बचपन में प्यार न मिलने पर बड़े होकर लोग कैसे बन जाते हैं

04 अगस्त, 2018
बचपन में लाड़-प्यार न पाने पर आगे जाकर बच्चे कई भावनात्मक कमियों का शिकार होने के साथ-साथ दूसरों के प्रति सहानुभूति महसूस करने में भी अक्षम सकते हैं।

यह दुनिया प्यार पर ही टिकी हुई है। हम सभी का जन्म प्यार पाने और प्यार बांटने के लिए ही हुआ है। पर उन लोगों का क्या होता है, जिन्हें अपने बचपन में प्यार नहीं मिला था? ज़ाहिर है, आगे जाकर यह बात कई व्यवहार-संबंधी समस्याओं का कारण बन जाती है

पैदा होने पर बच्चे को वह प्यार और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो केवल एक माँ ही उसे दे सकती है। बदकिस्मती से ऐसा हमेशा नहीं होता और बचपन में प्यार के अभाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

आगे जाकर इसकी झलक उस इंसान के बर्ताव और दूसरों के साथ उसके संबंधों में देखी जा सकती है।

बचपन में प्यार न मिलने के नतीजे

बचपन में प्यार न मिलने वाले लोगों को वयस्क हो जाने पर अकल्पनीय परिणामों का सामना करना पड़ता है। उनमें से कुछ हैं:

1. दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति उदासीनता

बचपन में प्यार के अभाव से हम दूसरों के प्रति उदासीन हो जाते हैं

अपने बचपन में माँ का प्यार न मिलने पर होने वाली परेशानियों में से यह एक होती है।

आमतौर पर देखा जाता है कि बचपन में प्यार से वंचित रह जाने वाले लोग दूसरों के प्रति उदासीन हो जाते हैं। दूसरों का दुःख-दर्द समझने में उन्हें मुश्किल आती है

उनका विरक्त बर्ताव उनके करीबी रिश्तों में दरार पैदा कर सकता है।

बेशक उनकी बहुत सी समस्याओं की जड़ तो अन्य लोगों की भावनाओं के प्रति उनकी बेपरवाही और उदासीनता ही होती है।

बचपन में प्यार से वंचित या किसी कारणवश माँ का प्यार न मिलने के बाद बड़े हो जाने पर लोग दूसरों की पीड़ा के प्रति उदासीन रह जाते हैं।

इसके अलावा, अपने मन की बात न कह पाने में आने वाली दिक्कतों से वे अपनी भावनाओं को अपने अंदर ही दबा देते हैं

2. रिश्ते बनाना और अपनी भावनाओं को व्यक्त करना

बचपन में प्यार के अभाव वाले लोगों को संबंध बनाने में कठिनाई आती है

एक अप्रिय बचपन भविष्य में समस्याग्रस्त पीढ़ियों की शुरुआत मात्र ही होता है।

  • माँ या पिता का प्यार न पाने वाला बच्चा जब बड़ा होकर खुद माँ या बाप बनता है तो उसके बच्चों को भी उसके प्रेमशून्य बचपन के नतीजे झेलने पड़ते हैं
  • बचपन में मिलने वाला प्यार ही हमें सच्चाई और वफ़ादारी के रास्ते पर चलने को प्रेरित करता है।

बड़े हो जाने पर लोगों के परोपकारी गुणों का कारण अपने जीवन के शुरुआती दौर में उन्हें मिला प्यार ही होता है।

माँ का प्यार इंसानियत की सबसे बुनियादी प्रवृत्तियों पर आधारित होता है। दूसरों के साथ हमारे संबंधों में वह सार्वभौमिकता, शान्ति और भाईचारे का प्रतीक भी होता है।

ज़िन्दगी के प्रारंभिक वर्षों में माँ का प्यार न मिलने से हममें उतनी सहानुभूति विकसित नहीं हो पाती, जितनी होनी चाहिए।

इस तथ्य से हम नज़रें नहीं फेर सकते कि बचपन की हमारी किसी भी अधूरी चाह की झलक प्रौढ़ावस्था के हमारे व्यवहार में देखी जा सकती है। लोगों की शिकायत, नाराज़गी या दूसरों की पीड़ा से अप्रभावित रहने का यही कारण होता है।

आमतौर पर देखा जाता है कि बचपन में प्यार के अभाव से ग्रस्त लोग अनजाने में ही अपनी ज़रूरतों के पूरा होने का इंतज़ार करते रहते हैं। इसके काफी व्यवहारिक परिणाम पैदा हो जाते हैं व प्यार करने और प्यार जताने की उनकी क्षमता बाधित हो जाती है।

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बच्चों के प्रति प्यार जताने का महत्त्व

बचपन में प्यार का अभाव बड़े होकर नाराज़गी का रूप धारण कर सकता है

कई कारण हैं कि बच्चों से लाड़-प्यार करना बेहद ज़रूरी होता है, क्योंकि सभ्य बनने का पाठ बच्चे अपने बचपन में ही सीखते हैं

प्रेमवंचित बचपन वाले व्यक्ति के जीवन में एक भावनात्मक खालीपन-सा आ जाता है। प्रेमशून्य परिवेश में हुई उसकी परवरिश की झलक भविष्य में उसके आक्रामक बर्ताव में देखी जा सकती है।

अपने जीवन के शुरुआती दौर में प्यार न मिलने से बच्चे और उनकी आने वाली पीढ़ियों पर असर पड़ता है। अपने विशाल भावनात्मक खालीपन से ये पीढ़ियाँ समूची मानव जाति के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं

परेशानी की बात तो यह है कि बड़े हो जाने पर एक प्रेमरहित बचपन के गंभीर परिणामों के बावजूद आज भी ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके लालन-पालन में प्यार का नामोनिशान तक नहीं है।

अपने जन्म के बाद से मिलने वाले प्यार में किसी भी बच्चे के भावी परोपकारी गुण, प्यार और सहानुभूति को विकसित करने की एक अकल्पनीय शक्ति होती है

अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे इन कमज़ोरियों से मुक्त रहें और उनके मासूम दिलों पर कोई ज़ख्म न लगे तो आपको उन्हें वह लाड़-प्यार देना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं

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