5 आसान आदतें न्यूरोजेनेसिस को पुनर्जीवित करने के लिए

जनवरी 20, 2020
कई सालों तक न्यूरोजेनेसिस और मस्तिष्क की खोई ही कोशिकाओं को दोबारा पाने की संभावना को असंभव विचार माना जाता था। हालांकि, अब हम जानते हैं दरअसल कुछ स्वस्थ आदतों से चिपके रहने पर न्यूरॉन्स को पुनर्प्राप्त किया जा सकता है।

न्यूरोजेनेसिस एक अद्भुत प्रक्रिया है जिसके जरिये हमारा दिमाग नई कोशिकाओं के साथ-साथ उनके संबंधित कनेक्शन भी दोबारा पैदा करने में सक्षम हैं।

संदेह है? यह पूरी तरह से समझ में आने वाली बात है! हाल तक व्यापक रूप से माना जाता था कि, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, मस्तिष्क अपनी नर्व सेल को खो देता है और वे इस कदर नष्मट हो जाते हैं कि मरम्मत लायक नहीं रहते। अब इसके सबूत मिले हैं है कि आप वास्तव में अपने न्यूरॉन्स को दोबारा जिन्दा कर सकते हैं।

यह माना गया था कि एक दर्दनाक दुर्घटना या बहुत अधिक शराब पीने से मस्तिष्क की क्षमता का निश्चित रूप से नुकसान होता है, दोनों ही एक स्वस्थ व्यक्ति और स्वस्थ आदतों के लक्षण हैं।

पर एक शब्द है जो हमें उम्मीद देता है: न्यूरोप्लास्टिसिटी (neuroplasticity)। इस तथ्य के बावजूद कि हमारा ब्रेन चोटों या बुरी आदतों (जैसे शराब या धूम्रपान) के कारण बदलते हैं, इस अंग में खुद को पुनर्जीवित करने और नए न्यूरोनल प[पैथवे टिशू बनाने की क्षमता है।

हालांकि इस प्रक्रिया को वास्तव में अंजाम देने के लिए और इस क्षमता को उत्तेजित करने के लिए सक्रिय पहलकदमी का अप्रोच अपनाना होगा।

आज हम कुछ ऐसी आदतों की जानकारी शेयर करना चाहते हैं जो न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देने और आपके न्यूरॉन्स को दोबारा पैदा कर सकती हैं।

आप जो कुछ भी सोचते और करते हैं वह आपके मस्तिष्क को पुनर्गठित करता है

न्यूरोजेनेसिस

मानव मस्तिष्क का वज़न लगभग तीन पाउंड होता है, फिर भी यह हमारी कुल ऊर्जा का लगभग 20% इस्तेमाल करता है।

हम जो भी करते हैं – चाहे वह पढ़ना हो, या अध्ययन करना या किसी से बात करना हो – वह हमारी ब्रेन की संरचना में हैरतअंगेज बदलाव का कारण बनता है। दरअसल  हम जो भी सोचते हैं और महसूस करते हैं उसका असर होता है।

उदाहरण के लिए अगर हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी  तनाव या एंग्जायटी पर टिकी हो तो मस्तिष्क के कई क्षेत्र (जैसे कि हिप्पोकैम्पस, जो याददाश्त से जुड़ा हुआ है) अक्सर प्रभावित होते हैं।

मस्तिष्क एक अंदरूनी स्कल्पचर की तरह है, जिसे हमारी भावनाओं, विचारों, कामकाज और रोजमर्रा की आदतों द्वारा आकार दिया जाता है।

इस आंतरिक मैप के कामकाज के लिए इसे सभी प्रासंगिक ‘रोड’, ‘ब्रिज’ और ‘लिंक’ की ज़रूरत होती है जो वास्तविक दुनिया के संपर्क में रहना संभव बनाती है। आज हम बताएंगे कि अपने मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस करके आप अपने जीवन स्तर को कैसे बेहतर बना सकते हैं।

यहां पढ़ें: 4 मेंटल एक्सरसाइज : वृद्धावस्था में दिमागी हालत दुरुस्त रखने के लिए

5 टॉप टिप्स जो न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देती हैं और न्यूरॉन्स को दोबारा पैदा करने में मदद करती हैं

टॉप टिप्स जो न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देती हैं

1. न्यूरॉन्स को पुनर्जीवित करने के लिए एक्सरसाइज

व्यायाम और न्यूरोजेनेसिस का बहुत करीबी सम्बन्ध है। हर बार जब हम वाकिंग पर जाते हैं, स्विमिंग करते हैं या एक्सरसाइज के लिए जिम जाते हैं, तो हम अपने ब्रेन को ऑक्सीजन देते हैं।

इससे न सिर्फ हमारे दिमाग को शुद्ध और भरपूर ऑक्सीजन वाले खून की सप्लाई होती है, यह एंडोर्फिन (Endorphin) पैदा करने में भी मदद कर सकता है। एंडोर्फिन हमारे मनोदशा में सुधार करते हैं और इस तरह तनाव से लड़ने में मदद कर सकते हैं, नर्व संरचनाओं को मजबूत करते हैं।

