सेरब्रल पॉल्ज़ी के बारे में इन तथ्यों को जानना जरूरी है

नवम्बर 25, 2019
सेरब्रल पॉल्ज़ी या मस्तिष्क पक्षाघात चलने-फिरने में होने वाली गड़बड़ी है जो आमतौर पर तीन साल की उम्र से पहले दिखाई पड़ती है। यहां इस बारे में जानिए।

सेरब्रल पॉल्ज़ी एक किस्म की विकलांगता है जो मस्तिष्क में चोट के कारण होती है। यह चोट व्यक्ति के चलने-फिरने में समस्या पैदा करती है क्योंकि यह चलने फिरने और पॉस्चर दोनों पर असर डालती है

उदाहरण के लिए, स्पेन में यह अनुमान लगाया गया था कि हर पाँच सौ बच्चों में से एक बच्चा सेरब्रल पॉल्ज़ी का शिकार है। यह एक आम लेकिन अक्षम बना देने वाली समस्या है। इस लेख में आप सेरब्रल पॉल्ज़ी और इस बीमारी की विभिन्न किस्मों के बारे में जानेंगे।

सेरब्रल पॉल्ज़ी के बारे में क्या पता होना चाहिए?

मस्तिष्क की ऐसी चोट जो सेरब्रल पॉल्ज़ी या मस्तिष्क पक्षाघात (CP) की ओर ले जाती है, आमतौर पर भ्रूण के विकास के दौरान या जीवन के शुरुआती कुछ वर्षों के भीतर होती है। साथ ही, सेरब्रल पॉल्ज़ी से पीड़ित रोगी अक्सर भावनात्मक या बौद्धिक कमियों का शिकार होता है। इसलिए इस स्थिति को अक्सर कई अक्षमताओं के रूप में जाना जाता है।

सेरब्रल पॉल्ज़ी क्या है?

सेरब्रल पॉल्ज़ी रोगों के एक ग्रुप को कहते हैं जो किसी व्यक्ति के चलने-फिरने, संतुलन और पॉस्चर को प्रभावित करते हैं। यह आमतौर पर जीवन के पहले कुछ वर्षों में प्रकट होता है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह चोट गर्भावस्था के दौरान ही होती है।

सेरब्रल पॉल्ज़ी आमतौर पर दूसरी समस्याओं के साथ होती है। उदाहरण के लिए इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए चलना या लिखना जैसे काम मुश्किल हो जाते हैं।

सेरब्रल पॉल्ज़ी के शिकार लोग अक्सर दूसरी बीमारियों और मानसिक विकलांगता से पीड़ित होते हैं। हालांकि यह सब मस्तिष्क की चोट के स्थान और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

दुर्भाग्य से सेरब्रल पॉल्ज़ी एक स्थायी बीमारी है। क्योंकि मस्तिष्क की चोट और साथ में न्यूरोलॉजिकल क्षति को ठीक नहीं किया जा सकता। जैसा कि रोगी के तीन साल तक पहुंचने से पहले ज्यादातर मामलों में होता है, लक्षण अक्सर बहुत जल्दी दिखाई देते हैं।

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सेरब्रल पॉल्ज़ी के लक्षण

लक्षण

सेरब्रल पॉल्ज़ी आमतौर पर शिशुओं में दिखाई पड़ती है क्योंकि उनके लिए बैठना, क्रॉल करना और यहां तक ​​कि मुस्कुराना मुश्किल हो सकता है। यह बीमारी पैरालिसिस की किस्म के आधार पर मांसपेशियों के सुडौलपन को अलग-अलग तरीके से बदल देती है।

हालांकि इस बीमारी के लक्षण सिर्फ चलने-फिरने से नहीं जुड़े होते हैं। यह सुनने की समस्या भी पैदा कर सकती है और स्पर्श (agnosia) द्वारा संवेदनाओं को पहचानने और उनकी व्याख्या करने में भी समस्या पैदा कर सकती है। यह कोऑर्डिनेशन में कमी, एकाग्रता में गड़बड़ी या डिस्काइनेसिया का कारण भी बन सकता है।

सेरब्रल पॉल्ज़ी किस्में

अलग-अलग लक्षणों वाले सीपी की कई किस्में हैं:

स्पैस्टिक पॉल्ज़ी (Spastic palsy): इस प्रकार के सीपी से पीड़ित लोगों को अपनी मांसपेशियों को नियंत्रित करने में बहुत मुश्किलें होती हैं, जो कमजोर पड़ जाती हैं। इसके अलावा, यह आमतौर पर हाथ और पैर को प्रभावित करता है।

डिस्काइनेटिक पॉल्ज़ी (Dyskinetic palsy): इसमें अनैच्छिक और धीमी गति से चलने वाले पदार्थ होते हैं, जो थकान और मजबूत भावनाओं के साथ खराब हो जाते हैं। वास्तव में, यह आराम और नींद के साथ सुधार करता है। इस प्रकार के CP से पीड़ित व्यक्ति के भाषण को समझना आम तौर पर मुश्किल है।

गतिविभ्रम (Ataxia): यह प्रकार सेरिबैलम को प्रभावित करता है, जो मस्तिष्क का हिस्सा है जो संतुलन को नियंत्रित करता है।

मिश्रित सेरब्रल पॉल्ज़ी (Mixed cerebral palsy): यह प्रकार कई क्षेत्रों में चोटों के कारण होता है, इसलिए विभिन्न लक्षणों का एक संयोजन होता है।

दूसरी ओर, सेरेब्रल पाल्सी को भी प्रभावित क्षेत्रों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है। ये वर्गीकरण हैं:

  • हेमिप्लेजिया (Hemiplegia) (सिर्फ शरीर के आधे हिस्से में)
  • पैराप्लेजिया (Paraplegia)
  • टेट्राप्लेजिया (Tetraplegia)
  • मोनोप्लेजिया (Monoplegia)

इसी तरह बीमारी को इसकी गंभीरता के अनुसार भी क्लासिफ़ाई किया जाता है। इस तरह यह हल्का, मध्यम या गंभीर हो सकता है।

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इलाज

जैसा कि हमने बताया है, यह एक स्थायी बीमारी है। दुर्भाग्य से, इसका कोई इलाज नहीं है। हालांकि कुछ इलाज और देखभाल से सेरब्रल पॉल्ज़ी वाले लोग अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।

इसे संभव बनाने के लिए रोगियों को फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच थेरेपी सहित कई तरह के इलाज से गुजरना होगा

बेहतरीन इलाज के लिए कई हेल्थ सेंटर हैं। डे सेंटर, ऑक्यूपेशनल थेरेपी सेंटर और स्पेशल रेजिडेंस हैं। इन हेल्थ सेंटर पर आप ऊपर बताये गए तमाम इलाज हासिल कर सकते हैं।

रिसर्चर ने सेरब्रल पॉल्ज़ी को रोकने वाले कुछ कारणों की पहचान की है। उदाहरण के लिए बच्चे के सिर को किसी भी तरह से चोटिल होने या घायल होने से बचाना जरूरी है। आपको हेलमेट और सही कार सीट जैसी सुरक्षा डिवाइस का उपयोग करना चाहिए। घर के आसपास ज्यादा सावधानी बरतना भी अहम है।

एक दूसरा मुद्दा मां और भ्रूण के बीच ब्लड टाइप का फर्क हो सकता है। आपके डॉक्टर को गर्भावस्था में इस समस्या का जल्द पता लगाना चाहिए और आगे के नतीजों को रोकने के लिए इलाज करना चाहिए। इसलिए प्रसव पूर्व सभी तरह की जांच करवाना निश्चित करें

मां को रूबेला वायरस (German measles) का टीका लगाया जाना चाहिए जो सेरब्रल पॉल्ज़ी से जुड़ा हो सकता है।

निष्कर्ष

आदर्श रूप से इस बीमारी को रोकने के लिए प्रेग्नेंसी को हेल्दी रखना चाहिए। जोखिम भरी कोई भी एक्सरसाइज जैसे तंबाकू या शराब का सेवन भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान सभी जरूरी टेस्ट और जांच करवाना जरूरी है। यदि समस्याएं बाद में दिखाई दें तो आपको लक्षणों का ठीक से मूल्यांकन करने के लिए डॉक्टर से मिलना चाहिए।

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