ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल (AIP): इसमें क्या शामिल है?

10 दिसम्बर, 2020
ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल (एआईपी) एक तरह की डाइट है जिसका उद्देश्य सूजन, दर्द, और ऑटोइम्यून बीमारियों के दूसरे लक्षणों को कम करना है। इसमें क्या कुछ होता है? आज के आर्टिकल में आपको हम वह सबकुछ बताएंगे जो आपको जानना चाहिए।

एआईपी डाइट जिसे ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल डाइट के रूप में भी जाना जाता है, एक ऐसा डाइट मॉडल है जिसने हाल के वर्षों में काफी लोकप्रियता हासिल की है। इसमें सेहत में होने वाले बदलावों का निरीक्षण करने के लिए कुछ हफ्तों तक कुछ खाद्यों से परहेज करना शामिल है।

जैसा कि जर्नल इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज में प्रकाशित एक आर्टिकल में कहा गया है, इसका उद्देश्य सूजन, दर्द और ऑटोइम्यून कंडीशन के दूसरे लक्षणों, जैसे कि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और सीलिएक रोग पर काबू पाने में योगदान करना है।

आपको इसके बारे में क्या मालूम होना चाहिए? हम आपको इस लेख में बताएंगे!

AIP डाइट क्या है?

ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल (एआईपी) एक एलिमिनेशन डाइट है जिसमें सेहत पर होने वाले असर का निरीक्षण करने के लिए कई हफ्तों तक कुछ किस्मों का भोजन नहीं करना शामिल है। यह विशेष रूप से सोरायसिस (psoriasis), रूमेटाइड आर्थराइटिस (rheumatoid arthritis), ल्यूपस (lupus) और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (inflammatory bowel disease) जैसे ऑटोइम्यून रोगों की उपस्थिति में प्रासंगिक है।

इन बीमारियों में जोड़ों के दर्द से लेकर थकान, पेट दर्द, डायरिया, नर्व की क्षति और मानसिक भ्रम तक के लक्षण होते हैं। उनकी पैदाइश बहुसांस्कृतिक है और इसमें जेनेटिक और पर्यावरण से जुड़े फैक्णीटर शामिल हैं। हालांकि एक हाइपोथिसिस उन्हें आंतों की दीवार की क्षति के साथ जोड़ती है। यह बदले में, कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से जुड़ा हुआ है।

अनिवार्यतः एआईपी डाइटरी न्यूट्रिशन से भरपूर विकल्पों के साथ समस्या पैदा करने वाले फ़ूड पैटर्न को हटाने या उन्हें बदलने का प्रस्ताव करता है जो आंत की “मरम्मत” करने में मदद करते हैं और इसके माइक्रोबायोटा के संतुलन को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा यह ग्लूटेन या लैक्टोज वाले प्रोडक्ट को समाप्त करने का सुझाव देता है, क्योंकि ये अक्सर संवेदनशील लोगों में असामान्य इम्यून रिएक्शन का कारण बनते हैं।

ऑटोइम्यून त्वचा रोग अक्सर भोजन में मौजूद “ट्रिगर” से जुड़े होते हैं।

AIP डाइट के स्टेप

ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल (एआईपी) लोकप्रिय पैलियो-डाइट के समान है। दरअसल कुछ एक्सपर्ट इसे विस्तार कहते हैं। जो भी हो यह एआईपी संस्करण थोड़ा ज्यादा सख्त है और इसमें दो मुख्य कदम हैं।

उन्मूलन के स्टेप

एआईपी डाइट के पहले चरण में कुछ विशिष्ट भोजन और दवा से परहेज शामिल है जो आंतों की सूजन या माइक्रोबायोटा में असंतुलन से जुड़े हो सकते हैं। यह उन प्रोडक्ट को ध्यान में रखता है जो अक्सर एलर्जी और अवांछित रिएक्शन का कारण बनते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • अनाज
  • लेग्युम
  • नट्स
  • सीड्स
  • सोलनसियस वेजिटेबल (Solanaceous vegetables)
  • अंडे
  • मिल्क प्रोडक्ट
  • वेजिटेबल आयल
  • फ़ूड एडिटिव
  • प्रोसेस्ड शुगर
  • कॉफ़ी
  • शराब
  • तंबाकू
  • प्रोसेस्ड प्रोडक्ट

नॉन स्टेरायडल एंटी इन्फ्लेमेटरी (NSAIDs), जैसे कि आईबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन, डाइक्लोफेनाक (diclofenac) और हाई डोज एस्पिरिन।

