रोज़ाना ग्रीन टी पीने का हमारे शरीर पर क्या असर होता है?

ग्रीन टी हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है, बशर्ते कि हम उसका ज़रूरत से ज़्यादा सेवन न कर लें। ग्रीन टी का पूरा लाभ उठाने के लिए आपको दिन में दो कप से ज़्यादा नहीं पीने चाहिए।
रोज़ाना ग्रीन टी पीने का हमारे शरीर पर क्या असर होता है?

आखिरी अपडेट: 26 जून, 2019

ग्रीन टी नाम की नेचुरल ड्रिंक कई शताब्दियों से चीन की पारंपरिक औषधि प्रणाली का हिस्सा रहा है। वक़्त बीतने के साथ-साथ वह एशियाई महाद्वीप के और देशों में भी मशहूर हो गया। आजकल दुनिया भर में कई लोग रोज़ाना ग्रीन टी का सेवन करते हैं

सामान्य चाय के विपरीत, यह चाय फर्मेंटेशन प्रक्रिया से नहीं गुज़रती। इसीलिए उसके सारे एंटीऑक्सीडेंट और पोलीफिनॉल बचे रह जाते हैं। इसके बावजूद, हर रोज़ ग्रीन टी पीना कोई इतना मुश्किल काम भी नहीं है।

इसमें मौजूद तत्वों में आपकी सेहत के लिए कई लाभकारी गुण छिपे होते हैं। उनकी मदद से आप अपने वज़न को काबू में रख सकते हैं और यहाँ तक कि कैंसर जैसी बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।

(एक सीमा में रहकर) रोज़ाना ग्रीन टी पीने के कई लाभ होते हैं। इस लेख में हम आपको उसके सबसे ज़रूरी फायदों के बारे में बताएँगे। हम आपको उन परिस्थितियों के बारे में भी बताएँगे, जिनमें आपको ग्रीन टी से परहेज़ करना चाहिए।

रोज़ाना ग्रीन टी पीकर अपना वज़न कम कर सकते हैं

ग्रीन टी पीकर अपना वज़न घटाएं

ग्रीन टी में पोलीफिनॉल की बड़ी मात्रा होती है, जिनका संबंध हमारे मेटाबोलिज्म में सुधार लाकर हमारे वज़न को कम करने की उसकी काबिलियत से होता है।

इन एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से हमारे द्वारा खर्च की गई ऊर्जा में बढ़ोतरी आ जाती है। हमारे शरीर में कैलोरीज़ को चरबी की तरह जमा होने से भी वे रोकते हैं

डायबिटीज को रोकने में ग्रीन टी मददगार साबित हो सकती है

इस प्राकृतिक पेय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हमारे खून में ग्लूकोस के स्तर को नियंत्रित कर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़  से हमें बचाए रखने में मददगार होते हैं

रोज़ाना खाने के बाद ग्रीन टी पीने से हमारी शुगर काबू में रहती है। साथ ही, हमारा शरीर शुगर को चरबी की तरह जमा करने की अपनी ख़राब आदत की चपेट में आने से भी बचा रहता है।

ग्रीन टी हमारे कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य की देखभाल करती है

ग्रीन टी पीकर अपने कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य की रक्षा करें

रोज़ाना ग्रीन टी का एक छोटा कप पी लेने से कई तरह की कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल का जमाव और सर्कुलेटरी सिस्टम की बीमारियाँ इनके प्रमुख उदाहरण हैं।

ग्रीन टी के एंटीऑक्सीडेंट्स खून के थक्के नहीं बनने देते व हमारी धमनियों की सफाई करते रहते हैं। इतना ही नहीं, हमारे खून में लिपिड्स की बहुतायत को भी वे काबू में रखने में मदद करते हैं।

कई विशेषज्ञों का दावा है कि उसके सक्रिय तत्व दिल के दौरे, सदमे और थ्रोम्बोसिस के खतरे को भी कम कर देते हैं

ग्रीन टी पीने से हमारी आँखें स्वस्थ बनी रहती हैं

पोलीफिनॉल्स के अलावा, ग्रीन टी में विटामिन सी और ई, ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन जैसे पदार्थ भी होते हैं, जिन्हें हमारी आँखों में मौजूद अलग-अलग टिशू सोख लेते हैंइन टिशू में रेटिना भी शामिल होता है, जिसे मिलने वाले फायदे ग्लूकोमा और आँखों की अन्य बीमारियों से हमें बचाए रखते हैं।

