हम बूढ़े होना कब शुरू करते हैं?

05 अप्रैल, 2020
वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि हम बूढ़े होना तब शुरू करते हैं, जब कोशिकाएँ ख़राब होने लगती हैं। इस मामले में  इस प्रक्रिया के बारे में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका अभी जवाब नहीं मिला है।
 

हम बूढ़े होना ठीक कब शुरू करते हैं, इसे परिभाषित करना बहुत आसान नहीं है, क्योंकि बुढ़ापे की अवधारणा सापेक्ष है। कुछ लोगों को झुर्रियाँ हो सकती हैं पर फिर भी वे शानदार सेहत और जीवनी शक्ति का आनंद लेते देखे जा सकते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों की त्वचा चिकनी होती है लेकिन वे कमजोर सेहत का शिकार होते हैं।

एक तथ्य जो यह जानना मुश्किल कर देता है कि हम कब बूढ़े होना शुरू करते हैं, वह आजकल फिला हुआ एक सांस्कृतिक मिथ हैं। ऐसे कई तरीके हैं जो आपको बुढ़ापे में भी जवाँ दिखने में मदद कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप बूढ़े नहीं हुए हैं।

आपकी बाहरी रंग-रूप सिर्फ उन वैरिएबल में से एक है जो आपके बूढ़े होने को परिभाषित करती है, लेकिन यह निश्चित रूप से सबसे अहम नहीं है। दूसरी प्रक्रियाएं उस बिंदु को ज्यादा अधिक सटीक रूप से बता सकती हैं, जहाँ से आप बूढ़े होना शुरू करते हैं।

बूढ़े होने की प्रक्रिया

पहली बात जो हम कहना चाहते है, वह यह है कि उम्र बढ़ना एक जटिल प्रक्रिया है। यह इतना जटिल है कि एक्सपर्ट के पास इस बारे में जवाब से ज्यादा सवाल हैं। यह तय करना आसान नहीं है कि हम किस उम्र में बूढ़े होना शुरू करते हैं, क्योंकि यह सभी लोगों में एक ही उम्र में शुरू नहीं होता है।

दरअसल सभी अंग एक ही समय में बूढ़े नहीं होते हैं। एक पहलू बायोलॉजिकल एज और दूसरी मनोवैज्ञानिक या सामाजिक उम्र की है। यह आम तौर पर माना जाता है कि फंशनल टिशू में क्षय के साथ ही बुढ़ापे की प्रक्रिया शुरू होती  है।

वैसे यह पूरी तरह से सही नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट का अनुमान है कि जब सेल्स में खराबी शुरू होती है तो बुढ़ापा आने लगता है। इन गड़बड़ियों में शामिल हैं:

  • जीन में होने वाली ख़ामियों का इकठ्ठा होना
  • टेलोमियर (telomere) का छोटा होना, जो क्रोमोजोम के सिरे पर होते हैं
  • दोषपूर्ण प्रोटीन से पीछा छुडाने में ख़ामियाँ

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जब हम बूढ़े होना कब शुरू करते हैं

हम बूढ़े होना कब शुरू करते हैं, इस पर कोई आम सहमति नहीं है। सबसे रूढ़िवादी एक्सपर्ट का कहना है कि यह प्रक्रिया 25 साल की उम्र से शुरू होती है जब से कोशिकाओं में खराबी आना शुरू होती है। खासकर मांसपेशियों के बड़े पैमाने पर नुकसान की क्रमिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

नासा की एजिंग लैबोरेटरी के पूर्व निदेशक जेइम मिकुएल का कहना है कि 30 साल की उम्र से लोग बुढ़ापे की ओर जाना शुरू करते हैं। वे संकेत देते हैं कि, इस  उम्र में जेनेटिक प्रोग्राम का क्षय होना शुरू हो जाता है और शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। इन बदलावों में शामिल हैं:

  • वजन बढ़ना
  • मेटाबोलिज्म का धीमा होना
  • कुछ हार्मोनल बदलाव
  • स्मरण शक्ति का क्षय
  • नींद के पैटर्न में बदलाव

इसके बाद होने वाली प्रक्रिया की स्पीड जेनेटिक और लाइफस्टाइल पर निर्भर करती है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन के अनुसार उम्र बढ़ना तीन चरणों में होती है और समान रूप से नहीं होता है। यह स्टडी जर्नल नेचर में प्रकाशित किया गया था और इसमें उम्र बढ़ने के 5 मार्कर बताये गए हैं:

  • सबसे पहले धीमा मेटाबोलिज्म
  • कमजोर हड्डियाँ और हड्डियों की बनावट
  • इसके अलावा याददाश्त की समस्याएं
  • नींद का पैटर्न बदल जाता है
  • मांसपेशियों की संरचना बिगड़ती है

इन मापदंडों के आधार पर उम्र बढ़ने के तीन क्षण हैं। पहला 34 साल की उम्र में, दूसरा 60 साल की उम्र में और तीसरा 78 साल की उम्र में होता है। इस दृष्टिकोण से, जिस उम्र में हम बुढ़ापे की ओर जाना शुरू करते हैं, वह उम्वर 34 की है।

न्यूरोलॉजी और न्यूरोलॉजिकल साइंसेज के प्रोफेसर और इस स्टडी के डायरेक्टर टोनी वायस-कोरे के अनुसार रक्त-जनित प्रोटीन में अहम बदलाव इन्हीं उम्रों में शुरू होते हैं। यही बुढ़ापे के इन शिखरों को मार्क करता है।


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क्रोनोलोजिकल एज और बायोलॉजिकल एज

क्रोनोलोजिकल एज बुढ़ापे की पारंपरिक अवधारणा है। इसका अर्जथ जन्म के बाद बीते वर्ष हैं। यह मूल रूप से एक सोशल और कल्चरल इंडिकेटर है। हालाँकि जैविक दृष्टिकोण से यह बहुत अहम है।

दूसरी ओर कोशिकाओं की क्षय से बायोलॉजिकल एज को मापा जाता है। ज्यादा सटीक रूप से, कोई यह कह सकता है कि इसे खराब कोशिका को ठीक करने की शरीर की क्षमता से मापा जाता है।

इसे टेलोमियर की लंबाई से स्थापित किया जा सकता है। टेलोमियर क्रोमोजोम के सिरे पर होता है। कोशिका में होने वाले हर सेल डिवीजन के साथ ये छोटे होते हैं, और आखिरकार जब वे समाप्त हो जाते हैं तो कोशिका मर जाती है। इस प्रक्रिया की स्थिति एक्सपर्ट को बायोलॉजिकल एज को मापने की सहूलियत देती है, जो हमेशा क्रोनोलोजिकल एज से मेल नहीं खाती ह।

Salech, M. F., Jara, L. R., & Michea, A. L. (2012). Cambios fisiológicos asociados al envejecimiento. Revista Médica Clínica Las Condes, 23(1), 19-29.