स्ट्रेस कम करने वाली कोई भी एक्टिविटी न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देती है। आपको बस यह जानने की जरूरत है कि आपके लिए किस प्रकार की एक्सरसाइज सबसे अच्छी है।

2. फुर्तीला दिमाग, शक्तिशाली दिमाग

मस्तिष्क को चुस्त-दुरुस्त, जाग्रत और अपने परिवेश को तेज़ी से प्रोसेस करने लायक बनाने के कई तरीके हैं। इनमें से एक तरीका है कुछ अलग तरह की एक्दूसरसाइज करना। इस मामले में हमें जिम में शरीर की बजाय ब्रेन को ले जाना है।

  • हर दिन पढ़ने से आप अपनी रुचि और नई चीजों के लिए उत्सुकता बढ़ाते हैं।
  • आप कोई नई भाषा सीखने के फायदों को पा सकते हैं।
  • कोई वाद्य बजाना सीखें।
  • चीजों को गंभीर रूप से देखें और अपना निष्कर्ष निकालें।
  • गेम खेलें और पज़ल हल करें।
  • एक खुला दिमाग विकसित करें, अपने आस-पास की हर चीज के प्रति ग्रहणशील बनें, सोशलाइजेशन करें, ट्रेवल करें, चीजों की खोज करें और जीवन को लेकर भावुक बनें।

3. न्यूरोजेनेसिस को बढ़ावा देने के लिए डाइट का ध्यान रखें

स्वस्थ मस्तिष्क के सबसे बड़े शत्रुओं में से एक है संतृप्त वसा (saturated fat)। डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फ़ूड भी न्यूरोजेनेसिस को धीमा कर सकते हैं। यही वजह है कि कम कैलोरी लेकिन विविधतापूर्ण डाइट अपनाना अहम है जिसमें हमारे लिए सभी ज़रूरी पोषक तत्व शामिल हैं।

हमेशा याद रखें कि हमारे दिमाग को एनर्जी की ज़रूरत होती है और उदाहरण के लिए सुबह शुगर वाला खाना मदद कर सकता है। हालांकि, हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह ग्लूकोज फलों, डार्क चॉकलेट, शहद या एक कप ओट्स से आना चाहिए।

बेशक ओमेगा -3 से भरपूर खाद्य पदार्थ सबसे अच्छा खाद्य है जो आपके न्यूरॉन को पुनर्जीवित करने में मदद कर सकते हैं।

4. सेक्स भी मदद करता है

सेक्स मस्तिष्क का महान मूर्तिकार और न्यूरोजेनेसिस का नेचुरल प्रोमोटर है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि क्यों? सेक्स सिर्फ स्ट्रेस पर काबू पाने में मदद नहीं करता है, बल्कि यह हमारी भावनाओं पर भी बहुत असर डालता है, जो याददाश्त से जुड़े मस्तिष्क के क्षेत्रों प्रेरित करता है।

इन अंतरंग क्षणों में उत्पन्न होने वाले सेरोटोनिन (serotonin), डोपामाइन (dopamine) या ऑक्सीटोसिन (oxytocin) जैसे हार्मोन नई नर्व कोशिकाओं के निर्माण में मदद कर सकते हैं।

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5. मेडिटेशन

मस्तिष्क पर मेडिटेशन के असर निर्विवाद और अद्भुत हैं:

  • मस्तिष्क कुछ संज्ञानात्मक क्षमताओं जैसे मेडिटेशन अवधि, स्मृति और एकाग्रता में सुधार करने में मदद कर सकता है।
  • यह हमें सक्रिय रहने में मदद करता है और तनाव और चिंता को चैनल करता है।
  • साथ ही, जब हम मेडिटेशन करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क अलग तरह से काम करना शुरू कर देता है। यह अल्फा वेव को बढ़ावा देने में मदद करता है, जो थोड़ा-थोड़ा करके गामा वेव का निर्माण करते हैं। ये तरंगें रिलैक्सेशन में मदद कर सकती हैं, जो बदले में, ब्रेन कनेक्टिविटी और न्यूरोजेनेसिस को उत्तेजित करने में मदद कर सकती हैं।

इस तथ्य के बावजूद कि मेडिटेशन सीखने के लिए कुछ वक्त और प्रैक्टिस की ज़रूरत होती है। इसकी प्रैक्टिस हमारे दिमाग और कल्याण के लिए सबसे अच्छी नेचुरल मेडिसिन है।

निष्कर्ष के तौर पर आप देख सकते हैं, इन पाँचों चीजों को करना आसान है, और यह मस्तिष्क की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

अगर आप न्यूरोजेनेसिस के बारे में ज्यादा जानकारी लेना चाहते हैं, तो हम आपको निम्नलिखित वीडियो देखने का सुझाव देंगे।

  • Barbosa, S., Urrea, A. (2018). Influencia del deporte y la actividad física en el estado de salud físico y mental: una revisión bibliográfica. Revista Katharsis, N 25, enero-junio 2018, pp.141-159, Disponible en http://revistas.iue.edu.co/index.php/katharsis