डायस्टैसिस रेक्टि: आप इसे कैसे ठीक कर सकते हैं?

सितम्बर 10, 2018

डायस्टैसिस रेक्टि या एब्डोमिनल सेपरेशन पेट की मांसपेशियों के बीच में बनने वाली गैप या खाली जगह है। यह स्थिति तब होती है जब मांसपेशियां अपना लचीलापन खो देती हैं और उनको साथ जोड़कर रखने वाले टिशू टूट जाते हैं।

आदमी का शरीर कई अंगों से मिलकर बना होता है जिसे डाइजेस्टिव सिस्टम, श्वसन तंत्र, नर्वस सिस्टम, सर्कुलेटरी सिस्टम, कंकाल और मांसपेशियों में बांटा गया है। शरीर को ढकने वाली सभी मांसपेशियों में एब्डोमिनल या रेक्टी मांसपेशियां होती हैं जो पेट में धड वाले क्षेत्र में होती हैं।

रेक्टी मांसपेशियां दो वर्टीकल और पैरेलल हिस्सों से मिलकर बनते हैं। वे लाइनिया अल्बा (linea alba) से जुड़ी होती हैं, जो एक कोलेजन से भरा रेशेदार ढांचा होता है और ऐब्स के बींचोबीच से होकर गुजरता है।

डायस्टैसिस रेक्टि के प्रकार (Types of diastasis recti)

जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है, तो 9 महीने के दौरान उसका पेट आम-तौर पर 7 से 35 सेंटीमीटर तक बढ़ा हुआ रहता है। इस वजह से पेट की मांसपेशियां फैल जाती हैं और इससे डायस्टैसिस रेक्टि की दो अलग-अलग स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

एनाटॉमिक डायस्टैसिस

पहली स्थिति वह है जब पेट की मांसपेशियां फट जाती हैं और आँतों के आस-पास का हिस्सा उभर जाता है। इस तरह का डायस्टैसिस रेक्टि शारीरिक गतिविधियों के कारण होता है।

फंक्शनल डायस्टैसिस

एब्डोमिनल सेपरेशन की दूसरी स्थिति वह है जब पेट की मांसपेशियां अलग-अलग हो जाती हैं। इस स्थिति में, पेट के आस-पास का हिस्सा बहुत कमजोर हो जाता है और इसे इलाज़ की जरूरत होती है।

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डायस्टैसिस रेक्टि के नुकसान

नीचे, कुछ ऐसे नतीजों के बारे में बताया गया जो गर्भावस्था के दौरान देखने को मिल सकते हैं:

  • पेल्विक फ्लोर की मजबूती कम हो जाती है, जिसके कारण सूजन, पेशाब से जुडी समस्यायें और पेल्विक क्षेत्र में लगातार दर्द होता है।
  • पेट के बीच में उभार जो उस समय दिखाई देता है जब आप एक्सरसाइज करते हैं।
  • अन्दरूनी अंगों पर कमजोर पकड़
  • पेट और आस-पास के हिस्सों में ढीलापन
  • जलन, पाचन में गड़बड़ी और भारीपन
  • कमर दर्द
  • अम्बिलिकल, इंजिनल या ऐब्डामनल हर्निया

अक्सर गर्भावस्था के दौरान पेट की मांसपेशियां अलग-अलग हो जाती हैं या फिर ख़त्म हो जाती हैं। अगर आपको लगता है कि आपको भी ऐसी कोई समस्या है, तो आपको तुरंत किसी मेडिकल स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ आप नीचे बताये सुझावों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

डायस्टैसिस रेक्टि को ठीक करने का तरीका

पहली चीजें सबसे पहले: डायस्टैसिस रेक्टि वाला कोई भी आदमी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता है क्योंकि उसकी मांसपेशियों में काफी बड़े बदलाव हो चुके होते हैं और वे फिर से अपनी पुरानी ताकत हासिल नहीं कर सकते। हालाँकि, कुछ अच्छे तरीके हैं जो आपके पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं:

थोड़ी फिजिकल एक्सरसाइज (physical exercise)

आप फर्श पर गिरी चीजों जैसे सिक्के, नोट या दूसरी छोटी चीजों को उठाने से बचें क्योंकि इससे आपके पेट पर दबाव पड़ता है। इसके साथ ही, बिस्तर से उठते समय एक तरफ से सहारा लेते हुये उठने से बचें।

एक्सरसाइज

डायस्टैसिस रेक्टि एक्सरसाइज

हाइपोप्रेशिव ऐब्डामनल एक्सरसाइज से आपको प्रभावित हिस्सों को पहले जैसा स्वस्थ बनाने में मदद मिलेगी, यह आपके रेक्टस मांसपेशियों को सुडौल बनाएगा। आपको उन्हें सीखना चाहिए क्योंकि ये कोई ट्रेडिशनल ऐब एक्सरसाइज नहीं हैं, इसके लिये आपको किसी स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिये।

डायस्टैसिस रेक्टि स्प्लिंट (Diastasis recti splint)

कुछ स्प्लिंट हैं जिन्हें खासतौर पर डायस्टैसिस रेक्टि के इलाज के लिए बनाया गया है। आपको यह ध्यान में रखना होगा कि उनका इस्तेमाल ज्यादा देर तक नहीं किया जाता है।

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स्वस्थ भोजन (Healthy diet)

स्वस्थ खाना खाने से आप कब्ज से बचेंगे, जिससे आप बाथरूम जाने पर पेट की मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर पर पड़ने वाले दबाव से छुटकारा पा सकते हैं।

डायस्टैसिस रेक्टि डाइट

अपने पेल्विक फ्लोर (pelvic floor) को मजबूत बनायें

प्रेगनेंसी से पहले, अपने पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को टोन कर लें। ऐसी कई स्पेशल एक्सरसाइज हैं जो इस स्थिति को और ज्यादा खराब होने से रोक सकती हैं।

अगर आपका एब्डोमिनल सेपरेशन लगातार बिगड़ता जा रहा है, तो उसके लिये कुछ और उपाय भी मौजूद हैं:

  • फिजिकल थेरेपी
  • इलेक्ट्रो-स्टिमुलैशन
  • पेट की सर्जरी

डायस्टैसिस रेक्टि के लिए सुझाव

वैसे तो एब्डोमिनल सेपरेशन एक रोकी नहीं जा सकने वाली समस्या है, लेकिन हमारी तरफ से कुछ सुझाव हैं जिन्हें आप मांसपेशियों के अलगाव को कम-से-कम करने के लिये इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • गर्भावस्था के दौरान भारी चीजों को उठाने से बचें।
  • रोजाना के कामों में, जितना हो सके कम-से-कम ताकत का इस्तेमाल करें।
  • अपने खाने में ज्यादा मात्रा में प्रोटीन और विटामिन C शामिल करें।
  • हर दिन बड़ी मात्रा में तरल चीजों का सेवन करें।

हम आपको यह भी बताना चाहेंगे कि कुछ मां अपनी प्रेगनेंसी के दौरान या यहाँ तक कि बच्चे को जन्म देने के बाद इस स्थिति को पैदा करती हैं। ऊपर बताये गये सुझाव एब्डोमिनल सेपरेशन के लक्षणों की देख-भाल करने में मददगार हो सकते हैं।

एब्डोमिनल सेपरेशन एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसे देख-भाल की जरूरत होती है, लेकिन सभी महिलाओं को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

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