आपकी कौन सी भावनायें आपके किन अंगों से जुड़ी हैं यह जानिये

जून 3, 2018
हमेशा ये सलाह दी जाती है कि अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अपनी भावनाओं को काबू में रखें। आप मानें या न मानें, आपके शरीर के आंतरिक अंग आपकी भावनात्मक स्थिति से प्रभावित होते हैं।

क्या आपने कभी सोचा कि कैसे आपकी भावनात्मक स्थिति आपके शरीर के अंगों पर असर डाल सकती है? कैसे आपकी भावनायें आपके शरीर पर सीधा असर डालती हैं?

पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति के अनुसार, हमारा शरीर प्रत्येक उद्दीपन यानी स्टिमुलस के लिए अपने आप ही प्रतिक्रिया करता है – चाहे बाहरी हो या आंतरिक – सभी प्रकार की प्रतिक्रियाएं देता है।

यह बात तो साफ़ है कि हमारे शरीर का निर्माण केवल जीवित रहने के लिए मेटाबोलिक क्रिया करके भोजन को ऊर्जा में बदलने के लिए नहीं हुआ है।

हकीकत में इसे हर उन स्टिमुलस के लिये काम करना पड़ता है जो उसे बाहर से मिलते हैं। उस समय उसे पॉजिटिव या नेगेटिव प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। ये प्रतिक्रियायें शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करती हैं।

शरीर को प्राप्त होने वाली इन शारीरिक उत्तेजनाओं के अलावा नर्वस सिस्टम से भी हम इमोशन का अनुभव करते हैं। भले ही वे सीधा असर नहीं करते, फिर भी वे प्रतिक्रियाएं देते ही हैं जो हमारे कुछ अंगों को सक्रिय या निष्क्रिय करने का काम करते हैं।

हालाँकि, वैसे तो यह एक स्वस्थ क्रिया है, लेकिन, जब हमारी भावनायें ज्यादा गहरी, नकारात्मक और लम्बे समय तक बनी रहती हैं, तब ये हमारे अंगों पर बुरा असर डाल सकती हैं और उन्हें कुछ विशेष स्थितियों में ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं।

इस लेख में, हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे।

शरीर के अंग और भावनायें

शरीर के अंग और भावनायें जो उन पर असर डालती हैं

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार, किसी भी अंग में होने वाली समस्याओं का सीधा सम्बन्ध हमारी भावनाओं से होता है।

जब शरीर का कोई अंग प्रभावित होता है, तो उससे पूरे शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसीलिए यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि हम इसके पीछे के भावनात्मक कारणों का पता लगायें ताकि इसे ठीक करने के लिए कोई कदम उठाया जा सके।

अगर हम अपनी भावनात्मक स्थिति को बदलने और अपने भीतर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं, तो इसके सही मायने क्या हैं।

नीचे हम अपने शरीर के अंगों और भावनाओं के सम्बंध के बारे में जानेंगे:

1. दिल और छोटी आंत: ख़ुशी

भावनायें; खुशी

प्राचीन चीनी चिकित्सा पद्धति के अनुसार, ख़ुशी का अहसास इन दोनों अंगो से मजबूती से जुड़ा हुआ है।

दिल रक्त संचार को बनाये रखने और खून को ले जाने वाली नसों को नियंत्रित करने का काम करता है। इसी तरह, छोटी आंत का काम है भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में आये हुये पोषक तत्वों और खनिजों को अवशोषित करना

खुशी का अहसास इन अंगों और उनके काम को बेहतर बना सकता है, लेकिन इसके ज्यादा हो जाने पर ये बढ़ सकती हैं:

  • घबराहट
  • धड़कन का तेज हो जाना
  • अनिद्रा
  • एकाग्रता की कमी

जिन लोगों के इन अंगों में समस्या होती है वे संवेदनशील, मिलनसार और बातूनी होते हैं। वे अक्सर खुद को अपनी भावनाओं में डूबा हुआ पाते हैं और अपनी भावनाओं को काबू में रखने में कठिनाई महसूस करते हैं।

