लोग उन रिश्तों को अलविदा क्यों नहीं कहते जो अब कारगर नहीं हैं

जबरन कोई काम करना सेहतमंद नहीं होता। लोग उन रिश्तों को अलविदा क्यों नहीं कहते जो अब कारगर नहीं हैं? इस पोस्ट में इसके बारे में और पढ़ें!
लोग उन रिश्तों को अलविदा क्यों नहीं कहते जो अब कारगर नहीं हैं

आखिरी अपडेट: 27 जून, 2019

जब लगे कि रिश्ता अब खत्म हो गया है तो उसे तोड़ना ही सबसे तार्किक और सही फैसला लगता है। तो लोग उन रिश्तों को खत्म क्यों नहीं कर देते जिनमें खुशी न बची हो? वह क्या है, जो हमें उस चीज को पकड़े रहने के लिए मजबूर करता है, जो हमारे हाथ से फिसल चुका है, मर चुका है?

आपने सबकुछ करके देख लिया है। फिर भी कुछ भी अब पहले जैसा नहीं है और ऐसा नहीं लगता कि वैसा कभी हो पायेगा। बावजूद आप हार नहीं मानते हैं।

कई बार हम आधिकारिक तौर पर उस रिश्ते को ख़त्म करने का कठिन फैसला नहीं ले पाते जो काफी हद तक पहले ही खत्म हो चुका है। उस मामले में तो ऐसा करना और भी मुश्किल होता हैं जब आपका रिश्ता लंबे समय से रहा हो और आप दोनों ने सच्चा प्यार किया हो।

ऐसे में अलविदा कहना और आगे बढ़ना सबसे अच्छा होता है। लेकिन हम कभी-कभी खुद को यकीन दिलाने की कोशिश करते हैं कि सबकुछ ठीक कर लेंगे। हम उन समस्याओं के साथ जीना भी सीखने की कोशिश करते हैं जो रिश्ते की शुरुआत में मौजूद नहीं थीं।

कई बार हम उस रिश्ते को तोड़ने में असमर्थ होते हैं जो काफी हद तक पहले ही खत्म हो चुका है। क्यों, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।

खुश न होने पर भी लोग रिश्ते क्यों नहीं तोड़ पाते

हमारे आस-पास के कई लोग भी यह देख सकते हैं कि रिश्ते को खत्म करने और आगे बढ़ने का समय है। लेकिन यह कोई आसान फैसला नहीं होता। जब रिश्ता कारगर नहीं रह जाता तो हम उसे क्यों नहीं तोड़ते? इसके कई कारण हैं:

एक क्षतिग्रस्त रिश्ते को तोड़ने और उसे ठीक करने की ज़रूरत के बीच कोई फर्क नहीं होता है।

कई कारणों से अक्सर लोग रिश्तों को तोड़ नहीं पाते हैं। इनमें शामिल है:

  • इसके कारण होने वाले नुकसान और उदासी का डर।
  • टकराव का डर।
  • अज्ञात का डर।
  • बच्चों का शामिल होना।
  • सामाजिक मूल्यांकन का डर।
  • रिश्ते में झोंकी गई सब चीजों को खोने से इंकार करना।
  • अपराधबोध की भावना क्योंकि आप असफल रहे।
  • आत्मविश्वास की कमी और अकेलेपन का डर।

रिश्ता तोड़ने पर नुकसान होता है और इसमें कोई शक नहीं है कि वह दर्द का कारण भी बनता है। यह इस अनुभूति की वजह से होता कि हमें एक अलग रास्ता लेना है। रिस्क लेना हमारे सबसे बड़े डर में से एक होता है। क्योंकि हम लंबे समय से एक निश्चित दिनचर्या में जीते रहे हैं और इसे तोड़ना मुश्किल होता है।

कभी-कभी हम आत्म सम्मान के मुद्दों के कारण रिश्तों को कायम रखते हैं।

“मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि वह मुझसे प्यार नहीं करता है, मैं उससे प्यार करती हूं और वह किसी दिन फिर से मुझे प्यार करने लगेगा”, यह एक आम सोच है। यह उम्मीद कि चीजें बदल सकती हैं, लोगों को अपने साथी को वापस जीतने की योजनाएं बनाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है। उन योजनाओं में आत्मविश्वास का गंभीर अभाव दिखाई देता है।