बेशक इनकी जगह एक्सपर्ट ताजा, पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य खाने की सलाह देते हैं।  लोगों को फर्मेंटेड फ़ूड या कुछ प्रोबायोटिक तत्वों वाले खाद्यों को नेगलेक्ट नहीं करना चाहिए। इसके अलावा रिलैक्शेसन टेक्नीक, फिफ्जिकल एक्टिविटी और बेहतर नींद से लाइफस्टाइल में सुधार करने का प्रयास करना अहम है।

इस स्टेप का समय तब तक बढ़ सकता है जब तक व्यक्ति के लक्षणों में सुधार महसूस न हो। अक्सर यह 30 से 90 दिनों के बीच का वक्त ले सकता है। हालांकि कुछ लोगों को तीन हफ्ते के बाद असर महसूस होता है।

डिस्कवर: ऑटोइम्यून बीमारियों में क्या खायें और किन खाद्यों से परहेज करें

दुबारा खाने में शामिल करने का चरण

जैसे ही व्यक्तियों में ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षणों में सुधार दिखाई दे, रिइन्ट्रोडक्शन फेज शुरू हो जाता है। यह धीरे-धीरे कभी परहेज किए गाए खाद्य पदार्थों को शामिल करना शामिल है। बेशक यह व्यक्ति की सहिष्णुता के स्तर पर निर्भर करेगा।

इस स्टेज में उन खाद्य पदार्थों को पहचानना शामिल है जो समस्या के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। इसके अलावा यह उन खाद्यों को फिर से शामिल करना है जो किसी भी लक्षण का कारण नहीं बनते पर ये खाने में वरायटी और पूर्णता को सुनिश्चित करते हैं।

एक-दूसरे के बीच 5 से 7 दिनों के अंतराल के साथ हर भोजन की शुरूआत बहुत कम है। यह अंतराल यह तय करने के लिए पर्याप्त है कि सेवन के बाद कोई भी लक्षण फिर से दिखाई देता है या नहीं। जो खाद्य ठीक तरह से सहन हो रहे हैं वे खाने में शामिल किए जा सकते हैं। बाकियों को छोड़ देना चाहिए।

भोजन को दोबारा डाइट में शामिल करने के लिए स्टेप

भोजन को AIP डाइट में फिर से शामिल करने के लिए कुछ चरणों का पालन करना होगा। एक हेल्थ प्रोफेशनल की गाइड में ही ऐसा किया जाना चाहिए है और यह पता लगाना चाहिए कि इसका सही वक्त कब होगा जब इससे सूजन नहीं आयेगी। इसलिए रात की नींद अगर ठीक नहीं हुई है, या तनाव हो तो दुबारा शुरुआत करने के प्रोग्राम को स्थगित करना बेहतर है।

मुमकिन हो तो उन खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जिनमें समस्याजनक तत्व कम मात्रा में हों। उदाहरण के लिए डेयरी प्रोडक्ट के मामले में, दही जैसे फर्मेंटेड आप्शन के साथ शुरू करना सबसे अच्छा है।

ये चरण निम्नलिखित हैं:

  • वह भोजन चुनें जिसे आप फिर से शामिल करना चाहते हैं। फिर टेस्ट के लिए चुने गए दिन, दिन भर में कई बार इसका सेवन करें। फिर अगले 5 या 6 दिनों के लिए इसे पूरी तरह से बचें।
  • थोड़ी मात्रा में प्रोडक्ट खाएं और रिएक्शन की जांच करने के लिए लगभग 15 मिनट इंतज़ार करें।
  • यदि कोई लक्षण हैं, तो टेस्ट रोक देना चाहिए और व्यक्ति को भोजन से परहेज करना चाहिए। हालांकि यदि लक्षण दिखाई नहीं दें तो व्यक्ति को और 2 या 3 और घंटों के लिए प्रभावों को देखते हुए ज्यादा मात्रा में आजमाना चाहिए।
  • यदि कोई लक्षण नहीं हैं, तो व्यक्ति उसी भोजन का एक नार्मल हिस्सा खा सकता है। फिर उन्हें दूसरे भोजन को फिर से शुरू करने से पहले 5 या 6 दिनों का वक्त लेना चाहिए।
  • प्रक्रिया को दोहराएं।

एआईपी डाइट में मान्य और परहेज किये जाने वाले खाद्य

एआईपी डाइट के सफल होने के लिए निषिद्ध खाद्य पदार्थों और स्वीकार्य खाद्यों के बारे में मौजूद सिफारिशों का सम्मान करना जरूरी है। इस संबंध में, आपको ध्यान रखना चाहिए कि कई प्रतिबंध भी हैं। इसलिए कमियों से बचने के लिए न्यूट्रिशन प्रोफेशनल से सलाह लेना सबसे अच्छा है।

