टी ट्री ऑयल : वह अद्भुत तेल जिसके हैं कई नायब फायदे

टी ट्री ऑयल को हमेशा किसी विशिष्ट अंग पर ही लगाएं। इसके अलावा, तेल लगाने से पहले थोड़ा पानी मिलाकर इसे कुछ हल्का कर लेना ही अच्छा है, जिससे यह कोई समस्या या एलर्जी न पैदा कर पाए।
टी ट्री ऑयल : वह अद्भुत तेल जिसके हैं कई नायब फायदे

आखिरी अपडेट: 17 दिसम्बर, 2018

सदियों से त्वचा से जुड़ी समस्याओं के इलाज में टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, इसके औषधीय उपयोग इससे कहीं ज्यादा हैं।

यह जानना दिलचस्प होगा कि टी ट्री ऑयल मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया से आता है। सबसे पहले इसका इस्तेमाल यहीं शुरू हुआ था, मेलालूका अल्टरनिफ़ोलिया (Melalueca Alternifolia) नाम के पेड़ की पत्तियों का भाप से आसवन (steam distillation) की बदौलत।

तब से ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी हमेशा ही त्वचा की समस्याओं, साँस की तकलीफ़ (respiratory problems), सर्दी-जुकाम और एलर्जी से लेकर ऐसी तमाम तकलीफ़ों का इलाज इससे करते हैं।

इसके ढेर सारे फायदों की वजह से इस समय फार्मास्यूटिकल और अरोमाथेरेपी इंडस्ट्री में टी ट्री ऑयल का नियमित इस्तेमाल हो रहा है।

उदाहरण के लिए, इसकी महक बहुत अच्छी होती है। आप इसे किसी भी हेल्थ स्टोर में बहुत सस्ते दामों पर आसानी से ढूंढ़ सकते हैं। यह बहुत आम समस्याओं के लिए बहुत उत्कृष्ट नतीजे देता है।

यहाँ हम इसके रोजमर्रा के कई उपयोगों के बारे में बताएंगे जो आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

टी ट्री ऑयल मुँहासों के ट्रीटमेंट में मददगार है

लगातार बने रहने वाले कील-मुँहासे (acne) या मस्से से छुटकारा पाने का एक असरदार माध्यम टी ट्री ऑयल (Tea tree oil) है। इसके जीवाणुरोधी, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण त्वचा की इस आम समस्या का मुकाबला करने के लिए आदर्श हैं।

हालांकि याद रखें, इस तेल को पानी में मिलाये बिना त्वचा पर न लगाएं। इसमें थोड़ा पानी मिलाकर इसे डाईल्युट कर लेना चाहिए।

मुँहासे के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग कैसे करें

टी ट्री ऑयल : मुँहासे

अनुपात

  • 1 बूंद टी ट्री ऑयल
  • 10 बूंदें पानी की
  • 5 बूंदें विच हेज़ेल (witch hazel) की

इस्तेमाल कैसे करें

तमाम इन्ग्रेडिएंट के एक सरल और असरदार मिश्रण को कॉटन बॉल से प्रभावित जगह पर लगाएं। इसे रोज़ाना दो बार लगाना चाहिए: सुबह और रात को सोने से पहले। एक हफ़्ते बाद आप इस मिश्रण का सकारात्मक असर देखेंगे।

टी ट्री ऑयल नाखूनों के क्यूटिकल की हिफ़ाजत में सहायक है

इस तेल के कई कॉस्मेटिक उपयोग हैं। उनमें एक यह है कि यह नाखूनों के असमान फटे हुए क्यूटिकल (nail cuticle) को कमजोर करने में मदद करता है। टी ट्री ऑयल नाखूनों के फंगल संक्रमण के ट्रीटमेंट में भी मदद करता है।

इसका उपयोग कैसे करें और इसे कैसे लागू करें

  • अपने मैनीक्योर में पूरी कमयाबी के लिए आपको बस एक कॉटन बॉल को इसमें डुबोकर क्यूटिकल पर लगाने की ज़रूरत है। कुछ मिनटों बाद आप देखेंगे, क्षतिग्रस्त क्यूटिकल से छुटकारा पाना कितना आसान है।
  • नाखूनों के संक्रमण से मुकाबले का एक और शानदार तरीका अपनी नेल पॉलिश में टी ट्री ऑयल की 5 बूंदें डाल लेना है। कुछ सेकंड के लिए नेल पॉलिश की शीशी हिलाएं और मिश्रण को हाथ और पैर के नाखूनों पर लगाएं।

पिट्रियेसिस का इलाज टी ट्री ऑयल से

टी ट्री ऑयल : मुँहासेपिट्रियेसिस

पिट्रियेसिस रोजिया (Pityriasis Rosea) एक त्वचा रोग है जो पतझड़ या वसंत में उभरता है।

