मेरी पीढ़ी के खूबसूरत लफ्ज़, ‘प्लीज’ और ‘धन्यवाद’

जून 12, 2018
विनम्रता के एक सहज कार्य के अलावा भी प्लीज और धन्यवाद कहना, दूसरों के प्रति सम्मान दिखाने का एक तरीका है और इसका दूसरे व्यक्ति और आप, दोनों पर सकारात्मक प्रभाव होता है।

जिसकी जबान पर ‘प्लीज’ और ‘धन्यवाद’ जैसे शब्द हों, वह पीढ़ी सहज सौजन्यता से ऊपर उठना चाहती है। इस आदत का मतलब यह है कि हमें दूसरों को वैसा ही सम्मान देना चाहिए जैसा हम दूसरों से अपने लिए चाहते है।

ऐसे कई लोग हैं जो कहते हैं कि इनमें से कई अच्छी आदतें अब खत्म हो रही हैं।

शायद हमारी ज़िंदगी में “कृपया” कहने के लिए अब समय ही नहीं है या बच्चो को सबकुछ देने की हमारी इच्छा ख़त्म हो रही है।
हालांकि इसके आधार पर आम राय नहीं बनानी चाहिए कि आधुनिक समाज ने जख्मों को भरने वाली ऐसी आदतों को खो दिया है।

कृपया और धन्यवाद‘ जैसे शब्द निशुल्क हैं, उन्हें बोलने के लिए कुछ खर्च नहीं होता, फिर भी उनका  मूल्य बहुत है।

‘प्लीज’ और ‘धन्यवाद’: वे मूल्य जिन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ज़रूरी है

मजे की बात है, हममें से ज्यादातर लोग जानते हैं कि धन्यवाद को अलग-अलग भाषाओं में इन शब्दों के जरिये कहा जा सकता है: थैंक्स, धन्यवाद, ग्रैज़ि, मर्सी, डंके,  ओब्रिगैडो, इविगेरस्टो, स्पासिबा, अरिगाटो, शोक्रान आदि।

लेकिन जब हम अपने माता-पिता, पार्टनर, मित्रों या बच्चों के साथ होते हैं, तो अक्सर हम ‘कृपया’ और ‘धन्यवाद’ कहना भूल जाते हैं। क्योंकि हम यह सोचते हैं कि हम जिनसे प्यार करते है उन्हें ये औपचारिक शब्द बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है।

यह सही नहीं है। आप मानें या न मानें , ये शब्द सिर्फ अक्षरों की लड़ियाँ नहीं हैं, ये उनसे ज्यादा भी कुछ हैं।

हमारी भावनाओं के साथ उनका सीधा संबंध है, इस हद तक कि ये हमारी भाषा में ऐसी दो शक्तिशाली मुद्राएँ बन गए हैं जिनके बिना हमारा काम नहीं चल सकता है।

'प्लीज' और 'धन्यवाद'

कृतज्ञता में है जख्मों को भरने की ताकत

नियमित रूप से आभारी बने रहने से आपमें और आपके आसपास ध्यान देने योग्य बदलाव हो सकते हैं। हार्वर्ड गैजेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इससे हम निम्न अनुभव पा सकते हैं:

  • धन्यवाद कहना कृतज्ञता का भाव है और जिसके सामने यह प्रकट किया जाता है उसमें यह सुरक्षा और भलाई की भावना भरता है।
  • दूसरे लोग अपने कार्यों के लिए धन्यवाद के लफ्ज सुनकर समर्थन पाते हैं और लाभन्वित महसूस करते हैं। बदले में यह आभार व्यक्त करने वाले व्यक्ति को भी प्रभावित करता है।
  •  नियमित रूप से आभार के शब्द सुनने वाले व्यक्ति में आत्म-सम्मान बढ़ता है और यह उसमें “कृतज्ञता के असर” को प्रेरित करता है।

