सॉफ्ट टिशू इंजरी का इलाज

01 अप्रैल, 2020
सॉफ्ट टिशू में टेंडन, लिगामेंट्स और मांसपेशियां शामिल हैं। उनमें जो तेज चोटें अक्सर लगती हैं, वे मोच और चोट के निशान हैं। हालांकि कोई आदमी अंगों के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली जख्मों जैसे कि टेंडिनाइटिस या बर्साइटिस से भी पीड़ित हो सकता है। यहां सॉफ्ट टिशू इंजरी का इलाज करने का तरीका जानें!
 

सॉफ्ट टिशू इंजरी मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम के नरम भागों में होती हैं। इस प्रणाली में टेंडन, लिगामेंट्स और मांसपेशियां होती हैं

मांसपेशियों में फाइबर का एक गुच्छा होता है, जो अपने लचीलेपन के कारण छोटा हो सकता है, सिकुड़ और खिंच सकता है।

दूसरी ओर टेंडन (tendon) मांसपेशियों के ही हिस्से हैं जो मांसपेशियों और हड्डी को जोड़ते हैं। हिलने-डुलने के लिए टेंडन हड्डी में ऊर्जा संचारित करते हैं।

इसके अलावा लिगामेंट (स्नायुबंधन) टेंडन के समान संरचना वाले ही होते हैं। हालांकि, उनका काम जॉइंट का निर्माण करने वाले घटकों को बांधना और स्थिरता देना होता है। सॉफ्ट टिशू इंजरी को दो ग्रुप में बांटा जाता है: तीव्र और अतिरिक्त प्रयोग।

एक्यूट सॉफ्ट टिशू इंजरी

एक्यूट सॉफ्ट टिशू इंजरी

इस तरह की चोटें अचानक आघात के कारण होती हैं, जैसे कि गिरने या झटका लगने से। मोच, तनाव और खरोंच इस श्रेणी में आती हैं।

मोच (Sprain)

मोच दरअसल लिगामेंट में होने वाला खिंचाव और/या उनका फटना है। शरीर के जिन हिस्सों में मोच आने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, वे हैं टखने, घुटने और कलाई। गंभीरता के अनुसार इन्हें इस प्रकार क्लासिफाई किया गया है:

  • ग्रेड 1 या मामूली: थोड़ा खिंचाव होता है, साथ ही लिगामेंट फाइबर को भी मामूली नुकसान होता है
  • ग्रेड 2 या मध्यम: लिगामेंट में कुछ दरार आती है
  • गंभीर (ग्रेड 3): लिगामेंट पूरा फट जाता है और अस्थिरता का कारण बनता है

तीव्रता अलग-अलग होने पर भी तीनों ग्रेड में दर्द, चोट, सूजन आम है।

तनाव (Strain)

तनाव भी एक किस्म की सॉफ्ट टिशू इंजरी है जो अक्सर ओवरयूज, खिंचाव या अत्यधिक प्रयास के कारण होती है। मांसपेशियों और टेंडन के कॉम्बिनेशन में होने वाला यह तनाव एकल खिंचाव से लेकर आंशिक या पूर्ण रूप से फटना शामिल हो सकता है। स्ट्रेन के सबसे आम लक्षण हैं:

  • मांसपेशियों की ऐंठन (Muscle spasms)
  • ऐंठन (Cramps)
  • मांसपेशी में कमज़ोरी
  • सूजन

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जख्म

जख्म किसी बाहरी बल या झटके का नतीजा होता है। ब्लड वेसेल्स के टूटने के कारण रंग में बदलाव होता है। यह मूवमेंट को सीमित भी कर सकता है।

एक्यूट सॉफ्ट टिशू इंजरी का इलाज

इसका इलाज इसकी टाइप और चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है। एक्यूट सॉफ्ट टिशू इंजरी होने पर प्रारंभिक इलाज राइस प्रोटोकॉल (RICE protocol) से मेल खाता है: आराम, बर्फ, कम्प्रेशन और ऊंचा उठाकर रखना है।

चोट के कारण एक्टिविटी से ब्रेक लेना अहम है, साथ ही 20 मिनट के लिए दिन में कई बार बर्फ या कोल्ड कम्प्रेशन लेना भी ज़रूरी है। सूजन को रोकने के लिए एक्सपर्ट एक इलास्टिक कम्प्रेशन बैंडेज पहनने और जख्मी अंग को दिल की ऊँचाई से ऊपर उठाने की सलाह देते हैं।

मामूली मोच का इलाज भी RICE है। हालांकि मध्यम मोच को अक्सर स्टेबलाइज करने वाले वक्त की ज़रूरत होती है और गंभीर मोच में चोट की मरम्मत के लिए सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है।

स्ट्रेन के लिए विशेषज्ञ आराम, आइस, कम्प्रेशन और ऊंचाई पर रखने की सलाह देते हैं। दर्द को दूर करने और मूवमेंट बहाल करने के लिए आपको आसान व्यायाम के साथ-साथ इस प्रोटोकॉल पर अमल करना चाहिए। ज्यादातर हल्के स्ट्रेन RICE प्रोटोकॉल से अच्छा रेस्पोंसे देते हैं।

सॉफ्ट टिशू के ज्यादा उपयोग होने के बाद चोट


ये चोटें समय बीतने के साथ धीरे-धीरे होती हैं। वे तब उभरती हैं जब कोई व्यक्ति इतनी बार फिजिकल एक्टिविटी करता है कि उसके शरीर को ठीक होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। टेंडोनाइटिस और बर्साइटिस इस श्रेणी में सबसे आम सॉफ्ट टिशू इंजरी हैं।

टेंडीनाइटिस (tendonitis)

यह सॉफ्ट टिशू इंजरी कण्डरा की सूजन या जलन है। आमतौर पर, यह बार-बार प्रयासों की एक श्रृंखला के कारण होता है जो कण्डरा को प्रभावित करते हैं। टेंडोनाइटिस के विशिष्ट लक्षण सूजन और दर्द हैं जो गतिविधि के साथ बिगड़ते हैं।

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बर्साइटिस (bursitis)

बर्साइटिस छोटे जिलेटिनस बैग होते हैं जो कंधे, कोहनी, कूल्हे, घुटने और टखनों के आसपास स्थित होते हैं। इस अर्थ में, उनके पास थोड़ी मात्रा में तरल होता है और हड्डियों और नरम ऊतकों के बीच स्थित होता है। इस प्रकार, वे घर्षण को कम करने के लिए कुशन का काम करते हैं। बर्साइटिस एक बर्सा की सूजन है। यह स्थिति बार-बार दोहराने वाली एक्टिविटी के परिणामस्वरूप होती है।

 

ज्यादा उपयोग से हुई चोट का इलाज

विशेषज्ञ टेंडोनिटिस के इलाज और लचीलेपन में सुधार के लिए आराम, एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाओं और व्यायाम की सलाह देते हैं। यदि सूजन बनी रहती है, तो यह कण्डरा को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसके लिए सर्जिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता हो सकती है।

आप अपनी गतिविधियों को बदलकर बर्साइटिस से राहत पा सकते हैं। आपको एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाएं लेने की ज़रूरत भी होगी। यदि सुधार न हो तो बर्सा से द्रव को निकालना भी ज़रूरी हो सकता है।

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