मेलाटोनिन को नियंत्रित करके पाएं चैन की नींद

28 जून, 2018
अंधेरा दिमाग को संकेत भेजता है कि यह सोने का समय है। बिस्तर पर जाने से पहले टीवी या फोन की चमकदार रोशनी से बचें और भरपूर नींद लें। मेलाटोनिन को नियंत्रित करने में कुछ आदतें आपकी सहायता कर सकती हैं।
 

मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर के कई क्रिया-कलापों के लिए जिम्मेदार है। इनमें सोने और जागते रहने की प्रक्रिया भी शामिल हैं।

इसी कारण शरीर को अच्छी तरह आराम देने और अनिद्रा जैसी नींद की आम समस्याओं से बचाव के लिए मेलाटोनिन पर नियंत्रण को अहम माना जाता है।

इस पोस्ट में हम बताएंगे कि आप मेलाटोनिन को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं।

मेलाटोनिन के बारे में क्या जानना ज़रूरी है?

मेलाटोनिन

सबसे पहले इस अहम हार्मोन के बारे में बुनियादी बातों को जान लेना बहुत ज़रूरी है।

मेलाटोनिन स्लीप-साइकल यानी निद्रा-चक्र को नियमित करने जैसे कई विशिष्ट कार्य करता है। इसका निर्माण रात के समय दिमाग में स्थित शीर्ष ग्रंथि (पिनीयल ग्लैंड) में होता है।

रात में मेलाटोनिन के कार्यः

  • यह दिल की धड़कन और रक्तचाप को स्टेबल रखता है।
  • आपकी आंखों की रेटिना को आराम पहुंचाता है।
  • फ्री रेडिकल्स से मुक्ति पाने में सहायक है।

यह ग्लैंड हार्मोन को पूरे शरीर में पहुंचाती है और जिसकी मात्रा आपके दिल की धड़कन के अनुसार घटती-बढ़ती है। आपके शरीर में जब मेलाटोनिन का स्तर सामान्य होता है तब आप अच्छी नींद लेते हैं या आराम कर सकते हैं।

इस हार्मोन के साथ बड़ी समस्या तब पेश आती है जब खून में इसकी कमी होने लगती है। ऐसा आम तौर पर तब होता है जब सही आहार न मिलने के कारण आप थक जाते हैं, लगातार एक जगह बैठे-बैठे काम करते हैं या रात के समय कृत्रिम रोशनी में बहुत ज्यादा रहते हैं।

इसके बाद व्यक्ति अनिद्रा का शिकार हो जाता है।

इसके अलावा, मेलाटोनिन वृद्धि हार्मोन और टिश्यू /मांसपेशियों की मरम्मत करने वाले हार्मोन के स्राव को भी बढ़ावा देता है।

टिश्यू और मांसपेशियों की मरम्मत के साथ-साथ ग्रोथ में इसके सहायक होने के कारण ही हम एक बच्चे के रूप में किसी वयस्क की तुलना में ज़्यादा सोते हैं। जब हम बीमार होते हैं या जिम में बहुत ज़्यादा मशक्कत करते हैं तब भी हमारा शरीर अधिक नींद की ‘मांग करता’ है।

 

इतना ही काफी नहीं है, मेलाटोनिन नीचे दिए गए कार्यों को भी करता हैः

  • भूख को नियंत्रित करता है।
  • अंडकोष (टेस्टिकल्स) और अंडाशय (ओवरीज) के विकास और कार्य में भी भूमिका निभाता है।
  • यह एक पावर एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है।
  • कुछ विशिष्ट वायरस और बैक्टीरिया की रोकथाम करके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है

मेलाटोनिन और सेरोटोनिन

वैसे हम कह सकते हैं कि ये दोनों ‘विपरीत’ हार्मोन हैं लेकिन ये इकट्ठे काम करते हैं। इसी कारण हमें शरीर में इन दोनों हार्मोन के सामान्य स्तर की आवश्यकता पड़ती है।

  • जिस प्रकार रात में मेलाटोनिन का उत्पादन बढ़ता है, उसी तरह दिन में सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ जाता है।
  • हमारी रेटिना सूरज की रोशनी ग्रहण कर लेती हैं और यह रोशनी शीर्ष ग्रंथि तक पहुंच जाती है। ऐसा होने पर मेलाटोनिन का उत्पादन बंद हो जाता है और ग्रंथि सेरोटोनिन बनाना शुरू कर देती है।

जब हम अंधेरे में होते हैं तो ठीक इसकी उलटी प्रक्रिया चलती है।

यहां यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि कृत्रिम रोशनी को सूरज की प्राकृतिक रोशनी के समान नहीं माना जा सकता।

