भावनात्मक शोषण के 5 रूप जिन्हें हम समय रहते नहीं पहचान पाते

28 जून, 2018
इमोशनल एब्यूज़ यानी भावनात्मक शोषण के सबसे बुरे पहलुओं में से एक यह है कि इससे प्रभावित व्यक्ति को इसके लक्षणों की पहचान करने में काफी समय लग जाता है।

भावनात्मक शोषण का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह हमारे शरीर पर तो कोई निशान नहीं छोड़ता पर हमारे दिमाग पर पर बहुत ही घातक असर डालता है, ऐसा असर जिसे पहचानने में लम्बा समय लग जाता है। 

वह लोग जो अपने जीवन में लंबे समय तक इमोशनल एब्यूज अर्थात भावनात्मक शोषण को झेलते रहे हैं, उन्हें सामान्यतः ठीक होने में और भी ज्यादा समय लग जाता है। इस स्थिति में एक ऐसा सदमा लगता है जिससे पार पाने में ही सालों लग सकते हैं।

भावनात्मक शोषण बहुत पेचीदा होता है। जब किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचती है, तो उसे उसी वक्त पता चल जाता है कि शारीरिक नुकसान से बचने के लिए उन्हें उस स्थिति से जितना संभव हो दूर हो जाना चाहिए।

मनोवैज्ञानिक शोषण में ऐसा नहीं होता है।

शारीरिक शोषण के विपरीत इमोशनल एब्यूज के चेतावनी के संकेत इतनी आसानी से पहचान में नहीं आते। ये ज्यादा सूक्ष्म होते हैं: रोज दिए गए ताने, अपमान, खालीपन का एहसास…

अक्सर, भावनात्मक शोषण का शिकार व्यक्ति पहले यह नहीं सोचता है कि वह इतना स्ट्रांग है जिसे इस परिस्थिति से बचने के लिए कोई कदम उठाना चाहिए, बल्कि यह सोचता है कि वही इस परिस्थिति के लिए दोषी है

शुरुआत में, लोगों के लिए यह सोचना बड़ा सामान्य है: “मैं ही शायद कुछ गलत कर रहा/रही हूँ जिससे वे मेरे साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं”।

हालांकि, बाद में इससे कई ज्यादा जटिल और थका देने वाली भावनाएं उभरने लगती हैं। कई लोग ऐसे विचारों का अनुभव करने लगते हैं जैसे कि: “मैं यह सब नहीं झेल सकता। मुझे पता है कि यह स्थिति मुझे परेशान करती है पर यह स्थिति है ही इतनी नाजुक कि मुझे नहीं पता इसे संभालूं कैसे!”

आखिर में, भावनात्मक शोषण के पीड़ित इस स्थिति को चलते रहने देते हैं। वे तब तक इंतजार करते हैं जब तक छोटे जख्म, इमोशनल आघात और नफरत बढ़ नहीं जाती। फिर, इससे पहले कि उन्हें पता चले, यह स्थिति उन्हें भावनात्मक रूप से पूरी तरह तोड़ देती है। 

भावनात्मक शोषण से बच पाना इतना आसान नहीं होता। इसलिए आज हम पांच ऐसी छोटी आदतों के बारे में बात करेंगे जिन्हें आपको जानने-पहचानने के साथ इन पर प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

1. वे हर बात में शानदार और आकर्षक हैं और आप कभी उनकी तुलना नहीं कर सकते

भावनात्मक शोषण

ऐसे लोग जो दूसरों पर भावनात्मक ताकत का इस्तेमाल शोषण के इरादे से करते हैं, वास्तव में, अपनी पब्लिक इमेज को लेकर पागलपन भरे जुनून की हद तक फिक्रमंद रहते हैं।
लोगों के बीच, घर के बाहर, ऐसा व्यक्ति दुनिया का सबसे अधिक आकर्षक इंसान दिखाई देगा।

ऐसे व्यक्ति आसानी से उपलब्ध, विनम्र, हाज़िर-जवाब, दयालु और चौकस होते हैं। वास्तव में, इतने ज्यादा कि, अगर आप इनके बारे में कुछ भी नकारात्मक बोल दें तो आपको एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलेगा जो आप पर यकीन करेगा।

इसलिए यह बहुत सामान्य है कि लोगों को यह छल-कपट दिखाई नहीं देती और जब तक वे इन्हें देख पाते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। पहली नजर में इमोशनल एब्यूज़ करने वाले को पहचानना लगभग नामुमकिन होता है। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता है, आपके साथ उनके द्वारा हर रोज किया गया बर्ताव इसके लक्षणों को प्रकट करने लगता हैः आपका अपमान करने और आपको नीचा दिखाने की कोशिश के संकेत साफ दिखने लगते हैं।

मगर यह सिर्फ अकेले में नहीं होगा। भावनात्मक शोषण करने वाले, लोगों के बीच भी, आपका मजाक बनाने में शर्म नहीं करेंगे। यह अक्सर उनके द्वारा अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका होता है। वह आपकी कीमत पर दूसरों के सामने खुद को अच्छा दिखाने की कोशिश करते हैं।

इसी बीच, दूसरी ओर खड़ा, इस व्यवहार को झेल रहा व्यक्ति इस मुश्किल राह पर चलने वाला यात्री ही बना रह जाता है। रोज-ब-रोज, धीरे-धीरे वह इस मानसिक दुर्व्यवहार के नर्क में धँसता चला जाता है।

2. विकृत सहानुभूति

ऐसा कहना बहुत सामान्य है कि शोषण करने वालों में सहानुभूति नहीं होती – पर ऐसा नहीं है।

