रक्त के थक्के: इन 8 संकेतों के प्रति सतर्क रहें

जुलाई 30, 2018
जब आपके शरीर में कोई घाव होता है या चोट लगती है तो रक्तस्राव रोकने के लिए क्लॉटिंग महत्वपूर्ण है।

जब रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्के बनते हैं तो यह स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी ही जोखिम भरी बात होती है। एक रक्त का थक्का एक रक्त द्रव्यमान है जो तरल से जेलैटिनस या अर्ध ठोस अवस्था में बदलता है।

रक्त प्रवाह में स्वतंत्र रूप से बहते समय, यह द्रव्यमान आंशिक रूप से या पूरी तरह से धमनी या नस को अवरुद्ध कर सकता है। जैसा कि आप जानते होंगे ऐसी स्थिति को घनास्त्रता या थ्रोम्बोसिस कहा जाता है।

यह देखते हुए कि हमारा पूरा शरीर रक्त वाहिकाओं से जुड़ा हुआ है, एक रक्त का थक्का कहीं भी यात्रा कर सकता है, जो बेहद खतरनाक है।

मान लीजिये कि यह दिल, मस्तिष्क या फेफड़ों में जाता है तो इसका वहां फंसने का खतरा होता है जिसकी वजह से एम्बोलिज्म या कार्डियोवैस्कुलर दुर्घटना हो सकती है।

दो प्रकार के रक्त के थक्के होते हैं –

  • धमनीय – ये खून के थक्के हैं जो धमनी में बनते हैं और ऑक्सीजन को प्रमुख अंगों तक पहुंचने से रोकते हैं।
  • क्लॉट्स अनगिनत जटिलताओं जैसे दिल के दौरे, सेरेब्रोवास्कुलर तंत्रिका पक्षाघात और तीव्र दर्द का कारण बन सकते हैं।
  • शिरापरक – शिरापरक रक्त के थक्के धीरे-धीरे नसों में बनते हैं, यही कारण है कि लक्षण समय के साथ प्रकट होते हैं।
  • ये आमतौर पर बांहों, पैरों और श्रोणि क्षेत्र में दिखाई देते हैं।
  • आम तौर पर, ये थक्के स्थिर रहते हैं। लेकिन उनके दूसरी जगह जाने और एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बनने की हमेशा आशंका होती है।

रक्त के थक्के बनने के कारक

कुछ परिस्थितियों में रक्त के थक्के होने का खतरा बढ़ सकता है जैसे कि –

  • लंबे समय तक एक ही पोज़ीशन में रहने से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है जो रक्त प्रवाह में बाधा डालता है।
  • चार घंटे से अधिक लंबी यात्राएं भी कारक हैं जो रक्त के थक्के का कारण बन सकती हैं।
  • लंबे समय तक बैठे रहने से रक्त प्रवाह ठीक से नहीं होता है इसलिए रक्त के थक्के हो सकते हैं।
  • बिस्तर पर या रिलैक्स करने में बहुत ज्यादा समय बिताना।
  • कुछ गर्भ निरोधक गोलियां।
  • परिवार का इतिहास।
  • आसीन जीवन शैली।
  • उम्र।
  • मोटापा।
  • धूम्रपान।

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इन संकेतों की ओर ध्यान दें

1. बिना वजह की खांसी और सांस लेने की कठिनाइयों

फेफड़ों में एक थक्का ऑक्सीजन प्रवाह को धीमा कर देता है, जिससे आपकी हृदय गति तेज हो जाती है।

सांस लेने की कठिनाइयों के साथ हृदय की तेज गति आमतौर पर एक फुफ्फुसीय अंतःशल्यता या पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बारे में सतर्क करने वाला संकेत होता है।

2. मूड में बदलाव

चिड़चिड़ाहट, भ्रम, मिथ्याभास या आक्षेप जैसे लक्षण मस्तिष्क में धमनी घनास्त्रता के मौजूदा खतरे की चेतावनी दे सकते हैं।

