5 सबसे ज़रूरी बातें जो आपको प्रीडायबिटीज़ स्थिति के बारे में जानकर रखना चाहिए

डायबिटीज़ की ही तरह, प्रीडायबिटीज़ में भी स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। यही वजह है कि आपकी रेगुलर मेडिकल जांच होनी चाहिए ताकि इसके बारे में जल्द से जल्द पता लग सके।
5 सबसे ज़रूरी बातें जो आपको प्रीडायबिटीज़ स्थिति के बारे में जानकर रखना चाहिए

आखिरी अपडेट: 08 फ़रवरी, 2019

प्रीडायबिटीज़ होने का मतलब है, शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक है, लेकिन इतना भी अधिक नहीं है कि रोगी में डायबिटीज़ के वास्तविक लक्षणों को उभार सके।

हम सभी ने टाइप 2 डायबिटीज़ के बारे में पहले से सुन रखा है। टाइप 2 डायबिटीज़ का शिकार होना किसी गंभीर बीमारी से कम नहीं है, और इसे झेलना दुनिया की एक महामारी से जूझने से कम नहीं है।

यह एक ऐसी स्थिति है जब हमारा शरीर शुगर पर नियंत्रण की अपनी क्षमता खो देता है। इस रोग के लक्षण हमें बीमारी का संकेत देने में बहुत लम्बा समय ले लेते हैं।

हमारे लिए डॉक्टरों का महत्व बढ़ जाता है। वही लोग हैं, जिन्हें हमें उन सभी संकेतों की पूरी जानकारी देनी चाहिए, जो हमारे लिए इस बीमारी के ख़तरे को बढ़ाते हैं।

इसलिए यदि  डॉक्टर ने यह पहचान की है कि आप प्रीडायबिटिक हैं, तो आपको टाइप 2 डायबिटीज़ होने का ख़तरा है। ऐसे में आपमें हृदय संबंधी समस्यायें शुरू होना और स्ट्रोक होना भी सच हो सकता है।

इसे हल्के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। हम एक ऐसी गंभीर और कड़वी सच्चाई के खिलाफ खड़े होते हैं, जिसके बारे में हमें मालूम होना चाहिए और जिसे हमें नियंत्रण में लेना चाहिए।

यहाँ हम प्रीडायबिटीज़ से जुड़ी मुख्य समस्याओं के बारे में बात करेंगें

सावधान रहें, खून में ज़्यादा शुगर होना बहुत ही गंभीर स्थिति है

प्रीडायबिटीज़ : खून में ज्यादा शुगर

मान लीजिए कि आपमें प्रीडायबिटीज़ की डायग्नोसिस हुई है।  क्या इसका 100% यही मतलब है कि हम डायबिटीज़ का शिकार होने जा रहे हैं?

जवाब है, नहीं। प्रीडायबिटीज़ होना एक ख़तरा ज़रूर है, लेकिन इसका सीधा संबंध डायबिटीज़ से नहीं है। इसका मतलब यह है कि किसी भी चीज़ से ज़्यादा ज़रूरी आपका सही दवा लेना है। आपको सभी मेडिकल गाइडलाइन का पालन करना चाहिए और समय-समय पर अपनी जांच कराते रहना चाहिए।

फिर भी, मुख्य समस्या यही है कि, आम तौर पर न तो प्रीडायबिटीज़ और न ही डायबिटीज़ जैसी परेशानियाँ स्पष्ट लक्षण दिखाती हैं। इसलिए सावधान रहें और इस बात को समझें कि डायग्नोसिस और इलाज के बिना इस बीमारी के प्रभाव बहुत गंभीर हो सकते हैं।

  • डायबिटीज़ रक्त के थक्के के जोखिम को बढ़ाता है जो दिल के दौरे और स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
  • बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल से नर्व डैमेज, पैरों में दर्द और उनके सुन्न होने की स्थिति भी आ सकती है।
  • हमारी आँख के रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं और इससे अंधापन हो सकता है।
  • हम अपनी किडनी को पहुँचने वाले नुकसान के बारे में नहीं भूल सकते हैं। बढ़े ब्लड शुगर से उनको क्षति पहुँच सकती है और यह रीनल फेलियर की वजह बन सकता है।
  • इसके साथ-साथ बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल शरीर की वाइट ब्लड सेल्स के काम करने के ढंग को बदल सकते हैं। इसकी वजह से हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता (immune system) कमजोर हो जाती  है और हम संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील होते जाते हैं।

प्रीडायबिटीज़ होने का सबसे अधिक ख़तरा किसे है?

