भावनात्मक थकान: खोयी एनर्जी को वापस कैसे पायें

अगस्त 17, 2018
अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करना और आसपास जो भी चल रहा है उसे चलने देना हमारी सबकुछ अपने नियंत्रण में रखने की चाहत से होने वाली भावनात्मक थकान से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका हो सकता है।

भावनात्मक थकान या इमोशनल इग्ज़ॉशन (emotional exhaustion) का सामना करना बहुत ही आम बात है, और इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं या आप क्या करते हैं। इस थकान की वजह यह है कि हमारे पास सोचने-समझने और जिंदगी में अनुभवों को गढ़ने की क्षमता होती है।

जब हम ध्यान देते हैं और उनके बारे में सजग होते हैं, तो हर तजुर्बा हमें कुछ-न-कुछ महसूस कराता है। अगर हर चीज आपके लिये नेगेटिव एनर्जी लेकर आ रही है, तो हो सकता है, आपको खुश और स्वस्थ रहने में समस्याएं हो रही हैं।

अगर आप ऐसे किसी स्थिति में हैं, तो आगे पढ़ें कि खोयी एनर्जी को फिर से वापस पाने के लिए इमोशनल इग्ज़ॉशन का सामना कैसे करें।

1. अपनी भावनाओं के प्रति खुद को जागरूक रखें

भावनात्मक थकान: भावनाओं पर नियंत्रण

हम सब भावुक प्राणी हैं, और पूरे दिन कई नेगेटिव और पॉजिटिव इमोशन का अनुभव करते हैं। वे हमें आगे विकसित होने या पीछे रोक रख सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उनसे किस तरह निपटते हैं।

आदर्श तो यह है कि आप सीख लें कि खुद को अच्छा और संतुलित बनाये रखने के लिए उन्हें कैसे गुजरने देना है।

अपनी भावनाओं पर काबू रखने के लिए, सबसे पहले आपको उनके बारे में जानना चाहिए। अपनी राय या निर्णय बताने से पहले गहरी साँस लेना और अपनी भावनाओं को समझना सीखें।

यह छोटी-सी एक्सरसाइज ऑक्सीजन को आपके शरीर के अन्दर जाने और थकान को मिटाने में मदद करती है। अगर आप लगातार इसकी प्रैक्टिस करते हैं, तो आप अपने दिमाग, शरीर और आत्मा के बीच अच्छा तालमेल बना सकेंगे।

सबसे अच्छी बात तो यह है कि लोगों से आपके आपसी रिश्तों को भी इसका फायदा मिलेगा।

2. आप जैसे भी हैं खुद से प्यार करें

भावनात्मक थकान: खुद से प्यार करें

भावनात्मक थकान से निपटने का एक और तरीका है कि आप खुद से प्यार करना सीखें। यह भावना सच्ची होनी चाहिए, लेकिन पूरी भी होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में, आपको उस इंसान से प्यार करना होगा जो आप अभी हैं, भले ही ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं या बदलना चाहते हैं।

लोगों को नेगेटिव सोच के साथ जिंदगी गुजारते हुये और खुद की आलोचना करते हुये देखना आम बात है। ऐसा इसलिये है कि वे जैसे दिखते हैं या जो वे महसूस करते हैं, उसे एक कमी मनाते हैं। अक्सर ये देखा जाता है कि वे अपनी पूरी एनर्जी को बर्बाद कर देते हैं बिना यह जाने कि खुश कैसे रहते हैं।

आपका दिमाग हमेशा शोर करने और चीजों के पीछे की वजह ढूंढने में व्यस्त रहता है। फिर भी, यह जरूरी है कि, इन सबसे पहले, आप खुद से प्यार करें और वह भी बिना किसी शर्त के

अगर आपको अतीत में अपने साथ हुई किसी हिंसा या नेगेटिव मैसेज की वजह से खुद को स्वीकार करने में दिक्कत आती है, तो शायद आपको थेरेपी लेने के बारे में सोचना चाहिए। इसके लिये कई अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं जो आपको बहुत शानदार नतीजे दे सकते हैं।

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3. अपने आप से जुड़ें (Connect With Yourself)

भावनात्मक थकान: खुद से जुड़ें

भावनात्मक थकान को दूर करने का एक और तरीका यह है अपने काम के बारे में सोचना और अपनी दक्षता और टैलेंट को निखारना, जो आपको खुद के साथ जोड़े रखता है।

खुद का विश्लेषण करें। इस बारे में जागरूक रहें कि आप क्या सोचत हैं, वे विचार आपको कैसा महसूस करवाते हैं या वे क्रियाएं जो आपके वैसा महसूस करने की कारण हैं। जब आप खुद पर ध्यान देते हैं, तभी आप अपने गुणों और अपनी ताकत का सही आकलन कर पाते हैं।

  • उन चीजों को खोजें या याद रखें जिनका आप शौक रखते हैं और जिन चीजें के साथ आप अपने दिन की शुरुआत करना चाहते हैं।
  • इससे आपको समझने में मदद मिलती है कि आपको खुद को विकसित करने, आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों तक पहुंचने, एंग्जायटी, डर और आत्मविश्वास की कमी को पीछे छोड़ने के लिए अभी और क्या-क्या चाहिए।

