न्यूरोपैथिक दर्द: रात को उठने वाला वह दर्द

22 नवम्बर, 2018
नयूरोपैथिक दर्द के साथ परेशानी यह है कि हर किसी को यह अलग-अलग तरह से महसूस होता है। आसान शब्दों में कहें तो इसका इलाज हर इंसान के लिए अलग व उसकी ज़रुरत के मुताबिक होता है।
“नयूरोपैथिक दर्द (Neuropathic Pain)” सुनने में आपको थोड़ा अजीब ज़रूर लग सकता है, लेकिन इस पीड़ा का संबंध रात को तेज़ हो जाने वाले हाथ-पैर के दर्द, खुजली या सुन्नता से होता है।

हो सकता है, सुनने में अब यह आपको इतना अजीब न लगे।

यह बीमारी बिल्कुल किसी बिजली के झटके जैसी होती है। अपने शरीर में आपको एक जलन, एक सिहरन महसूस होती है। हफ़्तों तक गायब रहने के बाद वह अचानक ही आपको परेशान करने के लिए लौट आती है।

हो सकता है, उस बीमारी की वजह से आप चैन की नींद भी न ले पाते हों।

नयूरोपैथिक दर्द से सिर्फ़ 10% लोग ही प्रभावित होते हैं। आपकी ज़िन्दगी का सुख-चैन चुरा लेने वाले इस रोग का कभी-कभी ऐसा कोई भी कारगर उपाय नहीं होता जिससे इस बीमारी से पूरी तरह से छुटकारा पाया जा सके।

इसके और भी कुछ लक्षण होते हैं, जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए।

ऐसे में हम आपको किसी विशेषज्ञ की राय लेने की सलाह देंगे। इस बीमारी के कई तरह के इलाज होते हैं। ज़्यादातर मामलों में आपका इलाज आपकी ज़रूरत के मुताबिक ही किया जाता है।

लेकिन फिर भी हम आपको कुछ बुनियादी बातें बताने जा रहे हैं ताकि आप समझ सकें कि आख़िर रात को यह दर्द इतना तेज़ क्यों हो जाता है

नयूरोपैथिक दर्द क्यों होता है?

नयूरोपैथिक दर्द के पीछे हमारे नर्वस सिस्टम में आए हल्के से बदलाव का हाथ होता है। किसी स्थायी दर्द से परेशान लोग भी इसकी चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

परेशान कर देने वाले उन “झटकों” के लिए कभी-कभी हमारी रीढ़ की हड्डी में लगी छोटी-मोटी चोटें भी ज़िम्मेदार होती हैं।

कारण कोई भी, अक्सर वह परेशानी हमारे चेहरे की ट्राइजेमिनल नस या फ़िर इंटरकोस्टल नस के माध्याम से ही बाहर आती है।

यह एक बहुत जटिल तरह का दर्द होता है। इतना जटिल कि वह हाथ-पैरों के “सो जाने” तक ही सीमित नहीं रहता।

आपके लक्षणों के आधार पर ही एक विशेषज्ञ आपको किसी उचित निदान के बारे में बता सकता है

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नयूरोपैथिक दर्द में हमारे दिमाग को दर्द महसूस ही नहीं होता

मुझे कौन-कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं?

नयूरोपैथिक दर्द स्थायी होता है। जैसा कि हमने इस लेख की शुरुआत में बताया था, वह आता-जाता रहता है। लेकिन इससे पीड़ित मरीज़ों को हमेशा यही शिकायत रहती है कि रात को यह बर्दाश्त से बाहर हो जाता है

हाथ-पैरों की असहजता आमतौर पर हमारे पूरे शरीर में महसूस होती अन्य संवेदनाओं के साथ ही आती है, जैसे किसी और के द्वारा हमारी त्वचा के खुरचे जाने का एहसास

रात को यह दर्द तेज़ क्यों हो जाता है?

