5 टिप्स किसी बहस में जीत के लिए

16 जून, 2018
जब हम किसी बहस के बीच होते हैं, हमें अपने शब्दों पर ध्यान रखना चाहिए और उनका चुनाव बड़ी सूझ-बूझ के साथ करना चाहिए जिससे स्थिति बद से बदतर ना हो जाए। इससे हम बेहतर समाधान पर पहुँच सकते हैं।
 

क्या आप किसी आर्गुमेंट या बहस में जीतना चाहते हैं?

इसके बावजूद कि हमें किसी ने नहीं सिखाया, स्वस्थ ढंग से बहस करते हुए कैसे किसी साझे समझौते तक पहुँचें, कई ऐसे ज़रूरी कारक हैं जो हमारी मदद कर सकते हैं।

सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि किसी सम्मानित और रचनात्मक बहस की मुख्य दुश्मन हमारी नकारात्मक भावनाएं होती हैं।

किसी जोड़े के बीच मतभेद, हमारे सहकर्मी या बॉस के साथ ग़लतफ़हमी कसर हममें बेचैनी, कष्ट, निराशा या गुस्से की भवना लाती है।

इन भावनाओं पर नियंत्रण हासिल करने से हमें आवश्यक मानसिक शांति मिलेगी, और जहां तक एक बहस और उसमें जीत का सवाल है, हम उसमें ज्यादा प्रभावीशाली हो पायेंगे।

इस विजेता वाली मानसिक अवस्था को हासिल करने के लिए हम आपको अपने भीतर इन 5 आसान टिप्स को लागू करने की सलाह देंगे।

1. आक्रमण न करें: बहस करना सुनना और दूसरे को ध्यान में रखना भी है

आक्रमण करके कोई बहस नहीं जीती जाती। इसे जीता जाता है बेहतर तर्क और उस व्यक्ति के आकर्षण से जो दूसरों को प्रभावित करने लायक आत्मविश्वास से भरा हो।

  • यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रहार करने, अपमान करने, चिल्लाने और आरोप लगाने से बहस का कोई भी उद्देश्य हासिल नहीं होता। इसके विपरीत, ये उस बिंदु तक चीजों को ख़राब कर देते हैं, जहाँ से लौटना मुश्किल हो जाता है। ये किसी भी तरह से उपयोगी नहीं हैं।
  • हालांकि इस प्रकार का तीखा तर्क-वितर्क असहमति को दर्शाता है, जो हमें परेशान करता है या तकलीफ देता है। फिर भी यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे वाद-विवाद को व्यक्तिगत रूप से न लें।
  • अपने जेहन को शांत-संजीदा, ह्रदय को गर्मजोशी से भरपूर और आवाज़ में दृढ़ता को बनाए रखें।

यदि आप बहस में जीतना चाहते हैं तो सामने वाले व्यक्ति को सुनना और उसके विचारों का सही आकलन करना एक पल के लिए भी न भूलें। यदि नेगेटिव इमोशन आप पर हावी हो जाते हैं, तो तो आप सुनना छोड़ देंगे। जब आप सुनेंगे ही नहीं, तो तर्कसंगत और प्रासंगिक लॉजिक नहीं पेश कर पाएंगे।

2. बहस के दौरान “क्यों” के बजाय “कैसे” का प्रयोग करें

बहस
 

यह आपको बेतुका लगेगा, लेकिन जब हम बहस के बीच में होते हैं, तो कुछ शब्दों का प्रयोग दूसरे व्यक्ति को हिला सकते हैं। यह उन्हें किसी महत्वपूर्ण चीज़ को ज्यादा गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।

चलिए एक उदाहरण से इसे समझते हैं। सोचिये कि आप अपने पार्टनर के साथ बहस कर रहे हैं और आप यह वाक्य बोलते हैं:

  • फैसला करते समय आप मुझे इन सबसे परे क्यों रखते हैं? मुझे बिना कुछ बताये आपने ऐसा क्यों किया?

