आपको अपने लिए वक्त चाहिये: इसे साबित करते हैं ये 5 मनोवैज्ञानिक पहलू

12 नवम्बर, 2018
जो वक्त आप खुद को देते हैं वह गुणवत्ता से भरपूर होना चाहिए। आपको इसे दूसरों की देखभाल में खर्च नहीं करना चाहिए। ऐसा क्यों? इसका जवाब ये मनोवैज्ञानिक पहलू देंगे।

आपको अपने लिए वक्त चाहिये। लेकिन आप हमेशा अपना लगभग पूरा समय अपने आस-पास के लोगों पर खर्च कर देते हैं। या फिर, उसे ऐसे हालात से निपटने में बर्बाद कर देते हैं जो केवल थकान और एंग्जायटी बढ़ाते हैं।

भले ही यह बात थोड़ी अजीब लगे, लेकिन ज्यादातर लोग नहीं जानते, ठीक से आराम कैसे करना है।

अपने लिए वक्त निकालने का मतलब यह नहीं है कि जब कभी आप स्ट्रेस से परेशान हों तो छुट्टी ले लें। इसका मतलब यह भी नहीं कि रोजाना की थका देने वाली परेशानियों से बचने के लिये ट्रिप पर निकल जाना काफी रहेगा।

अपने लिए वक्त खर्च करने का मतलब है, सबसे पहले आप सीखें कि खुद को दिमागी परेशानियों से “अलग” कैसे करना है। यह जानें कि दिमागी शोर-शराबे को कैसे बंद करना है, अपनी जिंदगी के बारे में फैसले लेने के लिए अपनी जरूरतों, विचारों, डर और खालीपन के साथ एक बढ़िया और भरोसेमंद सम्बन्ध कैसे बनाना है।

यहाँ हम आपको बतायेंगे, अपने अन्दर की इस बैचैनी को कैसे निकालें। साथ ही उन मनोवैज्ञानिक पहलुओं के बारे में भी समझायेंगे जो आपको खुद के लिए थोड़ा और समय देने का इशारा करते हैं।

5 मनोवैज्ञानिक पहलू जो साबित करते हैं, आपको अपने लिए वक्त चाहिए

अक्सर जब छुट्टियाँ नजदीक आती हैं, बहुत से लोग ट्रिप पर जाने, मनोरंजन के लिए समय निकालने और घूमने-फिरने की तैयारी में जुट जाते हैं। वे सोचते हैं, इससे उन्हें अच्छा महसूस होगा।

लेकिन वह शानदार “तीन का नियम” हमेशा पूरा नहीं होता है।

कभी-कभी, अपनी रूटीन से दूर हो जाने पर स्ट्रेस और बढ़ जाता है: ट्रिप, कोई प्रोग्राम, पारिवारिक मेल-मिलाप, कभी-कभी “समय का फायदा उठाने” के लिए हर चीज़ की योजना बनानी पड़ती है।

लेकिन एक सबसे जरूरी बात यह है कि, यह समय आपके खुद के लिये है जो आपको अच्छा महसूस करने में मदद करेगा, आपको इसे दूसरे लोगों के साथ शेयर करना होगा: आपका साथी, बच्चे, परिवार …

  • हम सबको हर दिन थोड़ा-सा अकेलापन चाहिये

कभी-कभी दिन में दो घंटे का समय निकलना आपके लिये विटामिन से ज्यादा बढ़िया काम करता है। चलिये देखते हैं, वे कौन-कौन से मनोवैज्ञानिक पहलू हैं जो बताते हैं, शायद आप अपनी स्ट्रेंग्थ की आख़िरी सीमा तक पहुंच चुके हैं।

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5 साइकोलॉजिकल डाइमेंशन्स जो इसे साबित करते हैं

1. खराब मूड और उदासी (Bad moods and apathy)

हममें से हर आदमी उस दौर से गुजरता है जब हर चीज परेशान करती है। हम खुश रहने में नाकाम रहते हैं और हमारे साथ कुछ भी सही नहीं चलता है। कुछ खास पलों या दिनों में ऐसा हो सकता है, लेकिन जब यह समस्या पुरानी हो जाती है तो यह कुछ अलग ही हो जाती है। यह पहला साइकोलॉजिकल पहलू है जो बताता है, आपको थोड़े अकेलेपन की जरूरत है।

हमेशा इस सोच के साथ जागना कि आपमें ऐसा कुछ नहीं है जो आपका दिन सफल बना सके, कि आप परिस्थितियों के विपरीत चल रहे हैं, कि आपके आस-पास के लोगों की ऐसी जरूरतें हैं जो आपके साथ ठीक नहीं बैठती हैं।

बेशक, यह उन छोटी-छोटी बातों को पैदा करती है जो बड़ी परेशानियों की वजह बनती हैं।

जब इस ख़राब मूड से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाये, तो समझ लीजिये अंदर कुछ न कुछ चल रहा है।

2. ऐसा लगता है जैसे आपके पास किसी भी चीज के लिये समय नहीं है

समय की कमी की यह अजीबो-गरीब घटना एंग्जायटी से जुड़ी समस्याओं का एक बहुत ही आम लक्षण है।