यह तब होता है जब एक रक्त का थक्का रक्त प्रवाह में ऑक्सीजन और ग्लूकोज के नियमित प्रवाह को बाधित करता है। नतीजतन, मस्तिष्क काम नहीं कर सकता है जैसा कि उसे करना चाहिए।

3. थकान

जब शरीर में खून का थक्का होता है, तो यह अपने रक्षा जीवों को सक्रिय करता है, जो कभी-कभी थकान या थकावट का कारण बन सकता है।

थकान के लक्षणों का निदान करना अक्सर मुश्किल होता है, यही कारण है कि अन्य संभावित लक्षणों से सावधान रहना बहुत महत्वपूर्ण है।

कई मामलों में, आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान का अनुभव होगा। यह रात में पूरी तरह से आराम करने के बाद भी हो सकता है।

4. अंगों में सूजन

इस स्थिति को गहरी नस घनास्त्रता के रूप में जाना जाता है। यह परिसंचरण तंत्र में रक्त प्रवाह को बाधित करता है जिसकी वजह से ऑक्सीजन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक नहीं पहुंच पाता है।

मान लीजिये कि आपके शरीर का कोई अंग जल्दी से सूज जाता है, खास तौर से अगर उसमें दर्द भी होता है तो आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। आप इस गलतफहमी में न रहें कि यह सूजन तरल प्रतिधारण के कारण है।

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5. हाथ या पैर में दर्द

यह एक स्थानीय और तेज दर्द है। यह अक्सर चलने या अंगों को झुकाते समय होता है।

दर्द के साथ स्तब्धता भी महसूस हो सकती है।

6. फूली हुई नसें

ऐसे तो फूली हुई नसें जटिलताओं या प्रमुख समस्याओं का कारण नहीं होती हैं। लेकिन जब रक्त के थक्के रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालते हैं तो आंतरिक विदारण, लाल होना या चोट लगना संभव है।

कभी-कभार पैरों में शिरापरक थ्रोम्बोसिस के परिणामस्वरूप वेरीकोस वेंस प्रकट हो सकती हैं।

7. त्वचा पर लाल रेखाएं

अगर आप अपनी नसों के साथ लाल रेखाएं दिखा रहे हैं तो आपको अपनी त्वचा में अन्य परिवर्तनों की जांच करनी चाहिए।

धमनी घनास्त्रता की संभावना को रद्द करने के लिए आपको मनोदशा में बदलाव के बारे में सावधान रहना चाहिए। इन लाल रेखाओं के कारण आपके अंग स्पर्श करने के लिए गर्म होंगें।

8. बुखार

जब आपके शरीर में एक खून का थक्का होता है और यह आपके रक्त प्रवाह में जाता है तो इससे बुखार हो सकता है। बुखार के साथ अक्सर पसीना आना, कांपना, माइग्रेन, निर्जलीकरण, शारीरिक कमजोरी और कम भूख लगना, जैसे लक्षण भी होते हैं।

रक्त के थक्के बनने से रोकने के लिए सलाह

  • अच्छे रक्त परिसंचरण के लिए विटामिन बी 3, सी और ई में समृद्ध खाद्य पदार्थ खाने का प्रयास करें। लहसुन, जस्ता, मैग्नीशियम, मैंगनीज और खनिज की खुराक, इनके उदाहरण हैं।
  • धूम्रपान छोड़ें सिगरेट से रक्त के थक्के के गठन में वृद्धि होती है।
  • स्वस्थ वजन रखें जो आपकी ऊंचाई और शरीर के आकार के अनुकूल हो। आप एक्सरसाइज करके अपने शेप को बनाये रख सकते हैं।
  • मोटापा और आसन्न जीवनशैली मुख्य कारक हैं जो रक्तचाप में अबद्ध रक्त के थक्के से होने वाली हृदय संबंधी दुर्घटनाओं और दिल के दौरे का कारण बनते हैं।
  • मान लीजिये आप मौखिक गर्भ निरोधकों को लेते हैं तो सावधान रहें क्योंकि हार्मोन खून के जमने या ब्लड क्लॉटिंग में वृद्धि करते हैं।