किडनी की समस्याओं के 8 अहम लक्षण

दिसम्बर 13, 2018
किडनी की समस्याएं आम तौर पर अपने उन्नत चरणों में पहुंचने तक लक्षण नहीं दिखाती हैं। लेकिन कुछ संकेत हैं, जैसे फ्लूइड रिटेंशन या यूरिन में बदलाव, जो चेतावनी के रूप में दिखाई पड़ सकते हैं।

आपकी किडनी वह अंग है जो रक्त प्रवाह में मौजूद बेकार पदार्थों को फिल्टर करने और यूरिन के जरिये शरीर से निकालने के लिए जिम्मेदार होती है।

औसतन ये लगभग एक फुट लम्बी होती हैं। ये आपके शरीर में दिन में 190 लीटर तक के रक्त को साफ़ कर सकती हैं और लगभग दो लीटर पानी को हटाती हैं।

किडनी आपके ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में भी एक अहम भूमिका निभाती है। यह कई हार्मोन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है जो आपकी सामान्य सेहत के लिए ज़रूरी हैं।

लेकिन शरीर के अन्य अंगो की तरह नुकसानदेह पदार्थों की ज्यादा मात्रा इनके कार्य को प्रभावित कर सकती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि गुर्दे की समस्या के अक्सर कोई लक्षण नहीं होते या उन्हें गलती से कोई अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझा जा सकता है।

अच्छी खबर यह है कि कुछ साफ संकेत हैं जो आपको उनके काम से जुड़ी किसी समस्या की चेतावनी दे सकते हैं। ज्यादातर लोग शायद उनसे परिचित नहीं हैं। इनमें से हम आठ सबसे अहम बातों को शेयर करना चाहते हैं।

1. यूरिन हैबिट में बदलाव

आम तौर पर आपकी मूत्र संबंधी आदतों में तब बदलाव होते हैं जब आपकी किडनी ठीक से काम नहीं करती।

हर समय टॉयलेट जाने की ज़रूरत, या इससे उलट यूरिन में कमी आना इस बात की ओर इशारा हो सकता है कि ये अंग वैसा काम नहीं कर रहे हैं जैसा उन्हें करना चाहिए।

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2. यूरिन में ही परिवर्तन (Changes in the urine itself)

पेशाब के रंग, गंध या बनावट में परिवर्तन किडनी की प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या के उपयोगी संकेत हो सकते हैं।

यदि आप पाते हैं कि आपका यूरिन सामान्य से ज्यादा पीला है, उसमें रक्त है या एक अप्रिय गंध है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

ये संकेत मूत्र पथ संक्रमण या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (urinary tract infection) के मामले में लगभग हमेशा मौजूद होते हैं। फिर भी समस्या कहीं इनसे ज्यादा गंभीर तो नहीं, इस आशंका को दूर करने के लिए कुछ टेस्ट करा लेना एक अच्छा आईडिया है।

3. शरीर में जल जमाव (Fluid retention)

इन अंगों को आपके शरीर में द्रव के स्तर को नियंत्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है इसलिए इनकी खराबी द्रव प्रतिधारण या एडिमा का कारण बन सकती है।

ये तरल और बेकार पदार्थों को फिल्टर करने की अपनी क्षमता खो देते हैं इसलिए शरीर की सूजन प्रक्रियाएं बाधित होती हैं, जिससे चेहरे, पैर, टखने और अन्य क्षेत्रों में सूजन हो जाती है।

4. थकान और शिथिलता (Fatigue and tiredness)

किडनी एक हार्मोन उत्पन्न करती है जिसे एरिथ्रोपोइटीन (erythropoietin) कहते हैं। इसका काम लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में हस्तक्षेप करना है।

इसका मतलब है, वे शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाने में भी एक बहुत अहम भूमिका निभाती हैं।

इस कारण, किडनी की खराबी से एनीमिया, हर समय थकान और शिथिलता महसूस हो सकती है।

कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर चक्कर आता है, थकान महसूस होती है और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई आती है।

5. पीठ या किडनी में दर्द (Pain in the back or in the kidneys)

जिन मरीजों को गुर्दे की समस्या होती है, खासकर बुजुर्ग लोगों को आम तौर पर पीठ के लम्बर क्षेत्र या इन अंगों के नजदीक के क्षेत्र में दर्द होता है।

हालांकि यह मांशपेशियों की समस्या भी हो सकती है, पर यह कभी-कभी बढ़ते हुए किडनी रोग से सीधे जुड़ा होता है।

किडनी स्टोन या UTI तीखे पीठ दर्द का कारण बन सकती है जो पेट और जांघ के बींचोंबीच तक फैल जाता है।

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6. मुंह में एक अजीब स्वाद

जब किडनी की समस्याओं के फलस्वरूप आपके रक्त प्रवाह में नुकसानदेह पदार्थ बढ़ते हैं तो उसकी वजह से साँस की बदबू और मुंह में धातु का स्वाद आने की समस्या हो सकती है।

कुछ लोग तो मीट का स्वाद भी खो देते हैं या सामान्य रूप से एक दिन में वे जितना खाते हैं उसकी मात्रा घटा देते हैं।

7. लाल चकत्ते (Rash)

हालांकि कई लोग इस बात को अनदेखा करते हैं, पर त्वचा की सेहत ऑक्सीजन की अच्छी आपूर्ति और रक्त प्रवाह की सफाई पर निर्भर करती है।

दूसरी ओर, जब गुर्दे बेकार पदार्थों को फिल्टर करना बंद कर देते हैं त्वचा पर लाल चकत्ते और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं का होना एक आम बात है।

कभी-कभी इन परिवर्तनों के साथ खुजली या एलर्जी का असुविधाजनक संवेदन भी होता है।

8. हाई ब्लड प्रेशर

यह एक ऐसी समस्या है जिसे धमनियों और कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली को प्रभावित करने वाले कई कारकों से ट्रिगर किया जा सकता है।

यह जानना ज़रूरी है कि द्रव और सोडियम के जमा होने से आपका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ सकता है।

क्रॉनिक किडनी फेल्योर और ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (glomerulonephritis) दोनों ही इस स्थिति का खतरा बढ़ाएंगे।

हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी स्थिति के विकास के साथ भी प्रकट हो सकता है जिसमें किडनी की धमनियाँ पतली (renal artery stenosis) हो जाती हैं। यह गुर्दे की धमनी, जो गुर्दे तक रक्त पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है, के आंशिक रूप से बाधित होने के कारण होता है।

क्या आपको संदेह है, आपको किडनी की समस्याएं हैं? किसी भी गंभीर जटिलता को रद्द करने के लिए जितनी जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से मुलाकात करें।

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