योग ने बदला 87 वर्षीय इस वृद्धा की जिंदगी

नवम्बर 6, 2018
योग बहुत पुरानी एक्सरसाइज है जो आपके दिलो-दिमाग और पूरे शरीर की देख-भाल करता है। अगर योग एक बूढ़ी महिला की जिंदगी बदल सकता है, तो यह आपकी भी ज़िन्दगी में नया मोड़ ला सकता है।

यह माना जाता है कि उम्र कुछ भी नया सीखने और नए तौर-तरीकों को अपनाने में बाधा डालती है, भले ही वह योग ही क्यों न हो।

जो लोग बेरोक-टोक अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के इच्छुक हैं, उन्होंने साबित किया है, आप जिंदगी में किसी भी पड़ाव पर इसे बेहतर बनाने के लिए काम कर सकते हैं।

इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है, एक 87 साल की बूढी महिला। क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने अपनी बीमारियों के इलाज के लिए योग सीखने का फैसला लिया।

उनकी कहानी दुनिया भर में चर्चा का विषय रही है। उन्होंने बुजुर्गों की एक्सरसाइज करने की क्षमता के साथ-साथ योग से होने वाले फायदों को भी साबित किया है।

योग से एक वृद्धा की ज़िन्दगी बदलने की कहानी

2-योग ट्रेनर

हमारी इस कहानी की नायिका अन्ना पेस्से ने अपने कैफोसिस (कूबड़ेपन) की बीमारी का असरदार इलाज इलाज ढूंढने की कोशिश में 86 साल की उम्र में अपने लाइफस्टाइल को बदलने की शुरुआत की।

यह ऐसी स्थिति थी जिसकी वजह से उनके रीढ़ की हड्डी स्थायी रूप से झुक गयी थी और फिर धीरे-धीरे उनकी पीठ पर एक कूबड़ उभर आया जिसमें बहुत दर्द होता था।

स्कोलियोसिस, ऑस्टियोपोरोसिस और हर्निएटेड डिस्क की वजह से होने वाली इस बीमारी ने उनका चलना-फिरना सीमित कर दिया और उन्हें लगातार थकान महसूस होने लगी।

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दशकों से परेशान रहने के बावजूद अपने जीवन की क्वालिटी को प्रभावित किए बिना इस बीमारी का मुकाबला करने का कोई रास्ता ढूंढ पाने में वे नाकाम रहीं

जब उन्हें पहली बार इस बीमारी के बारे में पता चला तब वह एक्यूपंक्चर, फिजियोथेरेपी के साथ एक्सरसाइज और ऑस्टियोपैथी जैसी थेरेपी आजमा रही थीं।

हालाँकि थेरेपी ने उनके दर्द को कम तो किया, फिर भी वह पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करने में असमर्थ रहीं।

लेकिन योग ने सबकुछ बदल दिया।

3-योग ट्रेनिंग

कुछ लोगों ने चिंता जताई कि उनकी उम्र के हिसाब से यह एक्सरसाइज अच्छी नहीं है। लेकिन योगा स्पेशलिस्ट प्रोफेसर रैचेल जेसियन ने उन्हें मोटिवेट किया और हफ्ते में एक बार उन्हें अपनी क्लास देना शुरू किया।

एन्ना महसूस कर पा रही थी कि धीरे-धीरे उनके चलने-फिरने में सुधार हो रहा है और एक महीने के भीतर वह बिना किसी परेशानी दोबारा चलने-फिरने लगी थी।

दो महीने में उनका दर्द गायब होन शुरू हो गया और एक साल तक लगातार क्लास लेने के बाद उन्होंने हर दिन योग का अभ्यास करने का फैसला किया।

87 साल की उम्र में अब उनकी पीठ पर कोई कूबड़ नहीं है। उन्होंने चलने-फिरने की क्षमता को इस तरह से हासिल किया कि कई लोग इसे एक “चमत्कार” मानते हैं। अब वह पहले से ज़्यादा फुर्तीली हो गयी हैं।

4-योग ट्रेनिंग

इस तरह की रिकवरी सर्विस हर किसी के लिए एक उम्मीद की तरह काम करती है। ऐसी चीजों को शुरू करने में कभी देर नहीं करनी चाहिये जो आपकी जिंदगी बदल सकती हैं।

इसके अलावा, उनकी कहानी यह स्पष्ट करती है कि हर आदमी एक-दूसरे से अलग होता है। इसलिए आपको अपनी बीमारियों के लिए सही इलाज ढूंढना चाहिये।

वैसे तो कई तरह की थेरेपी और नुस्खे मौजूद हैं, लेकिन कभी-कभी जो किसी एक आदमी के लिए बढ़िया काम करता है वह दूसरे के लिए भी उतना ही फायदेमंद नहीं होता।

अगर आप गहराई से अपने शरीर की जरूरतों को समझें और नये प्रयोग करें, तो सालों-साल तक खुद को स्वस्थ रखने का कोई न कोई अच्छा तरीका खोज लेंगे।

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योग के बारे में …

5-योग पोस्चर

महज एक एक्सरसाइज बढ़कर, योग को हेल्दी लाइफस्टाइल माना जाता है जो दिलोदिमाग और देह सबको स्वस्थ रखता है, उन्हें मजबूत बनाता है।

भारत में सदियों से इसका अभ्यास किया जाता रहा है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे पसंदीदा एक्सरसाइज में है।

हालाँकि हिंदू धर्म में योग धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन अब यह सीमाओं को पार करते हुये हेल्थ थेरेपी बन चुका है

हर योगा सेशन एक से डेढ़ घंटे तक चलता है, हालांकि कुछ लोग इसका अभ्यास थोड़े कम समय के लिये करते हैं।

लगातार ब्रीदिंग एक्सरसाइज और अलग-अलग स्तर की मशक्कत से पोस्चर पर असर पड़ता है।

इसकी शुरुआत एक हल्के वार्म-अप के साथ होती है जिसे “सूर्य नमस्कार” कहा जाता है, जो मांसपेशियों और जोड़ों को वार्म-अप करने के लिए किया जाता है।

इस सेशन को एक आरामदायक ढंग से पूरा किया जाता है जो 10 से 15 मिनट का होता है। इसका मकसद आपके शरीर और दिमाग की शांति को वापस पाना है।

योग का अभ्यास किसी खास जिम या फिटनेस सेंटर में किया जा सकता है। जिन लोगों ने अभी सीखना शुरू किया है उन्हें किसी स्पेशलिस्ट की देख-रेख में ही इसे करना चाहिये, क्योंकि गलत पोस्चर चोट लगने की वजह बन सकता है।

मुद्रा में कुशल हो जाने और सही तकनीक सीख लेने के बाद आप कहीं भी, किसी भी जगह इसे आसानी से कर सकते हैं।

तो कैसे योग ने इस महिला की जिंदगी को बदल दिया, इस बारे में पढ़ने के बाद, क्या आप इसे अपने जीवन में शामिल करने के लिए उत्साह से भरे हुए नहीं महसूस कर रहे हैं?