7 अहम पहलू जुझारू जीवट केः साहस अपने भीतर से आता है

जुझारू जीवट मुश्किल हालात से निपटने की आपकी क्षमता है। यह भावनात्मक जख्मों को पीछे छोड़ने और उम्मीद और हौसले के साथ भविष्य की ओर देखने की क्षमता है। यह क्षमता हर व्यक्ति में होती है और इसे आप अपने भीतर भी पैदा कर सकते हैं।
7 अहम पहलू जुझारू जीवट केः साहस अपने भीतर से आता है

आखिरी अपडेट: 13 सितम्बर, 2018

जुझारू जीवट वाली इंसानी फितरत पर बात करने से पहले यह जान लेना अच्छा रहेगा कि रेजिलिएंस (Resilience) शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मोटिवेशनल साइकोलॉजी में भले ही किया जाता है, इसकी उत्पत्ति दरअसल फिजिक्स में हुई।

किसी चोट या रासायनिक क्रिया के कारण जब किसी वस्तु की शेप बिगड़ जाती है, लेकिन अगले ही पल वह बिना टूटे या चटके अपनी पुरानी आकृति में वापस लौट आती है, तो वस्तु की उस क्षमता को रेजिलिएंस अर्थात लोच या लचीलापन कहते हैं।

मनोवैज्ञानिक इस भौतिक गुण का प्रयोग इंसानों के सन्दर्भ में करने लगे, यह बताने के लिए कि इंसान भी ऐसा हिम्मत वाला व्यवहार कर सकते हैं: हम मुसीबतों का सामना कर सकते हैं, उनसे उबर सकते हैं और आखिर में इससे मजबूत होकर बाहर आते हैं। आदमी की इस क्षमता को, जिन्दादिली और जीवट भरे इस गुण को उसका जुझारू जीवट भी कहते हैं।

आज इस पोस्ट में आप जानेंगे वे 7 तरीके जिनसे जुझारू जीवट के चिकित्सीय और स्वास्थ्यवर्धक प्रभावों का लाभ उठाकर आप भी एक मजबूत इंसान बन सकते हैं।

हम इस बात के शुक्रगुजार हो सकते हैं कि हम ज़िन्दा प्राणी है, जिसके कारण हममें मुश्किलों में बच निकलने की एक जैविक शक्ति होती है। हमारा दिमाग इसमें हमारी मदद करता है।

यह एक तरह का पुनर्जन्म होता है जिसमें हम कटु अनुभवों को पीछे छोड़कर जीवन की नई शुरुआत करते हैं।

अपने भीतर जुझारू जीवट पैदा करने के मंत्र

वर्तमान में रेजिलिएंस का कॉन्सेप्ट कई क्षेत्रों और विभागों में इस्तेमाल होता है। उदाहरण के लिए कार्पोरेट जगत में संकट या मुश्किलों का सामना करने का यह बहुत उपयोगी तरीका है और हर टीम मेम्बर को हालात का विश्लेषण करने और आगे बढ़ने की रणनीति बना पाने में सक्षम होना चाहिए।

कभी-कभी संकट के क्षण आपको और मजबूत व्यक्ति बन कर उभरने का बेहतरीन अवसर देते हैं। यह ऐसी बात है जिसका आपको निजी और भावनात्मक स्तर पर ध्यान रखना होगा। आइए जानते हैं कि कौन सी चीज़ें ऐसा जुझारू जीवट हासिल करने में आपकी मदद कर सकती हैं।

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1. अपने परिवेश से गहरा रिश्ता बनायें रखें

जुझारू जीवट (Resilience)

जब आप मुश्किलों से गुजर रहे होते हैं तो कई बार लगता है कि ये दुनिया बेसुरी, बेस्वाद हो गयी है। सब लोग एक तरफ जा रहे हैं, और आप उलटी दिशा में उलझे हुए हैं।

ऐसे में आपको यह समझना होगा, आप अकेले नहीं हैं। दूसरे लोगों, अच्छे दोस्तों, आत्मीय-परिजनों और जो लोग आपको अच्छी तरह जानते-समझते हैं, आपकी मदद कर सकते हैं, उनसे जुड़ने का साहस जुटाएं।

अपने आसपास मौजूद परिवेश से मदद हासिल करना आपको मजबूत होकर उभरने, सुरक्षित महसूस करने, नए फैसले ले पाने, और उम्मीद को दोबारा हासिल करने की सहूलियत देता है।

2. याद रखेंः सबसे गहरा दर्द भी हमेशा नहीं रहने वाला, आप फिर खुली साँस लेंगे

आपके जीवन में अब तक जो हो चुका है, उसे कोई बदल नहीं सकता है। सच हमेशा कड़वा होता है और आप इसे लेकर नाराज़, दुखी और तिरस्कृत महसूस कर सकते हैं…।

