5 रिस्क फैक्टर जो डिप्रेशन की ओर ले जा सकते हैं

डिप्रेशन सिर्फ दर्दनाक घटनाओं के कारण नहीं है। यहां कुछ रोजमर्रा की आदतों के बारे में बताएँगे जो डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं।
5 रिस्क फैक्टर जो डिप्रेशन की ओर ले जा सकते हैं

आखिरी अपडेट: 09 अक्टूबर, 2019

क्या आप उन रिस्क फैक्टर को जानते हैं जो आपको डिप्रेशन की ओर ले जा सकते हैं?

डिप्रेशन को मूड डिसऑर्डर के रूप में क्लासिफाई किया गया है। जो लोग डिप्रेशन के शिकार हैं, उनमें चिड़चिड़ापन, जीवन में दिलचस्पी की कमी और व्यवहार में बदलाव के अलावा उदासी की गहरी भावनाएं दिखती हैं

इस स्थिति की जड़ बायोलॉजिकल या हालात में  हो सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं, डिप्रेशन अक्सर ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव के कारण होता है, भले ही उसके पीछे हार्मोन का असंतुलन, परिस्थितियों या कुछ घटनाओं का प्रभाव हो।

हालाँकि डिप्रेशन कुछ गलत आदतों से भी आ सकता है।

रिस्क फैक्टर जो डिप्रेशन की ओर ले जा सकते हैं

यह ध्यान रखना अहम है कि गहरी उदासी के सभी पल डिप्रेशन वाले नहीं होते हैं। एक व्यक्ति उदास और दर्दनाक घटनाओं से गुजर सकता है बिना उन गंभीर लक्षणों का अनुभव किए जिनकी डायग्नोसिस डिप्रेशन के रूप में की जा सकती है।

मेडिकल प्रोफेशनल इस गड़बड़ी की पहचान एक गंभीर मेडिकल कंडीशन के रूप में करते हैं, क्योंकि इसका ठीक से इलाज न होने पर नतीजे घातक हो सकते हैं।

डिप्रेशन पीड़ित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बहुत कम हो जाती है और वे उस पॉइंट तक पहुँच सकते हैं जहाँ वे अपनी डेली एक्टिविटी पूरा करने में असमर्थ महसूस करते हैं। कभी-कभी अवसाद दूसरे हेल्थ प्रॉब्लम को भी जन्म दे सकता है।

डिप्रेशन बहुत जटिल रोग है। इस कारण इस बीमारी को जन्विम देने का निर्दिष्ट कारण भी साफ़ नहीं है। दरअसल रिसर्चरों ने दर्जनों कारण बताये हैं जो अवसाद का कारण बन सकते हैं।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि हम अपनी लाइफस्टाइल में मौजूद इसके कई कारणों को नजरअंदाज कर देते हैं।

इस आर्टिकल में जानें वे रिस्क फैक्टर क्या हैं।

1. गलत डाइट डिप्रेशन के लिए रिस्क फैक्टर है

गलत डाइट डिप्रेशन के लिए रिस्क फैक्टर है

जंक फूड को अनगिनत स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा गया है। इसमें स्ट्रेस और अवसाद भी शामिल है

कुपोषण मानसिक सेहत की समस्याओं से बहुत ज्यादा जुड़ा है, जिसमें अवसाद भी है। जबकि अच्छी तरह खाने की ज़रूरत को अनदेखा करना आसान है, गलत खानपान आपके नर्वस सिस्टम और ब्रेन के केमिकल साइंस में बदलाव ला सकता है।

उदाहरण के लिए फैट और जंक फूड का लगातार सेवन अवसाद और स्ट्रेस के रिस्क फैक्टर से जुड़ा हुआ है। हालांकि जंक फूड आपको अस्थायी खुशी दे सकता है, पर यह हार्मोनल एक्टिविटी में बदलाव के कारण अवसाद का कारण भी बन सकता है।

इसलिए, ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और मिनरल के स्रोतों से समृद्ध हेल्दी डाइट खाने की कोशिश करें

2. पर्याप्त नींद न लेने से डिप्रेशन हो सकता है

अगर आप ज़िन्दगी की अच्छी गुणवत्ता चाहते हैं, तो आपको आदर्श रूप से बिना किसी रुकावट के रोजाना 7 से 8 घंटे सोना होगा