उत्साह, घबराहट, उत्तेजना और भावनाओं की अधिकता को काबू करना इन अंगों को स्वस्थ रखने में मदद करेगा। आखिरकार, उनका स्वस्थ होना हमारे पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

2. लीवर और पित्ताशय: गुस्सा और खीझ

क्रोध और खीझ

गुस्सा और खीझ, दूसरी भावनाओं की तरह ही इन दो अंगों से जुड़े हुए हैं।

आपका लीवर खून को जमा करने और ऊर्जा के प्रवाह को बनाये रखने का काम करता है। इसी तरह, पित्ताशय थैली पित्तरस को इकट्ठा करने और निकालने का काम करती है।

यदि आप उन लोगों में से हैं जिसके इन्ही खास अंगों में कोई समस्या है, तो हो सकता है कि आप एक क्रियाशील व्यक्ति हैं जो बहुत ज्यादा परेशानियों से घिरे रहते हैं। हो सकता हैं आप कभी-कभी उन पर आक्रामक प्रतिक्रिया भी देते हों।

गुस्सा और खीझ के अलावा, आप निराशा और घृणा की भावनाओं को पहचानकर उन्हें काबू करने पर ध्यान दें। साथ ही, ध्यान रखें कि स्वस्थ लीवर अच्छी और असीमित ऊर्जा पैदा करता है।

3. स्प्लीन और पेट: जुनून

ये विशेष अंग जुनून, उदासी और पुरानी यादों से जुड़े होते हैं।

पेट का काम है पोषक तत्वों का निर्माण करना। स्प्लीन या प्लीहा लिम्फैटिक सिस्टम का हिस्सा है। इसका काम इन्फेक्शन से लड़ता है और यह शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बनाए रखता है।

जो लोग इन अंगों से संबंधित परेशानियों से ग्रस्त हैं वे आमतौर पर शांत और शालीन होते हैं, लेकिन अक्सर कोई भी निर्णय लेने में इन्हें बहुत दिक्कत होती है।

4. फेफड़े और बड़ी आंत: उदासी

उदासी

ये दो अंग उदासी, निराशा और दु:ख की भावनाओं से बंधें हुए हैं।

फेफड़ों का मुख्य काम सांस को नियंत्रित करना है। बड़ी आंत का काम पाचन से पोषक तत्वों का अवशोषण और शरीर की इम्यून सिस्टम को बनाये रखना है।

यदि आप इन अंगों में परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आप एक स्वतंत्र और अत्यधिक अक्लमंद इंसान हैं जो आत्मकेन्द्रित होते हैं

बहुत ज्यादा चिंतन करने से आपके शरीर पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे कुछ लोगों को भूख की कमी, सीने में जकड़न और हल्की उदासी की अनुभूति भी हो सकती है।

5. किडनी और मूत्राशय: डर

भावनायें: डर

हमारी किडनियां डर और घबराहट की भावनाओं से जुड़ी हैं। इनका काम खून में मौजूद गन्दगी को हटाना है। इसी तरह मूत्राशय पेशाब को जमा करने और बाहर निकालने का काम करता है।

जो लोग कमर के निचले हिस्से में दर्द और कमजोरी, और भी कई अन्य लक्षणों से परेशान हैं, हो सकता है वे लोग अपने जीवन में अनिश्चितता से भरे दौर का अनुभव कर रहे हों।

इसके विपरीत, किडनी की ऊर्जा का अच्छा संतुलन बनाए रखने से आप अपनी क्षमताओं के आधार पर अपने आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं।

अब जब आप जान चुके हैं कि कौन सी भावनाएं आपके शरीर के कौन से अंगों पर असर डालती है, तो आप कोशिश करें सकारात्मक सोच बनाने की। यह आपके शरीर को स्वस्थ रहने में सक्षम बनायेगा।

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