उदाहरण के लिए, कृतज्ञता के मूल्यों से प्रशिक्षित घर या स्कूल के बच्चे इसे कॉलेज तक ले जायेंगे और अपने दोस्तों और प्रोफेसरों के बीच यह अभ्यास बनाए रखेंगे।

समाज में ‘कृपया’ कहने की सौजन्यता की अहमियत

‘कृपया’ एक सरल शब्द है, जिसे आप ‘धन्यवाद’ की तरह अक्सर नहीं सुनते हैं। इसका कारण यह है कि कोई दूसरों के अनुरोध करने से पहले ‘कृपया’ कहने की जरूरत नहीं समझता है।

यह आश्चर्यजनक है कि अपने वाक्य में ‘कृपया’ शब्द को जोड़ भर देना ही पूरे वाक्य की भावना को बदल देता है। इन सरल उदाहरणों को ध्यान में रखें:

  • ‘अपनी कार आगे बढ़ाइये।’ ⇒ ‘प्लीज, क्या आप अपनी कार को ज़रा आगे बढ़ा पायेंगे?’
  • ‘काली मिर्च दीजिये।’ ⇒ ‘क्या कृपया आप मुझे काली मिर्च दे सकते हैं?’
  •  घर लौटते हुए मेरे लिए अखबार ले आना।’ ⇒ ‘घर लौटते हुए आप क्या कृपया मेरे लिए अखबार ला सकते हैं?’

‘कृपया’ शब्द एक सामान्य सौजन्यता से कुछ ज्यादा है। यह दूसरे व्यक्ति का सम्मान करने का एक वास्तविक तरीका है और हमें इसका हर दिन अभ्यास करना है।

  •  वह व्यक्ति जो कुछ करने वाला है और जिसके जरिये वह हमें खुशी देगा या हमारी सहायता करेगा, उसके लिए दूसरे कहे गए इस शब्द में ‘विचारशीलता’ झलकती है।
  •  यह कभी नहीं माना जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति हमारे लिए सिर्फ इसलिए कुछ कर देगा कि हम उसे ऐसा करने के लिए कह रहे हैं।

यह सहज कार्य हमें दूसरे व्यक्ति से जुड़ने में सक्षम बनाता है, उन्हें अहमियत, सम्मान देता है और हमारे अनुरोध को स्वीकार या अस्वीकार करने की पूरी आजादी प्रदान करता है।

'प्लीज' और 'धन्यवाद': दो सुन्दर शब्द

‘प्लीज’ और ‘धन्यवाद’: किसी भी भाषा में दो सुंदर शब्द हैं

हमें इस अहम तथ्य को कभी नहीं भूलना चाहिए: मनुष्य के रूप में हमारी विरासत की जड़ें उस सामाजिक मानसिकता में हैं जो भावनाओं की ताकत से संचालित होती है।

  • भावनाएं हमें आस-पास के लोगों के साथ एक अद्भुत संपर्कसूत्र देती हैं, जिसकी वजह से अतीत में भाषा विकसित हुई। इस आविष्कार के जरिये हमने अपने आप को संबंधित करने, शिक्षित करने, समुदायों को बनाने, शिकार करने, खुद को संगठित करने और विकसित करने का एक तरीका खोजा।
  • संवाद की इस पद्धति के माध्यम से, ‘प्लीज’ और ‘धन्यवाद’ कहना आपके इस विचार को दर्शाता है कि आपका दिल दूसरे इंसानों का सम्मान करता है और उनकी परवाह करता है। बदले में यह सह-अस्तित्व  और आजादी को बढ़ावा देता है।

धन्यवाद कहकर, हम दूसरे व्यक्ति का सम्मान करते हैं। ‘कृपया’ कहकर हम उनके लिए अपना सम्मान प्रकट करते हैं और उन्हें चुनाव की आजादी देते हैं, जो दोनों पक्षों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

इससे अद्भुत कुछ और नही हो सकता कि कुछ करने के बाद हम बहुत अच्छे अहसास से भरे हों और एक अजनबी को अपनी ओर देखकर मुस्कुराते हुए ये जादुई शब्द कहता हुआ सुनें।