स्ट्रेस दूर करने के लिए जापानी तरीका

17 सितम्बर, 2018
सीमित मालिश के साथ आप अलग-अलग रिलैक्सेशन तकनीकों, अभ्यासों, और स्ट्रेचेज का प्रयोग भी कर सकते हैं जो तनाव कम करेेंगे और स्वस्थ होने में आपकी सहायता करेंगे।

इससे कोई भी इन्कार नहीं कर सकता कि स्ट्रेस इस सदी का अभिशाप है जिसके आपके स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
जापान में, उन्होंने एक क्रांतिकारी तरीके की सृष्टि की है जो थकावट, घबराहट और चिंता से आपको मिनटों में छुटकारा दिलाने का वादा करता है।

जानना चाहते हैं कि यह क्या है? अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़िए।

स्ट्रेस दूर करने के लिए जापानी तरीका

क्लांति और थकावट जब आपके दैनिक कर्तव्यों से जुड़ते हैं तब यह आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। ऐसा लगेगा कि हमेशा स्ट्रेस, स्वास्थ्य और शांति से अधिक सामान्य है।

जब भी काम पर और घर पर चीजें आपको ज्यादा स्ट्रेस दे रही हैं, हम सलाह देते हैं कि आप रिलैक्स करने के लिए यह दिलचस्प पूर्वी तकनीक अजमाइए।

पश्चिम में, हम बिरले ही जानते हैं कि हमारे शरीर के प्रत्येक अंग में कुछ शक्तियाँ होती हैं, विशेष रूप से उंगलियोँ में। प्रत्येक उंगली एक अलग मनोभाव या भावना से जुड़ी है।

सिद्धांत यह है कि किसी विशेष उंगली पर दबाव देने पर या मालिश करने पर आप किसी विशेष पीड़ा को कम करेंगे।

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यदि आप अपनी हथेलियोँ को एक-दूसरे के आगे रखें और कुछ सेकंडों के लिए उन्हें एक साथ दबाएँ, तब आप अपने जीवन से कुछ नकारात्मकता दूर कर सकते हैं (जिनमें कुछ व्याधियाँ और रोग सम्मिलित हैं जो जहरीले मनोभावों के परिणाम हैं)।

यह कैसे काम करता है इसे बेहतर समझने के लिए, पहले आपके लिए प्रत्येक उंगली की शक्तियों को जानना जरूरी है।

  • अंगूठा: चिंताएँ, स्नायु, और स्ट्रेस।
  • तर्जनी उंगली: डर।
  • बीच की उंगली: क्रोध और रोष।
  • अनामिका उंगली: अवसाद, उदासी, और अनिश्चयता।
  • छोटी उंगली: निराशावाद, ऊर्जा का अभाव, और चिंता।

इस तकनीक की “वैज्ञानिक” व्याख्या इस तथ्य पर आधारित है कि आपके हाथ आपके दिमाग से संयोजित हैं – विशेष रूप से वह क्षेत्र जो आपके मनोभावों के लिए उत्तरदायी है।

यह कार्यवाही करने के लिए आपको अपने बाएँ हाथ की मुट्ठी बना कर और उसके गिर्द अपने दाएँ हाथ की उंगलियाँ लपेटनी पड़ेंगी।

तब अपनी व्याधि या समस्या से संबंधित उंगली पर दबाव डालिए। यदि यह स्ट्रेस है, तब आप अंँगूठे को ले रहे हैं। दबाव 30 सेकंड तक बनाए रखें, दूसरे 30 में विश्राम दें, और फिर शुरु करें, जितना अक्सर आप चाहें।

अपनी उंगलियोँ पर दबाव डालें और अपने जीवन में सुधार लाएँ

एक दूसरा उपाय, जिससे लोग अपनी उंगलियोँ का उपयोग करते हुए अपनी भावनाओं द्वारा कार्य करते हैं, एक जापानी कला पर आधारित है और “जिन शिन इयुत्सू” के रूप में ज्ञात है, अनुवाद करने पर इसका मतलब “प्रसन्नता की कला” के समान कुछ होता है।