इससे आसानी से यह समझा जा सकता है कि सर्दियों में हम अक्सर घर में रहना और आराम करना क्यों पसंद करते हैं जबकि गर्मियों में हम अधिक ऊर्जा के साथ सोकर जागते हैं और ढेर सारे काम करते हैं।

जब हमारे शरीर में सेरोटोनिन पर्याप्त नहीं होता है तो वह हाई कैलोरी या नुकसानदायक खाद्य पदार्थों जैसे कि कुकीज़, कैंडी, चॉकलेट, आइसक्रीम आदि को खाने की इच्छा जाहिर करने लगता है।

इसके उलट, मेलाटोनिन की कमी होने पर हम अनिद्रा या नींद की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। वहीं, इसके ज़रूरत से ज़्यादा हो जाने पर हमें सुस्ती, उदासीनता या कमज़ोरी का अहसास होता है।

मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का महत्व समझने के लिए हमें यहां एक और चर्चित हार्मोन-कॉर्टिसोल की भी बात करनी होगी।

कॉर्टिसोल को ‘स्ट्रेस हार्मोन’ भी कहते हैं। जैसा कि इसका नाम बताता है, यह तनाव के लक्षणों को घटाने या बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

 

इसके अलावा यह सोने और जागने की प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

तनाव होने पर कुछ लोग ज़्यादा देर तक सोना पसंद करते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो सारी रात आंखों में काट देते हैं

इसे समझना आसान है क्योंकि कॉर्टिसोल ही आराम या गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हार्मोन के स्राव को संतुलित करता है।

मेलाटोनिन के उत्पादन को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ

मेलाटोनिन को नियमित करने और रात में रोज़ाना 7-8 घंटे तक सोने के लिए स्वस्थ खुराक लेना आवश्यक है।

सबसे बढ़कर, ट्रॉपिकल फल जैसे कि अनन्नास या सिट्रिक फल जैसे कि संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए।

नीचे दी गईं चीजों को खाकर भी आप अधिक मेलाटोनिन के उत्पादन में अपने शरीर की सहायता कर सकते हैंः

  • ड्राई फ्रूट
  • अंडा
  • मछली
  • दालें
  • जई (ओट) और जौ (बार्ली)
  • मक्का
  • चावल

मेलाटोनिन लेवल को सुधारने के लिए आपकी प्लेट में ये चीजें भी होनी चाहिएः

  • टमाटर
  • आलू
  • रेड वाइन
  • डेयरी प्रोडक्ट
  • टूना़ मछली

मेलाटोनिन को नियमित करने की अच्छी आदतें

संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक आहार खाने के अलावा हम ऐसी कुछ आदतों को अमल में लाने की सलाह देंगे जो मेलाटोनिन को नियंत्रित रखने में उपयोगी हैंः

1. अंधेरे कमरे में सोएं

आपके सोने के कमरे में शटर या परदे लगे होने चाहिए जो बाहर की रोशनी को अंदर अाने से रोकें। इसमें स्ट्रीट लाइट भी शामिल है।

कम रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि “यह सोने का समय है”। एक अंधेरा कमरा भरपूर सुखद नींद को सुनिश्चित करता है।

2. सोने से पहले टीवी न देखें

मेलाटोनिन: जल्दी उठना

आपको हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि चमकदार स्क्रीन के अलावा कुछ विशेष दृश्य, आवाज़ें या ख़बरें दिमाग को “सक्रिय” कर देती हैं और आसानी से आराम की स्थिति में पहुंचने से रोकती हैं

यही कारण है कि मेलाटोनिन को नियंत्रित करने के लिए अपने बेडरूम में टीवी नहीं रखना अच्छा माना जाता है। यही बात फोन पर भी लागू होगी। इसका इस्तेमाल बिस्तर पर जाने से एक घंटा पहले ही रोक देना चाहिए।

 

3. शाम को एक्सरसाइज करना

कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता है कि एक्सरसाइज करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हालांकि अगर आप रात में एक्सरसाइज करते हैं तो आपका शरीर और दिमाग ज़्यादा देर तक ‘अलर्ट’ मोड में रहते हैं। आप जल्द नहीं थकते हैं।

अगर आपके शरीर को फिजिकल एक्टिविटी के कारण हुई क्षति की मरम्मत करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है तो सुबह सोकर उठने में परेशानी होगी।

अगर आप भरपूर आराम पाना चाहते हैं तो शाम से पहले सारा कामकाज निपटाना ही सर्वोत्तम है।

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