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4 कारण जो बताते हैं, बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है

5 मिनट
बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है, यह जानना और समझना माता-पिता के लिए बहुत ही ज़रूरी है। यह सुनिश्चित करना कि आपके बच्चों को पर्याप्त नींद मिले, उनके समग्र विकास के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण है। अच्छी गुणवत्ता वाली नींद अच्छे पोषण जितनी ही महत्वपूर्ण है।
4 कारण जो बताते हैं, बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है
प्रकाशित: 06 सितंबर, 2018 02:30

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब है और उन के लिए अच्छी नींद पोषण से कम महत्वपूर्ण नहीं है। हर कोई यह बात जानता है।  फिर भी कई लोग अपने बच्चों के सोने और जागने के समय पर ध्यान नहीं देते हैं।

हमारी आधुनिक जीवन शैली ने इसे बहुत प्रभावित किया है। माता-पिता काम में इतने व्यस्त हैं। बच्चों के पास इतनी सारी स्कूल की गतिविधियां हैं। हर कोई अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इतना व्यस्त है कि सोने की कुल अवधि लगातार कम हो रही है।

चिंताजनक बात यह है कि कई लोग जानते ही नहीं, उनके बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब है। हालांकि थोड़ी देर के लिए झपकी न लेना या देर से बिस्तर पर जाना हानिकारक नहीं लगता।  लेकिन इन चीजों से वास्तव में नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जो जीवन भर तक चल सकते हैं।

बच्चों के लिए देर से सोना इतना ख़राब क्यों है? इसे बदलने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

यह देखते हुए कि कई माता-पिता इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, हम इससे जुड़े कुछ जोखिमों के बारे में आपको बताएँगे। साथ ही, आपके बच्चों की नींद की आदतों को बदलने में मदद के लिए कुछ सुझाव भी साझा करेंगे।

बच्चे के लिए अच्छी तरह सोना क्यों महत्वपूर्ण है?

बच्चों के लिए देर से सोना खराब है

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है? इसके बारे में जानने से पहले, यह जान लें कि बच्चों को अच्छी नींद की जरूरत क्यों होती है। कुछ बच्चे जल्दी बिस्तर पर जाने से इनकार करते हैं। लेकिन यह आदत जितनी लगती है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

रात भर का आराम ऊर्जा को बढ़ावा देने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। अच्छी नींद मस्तिष्क की “बैटरी” रिचार्ज करती है, ताकि आप पूरे दिन एक बढ़िया मानसिक प्रदर्शन कर सकें। इसलिए एक अच्छी नींद लेने के बाद बच्चे का दिमाग पूरी तरह सतर्क और शांत होगा।

दूसरी तरफ, नींद भौतिक क्षमताओं को भी प्रभावित करती है। जब आप आराम करते हैं, तो मांसपेशियां दिन भर के तनाव को बाहर निकल देती हैं। इससे आप नई चुनौतियों को लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह ज़ाहिर है, आपके बच्चों के स्कूल और खेल गतिविधियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

इसे भी पढ़ें:  भावनात्मक रूप से ज़ख्मी उस बच्चे के लिए एक पत्र जो जताता है कि सबकुछ ठीक है

स्वस्थ नींद का क्या मतलब है

  • स्वस्थ नींद में न केवल जल्दी सोना शामिल होता है, बल्कि यह भी होता है:
  • पर्याप्त नींद लेना (हर रात 10 घंटे से कम नहीं)
  • निर्बाध नींद लेना
  • पर्याप्त मात्रा में झपकी लेना

नींद का एक शेड्यूल बच्चे के सर्काडियन रिद्म (शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी) के साथ जुड़ा है।

यदि उपर्युक्त बातों में से कोई भी पूरी नहीं होती है, तो यह नींद की कमी के लक्षणों को शुरू कर सकता है। अच्छी खबर यह है कि कई ऐसी आदतें हैं जो उन्हें ट्रैक पर रखने में मदद कर सकती हैं।

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है

माता-पिता के लिए सबसे कठिन चीजों में से एक है, अपने बच्चों को जल्दी सुलाना। ध्यान बंटाने वाली इतनी सारी चीज़ों के साथ, बच्चे बिस्तर पर बिलकुल नहीं जाना चाहते।

लेकिन इस मुद्दे पर ध्यान न देने से उनके विकास को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि यह अप्रासंगिक लग सकता है, लेकिन देर से सोना बच्चों के लिए ख़राब है। यह अनेक समस्याओं का कारण हो सकता है।

एकाग्रता की कमी

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब - एकाग्रता में कमी

खराब गुणवत्ता वाली नींद बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती है। अपर्याप्त नींद  बच्चे को मानसिक रूप से सतर्क रहने और अपनी गतिविधियों पर ध्यान देने में असमर्थ बनाती है।

नींद की कमी कक्षा में ध्यान न दे पाने का सबसे आम कारण है। इसके अलावा, यह बच्चे को कम सक्रिय और आलसी बना सकता है।

