6 बातें हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के बारे में जिन्हें आपको जान लेना चाहिए

14 फ़रवरी, 2019
भले ही इस समय हशिमोतो थायरॉइडिटीज का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सही वक्त पर इसकी डायग्नोसिस और उचित ट्रीटमेंट इसका सही प्रबंध करने और जटिलताओं को कम करने में आपकी मदद कर सकता है।

1912 में जापानी डॉक्टर हकारू हाशिमोतो (Hakaru Hashimoto) ने रोग प्रतिरोधक प्रणाली से जुड़े एक नए रोग की खोज की। उनकी रिसर्च के अनुसार, यह स्थिति थायरॉइड ग्रंथि के माध्यम से रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system) पर हमला करती है। इस आर्टिकल में हाशिमोतो रोग (Hashimoto’s disease) या हाशिमोतो थायरॉइडिटीज (Hashimoto’s Thyroiditis) के बारे में ज्यादा जानकारी लें।

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज क्या है (What is Hashimoto’s thyroiditis) ?

जब हाशिमोतो ने अपना शोध किया, तो पाया कि इम्यून सिस्टम कभी-कभी बॉडी टिशू की हिफ़ाजत करने के बजाय उन पर हमला करने लगता है।

इस बीमारी में शरीर थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करता है। इसका तुरंत नतीज़ा यह होता है कि कई शारीरिक कार्यों के लिए आवश्यक हार्मोन के उत्पादन में कमी आ जाती है।

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हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के कारण (causes of Hashimoto’s thyroiditis)

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के कारण

इस बीमारी के कारणों के बारे में अभी पूरी तरह से जाना नहीं जा सका है। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इसके विकास से संबंधित कुछ पहलू ज़रूर ज्ञात हैं।

यदि नीचे बताये गए चार रिस्क फैक्टर आपमें मौजूद हैं, तो यह निर्धारित करने के लिए डॉक्टर से ज़रूर मिले कि कहीं आपको यह बीमारी तो नहीं, या उसके खतरे तो नहीं हैं।

आपका जीन

सबसे पहले, यह बीमारी अक्सर हाशिमोतो थायरॉइडिटीज या इसी तरह की बीमारियों के साथ परिवार में प्रकट होती है। गंभीर समस्या से निपटने के लिए अपने प्रियजनों से बातचीत करना और टेस्ट करवाना भी बहुत अहम हो जाता है।

अत्यधिक आयोडीन

इसके अलावा, डॉक्टर हाशिमोतो की स्टडी से पता चला है कि शरीर में अत्यधिक आयोडीन इस बीमारी को ट्रिगर कर सकता है।

आपको हमेशा ही बहुत ज्यादा आयोडीन के सेवन से बचना चाहिए। साथ ही, इस बीमारी का पारिवारिक इतिहास होने पर अपने आयोडीन के सेवन की मात्रा पर ख़ास ध्यान दें।

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हार्मोन से जुड़े रहस्यमय बदलाव

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज : हॉर्मोन के बदलाव

हाशिमोतो रोग थायरॉइड पर असर डालता है। इससे आपके हार्मोन के स्तरों में बदलाव आ सकते हैं। आम तौर पर इस बीमारी से पीड़ित ज्यादातर महिलाओं में इसका पता बच्चे को जन्म देने के बाद एक से पांच साल के बीच हो जाता है। हालांकि गर्भावस्था से पहले भी इसके लक्षण प्रकट हो सकते हैं

रेडिएशन एक्सपोजर

यह बीमारी रेडिएशन के संपर्क में रहने के सबसे आम प्रभावों में से एक है। हिरोशिमा, नागासाकी और चेरनोबिल में परमाणु विस्फोट के बाद की गयी कई स्टडी ने इसे साफ़ दिखाया है।

ल्यूकेमिया और अन्य कैंसर पीड़ितों को दिए जाने वाले रेडिएशन के बाद उनमें यह रोग विकसित हो सकता है।

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के लक्षण

इसके लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं। इस रोग के लिए शरीर में होने वाले जिन बदलावों पर आपको निगाह रखनी चाहिए उनमें शामिल हैं:

  • अत्यधिक थकान या रोज़, लगातार बनी रहने वाली थकान।
  • ठंड के प्रति संवेदनशीलता।
  • क्रॉनिक, अचानक कब्ज।
  • सूजा हुआ दिखने वाला चेहरा।
  • लगातार खर्राटे।
  • पीली, शुष्क त्वचा।
  • कूल्हे और कंधे की मांसपेशियों में कठोरता।
  • निचले छोरों का कमजोर होना (Weak lower extremities)।
  • द्रव प्रतिधारण (fluid retention) के कारण वजन बढ़ना।
  • हाथ, पैर और घुटने के जोड़ों में कठोरता।
  • लगातार बन रहने वाला अवसाद (depression)।
  • मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive menstrual bleeding)।

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज की डायग्नोसिस कैसे करें

हाशिमोतो रोग का निदान निम्न परीक्षणों के जरिये किया जा सकता है:

टी3 टेस्ट (T3 test) : यह एक ऐसा टेस्ट है जो पिट्यूटरी ग्लैंड और ट्राइयोडोथायरोनिन हार्मोन (triiodothyronine hormone) की गड़बड़ी की जानकारी देता है।

थायरॉइड स्टीमुलेटिंग हॉर्मोन (TSH) टेस्ट : टीएसएच वह हार्मोन है जो अन्य हार्मोन के उत्पादन और आपके रक्तप्रवाह में उनके छोड़े जाने के लिए थायरॉयइ को उत्तेजित करता है। यह परीक्षण आपके खून में इनके स्तरों की जाँच करेगा।

फ्री टी4 टेस्ट : इस हार्मोन का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है। गर्भनिरोधक जैसी दवाओं के कारण खून में इसकी बढ़ी हुई मात्रा आम बात है। बार्बिटरेट्स इसे कम करते हैं। इन कारकों के अलावा दूसरे मामलों में इसे खून में अपने सही लेवल पर होना चाहिए।

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यह रोग क्या करता है?

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज की डायग्नोसिस कैसे करें

स्वाभाविक रूप से हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के कारण जो समस्याएं होती हैं, उनकी कुंजी इस बात में है कि यह एक ऑटोइम्यून रोग है। जैसा कि हमने बताया है, ऑटोइम्यून रोग शरीर को अपने ही टिशू और अंगों के खिलाफ आक्रामक बना देता है

कुल मिलाकर, इसका मतलब है कि प्रभावित टिशू अपने कार्यों को करने की क्षमता खोना शुरू कर देते हैं।

समय के साथ, इसकी वजह से अन्य ऑटोइम्यून रोग भी विकसित हो सकते हैं:

हाशिमोतो थायरॉइडिटीज के जोखिम को कैसे घटाएं

दुर्भाग्य से, वास्तव में हाशिमोतो रोग को रोकने का कोई तरीका नहीं है। हालांकि, जो आप कर सकते हैं, वह है, जोखिमकारी कारणों को ध्यान में रखना और लक्षणों पर निगरानी रखना

अगर इस रोग की आपकी फैमिली हिस्ट्री है, या यदि डॉक्टर बताते हैं कि आपको इसका जोखिम है, तो आपको हर साल यह सुनिश्चित करने के लिए टेस्ट कराने चाहिए कि सबकुछ नॉर्मल है

कुल मिलाकर यदि आप अपना जोखिम कम करना चाहते हैं, तो एक हेल्दी लाइफस्टाइल जिसमें सही डाइट, एक्सरसाइज और भरपूर विश्राम शामिल हैं, आपकी बड़ी मदद कर सकता है।

हालांकि यह याद रखना अहम है कि रोग के लक्षण ऐसे हैं जो विशेषज्ञों के लिए बहुत साफ़ हैं। इसलिए समय पर इसे पकड़ पाना बहुत आसान है। इसके टेस्ट बहुत सटीक हैं और शुरुआत में ही डायग्नोसिस हो जाने पर बीमारी का सही प्रबंध करने और जटिलताओं से बचने में आपकी मदद कर सकते हैं।

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