अलसी (Flaxseed) का औषधीय पेय : त्वचा की सेहत सुधारने का चमत्कारी ड्रिंक

अपनी त्वचा की सेहत सुधारने के लिए अलसी से बने इस स्वादिष्ट और पोषक औषधीय ड्रिंक को एक बार आज़माकर तो देखें!
अलसी (Flaxseed) का औषधीय पेय : त्वचा की सेहत सुधारने का चमत्कारी ड्रिंक

आखिरी अपडेट: 26 जून, 2019

सेल्युलाईट एक ऐसी कॉस्मेटिक समस्या है, जिसमें त्वचा की सतह पर गड्ढेदार-सी छोटी-छोटी फैट की गांठें पड़ने लगती हैं। यह समस्या महिलाओं में आम है। कुछ वैज्ञानिकों का यहाँ तक अनुमान है कि अपनी प्यूबर्टी के बाद 90% से ज़्यादा औरतों को इस अवस्था से गुज़रना पड़ता है। अलसी (Flaxseed) से बनी जिस औषधीय ड्रिंक के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, वह आपकी त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।

सेल्युलाईट का नाता हमारे शरीर की अतिरिक्त चर्बी से होता है। लेकिन उसका संबंध हॉर्मोनल असंतुलन व लिम्फेटिक प्रणाली की कुछ समस्याओं से भी हो सकता है।

हालांकि आपकी सेहत के लिए यह कोई गंभीर खतरा नहीं होता, फिर भी कई लोग उससे छुटकारा पाने के उपायों की खोज में रहते हैं। आख़िर इससे उनकी त्वचा की खूबसूरती पर असर जो पड़ता है!

खुशकिस्मती से, संतुलित आहार खाकर, कसरत करके व कुछ प्राकृतिक नुस्ख़े आज़माकर आप अपने शरीर में सेल्युलाईट का बनना कम कर सकती हैं

आज के इस लेख में आपकी त्वचा की सेहत सुधारने के लिए हम आपको अलसी के बीज से बने एक ड्रिंक को पीने का सुझाव देना चाहेंगे।

इसे आज ही आज़माकर देखें!

सेल्युलाईट का इलाज करने के लिए अलसी से बना औषधीय ड्रिंक

अलसी के बीज से बनी औषधीय ड्रिंक

अपनी मूत्रवर्धक खूबियों (diuretic properties) के चलते अलसी से बना यह औषधीय पेय वज़न कम करने के लिए एक जाने-माने सप्लीमेंट में तब्दील हो चुका है।

अलसी विटामिन, मिनरल और एसेंशियल फैटी एसिड का सेहतमंद स्रोत होती है। उन्हें सोख लेने से हमारी त्वचा को कई फायदे होते हैं।

डाइटरी फाइबर की अपनी ऊँची मात्रा से यह चर्बी के पाचन की शारीरिक प्रक्रिया में सुधार लाकर शरीर से मल को निकाल बाहर करने में मदद करती है। ऐसे में, हमारी लिम्फेटिक प्रणाली ज़्यादा कारगर रूप से काम कर पाती है।

अलसी के बीज वाला औषधीय पेय

और तो और, ओमेगा-3 फैटी एसिड के सूजनरोधी (anti-inflammatory) प्रभाव से हमारे शरीर के टिशू में फ्लूइड रिटेंशन घटता है।

अलसी के बीज में विटामिन B और फोलिक एसिड होते हैं। ये दोनों ही तत्व हमारी त्वचा को मज़बूत, जवान और हाइड्रेटेड रखने के लिए ज़रूरी हैं।

साथ ही, अपने मूत्रवर्धक प्रभाव की बदौलत यह हमारे शरीर में बनने वाली अत्यधिक चर्बी से पैदा होने वाले नोड्यूल्स को कम करने में मदद करता है

अलसी से बने इस औषधीय ड्रिंक को कैसे बनाएं?

अलसी के बीज वाली औषधीय ड्रिंक को बनाने की विधि

अलसी आधारित इस प्राकृतिक नुस्ख़े को बनाना बहुत आसान व किफायती है। इसे बनाने के लिए इन बीजों के अलावा विशेष कुछ नहीं चाहिए।

इस अवस्था में किसी दूसरे इलाज से अलग इस नुस्ख़े को आप सीधे प्रभावित जगह पर नहीं लगाते। बल्कि आप वेस्ट्स यानी मल आदि को शरीर से बाहर निकालने, उसे बढ़ावा देने के लिए इसका सेवन करते हैं

यह ठीक है, कि यह ड्रिंक कोई ऐसा चमत्कारी नुस्खा नहीं है जो आपकी त्वचा संबंधी समस्याओं को रातोंरात गायब कर देगा। फिर भी यह आहार, एक्सरसाइज और दूसरे ट्रीटमेंट का बढ़िया पूरक है।
साथ ही, इस नुस्खे का एक हल्का एल्केलाइन और सूजनरोधी प्रभाव भी होता है। इसे पीकर आपके हाज़मे और इम्यून सिस्टम में सुधार आ सकता है।

सामग्री

  • पांच चम्मच अलसी के बीज (50 ग्राम)
  • एक लीटर पानी

बनाने की विधि

  • एक लीटर पानी को उबलने के लिए रख दें। जब वह उबलने लगे तो उसमें अलसी के बीज डाल दें।
  • मिश्रण को दो मिनट तक कम आंच पर रखें। दो मिनट बाद उसे कांच के किसी जार में डाल दें।
  • मिश्रण के ठंडे हो जाने का इंतज़ार कर उसे पीना शुरू करें।
  • अगर एक रात पहले उस मिश्रण को बनाकर उसे ठंडा होने के लिए आप छोड़ दें तो वह और भी कारगर हो जाएगा।
  • अगले दिन आपके सामने अलसी की सभी खूबियों से युक्त एक गाढ़ा या जेली जैसा तरल होगा।

सेवन की विधि

  • इस ड्रिंक का आधा-आधा गिलास दिन में 3-4 बार पिएं।
  • ज़्यादा खाने से बचने के लिए हर बार खाने से आधे घंटे पहले इसे पिएं।
  • अगर खाने के बाद भी आपको भूख लगती है तो उस पर काबू पाने के लिए इसमें से एक-आधा कप और पी सकते हैं।
  • इस नुस्खे का भरपूर लाभ उठाने के लिए आपको इसे 10 दिन तक लगातार पीना चाहिए और फिर दुबारा शुरू करने से पहले एक हफ़्ते की ब्रेक लेनी चाहिए।

निषेध

  • अलसी की यह औषधीय ड्रिंक कुछ दवाओं के शरीर द्वारा सोखे जाने में बाधा उत्पन्न कर सकती है। अगर आपका किसी तरह का कोई इलाज चल रहा है तो इसके सेवन से पहले अपने डॉक्टर की राय ज़रूर ले लें।
  • कोलाइटिस (colitis) अर्थात आँतों में रूकावट से पीड़ित लोगों को इस नुस्खे से परहेज़ करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से उनकी हालत बदतर हो सकती है।
  • फाइटोस्टेरॉल (phytosterol) की अपनी मात्रा के चलते एंडोमेट्रियोसिस से ग्रस्त महिलाओं को इससे परहेज़ करना चाहिए।
  • उपर्युक्त मात्रा से ज़्यादा सेवन न करें।

इसे आज़माने के लिए क्या आप तैयार हैं? अब जब इसे अपने घर पर बनाने की विधि के बारे में आप जान ही चुके हैं, तो इसे अपने आहार में शामिल कर इसकी खूबियों का फायदा उठाने में देरी कैसी!

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