यह केवल एक अहसास नहीं है कि आप जो कुछ भी सोच रहे हैं उसे करने के लिए आपके पास वक्त नहीं है। यह सच में वक्त की कमी का अहसास दिलाता है। एक से डेढ़ घंटे, आपको पता है कि आपने कुछ भी नहीं किया, लेकिन आप याद नहीं कर पा रहे हैं कि उस दौरान क्या हुआ था।

बहुत ज्यादा स्ट्रेस और एंग्जायटी के दौरान इस तरह की बातें आम हैं।

3. खुद ही हार मान लेना

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं, नतीजा बुरा ही निकलने वाला है। आत्म-विश्वास की यह कमी आपको यह मानने के लिये मजबूर कर देती है कि सबकुछ आपके काबू से बाहर है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी कोशिश करते हैं, आपको लगता है, आपके हाथ में कुछ नहीं है।

यह निराश कर देने वाली सच्चाई इस बात ओर इशारा है कि कुछ तो चल रहा है। इसका मतलब आपको खुद पर और ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। खुद को अहमियत देनी पड़ेगी और अपने लिए वक्त निकालना पड़ेगा।

4. अहम महसूस नहीं कर पा रहे हैं (Not feeling valued)

हम पहले इसका जिक्र कर चुके हैं: दुनिया आपके खिलाफ लड़ रही है और ऐसा लगता है, आपके आस-पास के लोग खुद को ज्यादा अहमियत देते हैं, इस बात का फायदा उठाते हुए कि आप हमेशा उनके लिए हाजिर रहते हैं।

जब उन्हें सांस लेनी होती है, तो आप उन्हें हवा देते हैं; जब वे चलना चाहते हैं, तो आप उनके पैरों तले जमीन पर लेट जाते हैं।

  • असहायता की यह भावना केवल आपकी दिमागी हो सकती है, या सच्चाई भी हो सकती है। इसलिए आपको यह भी सीखना होगा कि इनसे  कैसे निपटें और अपनी सीमायें कैसे तय करें। क्योंकि खुद को अहम  और मूल्यवान महसूस न करना सीधे-सीधे डिप्रेशन की वजह बन सकता है।

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5. मनोवैज्ञानिक लक्षण (Psychosomatic symptoms)

अपने लिए वक्त न होना, सोचने, आराम करने और खुद से बातें करके अपनी प्राथमिकताओं को जानने, अपने द्वारा किए जाने वाले बदलावों के बारे में सोचने के लिए वक्त नहीं होना – आपके दिमाग में उथल-पुथल की वजह बन सकता है।

इससे पैदा होने वाली समस्याएं:

  • टैकीकार्डिया (Tachycardia)
  • बहुत ज्यादा थकान
  • सिरदर्द
  • कमजोर पाचन
  • अनिद्रा

खुद को ज्यादा समय देने की शुरुआत कैसे करें

छुट्टियां लेना बहुत अच्छा नहीं है। खुश होने के लिये आपको शुक्रवार या छुट्टियों के आने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। आपका सबसे बेहतरीन पल अभी इसी वक्त है

अपने लिए वक्त निकलना हेल्थ में इन्वेस्ट करने जैसा है। यह जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। ठीक वैसे ही जैसे हर दिन खाना खाना और कपड़े पहनना है। तो दिन में एक या दो घंटे खास-तौर पर अपने लिए अलग से निकालें।

  • यहाँ पर, हो सके तो, आपके द्वारा खुद के लिये दिया गया यह समय ऊंची गुणवत्ता वाला (quality time) होना चाहिए।
  • कुछ लोग मेडिटेशन करते हैं, कुछ योग करते हैं और कुछ बस एक खिड़की के सामने बैठकर लंबी-लंबी साँसे छोड़ते हैं, जिससे उन्हें गहरी शांति मिलती है।
  • ये आपका वह समय है जो आपको अपनी जरूरतों से जुड़ने के लिए चाहिए। यह समय है यह सोचने का कि आप अपनी जिंदगी में क्या चाहते हैं और क्या नहीं चाहते हैं।
  • धीरे-धीरे, आप अपनी जरूरतों को समझते हुये फैसले लेना शुरू कर देंगे। क्योंकि जिंदगी में खुश रहने के लिए जरूरी है कि आप फैसले लेने और निडरता से आगे बढ़ने के काबिल बनें।

ताकत आपके हाथों में ही है।

  • Glise, K., Ahlborg, G., Jr, & Jonsdottir, I. H. (2014). Prevalence and course of somatic symptoms in patients with stress-related exhaustion: does sex or age matter. BMC Psychiatry14, 118. https://doi.org/10.1186/1471-244X-14-118
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  • Wiegner, L., Hange, D., Björkelund, C., & Ahlborg, G., Jr (2015). Prevalence of perceived stress and associations to symptoms of exhaustion, depression and anxiety in a working age population seeking primary care–an observational study. BMC Family Practice16, 38. https://doi.org/10.1186/s12875-015-0252-7