिए खुद को क्षमा कर देंगे जब आप स्वयं को अपराधी महसूस किया करते थे। वास्तव में, उन क्षणों के लिए खुद को दोषी मानने का कोई कारण नहीं था।

जब आप अपनी आत्मा में लगी चोट को महसूस कर लेंगे, तो इसमें हुए नुकसान की भरपाई हो जायेगी। लेकिन यह एक निशान छोड़ जाएगा, जिसे आप बाद में बड़ी कोमलता से देखेंगे। आप इसे प्यार से सहलायेंगे क्योंकि आपने इससे बेपनाह अनुभव पाया है।

बचपन की भावनात्मक चोटें जितनी दर्दनाक होती हैं, भरने में उतनी ही मुश्किल होती हैं। हालांकि, वे अकेली भावनात्मक चोटें नहीं होंगी जिनसे आपको ज़िन्दगी में निपटना है।

जीवन भर आपको घावों या अतिरिक्त चोटों से निपटना होता है। ये शायद उन पुराने घावों को हरा कर दें जिन्हें आपने भरा हुआ मान लिया था।

घबरायें नहीं! आप इस समय जो एक डरे हुए बच्चे हैं, एक मजबूत और लचीले व्यक्तित्व वाला वयस्क बनकर बड़े हो जाएंगे। उस वयस्क को मालूम होगा, कैसे एक मुस्कुराहट के बल पर हालातों के बीच अपने लिए रास्ता हासिल किया जाता है। आपको पता होगा, ज़िन्दगी के सबसे मूल्यवान पलों से अपने लिए सबसे ज्यादा उपहार कैसे हासिल किये जाएँ।