खोने से विरक्ति (Loss aversion)

मनोवैज्ञानिक और नोबेल विजेता डैनियल कन्नमन ने एक अवधारणा की स्थापना की। यह बताती है कि किसी रिश्ते के कारगर न रहने पर भी हम उसे ख़त्म क्यों नहीं करते।

यह “खोने से विरक्ति” या किसी भी निवेश को छोड़ने में कठिनाई है। हमें बार-बार यह विचार आता है कि हमने रिश्ते में बहुत कुछ खपाया है इसलिए हमारे लिए उसे छोड़ना मुश्किल है।

हमारा सोशल माहौल भी एक कारण है। लोग सचमुच चिंतित रहते हैं कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या कहेंगे। हम न केवल असफल होने से डरते हैं, बल्कि दूसरे लोग हमें असफल होते हुए देखें, इस बात से भी हम डरते हैं। एक खुश और परिपूर्ण जीवन का मुखौटा ओढ़े रखना कभी-कभी हमें निष्क्रिय भी कर देता है।

बच्चे भी एक आम कारण हैं। पति-पत्नी सोच सकते हैं, अगर वे रिश्ता तोड़ेंगे तो इससे बच्चों को तकलीफ पहुंचाएंगे। यह कारण बिना किसी शारीरिक सम्बन्ध के भी दाम्पत्य को प्रतिकूल माहौल में भी बनाए रख सकता है। जबकि विडंबना यह है कि यह माहौल उन बच्चों के लिए कतई स्वस्थ नहीं है।

वे संकेत कि यह अब खत्म हो गया है

जब आप में से कोई एक या दोनों ही इकट्ठे रहने की प्रेरणा खो देते हैं, तो रिश्ता जीवंत नहीं रह जाता। हालांकि इस बारे में अभी भी संदेह हो सकता है, लेकिन ये संकेत निर्विवाद रूप से बताते हैं कि कि आपका रिश्ता खत्म हो गया है।

  • संतोषजनक सेक्स का न होना, या बिलकुल ही यौन संबंध न होना।
  • कोई संवाद नहीं होना।
  • माहौल प्रतिकूल हो जाना।
  • जब अविश्वास हो।
  • जब दिलचस्पी की कमी हो जाए।

हम सबको खुश रहने का हक है। ये संकेत बताते हैं कि हम सुखी नहीं हैं और कुछ बदलने की ज़रूरत है। ऐसे में ब्रेकअप को अपने भरोसे चलना सीखने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

ऐसे समय होते हैं जब हमारी भीतर की आवाज़ हमें बताती हैं कि यह किसी चीज को ख़त्म करने का समय है। मामला अगर यह है, तो आपको उसे जाने देना, ज़रूरत हो तो क्षमा कर देना और आगे बढ़ जाना चाहिए। यदि आप यह नहीं जानते कि स्थिति को कैसे संभालना है तो मदद मांगना सबसे अच्छा है।

दुखी कपल एकसाथ क्यों रहते हैं? जब रिश्ते स्पष्ट रूप से असफल हो रहे हैं तो हम उन्हें समाप्त क्यों नहीं करते हैं?

एक आदत, किसी नुकसान का डर, सोशल माहौल… ऐसे अंतहीन कारण हो सकते हैं, जिनसे लोग रिश्तों को उस समय नहीं तोड़ने जब उन्हें ऐसा करना चाहिए।

आप अपनी समस्याओं को छिपाने की कोशिश कर सकते हैं जैसे कि कुछ भी नहीं हो रहा है। लेकिन जीवन के उस अध्याय को बंद करना सबसे स्वस्थ बात है जो आप कर सकते हैं। यह बहुत रोमांटिक नहीं है लेकिन कभी-कभी अपने दिल की जगह अपने दिमाग की सुनना बेहतर होता है।

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