बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम: कारण और इलाज

01 अप्रैल, 2020
सूजन और अचानक वजन बढ़ना बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम के दो अहम लक्षण हैं। इस आर्टिकल में इस बारे में ज्यादा जानकारी लें।

स्पैनिश एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार 100,000 बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लगभग 15 मामले देखे जाते हैं।

दरअसल यह कैसी बीमारी है? इसके संभावित कारण और इलाज क्या हैं?

इस आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में बताएंगे।

बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम क्या है?

यह सिंड्रोम दरअसल क्या है, यह समझने के लिए हमें पहले यह बताना चाहिए कि आपकी किडनी कैसे काम करती है। ये दो सेम के आकार के अंग कूल्हे (हिप) के ठीक ऊपर स्थित हैं। दरअसल वे खून को छानने का काम करते हैं:

  • अनावश्यक पानी सहित शरीर से अपशिष्ट को निकालते हैं।
  • पोटैशियम, फास्फोरस और सोडियम जैसे तत्वों को छानकर उन्हें वापस ब्लडस्ट्रीम में लौटा देते हैं।

हर किडनी में लगभग एक लाख नेफ्रॉन होते हैं। ये छोटे-छोटे अंग होते हैं जिनमें एक फिल्टर होता है। इसे ग्लोमेरुलस (glomerulus) कहते हैं। ग्लोमेरुलस आपके खून में मौजूद प्लाज्मा को फ़िल्टर करने के लिए जिम्मेदार है। इसके ठीक से काम नहीं करने पर आप अपनी किडनी में बहुत ज्यादा प्रोटीन पास कर सकते हैं।

प्रोटीन और एल्ब्यूमिन के अहम कामों में एक है ब्लडस्ट्रीम में तरल पदार्थ बनाए रखना। इस तरह अगर प्रोटीन मूत्र (अतिरिक्त पानी और वेस्ट का मिश्रण) में पास हो जाए तो तरल पदार्थ ब्लडस्ट्रीम से निकलकर आपके अंगों, हाथों, हाथों और देह के दूसरे हिस्सों में सूजन पैदा कर सकते हैं।

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बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण

नेफ्रोटिक सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के मूत्र में अतिरिक्त प्रोटीन के अलावा वजन में अचानक बढ़ोतरी और पेट, चेहरे (विशेषकर आंखों के आसपास) और हाथ-पैरों इमं सूजन होती है। बाद में यह लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने के बाद उनके टखनों और पैर की उंगलियों में सूजन का कारण बनता है

ये मुख्य और सबसे स्पष्ट लक्षण हैं, लेकिन इनके अलावा भी कुछ दूसरे लक्षण होते हैं। इन बच्चों में ये लक्षण भी दिख सकते हैं:

  • डायरिया
  • पेशाब करने में तकलीफ
  • गहरा और झागदार पेशाब
  • थकान
  • पेट में दर्द
  • नाखूनों के आसपास की सफेद त्वचा
  • भूख की कमी

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बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम के तीन कारण

बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम इडियोपैथिक है। दूसरे शब्दों में इडियोपैथिक का अर्थ है कि डॉक्टर निश्चित रूप से यह नहीं जानते कि इस बीमारी से पीड़ित 2 से 12 वर्ष के 90% बच्चों में इसकी वजह क्या होती है।

आमतौर पर इन बच्चों में सामान्य किडनी के लक्षण दिखाई देते हैं। माइक्रोस्कोप से भी डॉक्टर यह नहीं बता सकते कि उनकी किडनी में क्या खराबी है। किडनी टिशू सामान्य दिखते हैं और आमतौर पर इसका कारण निर्धारित करना असंभव होता है।

बच्चों में दूसरा सबसे आम कारण जुवेनाइल डायबिटीज है। यह ग्लोमेरुली से प्रभावित करके किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और वेस्ट्स और उपयोगी तत्वों के बीच फर्क करने की उनकी क्षमता को खत्म कर सकता है।

तीसरा कारण जेनेटिक म्यूटेशन है। आमतौर पर नेफ्रोटिक सिंड्रोम को आनुवंशिक माना जाता है। हालाँकि 12 महीने से कम उम्र के बच्चों में यह एक जन्मजात नेफ्रोटिक सिंड्रोम माना जाता है।

संभावित इलाज

अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे को नेफ्रोटिक सिंड्रोम है, तो अपने डॉक्टर से बात करें। फिर डॉक्टर शायद यूरिन सैम्पल को देखना द्खेंगे कि उसमें एक्सेस प्रोटीन है या नहीं

बाद में आपका डॉक्टर सबसे अच्छा इलाज चुनने के कारणों को निर्धारित करने का प्रयास करेगा। इसके अलावा वह ब्लड टेस्ट और किडनी की बायोप्सी भी कराना चाह सकते हैं। बायोप्सी में वे एक छोटे टिशू के सैम्पल का विश्लेषण करेंगे।

आमतौर पर नेफ्रोलॉजिस्ट जन्मजात मामलों को छोड़कर कोर्टिकोस्टेरोइड से इलाज की सिफारिश करेगा। इसके अलावा अगर इस ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट होते हैं, तो आपका डॉक्टर दूसरे तरह के साइक्लोफ़ोसामाइड या एंटिस्किलिनसिन आजमाने की कोशिश कर सकता है।

आपका डॉक्टर सूजन का इलाज करने में मदद करने वाले मूत्रवर्धक दवाओं का इस्तेमाल करने का सुझाव दे सकता है। इसी कारण कम सोडियम वाली डाइट इस स्थिति से पीड़ित बच्चों के लिए आदर्श है।

जेनेटिक नेफ्रोटिक सिंड्रोम वाले कई बच्चे आमतौर पर इलाज पर रिस्पांस नहीं करते। हालांकि एक स्टडी यह भी बताती है कि कुछ रोगियों में इम्यूनोसप्रेसेन्ट काम कर सकते हैं। आखिरकार आपका डॉक्टर आपके बच्चे की विशिष्ट ज़रूरतों के लिए सबसे अच्छा इलाज करेगा।

आपको लगे कि आपके बच्चे को नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है, तो तुरंत डॉक्टर को बुलाएं। वह आपको बताएंगे कि क्या आपको एक नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। जैसा कि हम हमेशा कहते हैं, कोई भी आपको एक्सपर्ट से बेहतर सलाह नहीं दे सकता है।