इस प्रकार के सवालों में सबसे आम बात यह है कि आप पहले से ही जानते हैं, कि आपका पार्टनर क्या जवाब देगा।

अब ज़रा कल्पना कीजिये कि क्या होता यदि आप इस वाक्य को बोलते:

  • आपको क्या लगता है, मुझे कैसा लगता होगा, जब आप बिना मेरी परवह किये यह करते होंगे ?

3. “आप सही हैं” इस बारे में नहीं, एक आम सहमति तक पहुँचने के बारे में सोचें

बहस में

किसी भी बहस का उद्देश्य दूसरे व्यक्ति पर अपनी राय थोपना नहीं होता है। इसके जरिये हम जो वास्तव में चाहते हैं, वह यह है:

  • दूसरा व्यक्ति हमारे दृष्टिकोण से भली-भांति वाकिफ़ हो जाए
  • स्थिति को ज्यादा ख़राब होने से रोकना
  • एक आम सहमति तक पहुँचने के बाद दोनों पक्षों का मज़बूत होना

4. लहज़े को संयमित रखें, दृढ़ रहें और अपने को दोहराने से बचें

“आप मुझे नहीं समझते”, “आप नहीं जानते आप क्या बोल रहे हैं” जैसे वाक्य या महज “आप नहीं” जैसे शब्द बातचीत के रास्ते में रोड़ा डाल सकते हैं।

इनके जरिये आपने पहले जी बातचीत में एक नकारात्मक सोच थोप दी है।

  • दृढ़ता से बातचीत करें। मज़बूत, रहें लेकिन दूसरे व्यक्ति के लिए सहानुभूति भी रखें।
  • “आप नहीं जानते” जैसे शब्दों से वाक्य को शुरू करने से बेहतर होगा कि “मैं जानता हूँ आपका क्या तात्पर्य है, मैं समझ रहा हूँ” से अपने वाक्य की शुरुआत करें।
  • सुनिश्चित करें कि आपकी आवाज़ सहज हो। घबराएं नहीं और हमेशा यह जताएं कि आप संवेदनशील और फ्रेंडली हैं।
 
  • एक पल के लिए भी हमें भावनात्मक पहलुओं को नजरअंदाज नहीं चाहिए, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण तर्क का उपयोग करना भी है।
  • कई बार किसी का तर्कहीन जवाब दे बैठना स्वाभाविक होता है। हमेशा सतर्क रहें और उन्हें उनकी गलती का एहसास दिलायें।

5. बहस करें और ऐसे विचारों का योगदान करें, जो दूसरों में आपके लिए सहृदयता जगाये

बहस: समझौता

किसी बहस को जीतने की कोशिश करते समय सबसे आम समस्या यह है कि हमें यह मालूम नहीं होता, तर्क कैसे करें।

  • हम अपने दिमाग में बहुत से विचारों, भावनाओं और सोच को जमा तो कर लेते हैं, लेकिन उन्हें क्रमवार, साफ़-सुथरे ढंग से सजा नहीं पाते, जिससे हम उन पर दृढ़ता, शांति और सूक्ष्मता से बहस कर पायें।
  • अपने विचारों को साफ़-सुथरे, संक्षिप्त और सुरक्षित रूप से कह पाने के लिए हमें उन्हें क्रमवार सजाना और संगठित करना सीखना होगा।

इसके साथ ही एक और सुलझी हुई सोच यह है कि ऐसे वाक्यों को बातचीत में लायें जो दूसरे व्यक्ति के भीतर सहानभूति का भाव उत्पन्न करें।

कुछ आसान उदाहरणों को देखते हैं:

  • “आप मुझे समझ रहे हैं, आप जानते हैं, मैं क्या कहना चाह रहा हूँ।”
  • “आप बहुत बुद्धिमान हैं और मेरी स्थिति को समझते हैं।”

निष्कर्ष यह है कि बुद्धिमानी से बहस करना सीखना महत्वपूर्ण है। हालांकि इसमें समय लगेगा और यह इमोशनल इंटेलिजेंस की मांग करता है।      

इसे शांतिपूर्ण ढंग से, बहुत सम्मान पूर्वक और अच्छे तर्कों के साथ करें, और दोनों पक्षों के आम सहमति पर पहुँचने के साथं ही आप किसी भी बहस में विजेता बनकर निकलेंगे।