अगर अभी तक आप चीजों को केवल इसलिये कर रहे थे कि दूसरे लोग आपसे उम्मीद रखते हैं, तो यह अच्छा आईडिया होगा कि आप अपनी दोस्ती पर करीब से नज़र डालें और उन लोगों को बाहर कर दें जिनसे आपको कोई भी फायदा नहीं है। याद रखें, आपकी जिंदगी का जरूरी हिस्सा, वह इकलौता आदमी जिसे आपको संतुष्ट करना है, वह आप खुद हैं।

4. हमेशा आभारी रहें (Be grateful)

भावनात्मक थकान: आभारी रहें

आपके पास जो नहीं है, जो आप चाहते हैं या जो आपके पास है, लेकिन आपको पसंद नहीं है, उसके बारे में हर समय शिकायतें करते रहना भी इमोशनल इग्ज़ॉशन के बड़ी वजहों में से एक है।

अगर आप अपनी एनर्जी वापस पाना चाहते हैं, तो शिकायतों को आभार में बदल दें। हालाँकि, यह एक बेकार-सी फिलॉसफी लग सकती है, लेकिन हकीकत यही है कि आपके नजरिये में होने वाले बदलाव आपकी भावनाओं को प्रभावित करते हैं।

यहां तक कि अगर अक्सर आपको अपनी जिंदगी ख़राब लगती है, तो कुछ अच्छा पाना हमेशा संभव है।

वह समय कौन-सा था जब आखिरी बार आपने अपने पार्टनर से कहा था, आप उन्हें अच्छा मानते हैं और साथ रहने के लिए उनके आभारी हैं? क्या हाल ही में आपके माता-पिता ने आपसे “थैंक यू” शब्द सुना है? ये चीजें आपको फालतू लग सकती हैं, लेकिन ये बहुत मायने रखती हैं।

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5. कोई लक्ष्य ढूँढ़ें

भावनात्मक थकान: एक लक्ष्य ढूढें

भावनात्मक थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, प्रवाह के साथ बहना और अपने शौक को पूरा ना कर पाना। अगर आप इस बिंदु को समझ चुके हैं, तो याद रखें, आप हर वह काम कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं।

अतीत के बारे में या जिसमें आप सफल नहीं हुए उसके बारे में सोचते रहना आपको बुरी तरह थका देता है, आपकी खुशियों को ख़त्म कर देता है। बजाय इसके, आप एक लक्ष्य ढूंढें और अपनी एनर्जी पर ध्यान केन्द्रित करें। बस ये जरूर सुनिश्चित कर लें कि यह कोई पॉजिटिव बात हो।

इसके लिए आपको अपनी प्रतिभा को खोजने और उससे जुड़ी दूसरी चीजों को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है जो आपको उस जगह पर ले जायेंगी जहां आप पहुंचना चाहते हैं। हो सकता है आपको डर लगे, असुरक्षा महसूस हो या आप उलझन में पड़ जायें। लेकिन अगर आपने इन पर जीत हासिल कर ली, तो आप खुशहाली तक पहुंच जाएंगे।

6. सबकुछ अपने काबू में रखने की कोशिश न करें

भावनात्मक थकान: हर चीज काबू में

इमोशनल इग्ज़ॉशन की सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक यह है कि यह किसी भी समय वापस आ सकता है … भले ही आप अपनी कमियों को दूर कर दें या कोई लक्ष्य बना लें। यह उन लोगों के साथ अक्सर होता है जिन्हें लगता है कि हर चीज हमेशा उनके नियंत्रण में होनी चाहिये, दिन का एक-एक मिनट भी।

बदकिस्मती से, जिंदगी ऐसी चीज है जिसे आप कभी भी पूरी तरह से काबू में नहीं कर पाएंगे। जब आप इसे समझने लगते हैं और परिस्थितियों को आने और जाने देना सीख जाते हैं, तब आप ज्यादा खुश महसूस करेंगे।

हर चीज को काबू में रखने की इच्छा से दूरी रखना इमोशनल इग्ज़ॉशन से मुकाबला करने का एक और तरीका है। अगर ऐसी कोई स्थिति है जो आपके लिये बहुत ज्यादा दिक्कतें पैदा कर रही है, तो इसका सामना करने के लिए एक एक्शन प्लान बनाएं।

अपनी एनर्जी को वापस पाने के लिए आप और कौन-कौन से सुझाव देना चाहेंगे?

  • Barnes, C. M., & Van Dyne, L. (2009). I’m tired’: Differential effects of physical and emotional fatigue on workload management strategies. Human Relations, 62(1), 59-92.
  • Ramírez, M. T. G., & Hernández, R. L. (2007). Escala de cansancio emocional (ECE) para estudiantes universitarios: propiedades psicométricas en una muestra de México. Anales de psicología, 23(2), 253-257.
  • Teresa González Ramárez, M., Landero Hernández, R., & Tapia Vargas, A. (2007). Percepción de salud, cansancio emocional y síntomas psicosomáticos en estudiantes universitarios. Ansiedad y estrés, 13(1).