अनुमति वाले खाद्य पदार्थ

  • कई तरह के पौधे और एल्गी
  • प्रचुर मात्रा में ओमेगा 3 वाली हाई क्वालिटी फिश और समुद्री भोजन
  • ताजा फल, मध्यम भागों में
  • फर्मेंटेड और प्रोबायोटिक फ़ूड (कोम्बुचा (kombucha), किमची (, kimchi), सौकरकूट (sauerkraut), अचार, और नारियल का केफिर)
  • लीन मीट
  • ओलिव, नारियल और एवोकैडो तेल
  • हर्ब और मसाले जो बीज से नहीं बनते हैं
  • नेचुरल स्वीटनर जैसे शहद
  • बोन ब्रोद
  • ग्रीन और ब्लैक टी

निषिद्ध खाद्य पदार्थ

  • सोलेनेसी (Solanaceae) फैमिली की सब्जियां जैसे टमाटर, आलू, मिर्च, और बैंगन
  • अनाज (चावल, गेहूं, जई, जौ, राई और डेरिवेटिव)
  • लेग्युम
  • मिल्क प्रोडक्ट
  • वेजिटेबल आयल (ऊपर उल्लिखित को छोड़कर)
  • कॉफ़ी
  • अंडे
  • ड्राई नट्स और सीड्स
  • शराब
  • फ़ूड एडिटिव, जैसे रिफाइंड शुगर और ट्रांस फैट

AIP डाइट क्या काम करता है?

आज तक एआईपी आहार पर वैज्ञानिक प्रमाण बहुत सीमित हैं। हालांकि कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों की सूजन और डायग्नोस्टिक लक्षणों को कम कर सकता है।

आइए इसे विस्तार से देखें

ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल डाइट और पारगम्य बाउल

जो लोग ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित हैं, उनमें आमतौर पर पर्मीयेबल बाउल होता है। रिसर्च के अनुसार सूजन और आंत की पारगम्यता के बीच एक संबंध है। इस तरह व्यक्ति एक सूजन संबंधी गडबडी से पीड़ित हो सकता है।

इस मामले में निष्कर्षों ने निर्धारित किया है कि एआईपी डाइट लीकी बाउल सिंड्रोम से राहत पाने में योगदान करके सूजन की मात्रा और इससे जुड़े लक्षणों को घटाता है। हालांकि इस मामले में ज्यादा रिसर्च जरूरी है।

ऑटोइम्यून विकारों के लक्षणों का इलाज करना

ऊपर बतायी गयी बातों के अलावा, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस डाइट प्रोटोकॉल ने ऑटोइम्यून रोगों के लक्षणों के खिलाफ पाज़िटिव नतीजे दिए हैं, जैसे कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और हाशिमोतो थायरॉयडिटिस। वास्तव में कुछ मामलों में 29% से 68% सूजन की कमी शामिल है।


AIP आहार को थायरॉयड विकारों में प्रभावी दिखाया गया था, जैसे कि हाशिमोतो थायरॉयडिटिस।

अवश्य पढ़ें : ग्लूटेन इनटॉलरेंस के लक्षण और ऐसे करें इसका इलाज

एआईपी ऑटोइम्यून प्रोटोकॉल आहार के नुकसान क्या हैं?

एआईपी डाइट का मुख्य नुकसान यह है कि यह एक बहुत ही परहेज वाला खाने का पैटर्न है, खासकर इसके उन्मूलन के स्टेज में। यह स्थिति न केवल इसका पालन करना कठिन बना देती है, बल्कि सभी के लिए उपयुक्त नहीं भी हो सकती है।

दूसरी ओर व्यक्ति खुद को खाद्य परहेजोन के कारण ऐंगज़ाइइटी या सोशल आइसोलेशन के एपिसोड से गुजर सकता है। उचित योजना के बिना यह पोषण संबंधी कमियों को भी जन्म दे सकता है।

दूसरी बातों के अलावा इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि यह प्रोटोकॉल ऑटोइम्यून रोगों की सूजन को कम करेगा। फिर भी कई लोग इसके पाज़िटिव असर महसूस करते हैं।

पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे अच्छा है

पहली नज़र में ऐसा लगता है कि एआईपी डाइइट को अपनाना आसान है अगर आप इसके नियमों पर विचार करते हैं। हालांकि, यह एक प्रोटोकॉल है जिसे बहुत सावधानी से अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें महत्वपूर्ण आहार परहेज शामिल हैं।

इसलिए इस डाइइट पर सभी जरूरी जानकारी पाने के लिए किसी पोषण विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है। डॉक्टर आपको यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि क्या यह आहार आपके लिए सुविधाजनक है और आपकी सेहत पर प्रभाव से बचने के लिए इसे पर्याप्त रूप से कैसे नियोजित किया जाए।

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