क्लियर कान्शन्स रखने के लिए, वही कहें और करें जो करना चाहिए

09 नवम्बर, 2018
दूसरों का सम्मान करने मात्र से एक क्लियर कान्शन्स हासिल नहीं किया जाता है - आपको अपनी बात पर कायम रखने और अपनी खुशियों की रक्षा के लिए सीमाएं निर्धारित करना भी आना चाहिये

एक अच्छा कम्यूनिकेटर बनने के लिए, अपनी बात को साफ-साफ शब्दों में बोल देना काफी नहीं है। एक आदमी जो सम्मान के साथ लेकिन मजबूती से अपनी बात पर डटे रहने की क्षमता रखता है, एक बेहतर कान्शन्स का लुफ्त उठाता है। उसका दिल ज्यादा ईमानदार और भरोसेमंद होता है।

हालांकि, यहाँ पर कुछ दिलचस्प बाते भी हैं। सेज जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक केवल 18% लोग ही ऐसे होते हैं जो इरादों के बिल्कुल पक्के होते हैं।

हममें से बाकी लोग करीब-करीब “जी रहे हैं,” जिन्हें हम कह सकते हैं कि आदेश का पालन करने, सहमति जताने और चुप रहने के लिये होते हैं।

इनमें से कोई भी चीज हद ज्यादा न करें। आपको वह आदमी नहीं बनना है जो कभी भी बातों को कम नहीं करता, जो कभी चुप नहीं होता और बोलता रहता है। लेकिन, घुटने टेकना, स्वीकार करना और चुप्पी साधे रखना भी ठीक नहीं है।

दूसरी सभी चीजों से पहले, आपको चाहिये कि आप हर रात एक क्लियर कान्शन्स के के साथ अपने तकिये पर सिर रखें। यह जानने के लिए कि आपके उसूल और आपके कार्य एक सही तालमेल में हैं।

आज हम आपको इस बारे में और ज्यादा सोचने के लिए बढ़ावा देते हैं।

एक क्लियर कान्शन्स कैसे पायें (How to achieve a clear conscience)

साइकोलॉजी टुडे में छपे एक दिलचस्प आर्टिकल के अनुसार, 86% आबादी, सबसे पहले, टकराव से बचने की कोशिश करती है।

विवाद से बचने के लिए हर कोई संतुलन में रहने की कोशिश करता है। जब आप कुछ खास लोगों के आस-पास होते हैं तो स्ट्रेस से बचने के लिये, आस-पास के लोगों द्वारा नकारे जाने से बचने के लिये, या किसी और परेशानी से बचने के लिए आप कई तरह के गलत व्यवहार या गलत हरकतें स्वीकार कर लेते हैं।

परिवार के सदस्यों और वर्क-प्लेस, दोनों जगह इस तरह का व्यवहार आम बात है। आप अपने पिता का गुस्सा सहन करते हैं। आप अपने चचेरे भाई की फालतू बातें स्वीकार करते हैं। आप उस को-वर्कर के साथ भी रखते हैं जो अपनी पीठ पीछे लगातार आपको बुरा-भला कहता रहता है।

आखिरकार आप यह सब कुछ इतना ज्यादा सहन कर चुके होते हैं कि, आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि, कब यह एक बहुत बड़ा पहाड़ बन चुका है। पहाड़ जो आपको बस यह बताता है कि आप एक ऐसा आदमी बन चुके हैं जो चुप रहता है और जो चल रहा है उसे चलने देता है।

चलिए देखते हैं कि एक क्लियर कान्शन्स पाने के लिये इन हालातों को बेहतर तरीके से कैसे संभाला जाये।

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2-मैरीअनेट

हर चीज की एक हद होती है और यह आत्म-सम्मान का मामला है

अगर आप अपने उस खिजाने वाले चचेरे भाई को साल में सिर्फ एक बार देखते हैं – और सामना करते हैं तो फिर की बात नहीं है। और तब भी कोई दिक्कत नही है अगर आपके पिता का गुस्सा कभी-कभी आने वाली चीज है। हो सकता है कि वे अपनी इन हरकतों के बारे में सोचें और उन्हें कुछ और बेहतर बनाने के लिये उनमें सुधार करें।

  • लेकिन अगर इस तरह के बर्ताव को बार-बार दोहराया जा रहा है और वे आपकी गरिमा और आत्म-सम्मान को प्रभावित कर रहे हैं, तो यह जवाब देने का समय है।
  • हर किसी की एक हद होती है। बहुत-से लोग कुछ खास चीजों को सहन कर सकते हैं जबकि कुछ लोग थोड़ी-सी दिक्कत महसूस होने पर बस “उछल” जाते हैं।
  • दर्द या नुकसान के रास्ते पर अपनी सीमायें तय न करें। अगर कोई चीज आपको परेशान कर रही है, तो वही आपकी सीमा है; यही वो समय है जब आपको जवाब देने के लिए लाल बटन दबाना है।