इसे भी पढ़ें: बचपन में प्यार न मिलने पर बड़े होकर लोग कैसे बन जाते हैं

यह दिन भर नींद आने का कारण बन जाता है

देर से सोना बच्चों को सारा दिन नींद आते रहने का कारण बन सकता है। पर्याप्त नहीं सोना (10 या 12 घंटे से कम, उनकी उम्र के आधार पर) उन्हें पूरे दिन थका हुआ और उनींदा महसूस करायेगा।

थकावट महसूस होना

उनींदा होने से थकान महसूस होती है। कुछ लोगों के सोचने के विपरीत, केवल वयस्क ही इस समस्या से पीड़ित नहीं हैं। खराब गुणवत्ता वाली नींद के परिणामस्वरूप बच्चे भी कमजोरी और थकान से पीड़ित हो सकते हैं।

वे एक “हाइपर-अलर्ट” स्थिति में भी पहुँच सकते हैं, जो कई अन्य नींद के विकार पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह स्थिति मस्तिष्क को जागृत रखने वाले हार्मोन, जैसे एड्रेनालाईन, के स्राव को बढ़ाती है।

बच्चों के लिए देर से सोना थकान का कारण है

यह मोटापे के जोखिम को बढ़ाता है

16 देशों में किए गए 29 अध्ययनों के आंकड़ों को एकत्रित करके एक वैज्ञानिक शोध किया गया। शोध से मिले सबूतों के मुताबिक, नींद के खराब पैटर्न बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं। शोध में बताया गया है कि देर से सोने या बाधित नींद के कारण मोटापे का जोखिम बढ़ जाता है।

अपने बच्चों की नींद की आदतें कैसे सुधारें

माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे अपनी नींद की समस्याओं को खुद हल नहीं कर सकते। उन्हें इस काम में उनकी मदद की ज़रूरत होती है। ऐसा करने के लिए आपको उनकी नींद के पैटर्न की निगरानी करना शुरू करना होगा। साथ ही, ध्यान रखना होगा कि क्योंकि देर से सोना बच्चों के लिए ख़राब है, इसलिए वे 7:30 से 8:30 के बीच सोने अवश्य चले जाएँ।

पूरे परिवार को इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। जब बच्चे देखते हैं कि उनके माता-पिता और भाई बहन भी पर्याप्त नींद ले रहे हैं, तो उन के लिए यह समझना काफी आसान हो जाता है कि उन्हें भी ऐसा ही करना चाहिए। ।

साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि उनकी नींद में कोई खलल न पड़े। इसके लिए, उनके कमरे में टीवी, कंप्यूटर या टैबलेट जैसी ध्यान बंटाने वाली चीज़ें नहीं होनी चाहियें।

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब है और उन के लिए अच्छी नींद पोषण से कम महत्वपूर्ण नहीं है। हर कोई यह बात जानता है।  फिर भी कई लोग अपने बच्चों के सोने और जागने के समय पर ध्यान नहीं देते हैं।

हमारी आधुनिक जीवन शैली ने इसे बहुत प्रभावित किया है। माता-पिता काम में इतने व्यस्त हैं। बच्चों के पास इतनी सारी स्कूल की गतिविधियां हैं। हर कोई अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इतना व्यस्त है कि सोने की कुल अवधि लगातार कम हो रही है।

चिंताजनक बात यह है कि कई लोग जानते ही नहीं, उनके बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब है। हालांकि थोड़ी देर के लिए झपकी न लेना या देर से बिस्तर पर जाना हानिकारक नहीं लगता।  लेकिन इन चीजों से वास्तव में नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जो जीवन भर तक चल सकते हैं।

बच्चों के लिए देर से सोना इतना ख़राब क्यों है? इसे बदलने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

यह देखते हुए कि कई माता-पिता इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, हम इससे जुड़े कुछ जोखिमों के बारे में आपको बताएँगे। साथ ही, आपके बच्चों की नींद की आदतों को बदलने में मदद के लिए कुछ सुझाव भी साझा करेंगे।

बच्चे के लिए अच्छी तरह सोना क्यों महत्वपूर्ण है?

बच्चों के लिए देर से सोना खराब है

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है? इसके बारे में जानने से पहले, यह जान लें कि बच्चों को अच्छी नींद की जरूरत क्यों होती है। कुछ बच्चे जल्दी बिस्तर पर जाने से इनकार करते हैं। लेकिन यह आदत जितनी लगती है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

रात भर का आराम ऊर्जा को बढ़ावा देने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। अच्छी नींद मस्तिष्क की “बैटरी” रिचार्ज करती है, ताकि आप पूरे दिन एक बढ़िया मानसिक प्रदर्शन कर सकें। इसलिए एक अच्छी नींद लेने के बाद बच्चे का दिमाग पूरी तरह सतर्क और शांत होगा।

दूसरी तरफ, नींद भौतिक क्षमताओं को भी प्रभावित करती है। जब आप आराम करते हैं, तो मांसपेशियां दिन भर के तनाव को बाहर निकल देती हैं। इससे आप नई चुनौतियों को लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह ज़ाहिर है, आपके बच्चों के स्कूल और खेल गतिविधियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