आप अपने हाथ पर उन बिंदुओंँ की मालिश करते हैं जैसी चीजें होती हैं। अंगूठे चिंताओ के लिए हैं, तर्जनी उंगलियाँ चिंताओँ के लिए हैं, आपकी बीच की उंगलियाँ क्रोध के लिए हैं, अनामिका उंगलियाँ उदासी के लिए हैं और छोटी उंगलियाँ निराशावाद के लिए हैं।

एक हाथ खोलिए और उस उंगली पर ज्यादा ध्यान दीजिए जो आपकी परिस्थिति के साथ नजदीकी से संबंधित है।

अपने दूसरे हाथ के अंगूठे और तर्जनी का प्रयोग करते हुए अपनी दोनों उंगलियोँ को कुछ मिनटों के लिए दबाइए, या आप एक “बंधी” मुट्ठी के रूप में उस विशेष उंगली को बंद कर सकते हैं।

यह तकनीकें, केवल स्ट्रेस या भावनात्मक समस्याओँ के दौरान ही आपकी सहायता नहीं करतीं, बल्कि शारीरिक व्याधियों से राहत भी दिला सकती हैं। आइए देखते हैं कि प्रत्येक उंगली किसके लिए है:

* अंगूठा: पेट और स्प्लीन, सिरदर्द, पेट की समस्याएँ, और चमड़ी में गड़बड़ी।
* तर्जनी उंगली: आपकी किडनी और ब्लैडर, मांसपेशी की पीड़ा, और पाचनसंबंधी समस्याएँ।
* बीच की उंगली: गॉलब्लैडर और लिवर, मासिकधर्म की पीड़ा, दृष्टि के साथ समस्याएँ, रक्त-संचालन समस्याएँ, और थकावट।
* अनामिका उंगली: कोलन और फेफड़े, पाचन या सांस प्रणाली की समस्याएँ (विशेष रूप से दमा)।
* छोटी उंगली: हृदय और अंतड़ियाँ, हड्डी की समस्याएँ।

स्ट्रेस से मुकाबला करने के लिए पूर्वी तकनीकें

लगता है कि एशिया से बहुत सी प्रभावी तकनीकें हैं जिनका लक्ष्य लोगों को शांतचित्तता और प्रसन्नचित्तता की “जेन” स्थिति में लाना है। यही कारण है कि अधिकांश अनुशंसित व्यायाम और तरीके संसार के इसी भाग से आते हैं।

उंगली दबाने की तकनीक के अलावा, यदि आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस में हैं, तब हम निम्नलिखित में से चुनने की सलाह देते हैं:

योग

इस अभ्यास और जीवन-दर्शन का पहला 3000 वर्ष पुराना रिकॉर्ड उन रंगचित्रों पर है जो भारत में पाए गए हैं। ध्यान द्वारा शरीर और आत्मा को जोड़ने की इसकी क्षमता के कारण योग का अभिनंदन किया जाता है।

पूरे इतिहास के दौरान, योग की विभिन्न शाखाएँ विकसित की गई हैं परंतु उन सभी का उद्देश्य एक ही है:आपके शारीरिक और आध्यात्मिक अस्तित्वों में संतुलन प्राप्त करने में आपकी सहायता करना।

योग अभ्यास करने के बहुत से लाभों में सम्मिलित हैं: वजन कम करने के लिए प्रोत्साहन, पीड़ा से मुकाबला (विशेष रूप से पीठ-दर्द), मांसपेशियों को मजबूत बनाना, लचीलेपन में सुधार, और अवसाद तथा स्ट्रेस से मुकाबला। प्रत्येक व्यक्ति के अनुसार, विभिन्न आसनों से रिलैक्सेशन प्राप्त किया जाता है।

योग के बहुत से लाभों में सम्मिलित हैं: वजन कम होना, पीड़ा से मुकाबला (विशेष रूप से पीठ-दर्द), मांसपेशियों को मजबूत बनाना, लचीलापन उपलब्ध करना, और अवसाद तथा स्ट्रेस से मुकाबला। प्रत्येक व्यक्ति के अनुसार, विभिन्न आसनों से रिलैक्सेशन प्राप्त किया जाता है।

