गाइनेकोलॉजिस्ट की क्लिनिक में पैप स्मीयर टेस्ट

कई किस्म के स्त्री रोगों का पता लगाने के लिए गाइनेकोलॉजिस्ट की क्लिनिक में कराये जाने वाले कई अलग-अलग टेस्ट हैं। दरअसल पैप स्मीयर सबसे आम टेस्ट में से एक है। यह क्या है? इस आर्टिकल में इनके बारे में ज्यादा जानें!
गाइनेकोलॉजिस्ट की क्लिनिक में पैप स्मीयर टेस्ट

आखिरी अपडेट: 01 अक्टूबर, 2019

पैप स्मीयर रूटीन मेडिकल टेस्ट हैं जो स्त्रियों में सर्वाइकल कैंसर का पता लगा सकते हैं। रिप्रोडक्टिव सिस्टम की दूसरी समस्याओं का पता लगाने के लिए भी डॉक्टर इनका इस्तेमाल करते हैं। इस टेस्ट का नामकारण जार्जियोस पापोनिकोलाउ के नाम पर हुआ है जो इस प्रकार के कैंसर की डायग्नोसिस में अग्रणी डॉक्टरों में से एक थे।

कुछ लोग इस टेस्ट को “वेजाइनल साइटोलॉजी” “एक्सफोलिएटिव साइटोलॉजी” या  बस “पैप” कहते हैं। इस टेस्ट का उद्देश्य सर्विक्स में ऐसी संभावित असामान्य सेल का पता लगाना है जो कैंसरकारी बन सकती हैं। यह इन प्रीकैंसेरस सेल्स का शुरू में ही पता लगाना और उनमें कैंसर उभरने से पहले ही उनका इलाज करना है।

दूसरी आम बीमारियां जिनका पैप स्मीयर टेस्ट पता लगा सकता है उनमें सूजन या इन्फेक्शन है।

हालाँकि महिलाओं को ये टेस्ट कब कराना चाहिए इस बारे में जानने के लिए यह आर्टिकल पढ़ते रहें।

पैप स्मीयर टेस्ट क्या हैं (What are pap smears)?

पैप स्मीयर टेस्ट क्या हैं (What are pap smears)

गाइनेकोलॉजिस्ट ही पैप स्मीयर करते हैं। आम तौर पर अपने क्लिनिक या किसी हेल्थ सेंटर में। दरअसल इसके लिए उन्हें बहुत स्पेशल उपकरणों की ज़रूरत नहीं होती है। इस प्रोसीजर में आपको थोड़ी असुविधा ज़रूर होगी लेकिन यह दर्दनाक नहीं है

आमतौर पर डॉक्टर यह टेस्ट पेल्विस एरिया के परीक्षण से करते हैं। फिर डॉक्टर युटेरस, वेजाइना और ओवेरी की स्थिति की जांच करने के लिए एक सामान्य टेस्ट करते हैं। इस अंग के भीतर देखने के लिए वे इसे फैलाने के लिए रोगी की योनि में एक स्पेकुलम डालते हैं।

विजुअल इंस्पेक्शन के बाद गाइनेकोलॉजिस्ट सर्विक्स से टिशू का सैम्पल निकाल लेंगे। इसे वे एक सर्वाइकल ब्रश या स्क्रेपर से करते हैं।

इसके बाद सैम्पल को वे एक छोटी ग्लास प्लेट पर रखते हैं और स्पेशलिस्ट द्वारा विश्लेषण कराने के लिए लैब में भेजते हैं। कुछ दिनों बाद लैब में रिपोर्ट तैयार होगी। रिपोर्ट लेने के लिए रोगी को डॉक्टर की क्लिनिक में वापस जाना होगा।

महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट कब शुरू करना चाहिए?

महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट कब शुरू करना चाहिए?

लम्बे समय से स्पेशलिस्ट इस विषय पर बहस करते रहे हैं कि महिलाओं को अपना पहला पैप स्मीयर टेस्ट कब कराना चाहिए। कुछ साल पहले उन्होंने किशोरों में 16 या 18 साल की उम्र में अपना पहला पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सिफारिश की थी

हालांकि अब डॉक्टर उन स्वस्थ किशोरों में पेल्विस एरिया या पैप स्मीयर टेस्ट कराने की ज़रूरत महसूस नहीं करते हैं जो यौन रूप से सक्रिय नहीं हैं और जिनमें लक्षण नहीं हैं। जिस उम्र में ज्यादातर डॉक्टर इन टेस्ट को शुरू करने की सलाह देते हैं वह है 21 साल।

इसके अलावा जब व्यक्ति सेक्सुअली एक्टिव हो जाता है, तो नियमित रूप से गाइनेकोलॉजिस्ट को विजिट करने का समय आ जाता है। हालांकि अगर आपमें किसी किस्म की समस्या के लक्षण दीखते हैं तो आपको पहले ही विजिट करना चाहिए।

दरअसल यौन रूप से सक्रिय होने का अर्थ है ह्यूमन पैपिलोमावायरस ( Human Papillomavirus -HPV) के ग्रहण करने का ज्यादा जोखिम। कुछ मामलों में यह वायरस कैंसर का कारण बन सकता है। यह दूसरे तरह के वायरस और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन के संपर्क में आने का जोखिम भी बढ़ाता है।

आपको यह टेस्ट कितने दिनों पर कराना चाहिए?

हाल तक डॉक्टर आमतौर पर इस टेस्ट को साल में एक बार कराने की सलाह देते हैं। हालाँकि अब इन निर्देशों में थोड़ा बदलाव आया है

किसी भी मामले में आपका गाइनेकोलॉजिस्ट यह तय करेगा कि आपको कितनी बार टेस्ट करना चाहिए। यह सब आपकी विशेष स्थिति पर निर्भर करता है। इसके अलावा, इसका दोहराव इस बात पर निर्भर करेगा कि आपकी इसकी फैमिली हिस्ट्री है या नहीं। अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री नहीं है या कोई लक्षण नहीं है और परिणाम लगातार तीन साल तक नेगेटिव रहे तो डॉक्टर टेस्ट के दरम्यान समय का फासला बढ़ा सकता है।

उस मामले में डॉक्टर वर्तमान में कहते हैं कि 21 से 29 वर्ष की महिलाओं को हर तीन साल में कम से कम एक बार जांच करवानी चाहिए। 30 से 65 वर्ष की महिलाएं अपनी विशेष स्थिति के आधार पर हर तीन से पांच साल पर एक बार यह टेस्ट करा सकती हैं।

65 वर्ष की आयु के बाद बार-बार टेस्ट की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि फिर भी इसकी ज़रूरत हो सकती है अगर HIV हो, या इससे पहले इस तरह की की समस्या के लिए इलाज किया गया है।

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