"आई-मैसेज" क्या हैं?

07 अप्रैल, 2020
इंसान के बीच आपसी कम्युनिकेशन बेहद जटिल चीज है। इस कारण कुछ लोगों ने कई किस्म की रणनीतियाँ विकसित की है। ये हमें खुद को ज्यादा बेहतर रूप से अभिव्यक्त कर पाने की सुविधा देते हैं। उनमें से एक है, "आई-मैसेज"। इस आर्टिकल में हम बताएँगे, ये क्या होते हैं।

“आई-मैसेज” (I-messages) विशेष उपयोगी कम्युनिकेशन टूल हैं, उन मामलों में जब आप अपने पार्टनर को चोट पहुंचाए बिना अपने विचारों या भावनाओं को प्रकट करना चाहते हैं।

उदाहरण के लिए ऐसी स्थिति की कल्पना कीजिये जिसमें आप किसी दूसरे इंसान के काम करने के तरीके को पसंद नहीं करते। इससे जो बेचैनी पैदा होती है, जो भावनाएं पैदा होती हैं, उन्हें व्यक्त करना आपके लिए मुश्किल हो सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में लोग अक्सर टकराव से बचने के लिए यह कहने से बचते हैं कि वे वास्तव में क्या सोचते हैं। फिर अगर वे इसे कहने का फैसला भी करें तो यह मुश्किल वक्त होता है।

इस मामले में, “आई-मैसेज” का सहारा लेना ही सही तकनीक है, क्योंकि वे आपको खुद को बिना किसी रिएक्शन के सम्मानपूर्वक दिल खोलकर व्यक्त कर पाने की सुविधा देते हैं।

“आई-मैसेज” क्या हैं?

“आई-मैसेज” एक कम्युनिकेशन स्ट्रेट्जी है जो लोगों की आलोचना किये बिना अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर देती है।

जैसा कि “I-messages” फ्रेज से आप समझ सकते हैं इनका इस्तेमाल करने के लिए आपको फर्स्ट पर्सन के रूप में बोलने को प्राथमिकता देनी होगी। आप जिस बारे में बात कर रहे हैं, उस पर फोकस करें और अपनी भावनाओं को बताएं।


“आई-मैसेज” उपयोगी कम्युनिकेशन टूल हैं जब आप अपने पार्टनर को चोट पहुंचाए बिना अपने विचारों या भावनाओं को व्यक्त करना चाहते हैं। ये टकराव को कम करते हैं।

उदाहरण के लिए इस वाक्य पर ध्यान दें, “आप किसी भी चीज को उसके सही स्थान पर नहीं रखते।” यह बात दरअसल एक आलोचना है जो इकट्ठे रहने वाले दो लोगों के बीच हो सकती है। इस वाक्यालाप को सुनने वाला आदमी आहत महसूस कर सकता है और उसी तरह की प्रतिक्रिया दे सकता है।

इसके बजाय यह कहना कि “पिछले महीने मैं अपने दम पर तमाम सफाई करता रहा और मुझे कोई सपोर्ट नहीं मिला”, ज्यादा उपयुक्त होगा। इस मामले में बोलने वाले ने बताया कि क्या हुआ और उसे कैसा लगा, लेकिन दूसरे पर आरोप लगाने की उसने कोशिश नहीं की।

इस तरह से आपका पार्टनर आपके प्रति ज्यादा सहानुभूति महसूस करेगा। इसके अलावा उन्हें यह महसूस नहीं होगा कि उस पर आरोप लगाया जा रहा है। उसके लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करना आसान होगा।

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“आई-मैसेज” और “यू-मैसेज” के बीच अंतर

“यू-मैसेज” वे हैं जो आमतौर पर कुतर्क में इस्तेमाल किए जाते हैं। यहाँ “आई-मैसेज” और “यू-मैसेज” के बीच कुछ फर्क है:

दोषारोप

“यू-मैसेज” अच्छी कम्युनिकेशन में रुकावट डालते हैं क्योंकि अगर दूसरे व्यक्ति पर आप आरोप लगायेंगे तो वह आक्रांत महसूस कर सकता है। अपराध पर जोर देने से उलटा असर होगा। वह व्यक्ति आत्मरक्षा करेगा,  अपनी जिम्मेदारी कबूल नहीं करगा और दूसरों की आलोचना का सहारा लेगा