इसकी शुरुआत एक घाव के रूप में होती है, फिर यह एरिथेमेटस (लाल) धब्बों (erythematous spots) में तब्दील होकर त्वचा में पपड़ियाँ उखड़ने की ओर जाता है।

इसकी उत्पत्ति संक्रामक और इसका ट्रीटमेंट कई मामलों में कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroids) तक ही सीमित है। इसे बढ़ने से रोकने का एक और असरदार तरीका टी ट्री ऑयल का उपयोग करना है। यह त्वचा पर इसके असर को कम करने में भी मदद करेगा।

इसका उपयोग कैसे करें

इस किस्म के तेल की डोज हमेशा ही उपयोग किए जाने वाले पानी की मात्रा की 5% से कम या ज्यादा होनी चाहिए

  • उदाहरण के लिए, आप आधा ग्लास पानी (100 मिलीलीटर) लेकर इसमें 5 मिलीलीटर टी ट्री ऑयल डालकर ताज़ा सॉल्यूशन बना सकते हैं।
  • यदि आप पिट्रियेसिस की तकलीफ से पीड़ित हैं, तो डाईल्युट टी ट्री ऑयल लगाने से पहले प्रभावित क्षेत्र को साफ कर लेना चाहिए। फिर मिश्रण को लगाने के बाद आपको वहाँ मालिश करनी चाहिए। हर रोज ऐसा करने की सलाह दी जाती है।

धीरे-धीरे आपको सकारात्मक नतीजे दिखने शुरू हो जायेंगे।

एथलीट फूट का इलाज टी ट्री ऑयल से

ऑनिकोमायकोसिस अर्थात एथलीट फूट (Athlete’s food) का कारण एक ख़ास किस्म का फंगस है। ये डर्मैटोफाईट गर्म और आर्द्र स्थानों में बढ़ते हैं। वे त्वचा के मृत टिशू में रहते हैं।

इस रोग से पीड़ित होने पर पैरों के किनारों के साथ-साथ पैर की उंगलियों के बीच त्वचा में सूजन और इसमें पपड़ियाँ उधड़ने के लक्षण बहुत आम है। इसके अलावा, एथलीट फूट एक असुविधाजनक स्थिति है जो आपके पैर की उँगलियों पर असर डाल सकती है।

इस स्थिति का इलाज करने का एक उपाय टी ट्री ऑयल का उपयोग करना है, जो संक्रमण को धीमा कर देगा। अब हम बताएंगे, इस परिणाम को कैसे हासिल करना है।

इसका उपयोग कैसे करें

  • बाथटब को गर्म पानी से भरें।
  • पानी में टी ट्री ऑयल की 10 बूंदें और रोज़मेरी ऑयल की 10 बूंदें डाल दें।

बाथ में अपने पैरों को 20 मिनट तक डुबोकर रखें। इसके बाद उन्हें सावधानी से सुखाएं। पैर की उंगलियों के बीच वाले भाग को सुखाना न भूलें। रोज घर लौटकर इस प्रक्रिया को दोहरायें।

मच्छरों के लिए टी ट्री ऑयल सर्वश्रेष्ठ रिपेलेंट है

टी ट्री ऑयल सर्वश्रेष्ठ रेपेलेंट

यह नुस्ख़ा कभी नाकाम नहीं होता है। आप बहुत आर्द्रता वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो मच्छरों के हमले का जोखिम उठा रहे हैं। हम पहले से ही जानते हैं, इन कीड़ों जैसा कोई दूसरा दुश्मन नहीं है। हमारा ख़ून पीते हुए ये बीमारियों फैला सकते हैं।

कुछ मामलों में ऑर्गेनिक रिपेलेंट की तलाश या ख़ास किस्म के कपड़े पहनना मच्छरों को भगाने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। हम आपको यह नुस्खा अपनाने की सलाह देते हैं।

मच्छरों के लिए टी ट्री ऑयल से अपना खुद का रिपेलेंट (Mosquito Repellent) बनायें। इसे कैसे बनाना है, यह नीचे देखें।

इन्ग्रेडिएंट

  • 5 चम्मच पानी (50 मिलीलीटर)
  • टी ट्री ऑयल की 10 बूंदें
  • 100 बूँदें साइट्रस या एसेंशियल लेमन जूस की

इसे ऐसे बनाएं

इस मिश्रण को बनाने के लिए आपको एक बोतल की ज़रूरत होगी जिसमें ऑयल डिफ्युजर लगा हो। हर रात सोने से पहले इस मिश्रण को लगाना है।

यह एक शानदार और सस्ता रिपेलेंट है और हमेशा घर में रखने लायक है।

निष्कर्ष के तौर पर, आप पहले ही देख चुके हैं, इस तेल के कितने शानदार उपयोग हैं। याद रखें, टी ट्री ऑयल को किसी अंग पर लगाने से पहले इसमें थोड़ा पानी मिला लेना बेहतर है। एक सुझाव के रूप में, बता दें कि टी ट्री ऑयल घरेलू सफाई के कामों में भी इस्तेमाल होता है।

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