नोमोफोबिया: सेलफोन की लत

28 मई, 2020
क्या आप अपने सेलफोन के आदी हैं? यद्यपि आप सोच सकते हैं कि आप पहले से कहीं अधिक कनेक्टेड हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह आपको और अलग-थलग कर देता है। क्योंकि आपने अपने नजदीक के लोगों के साथ वास्तविक बातचीत की जगह सेलफोन पर ध्यान दिया है।
 

क्या आप अपने सेलफोन के आदी हैं? बैटरी लगभग खत्म हो जाने पर क्या आपको एंग्जायटी होती है? क्या आप हमेशा अपने साथ एक चार्जर लेकर घूमते हैं? यदि इन सवालों का जवाब हाँ है, तो आपको नोमोफोबिया हो सकता है।

यह निर्विवाद है कि नवीनतम तकनीकों ने जीवन को आसान बना दिया है। पर उन्हें गलत तरीके से उपयोग करने से एक सकारात्मक चीज समस्या में बदल गयी है।

हालांकि कई लोग वास्तव में अपने सेलफोन के आदी नहीं हैं, लेकिन यह सच है कि हमारी कुछ गलत आदतें नोमोफोबिया (Nomophobia) का कारण बन सकती हैं।

कैसे पता चलेगा कि आपको नोमोफोबिया है?

कैसे पता चलेगा कि आपको नोमोफोबिया है?

नोमोफोबिया रातोंरात नहीं होता। इसके बजाय यह कुछ अस्वस्थ आदतों से पैदा होता है जैसे कि ज़रा भी असहज होने पर आप हर बार अपने सेलफोन को देखना चाहते हैं।

कुछ मामलों में आपका सेलफोन एक ऐसा साथी बन जाता है, जो आपको अकेले होने पर कम अकेला महसूस करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए जब आप बस में हों या जब आपको रेस्तरां में किसी का इंतजार करना हो।

हालांकि यह आदत और बदतर हो सकती है और भावनात्मक स्ट्रेस को कम करने के लिए आपको सेलफोन पर निर्भर बना सकती है। यह आपके मैसेज और ई-मेल पर एक नज़र डालने का कारण बन सकता है, भले ही आपको कुछ मिला हो या नहीं।

यदि आप ऐसा व्यवहार करते हैं, तो आप कुछ ऐसे मापदंडों को बना सकते हैं जो आपको यह महसूस करने में मदद करेंगे कि आप नोमोफोबिया के शिकार हैं या नहीं।

  • आप लगातार और बड़े आवेग के साथ यह देखते हैं कि किसी ने आपको टेक्स्ट किया है या ईमेल।
  • फोन बंद हो जाने पर या इंटरनेट कनेक्शन नहीं होने पर स्थिति आपके लिए बहुत ड्रामेटिक हो जाती क्योंकि आप आटोमेटिक रूप से अलग-थलग महसूस करते हैं।
  • आप क्या सोच रहे हैं, क्या कर रहे हैं इस बारे में आप सबसे पहले पोस्ट करते हैं।
  • इसके अलावा आपको अपने पोस्ट की लाइक की संख्या की जानकारी है। यह आपके अपने अनुभवों के बारे में ज्यादा से ज्यादा पोस्ट करने की ज़रूरत को बढ़ाता है।
 
  • कभी-कभी आपको लगता है, आपने अपने फोन को यह बताते सुना है कि आपको एक मैसेज आया है, जबकि वास्तव में आपको कुछ भी नहीं मिला है।
  • दोस्तों के साथ होने पर आपके हाथ में हमेशा आपका फोन होता है। कभी-कभी आप बातचीत को फॉलो नहीं कर पाते क्योंकि आप पहले से ही अपने फ़ोन पर किसी से बात कर रहे हैं।

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हम ज्यादा कनेक्टेड हैं, लेकिन बहुत अकेले भी हैं


नोमोफोबिया से पीड़ित होने का कारण यह है कि आप टेक्नोलॉजी से जुड़े होने की ज़रूरत महसूस करते हैं। अब यह मायने नहीं रखता कि आपकी फैमिली और दोस्त दुनिया के दूसरी तरफ हैं। सिर्फ एक मैसेज, कॉल या वीडियो चैट से आप उनके साथ कम्यूनिकेट कर सकते हैं क्योंकि कोई बॉर्डर नहीं है!

हालांकि इस तथ्य की परवाह किए बिना कि लोग पहले से ज्यादा कनेक्टेड हैं, लोग ज्यादा अलग-थलग भी हो रहे हैं। आजकल पार्टनर खोजने या यहां तक ​​कि शॉपिंग के लिए घर से निकलना ज़रूरी नहीं है। अगर आप घर से काम करते हैं … तो आपको काम पर जाने के लिए घर छोड़ने की भी फ़िक्र नहीं करनी चाहिए।

हालाँकि, अगर आप सिर्फ टेक्नोलॉजी में जी रहे हैं तो क्या आपका जीवन वास्तविक है? क्या आपका फोन आमने-सामने की बातचीत की जगह ले सकता है?

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नोमोफोबिया : हम ऐसी ज़िन्दगी जी रहे हैं जो बहुत रीयल नहीं है


नोमोफोबिया वाले लोग हमेशा सोशल मीडिया पर अपनी ज़िन्दगी के बारे में पोस्ट करते हैं और अपने आस-पास के लोगों पर बहुत निर्भर होते हैं। हालाँकि आप इंटरनेट पर जो देखते हैं वह हमेशा वास्तविक नहीं होता।

  • कई कपल जो खुशी में झूनती हुई अपनी तस्वीरें पोस्ट करते हैं, वे वास्तव में अपने रिश्ते में एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हो सकते हैं।
  • वह दोस्त जो पॉजिटिव कोटेशन पोस्ट करने के अलावा कुछ नहीं करता वह वास्तव में गंभीर डिप्रेशन से पीड़ित हो सकता है।
 

सोशल मीडिया पर हम जो कुछ भी देखते हैं वह वही है जो दूसरे लोग हमें दिखाना चाहते हैं। लेकिन उनके पोस्ट की रीयलिटी क्या है?

जब कोई व्यक्ति नोमोफोबिया से पीड़ित होता है, तो वह हमेशा अपनी ज़िन्दगी की तुलना दूसरों से करता है। वे बुरा महसूस करेंगे क्योंकि – दूसरे लोग जब वीकेंड ट्रिप पर हैं वह घर पर बैठा अपने फोन को देख रहां है।

यद्यपि वह जो देख रहा है वह निश्चित रूप से वास्तविक हो सकता है, लेकिन तस्वीरें फ़ोटोशॉप की जा सकती हैं।

नोमोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति को बहुत तकलीफ होती है और अगर वह सेलफोन की लत को ठीक नहीं करता तो वे गंभीर एंग्जायटी और स्ट्रेस के एपिसोड से पीड़ित हो सकते हैं जो डिप्रेशन का कारण बन सकता है।

लोगों को सेल फोन पर निर्भरता बंद करनी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से आप जीवन का पूरा अनुभव नहीं कर सकते।

 

Yildirim, C., & Correia, A. P. (2015). Exploring the dimensions of nomophobia: Development and validation of a self-reported questionnaire. Computers in Human Behavior. https://doi.org/10.1016/j.chb.2015.02.059

King, A. L. S., Valença, A. M., Silva, A. C. O., Baczynski, T., Carvalho, M. R., & Nardi, A. E. (2013). Nomophobia: Dependency on virtual environments or social phobia? Computers in Human Behavior. https://doi.org/10.1016/j.chb.2012.07.025