फॉरेस्ट बाथ

“शिनरिन योकू” नामक इस तकनीक का अभ्यास करने के लिए आपको किसी पार्क या वन से होकर नंगे पैर टहलना पड़ेगा।

अवधारणा यह है कि प्रकृति के बीच टहलना इसे आपकी पाँचों इंद्रियों से होकर आपके शरीर में प्रवेश करने की अनुमति देता है। यह आपकी मनोदशा, सृजनात्मकता के स्तर और स्वास्थ्य में सुधार करता है।

टहलते हुए, चाय या फलों के रस का आनंद लीजिए और केवल उस पर ध्यान दीजिए जो आपको घेरे हुए है। अपने साथ सेलफोन या समस्याएँ लाने की अनुमति नहींं है।

अध्ययनों के अनुसार, यह आपके प्रतिरक्षी तंत्र और मानसिक प्रक्रिया में सुधार लाते हुए रक्त-चाप, कोर्टिसॉल स्तर (स्ट्रेस हॉर्मोन) और चिंता कम करता है।

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ताइ ची

यह पूर्वी अनुशासन, धीमी परंतु जोरदार गतिविधियोँ द्वारा शरीर और मन के बीच संतुलन पाने की खोज करता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपने इससे पहले पार्क में कुछ लोगों को इसका अभ्यास करते देखा है – यह मज़ेदार है और सभी आयुवर्ग के व्यक्ति इसमें भाग ले सकते हैं।

ताइ ची मार्शल आर्ट्स का एक रूप है, परंतु यह आपको रिलैक्स करने के लिए एक सक्रियता भी है।
इसके अनेक लाभों मेे स्ट्रेस कम करना तथा शारीरिक शक्ति, लचीलापन और घनात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना सम्मिलित हैं।

शियात्सू

इस अभ्यास का मूल जापानी है और यह कंधों तथा पीठ की अकड़न जैसी, स्ट्रेस से पैदा होने वाली सभी तरह की व्याधियों को कम करने में सहायता करता है।

आप शरीर के कई विशेष बिंदुओं पर दबाव डालते हैं, उनमें से प्रत्येक केंद्रीय नर्वस-सिस्टम और शरीर के मार्मिक अंगों से संबंधित है।

शियात्सू स्ट्रेस को कम करते हुए आपको ऊर्जा दे सकता है, बल्कि विषैले तत्त्वों को कम करता है, रक्त-चाप को नियमित करता है, और चिंता तथा नींद की गड़बड़ियों को भी कम करता है।

दो-इन

इस अभ्यास का आविष्कार चीन में किया गया था और इसका लक्ष्य है बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना। यह सांस के व्यायामों की एक श्रृंखला पर आधारित है जो घबराहट कम करते हैं, बेहतर संतुलन को बढ़ावा देते हैं और शांति का भाव उपलब्ध करने में आपकी सहायता करते हैं।

इनका उपयोग आपके काम की जगह पर स्ट्रेस से भरी अवधियों में भी किया जा सकता है। इसके लाभों में सम्मिलित हैं, यह जगरूकता से सांस लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे आपको ध्यान करने में, आपकी मांसपेशियोँ को मजबूत बनाने में, अच्छी नींद वापस लाने में तथा तनाव और स्ट्रेस कम करने में सहायता मिलती है।

आइकीडो

यह भी एक मार्शल आर्ट्स है, परंतु कराटे और ताइक्वौनदो कि विपरीत यह हिंसा को अस्वीकार करते हुए मानसिक शांति और दूसरों को सम्मान दिए जाने को प्रोत्साहित करता है।

इसकी गतिविधियाँ औसतन वृत्ताकार हैं और यह स्ट्रेस को कम करते हुए तथा आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाते हुए आपके दिमाग को संतुलित करते हुए ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ा सकता है। शब्द “आइकीडो” का अर्थ है, ऊर्जा और सामंजस्य का उपाय।

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