गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर : लक्षण और इलाज

प्रसवपूर्व हर विजिट के दौरान आपका डॉक्टर संबंधित समस्याओं को रोकने के लिए आपके रक्तचाप की जांच करेगा। इस पोस्ट में गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों और इसके संभावित इलाज की जानकारी लें।
गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर : लक्षण और इलाज

आखिरी अपडेट: 23 जुलाई, 2019

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की डायग्नोसिस तब की जाती है जब यह 140/90 mmHg से ज्यादा हो जाए। पर क्या आप जानते हैं, वास्तव में ब्लड प्रेशर क्या है?

 ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप धमनियों (आर्टरी) की दीवारों पर पड़ने वाला खून का दबाव या बल है। हाई ब्लड प्रेशर तब होता है जब यह दबाव किसी कारण बहुत ज्यादा हो।

उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने का संदेह होने पर अपने डॉक्टर से मिलें। इस स्थिति पर काबू पाया जाना चाहिए क्योंकि यह आपको और आपके बच्चे की सेहत पर असर डाल सकता है। इसके लक्षणों को अनदेखा न करें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर लक्षण

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना दूसरी हानिकारक या गंभीर समस्याओं को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है

आमतौर पर महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप गर्भावस्था के मध्य या आख़िरी चरणों में प्रकट होता है, अक्सर 20 हफ़्ते के बाद। वास्तव में, गर्भवती महिलाओं में गर्भ धारण के पहले महीने में निम्न रक्तचाप होना काफी आम है

लक्षणों के आधार पर हम गर्भावस्था के दौरान तीन प्रकार के उच्च रक्तचाप को देख सकते हैं:

1. गर्भकालीन उच्च रक्तचाप (Gestational hypertension)

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (Gestational hypertension ) वह उच्च रक्तचाप है जो गर्भधारण के 20 वें हफ़्ते बाद विकसित होता है। आमतौर पर यह बिना लक्षणों का होता है और प्रसव के बाद गायब हो जाता है। हालाँकि यह :

  • भविष्य में उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने का खतरा बढ़ा सकता है
  • असमय लेबर का कारण बन सकता है
  • कम बर्थ वेट का कारण हो सकता है
  • प्रीएक्लेम्पसिया की ओर ले जा सकता है

2. क्रॉनिक हाइपरटेंशन (Chronic Hypertension)

यह तब होता है जब कोई महिला गर्भावस्था से पहले या गर्भ धारण के 20 हफ़्ते से पहले हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित होती है

यह स्थिति ठीक वैसे ही प्रीएक्लेम्पसिया को ट्रिगर कर सकती है जैसा कि हमने ऊपर बताया है।

3. प्रीएक्लेम्पसिया (Preeclampsia)

प्रीएक्लेम्पसिया ब्लड प्रेशर में अचानक होने वाली ऐसी बढ़ोतरी है, जो आमतौर पर गर्भावस्था के अंत में, आखिरी तिमाही (trimester) में होता है। यह स्थिति लिवर, किडनी और दूसरे अंगों की क्षति का कारण बन सकती है।

इसके अलावा, यह माँ और बच्चे के जीवन को खतरे में डाल सकता है। इस कारण गर्भावस्था के दौरान अपने ब्लड प्रेशर पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण

यदि आप अपने हाथों और चेहरे पर एडिमा (edema) से पीड़ित हैं, दृष्टि धुंधली है, और नॉजिया की शिकार हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप हमेशा लक्षणों वाला नहीं होता है। जब यह होता है, तो आम तौर पर सिरदर्द होने लगता है, विशेष रूप से सिर के पीछे, साथ ही दृष्टि धुंधली, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, हाथ-पैरों में सूजन, और गहरे पेट दर्द की शिकायत होती है।

जैसा कि हमने देखा है, यह स्थिति माँ और बच्चे दोनों के लिए काफी खतरनाक हो सकती है। इस कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल प्रसवपूर्व केयर का एक अहम हिस्सा है। प्रसवपूर्व आपकी हर विजिट पर आपका डॉक्टर आपके रक्तचाप की जाँच करेगा

प्रीक्लेम्पसिया के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

  • मूत्र में ज्यादा प्रोटीन
  • तेज सिरदर्द
  • नज़र में परिवर्तन, दृष्टि में धुंधलापन या यहां तक ​​कि दृष्टि हानि
  • मतली और उल्टी (Nausea and vomiting)
  • साँस लेने में कठिनाई
  • प्लेटलेट काउंट में कमी
  • एडिमा, मुख्य रूप से चेहरे और हाथों में
  • अचानक वजन बढ़ना
  • ऊपरी पेट में दर्द, आमतौर पर दाईं ओर।

यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिख रहा है, तो आपका डॉक्टर प्रीएक्लेम्पसिया की उपस्थिति या अनुपस्थिति को निर्धारित करने के लिए कुछ टेस्ट करेगा और आपके और आपके बच्चे की सुरक्षा के उपाय करेगा।

हाई ब्लड प्रेशर का इलाज

आपका डॉक्टर तय करेगा कि आपको अपने रक्तचाप पर काबू पाने के लिए दवा लेनी चाहिए या नहीं

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर का इलाज महिला की स्थिति और उसकी मेडिकल हिस्ट्री के साथ-साथ गर्भावस्था की सामग्रिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अपने निजी मूल्यांकन के आधार पर आपका डॉक्टर यह तय करेगा कि क्या उपाय करना है।

वे ब्लड प्रेशर की ऐसी दवाएं लिख सकते हैं जो आपके और आपके बच्चे के लिए सुरक्षित हैं। अपने चिकित्सक के निर्देश के मुताबिक़ दवा लें। इसे टालें नहीं, न ही अपनी खुराक में बदलाव करें। ऐसा करना घातक हो सकता है।

इसके अलावा, डॉक्टर आपको पर्याप्त पानी (लगभग 12 गिलास या एक दिन में तीन लीटर) पीने की सलाह दे सकता है। वे कम नमक, मिठाई या सॉसेज जैसे प्रोसेस्ड फ़ूड की कम मात्रा और कम फ्राइड फ़ूड के साथ बैलेंस डाइट खाने और भरपूर आराम लेने की सलाह दे सकते हैं

ज्यादा गंभीर मामलों में प्रीएक्लेम्पसिया की स्थिति विकसित होने से रोकने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरी हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए हम रेगुलर एक्सरसाइज (उदाहरण के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए योग या वाटर एरोबिक्स), पर्याप्त पानी पीने, कॉफी और कैफीन युक्त ड्रिंक से बचने और नमक का कम से कम सेवन करने की सलाह देते हैं।

अगर इस विषय पर आपका कोई सवाल है, तो अपने अगले प्रीनेटल चेकअप के दौरान डॉक्टर से बात करें। वे आपके की व्यक्तिगत चिकित्सा की जानकारी को स्वीकार करके किसी और से बेहतर आपके सवालों का जवाब देने में सक्षम होंगे

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