7 अदृश्य प्रभाव मनोवैज्ञानिक शोषण के

जून 14, 2018
कई मामलों में, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार के शिकार लोगों में खुद में दोष होने ही एक उच्च भावना होती है जो उन्हें रिश्ते को ख़त्म करने से रोकती है, यहाँ तक ​​कि उस व्यक्ति में डिप्रेशन भी पैदा कर सकती है।
मनोवैज्ञानिक शोषण निस्संदेह सबसे क्रूर हिंसा में से एक है। इस प्रकार की हिंसा से पीड़ित इंसान को संदेह होता है कि उसके साथ वास्तव में दुर्व्यवहार किया भी जा रहा है या नहीं।
सबसे बुरी बात यह है कि जब तक शारीरिक आक्रामकता नहीं होती है, तब तक किसी को समस्या की गंभीरता का एहसास भी नहीं होता है।
इस हिंसा का रूप जहां अदृश्य है, वहीं इसके परिणाम भी अदृश्य हैं।
इन्हें सिर्फ आंखों से नहीं समझा जा सकता है। दुर्व्यवहार के शिकार व्यक्ति को गहरी पीड़ा होती है और हिंसा की स्थिति से बाहर आ जाने के काफी समय बाद भी वे इस दर्द का बोझ अपनी पीठ पर ढोते हैं।

मनोवैज्ञानिक शोषण के परिणाम

1. कुंडली मारे बैठी कुंठा, मैं किसी लायक नहीं हूँ

मनोवैज्ञानिक शोषण सबसे क्रूर हिंसा है।
आत्म-सम्मान में कमी इस तरह के दुरुपयोग का एक नतीज़ा हो सकती है। ऊँचें आत्म सम्मान वाला व्यक्ति कभी भी इसकी अनुमति नहीं देगा। हालांकि, खुद को कमतर समझना हमारी समझ के विपरीत कहीं अधिक आम समस्या है।
साथ ही, पीड़ित के हिंसा वाले हालातों में होने से समस्या और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में अपने बेकार होने का एहसास बढ़कर उस स्तर तक पहुंच जाता है जहाँ व्यक्ति आत्म-सम्मान में गिरावट के कारण अपना सिर तक नहीं उठा पाता।
इस स्थिति में मदद माँगना और हमें प्यार करने वाले अच्छे लोगों के आस-पास रहना बहुत महत्वपूर्ण है।

2. अकेलेपन का सामना

मनोवैज्ञानिक शोषण के अधिकांश मामलों में दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति अपने शिकार को सबसे अलग-थलग कर देता है, इस हद तक कि वह अपने दोस्तों और यहां तक ​​कि अपने परिवार से भी दूर हो जाती है।
आक्रामण कर्ता यह चाहता है कि उसके साथी के पास कोई भी सपोर्ट न हो, ताकि वह रिश्ते को तोड़ने की कोशिश न करें।
ज्यादातर मामलों में, वह पीड़िता की अपमानजनक छवि भी बनाता है, जिससे किसी को शक न हो और वे स्वयं ही पीड़ित व्यक्ति से खुद को दूर कर लें।

3. अपराधबोध से कुंठाग्रस्त

मनोवैज्ञानिक रूप से शोषण करने वाला कोई व्यक्ति जिन सबसे मजबूत पत्तों से खेल सकता है. वह है अपराधबोध। पीड़िता को हर समय ऐसा लगता है कि उसी ने गलत काम किया है, और उसी की वजह से दूसरा पक्ष अपमानजनक, शाब्दिक दुर्व्यवहार की भाषा में जवाब देता है।
अपराधबोध का यह एहसास कम आत्म-सम्मान से पैदा होता है जिस पर हमने शुरुआत में ही चर्चा की। इसे समाप्त करना बहुत मुश्किल है, जब तक कि इसे लेकर कुछ विशेष रणनीति न अपनायी जाए।

4. चौतरफा डिप्रेशन

मनोवैज्ञानिक शोषण: डिप्रेशन
अवसाद हमारे समय के भयानक शैतानों में से एक है। मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार के शिकार लोगों को भी इसका सामना करना पड़ता है।
डिप्रेशन किस कदर गहरा है, इस आधार पर यह तब तक जारी रह सकता है जब तक पीड़िता के दिमाग में आत्मघाती विचार न पनपने लगें।
पीड़िता यह मानने लगता है कि उसके साथ होने वाली हर बात का ज़िम्मेदार वह खुद है, और अकेलापन उसे यह विश्वास दिला देता है कि जीवन का अंत कर लेना ही इससे मुक्ति का एकमात्र तरीका है।

5. भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई

मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार का सामना करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़े परिणामों में से एक यह है कि उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम होने में गंभीर समस्याएं होती हैं। इसे “भावनात्मक चुप्पी” कहा जाता है।
वे काफी समय से भावनात्मक रूप से अनुभव किए गए हर कष्ट को निगलते रहें है, क्योंकि वे अपने को दोषी महसूस करते हैं और मानते हैं कि वे इसी के लायक हैं।
इस तरह, उन्होंने जीवित रहने के लिए अपनी भावनाओं को कम करने की कोशिश की है। हालांकि, यह पिछले बिंदु यानी अवसाद की ओर जाता है।

6. मैं सो नहीं सकता!

यह उन समस्याओं में से एक है जिससे मनोवैज्ञानिक शोषण शिकार हर व्यक्ति पीड़ित होगा: यह है अनिद्रा। यह उन ख़ास परिस्थितियों में मौजूद भारी चिंता और तनाव के कारण होता है।
कई मौकों पर, सपने दुःस्वप्न में बदल जाएंगे, जो एक शांतिपूर्ण और आरामदायक नींद का आनंद लेने की संभावना को रोकता है
यह सामान्य बात है कि जो लोग किसी प्रकार के दुर्व्यवहार से गुज़र चुके हैं, वे कुछ नींद की गोलियों का सहारा लेते हैं जो उन्हें थोड़ा आराम कर पाने की सहूलियत देती हैं।

7. दूसरों से संबंधित समस्याएं

मनोवैज्ञानिक शोषण के परिणाम
जैसा कि बहुत ही स्वाभाविक है, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार का सामना करने वाले लोगों में दूसरों पर भरोसा न करने की मजबूत प्रवृत्ति होगी, जिससे कि वे फिर से उसका शिकार न बनें।
इसी कारण से और अपनी भावनात्मक चुप्पी के कारण भी, वे स्वस्थ संबंध रखने या अन्य लोगों के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित करने में सक्षम नहीं होते हैं।
मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार एक मौन हिंसा है। इसे देख नहीं सकते हैं। यह एक निर्दोष सी दिखने वाली दृष्टि या शब्द के पीछे छिपा हो सकता है।
किसी पर छोड़े गए गहरे घाव उसके जीवन को हमेशा के लिए नष्ट कर सकते हैं। क्योंकि अदृश्य आघात हमेशा सबसे दर्दनाक होते हैं और उतने ही मुश्किल से भरते हैं।