प्रीडायबिटीज़ होने का सबसे अधिक ख़तरा किसे है

  • वे लोग जिनके परिवार में डायबिटीज़ की समस्या पहले भी रह चुकी हो
  • वे लोग जो ज़्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं
  • गलत डाइट वाले 45 साल से ज़्यादा की उम्र के लोग
  • वे महिलाएँ जिन्हें गर्भावस्था के समय डायबिटीज़ की शिकायत होती है
  • वे लोग जिनके पेट पर चर्बी जमा रहती है
  • वे लोग जो गतिहीन और सुस्त जीवनशैली जीते हैं
  • वे महिलाएँ जिन्हें ओवेरियन सिस्ट है, और कुछ अवसरों पर, ये समस्या डायबिटीज़ का होना तय करती है। 

प्रीडायबिटीज़ के लक्षण क्या हैं?

हम पहले चर्चा कर चुकें है, डायबिटीज़ और प्रीडायबिटीज़ जैसे रोगों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें लम्बे समय तक इनके लक्षण नहीं दिखते हैं और इनके होने का पता भी नहीं चल पाता है

डॉक्टर हमारी मेडिकल हिस्ट्री और नियमित चेकअप के माध्यम से पता लगा सकते हैं कि क्या हमारे खून में शुगर की मात्रा ज़्यादा है। 

फ़िर भी हम इन लक्षणों के माध्यम से इस बारे में पता कर सकते हैं:

  • संक्रमण का लगातार बने रहना
  • बहुत ज़्यादा प्यास लगना
  • थकान महसूस होना
  • बार-बार पेशाब आना

यह सभी सामान्य से दिखने वाले लक्षण हैं, जिसके चलते हम न तो इनके प्रति गंभीर होते हैं और न ही इन पर ध्यान देते हैं

अगर प्रीडायबिटीज़ है, तो हमें कौन से टेस्ट कराने चाहिए?

  • प्रीडायबिटीज़ के बारे में जानने के लिए खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट कराना सबसे सामान्य जांच में से एक है। इस जांच के माध्यम से शरीर के ग्लूकोज लेवल के बारे में मालूम किया जाता है। अगर ग्लूकोल का स्तर 100 से 125 मिलीग्राम के बीच आता है, तो हम प्रीडायबिटिक माने जा सकते हैं।
  • दूसरी जांच ग्लूकोज टॉलरेंस पर आधारित है जिसे खाना खाने के बाद कराया जाता है। अगर ग्लूकोज का स्तर 140 से 200 मिलीग्राम के बीच आता है, तो भी हम प्रीडायबिटिक माने जा सकते हैं।

प्रीडायबिटीज़ को शिकस्त देकर सामन्य जीवन कैसे जी सकते हैं? 
प्रीडायबिटीज़ को शिकस्त देकर सामन्य जीवन कैसे जी सकते हैं?

यदि हम डॉक्टर की सलाह मानें और अपनी जीवनशैली में सुधार लाएं तो डायबिटीज़ को नियंत्रित किया जा सकता  है

हमें इन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए:

  • कोशिश करके मेडिटरेनियन डाइट का पालन करें और खाने में ऑलिव ऑयल, साक-सब्जी, फ़लियां और ताज़े फ़ल इत्यादि का सेवन करें…
  • वजन कंट्रोल में रखें
  • संयम के साथ व्यायाम करें
  • शरीर में विटामिन D बढायें

आज की इस चर्चा से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि प्रीडायबिटीज़ पर काबू पाना और उसके चलते डायबिटीज़ की रोकथाम करना हमारे अपने हाथ में हैं। अब समय आ चुका है जब हमें अपना खूब अच्छी तरह ध्यान रखना चाहिए। 

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