जानें आलोचना से खुद का बचाव कैसे करना है

08 अगस्त, 2020
जब आप आलोचना को मुखर रहकर स्वीकार करते हैं और रक्षात्मक रूख नहीं अपनाते, तो आपको बुरा नहीं लगता। इससे आपको बेहतर मनोवैज्ञानिक संतुलन भी मिलेगा।
 

“आज आपने अच्छा काम नहीं किया” “अगर मैं आपकी जगह होता तो वह निर्णय नहीं लेता” … दिन भर हम आलोचना झेलते हैं। क्या आलोचना से बचाव कर पाना आपके लिए मुश्किल होता है?

मुखर और निश्चयात्मक होने का गुण कई लोगों में ठीक से विकसित नहीं होता। हालाँकि यह हमें अपना बचाव करने और ससम्मान प्रतिक्रिया जताने का तरीका जानने की सुविधा भी देता है।

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रक्षात्मक न हो – सवाल करें

जब कोई हमारी आलोचना करता है, तो हमारी पहली प्रतिक्रिया डिफेंसिव होने की हो जाती है। हम इसे एक हमले के रूप में लेते हैं। इससे हमें दुख होता है और आपत्तिजनक महसूस होता है। इसलिए हम इस तरह रियेक्ट करते हैं।

हालांकि जब हम रक्षात्मक होते हैं, तो हम पलटवार करना चाहते हैं। हम आलोचना को उनके चेहरों पर वापस फेंक मारते हैं और उन्हें उनकी ही दवा का स्वाद चखाने की कोशिश करते हैं।

यदि आप सीखना चाहते हैं कि आलोचना से खुद का बचाव कैसे करें, तो यह वह रास्ता नहीं है। पलटवार वास्तव में हमें उनके लेवल पर ले जाता है।

इसलिए जब आप उनकी आलोचना से खुद को बचाना चाहते हैं तो एक पल रुकिए सांस लीजिये और एक सवाल पूछें।

प्रश्न करना ऐसी बात है जिसकी आलोचना करने वाले व्यक्ति को उम्मीद नहीं होती।

उदाहरण के लिए अगर कोई कहे, “वाह, आज आपने क्या पहना है?” खुद को सही ठहराने की कोशिश करने, अपनी असुरक्षा दिखाने या वापस हमला करने के बजाय यह पूछना बेहतर है: “क्या फर्क पड़ता है कि मैंने क्या पहना है?”

वे शायद नहीं जानते कि इसका क्या जवाब देना है। या अगर वे जवाब दें भी तो उसका कोई अर्थ नहीं होगा।

अहम बात यह है कि उनकी आलोचना आपको पागल नहीं करेगी, और न ही अपने बारे में सोचकर बुरा महसूस करने देगी।

आलोचना को मुखरता से स्वीकार करें

 
आलोचना को मुखरता से स्वीकार करें

अगर आपने कुछ किया है और कोई आपकी आलोचना करता है, पर आपको बुरा महसूस कराने के लिए नहीं बल्कि इसलिए कि वे सही हैं, तो डिफेंसिव होना अच्छा नहीं है।

अगर कोई दोस्त आपको तैयार होने और उससे मिलने में इतना वक्त लेने के लिए आपकी आलोचना करता है, तो यह कहना अच्छा नहीं है, “उस वक्त को याद रखो जितनी देर मुझे तुम्हारा इंतजार करना पड़ा था?”

इस तरह की आलोचना पर प्रतिक्रिया देने से रिश्ते मजबूत नहीं होते। यह उन्हें कमजोर करता है, थोड़ा-थोड़ा करके, जब तक कि वे पूरी तरह टूट न जाएं।

आदर्श रिएक्शन स्वीकारोक्ति का होगा, “तुम सही हो, मैंने लंबा वक्त लिया।”

यहाँ एक और उदाहरण है। अगर वे कहें, “मैं तुमसे बात नहीं कर सकता, तुम राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानते,” आप कह सकते हैं, “सच है, मैं राजनीति के बारे में वाकई कुछ नहीं जानता।”

इसे स्वीकार कीजिये कि आप नहीं जानते या आप गलत थे। हालाँकि, कभी भी किसी को आप पर दबाव न डालने दें या आपको ऐसा महसूस कराने दें कि आपको बदलने की ज़रूरत है।

अगर आप राजनीति के बारे में कुछ भी नहीं जानते क्योंकि वास्तव में आपकी इसमें दिलचस्पी नहीं थी तो इसका कोई कारण नहीं है कि इसके लिए आपको अपने बारे में बहुत बुरा सोचें।

स्वीकार करें कि आप कौन हैं और बिना किसी शर्म के अपनी स्थिति समझाएं।

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स्वीकारोक्ति के मनोभाव से अपना बचाव करें, लेकिन दूसरों की राय का सम्मान करें

अब एक अहम बात जिसे हम छोड़ नहीं सकते। जब तक आप दूसरे लोगों की राय का सम्मान करते हैं, तब तक आप खुद का बचाव कर सकते हैं। लेकिन सबसे बढ़कर, खुद का सम्मान करें।

अगर कोई आपको बताये कि आपका पहनावा हास्यास्पद है, तो उस राय से नाराज़ होने या ख़ारिज करने का कोई कारण नहीं है। इसका सम्मान करें, इसे स्वीकार करें, और कहें, “हाँ? खैर, मुझे यह पसंद है।”

 

हम सबकी रूचि समान नहीं होती. और आपको बदलने की कोई जरूरत नहीं है।

आप इस बात का सम्मान कर सकते हैं कि दूसरा आदमी ईमानदार है, और आपको अपनी राय दी। हालांकि, याद रखें कि आपकी राय ही सबसे ज्यादा मायने रखती है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग कैसे कपड़े पहनते हैं। यदि आप इसे पसंद करते हैं, तो यह मायने रखता है। यदि आप ऐसा सोचते हैं, तो आप सीखेंगे कि दूसरे लोगों की राय और रूचि को लेकर ज्यादा लचीला कैसे होना चाहिए।

क्या आप जानते हैं, आलोचना से खुद का बचाव कैसे करना है? किसी के आपकी आलोचना करने पर आपको कैसे प्रतिक्रिया देनी है?