विशेषज्ञों का मानना है, अक्सर नयूरोपैथिक दर्द की सही पहचान नहीं हो पाती। अगर यह सच है तो इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं:

  • इस दर्द का हड्डियों और जोड़ों से कोई लेना-देना नहीं होता। यहाँ सवाल तो नसों और न्यूरोग्लिया का है। आसान शब्दों में कहें तो यह केंद्रीय संवेदनशीलता (सेंट्रल सेंसिटिविटी) ग्लियल कोशिकाओं में मौजूद होती है।
  • एस्पिरिन खाकर भी नयूरोपैथिक दर्द से कोई राहत नहीं मिलती। अपने दर्द से आराम न मिलने पर कुछ लोगों के तो हाथ-पाँव भी फूलने लगते हैं। कुछ वक़्त तक कोई भी समाधान न मिलने पर वे हताश महसूस करने लगते हैं।

अगर आपका दर्द भी रात को तेज़ हो जाता है तो इसका कारण यह है कि पूरे दिन के बाद तब आप हिल-डुल नहीं रहे होते। आपके हिलने-डुलने से पैदा होने वाली हरकतों से आपके शरीर को कुछ हद तक थोड़ा आराम मिल जाता है, जिससे आपकी नसों के “हंगामे” में थोड़ी कमी आ जाती है।

थोड़ी देर आराम करते समय आपकी रगों में दौड़ते बिजली के झटके और तेज़ हो जाते हैं। सुस्त पड़ी आपकी मांसपेशियों की वजह से सारा तनाव आपके हाथों और पैरों में जमा होने लगता है।

रात में हाइपरसेंसिटिविटी भी बढ़ जाती है। हमें ऐसा लगता है जैसे हमारे अंग-अंग में कोई सुइयां चुभो रहा हो।

नयूरोपैथिक दर्द का एहसास

क्या नयूरोपैथिक दर्द का कोई कारगर उपाय है?

आप एक स्थायी रोग से ग्रस्त हैं। ऐसे में, सबसे ज़रूरी बात है उस बीमारी की एक समझ होना।

कभी-कभी आपको बेबस कर देने वाली वह असहजता और आपकी नींद खराब कर देना वाला वह दर्द हमेशा आपके साथ रहेंगे।

लेकिन हार मान लेने के बजाये आपको लगातार अपनी ज़िन्दगी को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहना चाहिए

यह एक बहुत ही व्यक्तिगत लड़ाई होती है। इसका मतलब यह है कि जो इलाज आपके दोस्त के लिए फायदेमंद रहा हो, ऐसा ज़रूरी नहीं कि वह आपके लिए भी कारगर साबित हो।

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आइए अब मौजूद विकल्पों पर एक नज़र डालते हैं:

  • दवाइयां: जैसा कि हमने ऊपर बताया, यह ज़रूरी नहीं कि दवा लेने से आपका नयूरोपैथिक दर्द 100% ठीक हो जाएगा। लेकिन आपको अलग-अलग दवा, सूजनरोधी स्टेरॉयड्स, या आपके डॉक्टर द्वारा सुझाई अन्य दवाइयां लेते रहना चाहिए।
  • मालिश या फ़िर गर्म/ठंडे लेप जैसी पैसिव फिज़ियोथेरेपी भी कारगर साबित हो सकती है। साथ ही, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसी सक्रिय थेरेपी से भी आपको काफ़ी फायदा मिल सकता है।
  • सर्जरी: आपके दर्द के कारण का पता लगाने की अपनी कोशिश में आपका डॉक्टर आपको इस संभावना के बारे में भी बता सकता है ताकि परेशानी की जड़ तक पहुंचकर उसे ठीक किया जा सके।
नयूरोपैथिक दर्द का इलाज कैसे करें

  • न्यूरोस्टिम्यूलेटर्स (Neurostimulators): यह क्लिनिकी तकनीक भी आपकी ज़िन्दगी में सुधार ला सकती है। इसमें आपकी रीढ़ की हड्डी के पास मौजूद एपीड्यूरल स्पेस में छोटी-छोटी, हल्की बिजली की तरंगें भेजी जाती हैं। ऐसा करने से एक तेज़ दर्द की जगह आपको एक अतिसूक्ष्म सिहरन(tingling) महसूस होती है

सौ बातों की एक बात यह है कि बेहद नाज़ुक से इस नयूरोपैथिक दर्द के कई तरह के इलाज होते हैं।

उन सभी को आज़माकर अपने लिए सबसे कारगर इलाज को खोज निकालना एक बहुत ही अच्छा ख्याल है। ऐसा करके आप अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़कर उस दर्द के असर को कम कर सकते हैं।

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