आपको क्या पसंद नहीं है या कौन सी चीजें आपको परेशान करती हैं उन्हें लेकर मजबूत और अब्जेक्टिव बनें

इसका मतलब किसी दूसरे आदमी को चोट पहुंचाने की कोशिश से नहीं है। और न ही आपको चिल्लाने या बुरा व्यवहार करने की ज़रूरत से है। फिर भी, आपको स्पष्ट होने की जरुरत है।

“मुझे आपका मेरी पीठ पीछे बात करना पसंद नहीं है। यह सम्मान की कमी दिखाता है जिसे मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। आप जो कर रहे हैं, मिच्योर और इज्जतदार लोग ऐसा कुछ नहीं करते हैं। इसे रोकिये और झूठ मत फैलाइये। “

“मैं आपकी बताई हर चीज नहीं करना चाहती हूं, और न ही मैं कर सकती हूं। जब आपकी ज़रूरत होगी, तो मैं आपकी मदद करूंगी, लेकिन कभी-कभी मेरा सम्मान किए बिना या यहां तक कि मेरे बारे में भी सोचे बिना आप मेरी दोस्ती को भी बुरा-भला कहते हैं।”

  • इसके दूसरे पहलू पर भी ध्यान दें। आप जो कहते हैं दूसरे लोग उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, यह आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है।
  • अगर वे इसे गलत तरीके से लेते हैं या नाराज होते हैं तो आख़िरकार वे इसे स्वीकार करेंगे, और आपको अपनी व्यक्तिगत मिच्योरिटी दिखानी होगी।

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3-पक्षियों के साथ-में स्त्री

अपने लिए खड़े होने को अक्सर आपको दी गयी शिक्षा के खिलाफ जाना समझा जाता है

आप मानो या न मानो, आप एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां ऐसा माना जाता है कि जो लोग खुद का बचाव करते हैं वे स्वार्थी होते हैं। सच्चाई बताने के लिए, बेइज्जत होकर यहाँ से बाहर जाने वाली बात है।

आपको परिस्थितियों को समझना सीखना होगा। फिर भी, ये बात तो साफ़ है कि हमें कभी भी खुद से प्यार करना और खुद के लिए खड़े होना नहीं सिखाया जाता है।

  • इमोशनल इन्टेलिजेन्स एक ऐसी चीज है जिसके बारे में स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता है।
  • घर पर, बहुतों का मानना है कि यह आपके माता-पिता का काम है। बहुत सारे बच्चों को ये सिखाया जाता है कि अपनी भावनात्मक जरूरतों के बारे में बात करना उन्हें कमजोर बनाता है।
  • अकेले में रोना ज्यादा अच्छा है, क्योंकि “जो चीज आपको दुखी करती है उसे छुपा देने से” दूसरे लोगों कोई नुकसान नहीं होता है”।

ये सोचने के वे तरीके हैं जिन्हें जल्द से जल्द ख़त्म किया जाना चाहिए।

  • एक क्लियर कान्शन्स के साथ जीने के लिए आपको अपनी जगह, अपने मूल्यों और अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी। हमेशा ऐसा समय होगा जब आपको किसी चीज़ या किसी आदमी के खिलाफ प्रतिक्रिया देनी पड़ेगी। बहुत से लोगों को स्वार्थी होकर दूसरों का इस्तेमाल करने की आदत पड़ चुकी है।

आपको, अपनी ओर से, हमेशा सम्मान के साथ प्रतिक्रिया देना सीखना होगा, लेकिन साथ ही अपने हक़ का बचाव भी करना होगा। हमेशा वही कहें और करें जो आप महसूस करते हैं, दूसरों को नुकसान पहुंचाए बिना, खुद को सुरक्षित रखते हुये एक क्लियर कान्शन्स के साथ जिंदगी जियें।

इसे आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता।

  • Say What You Mean; Mean What You Say. (2016). Retrieved 16 October 2020, from https://www.psychologytoday.com/us/blog/understand-other-people/201607/say-what-you-mean-mean-what-you-say
  • Delamater, R. J., & Mcnamara, J. R. (1986). The social impact of assertiveness: Research findings and clinical implications. Behavior Modification, 10(2), 139-158.