“आई-मैसेज” उनके रक्षात्मकता रवैये को सीमित करते हैं। अगर आप कहें कि “कल मुझे दुख हुआ क्योंकि आपने फोन नहीं किया” तो आपका पार्टनर उस तरह से जवाब नहीं देगा जैसा कि यह कहने पर कि “आपके कारण कल का दिन मेरे लिए भयानक गुजरा”।

आंकना

“यू-मैसेज” में इसे कहने वाला दूसरे इंसान पर एक राय बनाता है, जो महज आक्रोश पैदा करता है। उदाहरण के लिए यह वाक्य, “आप हमेशा इसी तरह काम करते हैं, आप कभी नहीं बदलेंगे!” यह समस्या को हल करने की दिशा में दूसरे व्यक्ति को मोटीवेट नहीं करेगा।

इसके बजाय यह कहना कि “जब आप मुझे नहीं बताते कि आपको देर होगी, मैं बहुत घबरा जाता/जाती हूं”, एक बेहतर विकल्प होगा। यह दूसरे व्यक्ति पर कोई राय बनाए बिना अपनी भावना को बताता है।

"आई-मैसेज" और "यू-मैसेज"

“यू-मैसेज” फैसला जारी करते हैं और अच्छे कम्युनिकेशन में बाधा डालते हैं। इसलिए वे समस्याओं को हल करना मुश्किल बना देते हैं।

टकराव का हल

“यू-मैसेज” समस्या को हल नहीं करते, वे आमतौर पर इसे बदतर बनाते हैं। हालाँकि, “आई-मैसेज”दोनों पक्षों के बीच हल खोजने की एक अच्छी स्ट्रेट्जी है।

जो हुआ उसका ब्यौरा देने पर अपना ध्यान केंद्रित करना, यह व्यक्त करना कि यह आपको कैसा महसूस कराता है, और एक विकल्प पेश करना टकराव को हल करने में बहुत मददगार हो सकता है।

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“आई-मैसेज” का इस्तेमाल कैसे करें

  • अपनी बात फर्स्ट पर्सन यानी प्रथम पुरुष में कहें। मिसाल के लिए, “मुझे फ़िक्र होती है …”, “मुझे बुरा लगता है जब …”, या “मैं दुखी हूँ क्योंकि …।”
  • यथासंभव दूसरे व्यक्ति के व्यवहार का वर्णन करें। उदाहरण के लिए, “जब आप बिना बताये देरी करते हैं…”, या “जब आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त के बारे में गलत बातें कहते हैं …।”
  • बताएं कि उनका व्यवहार आपको कैसा महसूस कराता है। उदाहरण के लिए, “मुझे लगता है, आप सम्मान नहीं करते और न ही मेरे वक्त को अहमियत देते हैं…”, “मुझे लगता है, मुझे इग्नोर किया जाता है …”, या “मुझे लगता है, आप मेरी पर्याप्त कद्र नहीं करते …।”
  • एक समाधान की पेशकश करें। उदाहरण के लिए, “अगली बार, मैं यह पसंद करूंगा अगर आप मुझे बता सकें कि आपको देर हो रही है”, “अगली बार लंबी लाइनों से बचने के लिए कुछ जल्दी शॉपिंग के लिए जाना पसंद करूँगा”, या “मैं चाहता हूं, अगली बार हम दोनों इकट्ठे कपड़े धोएं।”

“आई-मैसेज” किसी के साथ संवाद बनाने में उपयोगी होते हैं, इनमें आपके दोस्त, पार्टनर, रिश्तेदार, सहकर्मी या आपके मिलने-जुलने वाले हो सकते हैं

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह से संवाद करना दूसरे व्यक्ति को आरोपी या दोषी महसूस करने से रोकता है। वे महसूस करेंगे कि आप एक ऐसी स्थिति की जानकारी दे रहे हैं जिसे आप महसोस कर रहे हैं और उन पर आघात किये बिना एक हल निकाल रहे हैं।

इस तरह वे डिफेंसिव नहीं होते और समझते हैं कि आप उनके व्यवहार पर महसूस नहीं करते। इसलिए समस्या को हल करने में उनका सहयोग करना चाहते हैं।

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