इसे भी पढ़ें:  भावनात्मक रूप से ज़ख्मी उस बच्चे के लिए एक पत्र जो जताता है कि सबकुछ ठीक है

स्वस्थ नींद का क्या मतलब है

  • स्वस्थ नींद में न केवल जल्दी सोना शामिल होता है, बल्कि यह भी होता है:
  • पर्याप्त नींद लेना (हर रात 10 घंटे से कम नहीं)
  • निर्बाध नींद लेना
  • पर्याप्त मात्रा में झपकी लेना

नींद का एक शेड्यूल बच्चे के सर्काडियन रिद्म (शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी) के साथ जुड़ा है।

यदि उपर्युक्त बातों में से कोई भी पूरी नहीं होती है, तो यह नींद की कमी के लक्षणों को शुरू कर सकता है। अच्छी खबर यह है कि कई ऐसी आदतें हैं जो उन्हें ट्रैक पर रखने में मदद कर सकती हैं।

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब क्यों है

माता-पिता के लिए सबसे कठिन चीजों में से एक है, अपने बच्चों को जल्दी सुलाना। ध्यान बंटाने वाली इतनी सारी चीज़ों के साथ, बच्चे बिस्तर पर बिलकुल नहीं जाना चाहते।

लेकिन इस मुद्दे पर ध्यान न देने से उनके विकास को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि यह अप्रासंगिक लग सकता है, लेकिन देर से सोना बच्चों के लिए ख़राब है। यह अनेक समस्याओं का कारण हो सकता है।

एकाग्रता की कमी

बच्चों के लिए देर से सोना ख़राब - एकाग्रता में कमी

खराब गुणवत्ता वाली नींद बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती है। अपर्याप्त नींद  बच्चे को मानसिक रूप से सतर्क रहने और अपनी गतिविधियों पर ध्यान देने में असमर्थ बनाती है।

नींद की कमी कक्षा में ध्यान न दे पाने का सबसे आम कारण है। इसके अलावा, यह बच्चे को कम सक्रिय और आलसी बना सकता है।

इसे भी पढ़ें: बचपन में प्यार न मिलने पर बड़े होकर लोग कैसे बन जाते हैं

यह दिन भर नींद आने का कारण बन जाता है

देर से सोना बच्चों को सारा दिन नींद आते रहने का कारण बन सकता है। पर्याप्त नहीं सोना (10 या 12 घंटे से कम, उनकी उम्र के आधार पर) उन्हें पूरे दिन थका हुआ और उनींदा महसूस करायेगा।

थकावट महसूस होना

उनींदा होने से थकान महसूस होती है। कुछ लोगों के सोचने के विपरीत, केवल वयस्क ही इस समस्या से पीड़ित नहीं हैं। खराब गुणवत्ता वाली नींद के परिणामस्वरूप बच्चे भी कमजोरी और थकान से पीड़ित हो सकते हैं।

वे एक “हाइपर-अलर्ट” स्थिति में भी पहुँच सकते हैं, जो कई अन्य नींद के विकार पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह स्थिति मस्तिष्क को जागृत रखने वाले हार्मोन, जैसे एड्रेनालाईन, के स्राव को बढ़ाती है।

बच्चों के लिए देर से सोना थकान का कारण है

यह मोटापे के जोखिम को बढ़ाता है

16 देशों में किए गए 29 अध्ययनों के आंकड़ों को एकत्रित करके एक वैज्ञानिक शोध किया गया। शोध से मिले सबूतों के मुताबिक, नींद के खराब पैटर्न बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं। शोध में बताया गया है कि देर से सोने या बाधित नींद के कारण मोटापे का जोखिम बढ़ जाता है।

अपने बच्चों की नींद की आदतें कैसे सुधारें

माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे अपनी नींद की समस्याओं को खुद हल नहीं कर सकते। उन्हें इस काम में उनकी मदद की ज़रूरत होती है। ऐसा करने के लिए आपको उनकी नींद के पैटर्न की निगरानी करना शुरू करना होगा। साथ ही, ध्यान रखना होगा कि क्योंकि देर से सोना बच्चों के लिए ख़राब है, इसलिए वे 7:30 से 8:30 के बीच सोने अवश्य चले जाएँ।

पूरे परिवार को इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। जब बच्चे देखते हैं कि उनके माता-पिता और भाई बहन भी पर्याप्त नींद ले रहे हैं, तो उन के लिए यह समझना काफी आसान हो जाता है कि उन्हें भी ऐसा ही करना चाहिए। ।

साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि उनकी नींद में कोई खलल न पड़े। इसके लिए, उनके कमरे में टीवी, कंप्यूटर या टैबलेट जैसी ध्यान बंटाने वाली चीज़ें नहीं होनी चाहियें।




यह पाठ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया जाता है और किसी पेशेवर के साथ परामर्श की जगह नहीं लेता है। संदेह होने पर, अपने विशेषज्ञ से परामर्श करें।