लेकिन आपको एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए। ये जटिल और कठिन हालात हमेशा नहीं बने रहेंगे। कोई दर्द अंतहीन नहीं होता। हर शाम के बाद सुबह आती है।

आपको जीवन की धारा में बहते जाना चाहिए। कई मुश्किलें आएंगी, कुछ मौके मिलेंगे और कई बार अनंत ख़ुशियां भी हासिल होंगी।

3. बदलाव जीवन का हिस्सा है

कुछ ऐसी ही बात हम ऊपर भी कह चुके हैं।  जीवन हमेशा नदी की धारा की तरह आगे बढ़ता रहता है। इसका अर्थ है, बदलाव होकर रहेगा, आप चाहें तो अपनी मुश्किलों से चिपके रह सकते हैं। अच्छा रहेगा कि आप पिछले दर्द को भूलकर इस दलदल से बाहर निकलें।

आपके अंदर ख़ुद को बदलने की जन्मजात क्षमता है। विपत्ति आने पर इस क्षमता को बाहर आने का मौका मिलना चाहिए। वैसे भी हमारा दिमाग इसके लिए हमेशा तैयार रहता है।

नई उम्मीदों की खोज में अपनी भावनाओं को धारदार बनायें। जो कुछ हो चुका है, उसे स्वीकार करते हुए धीरे-धीरे अपने आप को आगे बढ़ाएं। हर दिन गुजरने के साथ आपको लगेगा, आप भी सफलता का शिखर छू सकते हैं।

4. नए लक्ष्य तय करें

आपको कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। जो होना था वह हो चुका है, आप उसे बदल नहीं सकते हैं। एकमात्र विकल्प यही है कि स्थिति को स्वीकार कर आगे बढ़ें। मुश्किल का सामना करने के लिए आपको जो पहला काम करना है, वह है एक लक्ष्य निर्धारित करना।

कुछ ऐसा तय करें जो आपकी पहुंच के भीतर हो और जिस पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। बाद में आप और कठिन और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं लेकिन शुरुआत हमेशा सबसे आसान और फायदेमंद विकल्प से करें। जैसे, टहलने जाएं, नए दोस्तों से मिलें, कहीं घूमने जाएं या फिर जीवन की छोटी-छोटी बातों का आनंद उठाएं…।

5. अपनी पॉजिटिव इमेज बनाएं

जुझारू जीवट के पहलू: पॉजिटिव इमेज

आप जानते हैं, बहुत पेरशान, बेहद दुखी, असफल होने, किसी की गैरमौजूदगी या निराशा में डूबने पर आप कैसे दिखते हैं। यह एक जानी-पहचानी सी छवि है। इसे बदलना होगा। आपको अपनी एक नई इमेज गढ़नी होगी।

इस समय अपने भीतर आत्म-विश्वास पैदा करना ही जुझारू जीवट का मूलमंत्र है, क्योंकि इस रास्ते आप रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे, समस्यायें हल करते हुए अपने इंस्टिंक्ट पर भरोसा कर पाएंगे। इस तरह आप अपने जुझारू जीवट को धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं।

6. चीज़ों पर अपना नज़रिया बनाए रखें

भले ही आपको बेहद दर्दनाक घटनाओं का सामना करना पड़े, फिर भी आपको ख़ुद पर नियंत्रण रखते हुए अपना नज़रिया सही रखना है।

अगर आपको लगता है, दुनिया ने आपको छोड़ दिया है, तो भी इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको दोबारा ख़ुशियां पाने का कोई अधिकार नहीं है।

अगर आप किसी प्रियजन को खो बैठे हैं तो भी इतनी निराशा में न डूबें कि हंसना और ज़िंदगी का आनंद उठाना भूल जाएं। अगर अपना नज़रिया सही रखें तो जल्द सभी परेशानियों से उबर आयेंगे।

7. अपना ख्याल रखें

आपके आसपास दोस्त हैं, परिजन और वे लोग हैं जो आपको प्यार करते हैं और हर दिन मदद के लिए तैयार रहते हैं। हालांकि, जिस व्यक्ति को आपका सबसे ज़्यादा ध्यान रखना है, वह आप ख़ुद हैं।

यह बात हमेशा अपने दिमाग में रखें कि आपको एक बार फिर ख़ुश होना ही होगा। आपको अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए हर ज़रूरी कदम बेझिझक उठाने होंगे।

टहलने जाएं, अपनी डाइट सुधारें। किसी प्रोजेक्ट, प्लान या सपनों के माध्यम से अपनी भावनाएं उजागर करें। अपने भविष्य के बारे में सोचना कभी न छोड़ें।

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