माइक्रा : दुनिया का सबसे छोटा गैर-सर्जिकल इम्प्लांट पेसमेकर

दिसम्बर 3, 2018
इसका उपयोग नए मरीजों तक ही सीमित है, फिर भी पारंपरिक पेसमेकर का उपयोग कर रहे लोगों के लिए यह नहीं है। फिर भी माइक्रा अपने छोटे आकार और आसान इंस्टालेशन के कारण एक क्रांतिकारक डिवाइस है।

इसे माइक्रा के नाम से जाना जाता है। खुद इसका नाम ही इस क्रांतिकारी पेसमेकर की अद्भुत तकनीक का वर्णन करता है जो इस डिवाइस तक पहुंच वाले हजारों लोगों का जीवन तेजी से बदल रही है।

अभी हाल तक, पेसमेकर नाज़ुक ओपन हार्ट सर्जरी के जरिये मरीजों के शरीर में लगाए जाते थे। समय के साथ रोगियों की हार्ट बीट को नियंत्रित करने के उद्देश्य के तहत इन उपकरणों का आकार कम होता गया है।

वह साल 2013 का अंत था, जब मेडट्रॉनिक कंपनी ने दुनिया को कुछ अनोखा, कुछ हद तक जटिल और मेडिसिन के क्षेत्र में एक नायाब क्रांति दी।

यह था माइक्रा, दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर जिसे सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना भी लगाया जा सकता था

यह कुछ ख़ास है जिसे हम आपके साथ शेयर करना चाहते हैं।

माइक्रा, ज़िन्दगी के साथ धड़कता हुआ 

इस डिवाइस को 2013 में ही पेश किया गया था। लेकिन यह सभी जानते हैं, किसी भी नई तकनीक या दवा को मंजूरी देने, बढ़ावा देने और वितरित करने की पूरी प्रक्रिया बहुत धीमी रफ़्तार से चलती है।

  • माइक्रा को 2015 में CE की मंजूरी मिली। इसी समय यूरोपीय संघ के भीतर इसका प्रचार और वितरण शुरू हुआ।
  • सख्त परीक्षणों के बीच पारंपरिक पेसमेकर के मुकाबले इसने शानदार दक्षता और विश्वसनीयता दिखायी। यह कुछ ऐसा क्रांतिकारी बदलाव है कि उसके बाद से सिर्फ उम्मीद की किरणें और अच्छे नतीजे ही लेकर आया है।
  • अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ने साल 2016 के मध्य तक आते-आते माइक्रा को मंजूरी दे दी। अब तक, जो प्रत्यारोपण किए गए हैं वे बहुत सकारात्मक हैं और हमने पाया है कि यह पेसमेकर ज्यादातर हेल्थ बीमा योजनाओं द्वारा कवर किया जाता है

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पेसमेकर: दिल

दुनिया के सबसे छोटे पेसमेकर की खासियत

माइक्रा पेसमेकर 24 मिलीमीटर लम्बा होता है। आकार में यह 1 यूरो के सिक्के के समान है। 2014 और 2015 के बीच इसने एक ग्लोबल ट्रायल में सभी प्रयोगात्मक परीक्षणों को पास कर लिया। यह इसकी इनोवेटिव टेक्नोलॉजी की पुष्टि करता है।

इस पेसमेकर की विशेषताएं हैं:

  • यह केबल या बैटरी के बिना एक सबक्यूटेनियस कैप्सूल है।
  • इसे प्रत्यारोपित करने के लिए ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं होती।
  • ट्रांस-कैथेटर टेक्नोलॉजी के जरिये इसे रोगी के दिल में प्लांट किया जाता है। व्यक्ति की ग्रोइन (groin) में मौजूद एक नस से होते हुए दायी वेंट्रिकल में स्थापित हो जाने तक यह भीतर घुसती चली जाती है।
सबसे छोटा पेसमेकर: माइक्रा

  • यह इनोवेटिव पेसमेकर छोटे दांतों या स्टिच से दिल को जकड़े हुए अपनी जगह पर बना रहता है। किसी केबल की जरूरत नहीं होती।

  • इसके बाद रोगी की गतिविधि के साथ एडजस्ट करते हुए, दिल की धड़कन को बनाए रखने के लिए यह इलेक्ट्रिक आवेगों को उत्सर्जित करना शुरू कर देता है

  • “त्वचा के नीचे सर्जिकल पॉकेट डालना जरूरी नहीं होता है”। दूसरे शब्दों में कोई नोटिस भी नहीं कर पाता कि रोगी के पास पेसमेकर है, क्योंकि यह अदृश्य होता है। कैप्सूल हार्ट में मजबूती से “इनस्टॉल” रहता है।

  • अब चीरा लगाने, जख्मों के निशान या लंबे समय तक अस्पताल में रहना जरूरी नहीं है।

हृदय रोगियों के लिए बड़ा बदलाव

यह नई तकनीक सिर्फ मेडिसिन के क्षेत्र में ही एक नया कदम नहीं है। हमें उन रोगियों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक दबाव को नहीं भूलना चाहिए जिन्हें एक पेसमेकर को प्लांट करने के लिए सर्जरी से गुजरना पड़ता था।

  • यह डिवाइस साधारण तरीके से लगायी जाती है जो कोई निशान नहीं छोड़ती। कोई समस्या आती है, तो इसे बस “पुनर्स्थापित” किया जा सकता है।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार स्थापित होने पर माइक्रा पूरी तरह स्थिर  हो जाता है। पारंपरिक पेसमेकर के विपरीत, यह किसी भी तरह से दिल के टिश्यू को नुकसान नहीं पहुंचाता।
  • यह दिल की बीमारियों के इलाज में एक नया कदम है जो डॉक्टरों और मरीजों को एक समाधान देता करता है जो सरल और सुरक्षित दोनों है।

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पेसमेकर: माइक्रा

नकारात्मक पहलू जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए

माइक्रो पेसमेकर मेडिसिन की ​​दुनिया में और दिल के रोगियों के बीच एक क्रांति है। हालांकि डॉक्टर हमें बताते हैं, यह केवल शुरुआत है।

हमें उम्मीद है, कुछ सालों में यह प्रणाली सभी मामलों में समाधान लेकर आयेगी। उम्मीद है, समय के साथ इस डिवाइस की आयु में सुधार होगा।

अभी माइक्रा की निम्नलिखित सीमाएं हैं:

  • यह सिर्फ 10 साल तक चलता है। फिर इसे बदला जाना चाहिए।
  • ध्यान में रखने वाली एक और बात यह है कि इस डिवाइस का उपयोग बहुत मोटापे वाले मरीजों के लिए नहीं किया जा सकता। इसकी कुछ बड़ी सीमाएं हैं, और सही परिणामों की गारंटी के लिए और प्रगति होनी चाहिए।
  • साथ ही, हम यह नहीं भूल सकते कि माइक्रा को उन मरीजों में स्थापित नहीं किया जा सकता जिनके पास पहले से ही पारंपरिक पेसमेकर है

जो लोग इस तकनीक से अभी लाभ नहीं उठा सकते हैं उन्हें वर्तमान में उपलब्ध उपकरणों के साथ अपनी हृदय गति को नियंत्रित करना जारी रखना होगा (जो समान रूप से प्रभावी है)। आशा है, आने वाले वर्षों में विज्ञान हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं के लिए एक सरल और प्रभावी जवाब देने के लिए आगे बढ़ेगा।

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