अपनी सीमा तय करें और ज़िन्दगी में उन लोगों को जगह दें जो आपको ख़ुश रखें

रोज़ाना आपका पाला ऐसे लोगों से पड़ता है, जो आपकी ऊर्जा को बर्बाद कर देते हैं। इसीलिए यह ज़रूरी है कि उनकी बातों या हरकतों से प्रभावित होने से बचने के लिए आप अपनी सीमा को निर्धारित कर लें।
अपनी सीमा तय करें और ज़िन्दगी में उन लोगों को जगह दें जो आपको ख़ुश रखें

आखिरी अपडेट: 23 अक्टूबर, 2018

ज़िन्दगी में कुछ लोग हमें बुरी तरह से थका कर हमारी सारी ऊर्जा खर्च करवा देते हैं। हम आराम से जीना चाहते हैं, मगर वे हमें लड़ने-झगड़ने पर मजबूर कर देते हैं।

दिलचस्प बात तो यह है कि “हमारी ख़ुशी नोच लेने वाले” ये लोग जीवन के हर क्षेत्र में मिल जाते हैं। ये आपके घरवाले हो सकते हैं, आपके दोस्त हो सकते हैं और यहाँ तक कि आपके सहकर्मी हो सकते हैं।

कभी-कभी अनजाने में ही उनका बर्ताव टॉक्सिक हो जाता है। अपने मन की भड़ास निकालने के लिए उन्हें आपकी, आपके साथ की, आपके सलाह की ज़रूरत होती है। कभी-कभी तो ये बातें बर्दाश्त भी की जा सकती हैं, लेकिन हमेशा बिल्कुल नहीं!

यहीं से ब्लैकमेल और तानों का सिलसिला शुरू हो जाता है।

ऐसे लोगों के साथ रहना बहुत आसान नहीं होता। लेकिन आपको अपने आत्म-सम्मान को बरक़रार रखते हुए अपनी सुरक्षा करनी आनी चाहिए। साथ ही आपको ऐसे लोगों की तलाश करते रहना चाहिए, जो आपकी ख़ुशी का सबब बन सकें।

थकाऊ लोग: हमारे रोज़ के स्ट्रेस के स्रोत

ज़िन्दगी में हम लगातार तनाव भरे हालात से घिरे रहते हैं। परेशानियों का दूसरा नाम है ज़िन्दगी।

लेकिन यहाँ एक बात आपको अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए। आपकी ऊर्जा को खपा देने, आपका दम घोंटने और आपके भावनात्मक संतुलन के साथ छेड़-छाड़ करने वाला व्यक्ति ऐसा इसलिए कर पाता है कि आप उसे वैसा करने देते हैं

ज़िन्दगी में अपनी सीमा को समझकर उसे निर्धारित करें

हर किसी की बर्दाश्त करने की अपनी एक सीमा, अपनी एक दहलीज़ होती है। बेशक वह सीमा आपके व्यक्तित्व पर निर्भर करती है।

  • निरंतर सामाजिक मेलजोल वाली परिस्थितियों में पड़ने पर अंतर्मुखी (इंट्रोवर्ट) लोगों में सहनशक्ति की कमी दिखाई पड़ती है। पर्याप्त समय तक एकांत-वास कर ही वे अपनी बैटरी को “रिचार्ज” कर पाते हैं।
  • ज्यादा प्रोत्साहन की खोज में रहने वाले मिलनसार लोगों को आमतौर पर ढेर सारे लोगों से बात करना, अलग-अलग तरह के माहौल में वक़्त बिताना और योजनाएं बनाना अच्छा लगता है।
  • समस्या तब पैदा होती है, जब इन अंतर्मुखी और मिलनसार लोगों का पाला दूसरों की ख़ुशी उजाड़ने वाले कुछ लोगों से पड़ता है, वे लोग जो अपनी बात और अपने फायदे को सबसे ऊपर रखकर दूसरों को खपा डालते हैं।

अपनी आलोचना व अपनी सनक से आपकी सारी ऊर्जा को सोख लेने वाले इन लोगों की परेशानियां तो जैसे ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती।

आप मानें या न मानें, पर आपके तनाव के एक बड़े हिस्से के ज़िम्मेदार आपको थका डालने या तनावग्रस्त करने वाले ऐसे ही लोग होते हैं।

नकारात्मक मेलजोल और दिमाग पर उनके असर

ऐसी स्थितियों में “जलन” शब्द का मतलब समझ में आने लगता है। आपका दिमाग न्यूरल कनेक्शन के किसी अद्भुत जाले की तरह होता है। आपस में जुड़े टिशू के उस समूह में तालमेल होता है।

निरंतर या स्थायी तनाव से ग्रस्त रहने के बाद उस तालमेल का सत्यानाश हो जाता है। दिमाग की कुछ जगहें तो पूर्णतः गायब भी हो सकती हैं:

  • आपके दिमाग के हिप्पोकैंपस क्षेत्र में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के डेंडर्राइट्स टूटने लगते हैं। ऐसा न्यूरोट्रांसमिटर में आए बदलाव की वजह से होता है। कोर्टिसोल का दिमाग पर एक बहुत नकारात्मक असर होता है।
  • न्यूरॉन्स को आपस में जोड़े रखने वाली छोटी-छोटी शाखाओं को डेंडर्राइट्स कहा जाता है।
  • आप जितने ज़्यादा तनाव में होंगे, आपके दिमाग के हिप्पोकैंपस क्षेत्र में कनेक्टिविटी भी उतनी ही कम हो जाएगी। टूटते डेंडर्राइट्स कनेक्टिविटी को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • ध्यान रखें, हिप्पोकैंपस दिमाग की वह संरचना होती है जिसमें स्मरणशक्ति और भावनाओं को संचित किया जाता है।

ये बातें हम आपको यह समझाने के लिए बता रहे हैं कि चिंता या तनाव से ग्रस्त लोग अपनी एकाग्रता से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे में उदासीनता और नेगेटिविटी का महसूस होना भी आम हो जाता है।

ज़िन्दगी में नकारात्मक लोगों को अपने व्यक्तित्व की सीमा से बाहर ही रखें

थकाऊ लोगों के खिलाफ़ अपने व्यक्तित्व की “किलाबंदी” करना सीखें

तनावपूर्ण परिस्थियों में अपने व्यक्तित्व की किलाबंदी करना कोई बच्चों का खेल नहीं होता। इसका सबसे बड़ा कारण तो यह है कि कभी-कभी आपकी अपनी नकारात्मकता आपको ऐसा करने से रोकती है। आप रक्षाहीन महसूस करने लगते हैं।

लेकिन तब मुझे क्या करना चाहिए जब वह थकाऊ इंसान मेरी अपनी माँ, या फिर मेरा अपना साथी या बॉस हो? ऐसे पेचीदे सवाल आपको खपा डालते हैं।

तो आइए कुछ छोटी-मोटी रणनीतियों पर एक नज़र डालते हैं।

मैं उन्हें एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दूंगा

हो सकता है, आपका कोई यार-दोस्त या परिजन आपको फ़ोन करके अपने दुखड़े रोते रहता हो। उनकी कॉल्स का जवाब दो-तीन दिन में सिर्फ़ एक ही बार देना इस समस्या का एक समाधान हो सकता है।

अपनी सीमा निर्धारित करते समय आपको अपने अपराध बोध का शिकार होने से बचना होगा। हो सकता है, उन्हें एक-दो बार थोड़ा गुस्सा आए लेकिन धीरे-धीरे वे आपकी व्यक्तिगत सीमा के आदी हो जाएंगे।

ज़िन्दगी में आपकी ख़ुशी और आपकी सीमा में एक गहरा रिश्ता होता है

ऐसे लोगों की तलाश करें जो आपको प्रेरित कर आपकी ख़ुशी का सबब बनते हैं

अगर आपका कोई घरवाला या फ़िर सहकर्मी आपकी ऊर्जा को बर्बाद कर रहा है तो उनसे थोड़ी दूरी बनाकर ऐसे लोगों के साथ वक़्त बिताना शुरू कर दें, जो आपको खुश रखें।

  • ज़िन्दगी में संतुलन का बहुत महत्त्व होता है। कुछ पाने के लिए आपको कुछ खोना भी होगा।
  • थकाऊ लोगों से एक हाथ की दूरी बनाए रखें। अगर आपको मजबूरी में उनसे बात करनी भी पड़ती है तो अपनी सीमा निर्धारित करना सीखें। खुद को प्राथमिकता देना सीखकर अपने आत्मसम्मान पर कोई आंच न आने दें।
  • अपने समय का 70% हिस्सा अपनी व्यक्तिगत समृद्धि में लगाएं। इसके लिए, अपना वक़्त अच्छे, प्रेरणादायक और आपको आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर देने वाले लोगों के साथ ही बिताएं।
  • आपके सहकर्मियों में कुछ अच्छे लोग भी होंगे। आपके परिवार में भी कोई न कोई आपके दिल के बेहद करीब ज़रूर होगा।

इस बात का ध्यान रखें कि प्यार वाले किसी रिश्ते में कोई किसी को नहीं खपाता, क्योंकि आपको खपा देने वाले लोग आपसे प्यार ही नहीं करते। आपकी ऊर्जा के साथ-साथ वे आपके स्वास्थ्य को भी खपा डालते हैं।

इस बात को कभी न भूलें।


यह पाठ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया जाता है और किसी पेशेवर के साथ परामर्श की जगह नहीं लेता है। संदेह होने पर, अपने विशेषज्ञ से परामर्श करें।