इस दौरान शरीर उन प्रक्रियाओं की एक चेन रिएक्शन को अंजाम देता है जो यह दिन के दूसरे वक्त नहीं कर सकता है। इसलिए अगर आप अपनी नींद में रुकावट महसूस करते हैं या सोते समय परेशानी होती है, तो कई नेगेटिव प्रभावों हो सकते हैं।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अनिद्रा और नींद से जुड़ी समस्याएं डिप्रेशन से नजदीकी से जुड़े हुए हैं। दरअसल कुछ स्टडी से पता चलता है कि जो लोग अच्छी तरह नहीं सोते हैं, उन्हें ठीक-ठाक सोने वालों के मुकाबले  डिप्रेशन होने का 10 गुना ज्यादा जोखिम होता है।

3. सोशल नेटवर्क का ज्यादा इस्तेमाल करने से डिप्रेशन हो सकता है

हाल की स्टडी ने सोशल नेटवर्क और डिप्रेशन के व्यवहार के बीच परस्पर संबंध दिखाया है

हाल के वर्षों में सोशल नेटवर्क के उपयोग और मेंटल हेल्थ के बारे में कई अध्ययन किए गए हैं।

जर्नल ऑफ सोशल एंड क्लिनिकल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी ने निष्कर्ष निकाला है कि सोशल नेटवर्क का उपयोग अवसाद और अकेलेपन की नेगेटिव भावनाओं में भूमिका निभा सकता है। 

हालाँकि आमतौर पर सोशल नेटवर्क के सामान्य उपयोग का कोई गंभीर असर नहीं होता है, लेकिन इन प्लेटफार्मों पर ज्यादा वक्त बने रहना नकारात्मक हो सकता है। इसलिए इनका एक सीमा में ही इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाती है।

4. ज्यादा शराब पीने से डिप्रेशन हो सकता है

नशीले पेय पदार्थों का दुरुपयोग ब्रेन एक्टिविटी में बदलाव का कारण बन सकता है, जिससे अवसाद के एपिसोड ख़राब दशा में जा सकते हैं।

शराबी आमतौर पर अपने काम-काज और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सकते, जो नकारात्मक प्रभावों में योगदान देता है। चिंता की बात यह है कि जब कोई शराब और डिप्रेशन दोनों का दोहरा शिकार होता है, तो लत को छोड़ना और भी मुश्किल हो जाता है।

इसलिए, जो लोग डिप्रेशन ग्रस्त हैं और शराब ज्यादा पीते हैं, उन्हें लगातार डॉक्टर और परिवार के सपोर्ट की ज़रूरत होती है। साथ ही, पीड़ित को कई तरह की चिकित्सा में भाग लेना चाहिए।

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5. टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट भी डिप्रेशन के लिए रिस्क फैक्टर है

टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट भी डिप्रेशन के लिए रिस्क फैक्टर है

आपके वर्क एनवायरनमेंट का आपके मूड पर जबरदस्त असर होता है और इसलिए यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

कई रोगी जो स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन से पीड़ित हैं, वे टेन्स या टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट का भी सामना करते हैं

इसका क्या मतलब है?

इसमें उत्पीड़न, काम का दबाव, कम वेतन, और सहकर्मियों या मालिकों के साथ अन्हेल्दी रिलेशन शामिल हो सकते हैं। ये सभी फैक्टर अवसाद को जन्म दे सकते हैं क्योंकि वे मेंटल डिस्टर्बेंस में योगदान करते हैं। ज्यादा तनाव कोर्टिसोल और दूसरे हार्मोन के स्राव को बढ़ाता है।
आप कुछ आसान स्ट्रेट्जी अजमाकर इससे बचने में मदद कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए आराम करने के लिए थोड़ा ब्रेक लें, अपने आप पर काम का ज्यादा दबाव न लें और रिलैक्सिंग संगीत और एरोमाथेरेपी के साथ अपने वर्क एनवायरनमेंट में सुधार करें

अपनी सेहत का ख्याल रखें

क्या आप इन पांच रिस्क फैक्टर में से किसी से जुड़े हैं जो डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं?

यदि उत्तर हां में है, तो अपनी लाइफस्टाइल को बदलने के लिए स्टेप उठाना शुरू करें जिससे नेगेटिव नतीजों को रोक सकें

यह न भूलें कि अवसाद एक गंभीर बीमारी है जिसके लिए प्रोफेशनल ट्रीटमेंट की ज़रूरत होती है। अगर आप अवसाद के लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।

याद रखें, डिप्रेशन इलाज योग्य रोग है, लेकिन हमेशा रोके जाने योग्य नहीं है। किसी भी स्थिति में अपने जोखिम को कम करने के लिए इन रिस्क फैक्टर पर ध्यान रखें।

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