शोषण करने वाले और अपनी बात मनवा लेने वाले जिस तरह के व्यक्तियों की यहां हम बात कर रहे हैं, उनमें से कई अपने द्वारा सताए जाने वाले व्यक्तियों की भावनाओं से अच्छी तरह अवगत होते हैं। इसी वजह से वे यह पढ़ पाते हैं कि आप क्या महसूस कर रहे हैं और बड़ी ही जल्दी और आसानी से वे उसे आपके खिलाफ इस्तेमाल कर लेते हैं।

आइए एक उदाहरण देखें। मान लीजिये ऑफिस में आज अच्छा दिन नहीं बीता है। जब आप घर आते हैं, आपका पार्टनर तुरंत ही आपकी बेचैनी, आपकी उदासी या आपके दुख को समझ लेता है।
मगर आपकी मदद करने और आपको एक करीबी और स्नेह भरा इमोशनल सपोर्ट देने की बजाय भावनात्मक शोषण करने वाला आपकी स्थिति के लिए आपको ही दोष देने लगेगा। या वह आप पर ज्यादा नियंत्रण पाने के लिए आपके स्वाभिमान को और कमजोर कर देगा।

“हां तुम्हारा दिन बुरा गया ही होगा। दिक्कत यह है कि तुम जानती ही नहीं हो कि अपने आप को किस तरह से बचाया जाए। तुम हमेशा पीछे-पीछे ही चलते हो और इसीलिए हर चीज के लिए मुझ पर निर्भर हो। मेरे बगैर तुम कुछ भी संभालने लायक नहीं हो।”

ऐसी स्थिति में इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सहानुभूति सिर्फ तभी सकारात्मक और फायदेमंद होती है जब इसका इस्तेमाल दूसरे लोगों की मदद के लिए किया जाए। इसका इस्तेमाल कभी भी आपको और ज्यादा उदासी और मायूसी की तरफ धकेलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

3. वे हर समय आप की तुलना किसी ना किसी से करते हैं

“तुमने गाड़ी को हाईवे पर रोका ही क्यों? तुम एकदम अपनी बहन जैसी हो, एकदम बेढंगी, कुछ अता-पता नहीं गाड़ी चलाने के बारे में।”

आप कुछ भी कर लें, इमोशनल एब्यूज़र हमेशा आपकी तुलना किसी ना किसी से करेगा ही – वह भी पाॅज़िटिव तरह से नहीं।

शोषण करने वाले की मानसिक अपरिपक्वता उन्हें स्पष्ट, लाभदायक और सम्मानजनक मूल्यांकन करने से रोकती है।

बदले में, शोषण करने वाले की सबसे ज्यादा दिलचस्पी मौजूदा पार्टनर की तुलना अपनी पिछली रिलेशनशिप से करने में होती है, ताकि मौजूदा पार्टनर परेशान और दुखी हो।

4. वे कभी खुद को आपकी जगह रखकर नहीं देखते

ऐसा अक्सर होता है, सबसे छोटी, एकदम मामूली सी लगने वाली चीज़ों में और साथ ही बड़ी चीज़ों में भी।

शोषण करने वाला स्थितियों को कभी भी आपके नजरिए से नहीं देख पाएगा। वह ना तो कभी खुद को आपकी जगह रखकर देख पाएगा और ना ही कभी चीजों को उस तरह से देख पाएगा जिस तरह से आप देखते हैं।

उन्हें यह पता चल जाता है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं, क्योंकि जैसा कि हमने पहले कहा, उनके पास सहानुभूति दिखाने की बेहतरीन पावर होती है। हालांकि, वे कभी भी आप से “जुड़” नहीं पाएंगे। यानी उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि अगर कोई चीज आपको दुख पहुंचाती है, या अगर वह खुद ही आप को नुकसान पहुंचाते हैं।

5. आपके लक्ष्य, आपकी पसंद और आपके रीति-रिवाज उनके लिए कोई मायने नहीं रखते

भावनात्मक शोषण के रूप

आपको अपने नियंत्रण में रखने के लिए आपके लक्ष्यों या उद्देश्यों को लेकर मज़ाक करना या ताने मारना भावनात्मक शोषण करने वालों का पसंदीदा तरीका होता है।

जब कोई आपकी आलोचना करता है, उन चीजों का मज़ाक उड़ाता है जो आपको पसंद हैं, जिनका आप सपना देखती हैं या जिस प्रोजेक्ट को लेकर आप बहुत रोमांच से भरी हैं, तो ऐसे में उनका एक ही सरल और घातक उद्देश्य होता है – आपके स्वाभिमान को तोड़ देना।

याद रखने वाली सबसे जरूरी चीज यह है कि जिसका आत्म-सम्मान कम होता है उस पर नियंत्रण हासिल करना ज्यादा आसान होता है। भावनात्मक शोषण करने वालों को एकदम यही चाहिए होता है। उनके लिए ऐसा व्यक्ति सबसे आदर्श शिकार होता है।

वास्तव में, भावनात्मक शोषण का लक्ष्य ही यही होता है। शोषण करने वाला अपनी कीमत पहचानने की आपकी काबिलियत को ही खत्म कर देना चाहता है।

यहां बताए गए रिश्तों के तजुर्बों, उनके उतार-चढ़ावों को अच्छी तरह से दिमाग में बैठा लें। अगर आपको इनमें से कोई भी पैटर्न उभरता हुआ दिखाई दे तो तुरंत ही अपने आत्म-सम्मान, अपनी पहचान, अपनी इमोशनल हेल्थ और अपने अच्छे स्वास्थ्य को बचाने के लिए कदम उठाएं।

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