ग्रीन टी के लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ मिलकर ये पदार्थ कोशिकाओं की ऑक्सीडेशन से पैदा होने वाले तनाव को कम करने में सहायक होते हैं। आँखें खराब होने का प्रमुख कारण यही होता है।

मस्सों से मुकाबला

ग्रीन टी को पीने से मस्सों के लिए ज़िम्मेदार ह्यूमन पेपिलोमा वायरस  (एच.पी.वी.) को फैलने से रोका जा सकता है। ग्रीन टी के प्रमुख तत्वों में से एक एपिगालोकेटचिन गैलीट, एच.पी.वी. के फैलाव को बढ़ावा देने वाली सेलुलर साइकिल को रोक देता है

अल्झाइमर्स और पार्किन्सन्स रोग पर ग्रीन टी का असर

अल्झाइमर्स को रोकने में ग्रीन टी की भूमिका

मुक्त कणों की वजह से होने वाले नुकसान को धीमा कर देने की अपनी क्षमता की बदौलत, दिमाग को पहुँचने वाले नुकसान की रोकथाम में ग्रीन टी बहुत फायदेमंद साबित होती है। अल्झाइमर्स और पार्किन्सन्स जैसे रोगों को पनपने से रोकने में भी वह बेहद कारगर होती है।

कोशिकाओं की डिजनरेशन के नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ़ किसी रक्षा कवच की तरह काम करते हुए ग्रीन टी के एंटीऑक्सीडेंट्स न्यूरल गतिविधियों के लिए लाभकारी होते हैं।

ग्रीन टी पथरी से हमें बचाती है

हर रोज़ थोड़ी-सी ग्रीन टी पी लेना गुर्दों में पथरी की जमाव के जोखिम को कम करने का एक अच्छा तरीका होता है।

उसके तत्व कैल्शियम ऑक्सालेट के जमाव और आकार को कम कर देते हैं। हमारी किडनी में जमकर पथरी पैदा करने के पीछे कैल्शियम ऑक्सालेट जैसे पदार्थों का ही हाथ जो होता है।

कैविटीज़ का मुकाबला

कैविटीज़ के खिलाफ़ लड़ने में ग्रीन टी मददगार होती है

ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स  नामक रासायनिक एंटीऑक्सीडेंट गले के इन्फेक्शन, कैविटी और मुंह की अन्य बीमारियाँ पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया का नाश कर देता है।

हमें ग्रीन टी से परहेज़ कब करना चाहिए?

इन ख़ास परिस्थितियों में आपको ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए।

एक दिन में आपको दो कप से ज़्यादा नहीं पीने चाहिए। ज़रूरत से ज़्यादा ग्रीन टी पी लेने से आप इन साइड इफेक्ट्स की चपेट में आ सकते हैं:

  • सिरदर्द
  • घबराहट
  • दस्त
  • नींद न आना
  • चिड़चिड़ापन
  • दिल की गति (हार्ट रेट) का तेज़ हो जाना
  • चक्कर आना

किसी तरह की कोई भी दवाई या फिर शराब आदि जैसी चीज़ों का सेवन करते हुए भी आपको ग्रीन टी से परहेज़ करना चाहिए। उसमें कैफीन जो होता है। कैफीन को अन्य पदार्थों से मिलाए जाने पर वह कई अनचाहे प्रभावों को जन्म दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती या अपने नवजात शिशु को स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी ग्रीन टी से परहेज़ करना चाहिए, नहीं तो उनके बच्चे को नुकसान भी पहुँच सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया, और पाचन तंत्र की समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भी इस पेय को लेने से बचना चाहिए। अगर वे उसे पीते भी हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर उन्हें उसका कम से कम सेवन करना चाहिए।

ग्रीन टी का सूझबूझ-भरा सेवन ही यह निर्धारित करता है कि वह आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होगी या नुकसानदेह। अपना वज़न कम करने की उतावली में कई लोग हद से ज़्यादा ग्रीन टी पी लेने की गलती कर बैठते हैं। उन्हें इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं होता कि उनकी सेहत के लेने के देने भी पड़ सकते हैं।

ध्यान रहे कि दिन में आप दो कप से ज़्यादा न पिएं। इस चमत्कारी चाय को अपना काम करने दें ताकि आप देख सकें कि आपके स्वास्थ्य के लिए वह कितनी लाभकारी होती है।

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