इन्फ्यूजन पंप : उपयोग और पेशेंट केयर

अगस्त 27, 2019
इन्फ्यूजन पंप एक ऐसा सिस्टम है जो दवाओं को सीधे मरीज के ब्लडस्ट्रीम में डालता है। इसके बारे में यहाँ सबकुछ जानें!

इन्फ्यूजन पंप एक ऐसा सिस्टम है जिसका इस्तेमाल डॉक्टर मरीज के ब्लडस्ट्रीम में दवाएं डालने के लिए करते हैं।

इन्फ्यूजन पंप की टाइप

कुल मिलाकर इन्फ्यूजन पंप दो तरह के होते हैं:

एपिड्यूरल इन्फ्यूजन पंप (epidural infusion pump) दवाओं को आंतरिक रूप से शरीर में पहुँचाने का एक सिस्टम है। इसका मतलब है, दवा सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूइड तक पहुंचती है जो रीढ़ की हड्डी को घेरे रहती है। इसके लिए महंगी सामग्रियों की ज़रूरत होती है। इस वजह से डॉक्टर आमतौर पर इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा बीमार या उन लोगों के लिए करते हैं जो बहुत ज्यादा तकलीफ में हैं।

दूसरी ओर एक इंट्रावीनस इन्फ्यूजन पंप दवाओं को सीधे रोगी के रक्तप्रवाह में डालता है। यह अनिवार्य रूप से एक IV की तरह होता है, लेकिन कुछ दिलचस्प विशेषताएं हैं जो इसे अलग करती हैं। उदाहरण के लिए यह सुरक्षित रूप से बहुत छोटी खुराक को ही शरीर में प्रवेश करा सकता है। एक और फायदा यह है कि इसे प्रोग्राम करना आसान है, जिसका अर्थ है, रोगी को सही समय पर इन्फ्यूजन मिल जाता है।

यह दूसरे तरह का पंप ही निस्संदेह सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद हम सिर्फ इसी टाइप के इन्फ्यूजन पंप का जिक्र करेंगे।

इसे भी पढ़ें : 3 नेचुरल सॉल्यूशन जो बेली बटन की सफ़ाई करने में असरदार हैं

इन्फ्यूजन पंप की बदौलत मेडिकल टीम आसानी से विभिन्न रासायनिक कम्पाउंड का मैनेजमेंट कर सकती है।

इन्फ्यूजन पंप कैसे काम करता है?

कुछ क्लिनिकल मामलों में डॉक्टर मरीज की देह में आवश्यक केमिकल कम्पाउंड प्रवेश कराने के लिए इस डिवाइस का सहारा लेते हैं। वे रोगी के IV पर दबाव उत्पन्न करने के लिए मशीन को प्रोग्राम करते हैं। इस तरह यह रोगी के ब्लडस्ट्रीम में केमिकल को ट्रांसफर करने में सक्षम है।

इन्फ्यूजन पंप कैसे काम करता है?

अनिवार्य रूप से इस तरह प्रवेश कराई जाने वाली दवाएं दो तरह की होती हैं।

एक तरफ एंटरल इन्फ्यूजन का इस्तेमाल किया जा सकता है (ओरल तरीके से)। दूसरी ओर डॉक्टर पैरेंटेरल इन्फ्यूजन (IV का उपयोग करके) का सहारा ले सकते हैं। इस बीच पंप लगातार या रुक-रुक कर दवाओं को भीतर प्रवेश करा सकता है।

इस तरह, नर्स इन तरल पदार्थों को ट्रान्सफर करने में वक्त और ऊर्जा बचाती हैं। अतीत में उन्हें रोगी की स्थिति, कैथेटर, प्रक्रिया में लगने वाले वक्त आदि की निगरानी करनी पड़ती थी।

इन्फ्यूजन पंप की बदौलत वे ज्यादा सटीक तरह से खुराक को माप सकते हैं और रोगी हिल-डुल सकता है (एक सीमा तक)। इसके अलावा, ये पंप संभावित जोखिम या जटिलताओं को भी घटा देते हैं।

कुल मिलाकर विभिन्न प्रकार के एम्बुलेटरी इन्फ्यूजन पंप हैं। अपनी क्षमता और आवश्यक प्रोग्रामिंग टाइप के आधार पर वे अलग-अलग होते हैं।

पेशेंट केयर

आम तौर पर मेडिकल टीम बताएगी कि रोगी पर इन्फ्यूजन पंप का इस्तेमाल कैसे करना है। वे इलाज के दौरान इस डिवाइस के साथ एहतियात बरतने वाली ढेर सारी सिफारिशें करेंगे।

इन मशीनों को प्रोग्राम करना आसान होता है। फिर भी अगर कोई सवाल है तो रोगी को किसी एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए। कभी-कभी, नर्सें ऑटोमेटेड पासवर्ड-प्रोटेक्टेड प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल करती हैं जिससे भ्रमित हो जाने वाले मरीज अपनी इन्फ्यूजन रेट को न बदल सकें

इसे भी पढ़ें : नेचुरल तरीके से त्वचा में कसावट लाने की 6 टिप्स

इसके अलावान डॉक्टर को बैटरी बैटरी को भी एडजस्ट करना चाहिए जिससे मशीन कभी डिस्कनेक्ट न हो। कुछ क्लिनिकल ​​मामलों में मेडिकल टीम को शुरुआती खुराक एंटर करने की ज़रूरत हो सकती है (जैसे कि सिरिंज इन्फ्यूजन पंप की ज़रूरत होती है)।

अंत में डॉक्टर को प्रोसीजर के दौरान अपनाई जाने वाली लाइफस्टाइल के बारे में मरीज को सलाह देनी चाहिए। दूसरी बातों के अलावा वे व्यक्तिगत स्वच्छता, डाइट और फिजिकल एक्टिविटी का भी ध्यान में रखेंगे।

  • Santos Ramos, B.; Guerrero Aznar, M.D. (1994). «13. Bombas de infusión». Administración de medicamentos: teoría y práctica. Ediciones Díaz de Santos.