शोक वह आंतरिक प्रक्रिया है जिसके लिए कोई तैयार नहीं होता

08 अक्टूबर, 2018
शोक एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो किसी भी प्रकार का नुकसान होने पर हमारे मस्तिष्क में होती है, भले ही हम कहीं भी मौजूद हों। प्रत्येक व्यक्ति इसे अलग-अलग तरह से महसूस करता है। हम सबको खुद को कुछ वक्त देने की ज़रूरत होती है जिससे हम अपने जीवन में इससे आगे निकल सकें।

शोक एक नाजुक और जटिल प्रक्रिया है जिसके जरिये हम किसी ऐसे व्यक्ति को अलविदा कहते हैं जो हमारे लिए महत्वपूर्ण था।

इस निजी चीज को कई व्यक्तिगत प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है जिन्हें हम दिन-प्रतिदिन विकसित करते हैं।

लेकिन जिस तरह से हममें से हर कोई इस स्वीकारोक्ति की अवस्था तक पहुँचता है, वहाँ हमेशा जेहन में एक ही लक्ष्य होता हैअपने प्रिय व्यक्ति को अपने दिल में सबसे कीमती खजाने के रूप में “स्थापित” करना।

एक बार जब उस व्यक्ति की याद आपकी यादों में शांतिपूर्ण तरीके से समा जाती है, तो आप फिर से खुद को खुश होने की अनुमति दे सकते हैं। शोक मनाने का मतलब किसी को भूलना नहीं है, जख्म को भरना है ताकि हम अपने प्रिय की गैर मौजूदगी में रहना सीख सकें।

आज, हम आपको इसके लिए सही रणनीति सिखाना चाहते हैं।

1. मेरा शोक, आपका शोक

मेरा शोक, आपका शोक

एक बात है जिसे मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट करते हैं: प्रत्येक व्यक्ति दुःख का अलग-अलग तरीके से सामना करता है। ये सभी तरीके समान रूप से माननीय हैं।

कभी-कभी आप लोगों को ऐसी झूठी धारणाओं के बारे में बात करते सुनते हैं – शोक मनाने का  बेहतरीन तरीका, सार्वलौकिक तरीका, जो हर किसी के लिए एक तरह से कारगर है। यहां कुछ झूठे विचार हैं जिन्हें हमें पहले तोड़ना सीख लेना चाहिए है।

इसे भी पढ़ें: एंग्जायटी अटैक के समय शांत होने के लिए 7 सुझाव

शोक के बारे में झूठे मिथक

  • जो लोग अपनी भावनाएं प्रकट नहीं करते, या दिखाते नहीं हैं, उनका शोक या तकलीफ सहने का तरीका सही नहीं होता है। यह सच नहीं है। शोक मनाना प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है।
  • इसका मतलब यह है कि जो लोग अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त नहीं करते हैं, जो अपनी भावनाएँ प्रकट करने के आदी नहीं होते हैं, वे दूसरों के साथ बात चीत करके अपनी भावनाएँ और एहसास को व्यक्त करने के लिए शोक को अपने तरीके से सँभालते हैं।

  • प्रिय की अनुपस्थिति से ठीक होने के लिए खुद को अकेले रखने की चाह, अकेले में सोचना, मनोवैज्ञानिक को देखने का विकल्प चुनने के समान ही सम्मानजनक है। हर व्यक्ति अपने स्वयं के घावों को अपने तरीके से ठीक करता है।

  • एक और झूठे मिथक के अनुसार समय सबकुछ ठीक कर देता है। यह बात सच नहीं है। समय अपने आप सबकुछ ठीक नहीं करता है, न ही यह अपने आप परिवर्तन लाता है, न ही नुकसान को समेटने का काम करता है।

  • हमें एक महत्वपूर्ण बात बहुत स्पष्ट करने की ज़रूरत है: वह यह कि खालीपन हमेशा आपके दिल में मौजूद रहेगा; समय इस अनुपस्थिति को अपने आप ठीक नहीं करता है। लेकिन इससे “दर्द में थोड़ी कमी” लाने में मदद मिलेगी, ताकि आप जीवन में आगे बढ़ सकें।

  • यहां एक और भी मिथक है: “उस पल में दर्द महसूस होता है, और जो लोग इसे महसूस नहीं करते वे भावनाहीन और पत्थरदिल होते हैं।” यह एक ऐसा विचार है जिसका खंडन करने की जरूरत है।

किसी नुकसान के बाद, दुर्घटना में या किसी बीमारी में किसी को खोने के बाद, ज़रूरी नहीं है कि दुख या दर्द तुरंत महसूस होने लगे। वास्तव में किसी-किसी को प्रतिक्रिया करने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि आपमें भावनाओं की कमी है।

यह ज्यादातर उस स्थिति में देखने को मिलता है जब कोई किसी की मृत्यु की सच्चाई को मानने से इंकार करता है। आप इसका विश्वास नहीं कर पाते। इसलिए आप प्रतिक्रिया करने में असमर्थ हो जाते हैं। धीरे धीरे इसका एहसास जब होता है, तो दर्द भी अपने आप आ जाता है

शोक: तितली

शोक के प्रबंधन की तकनीकें

आइए आपको फिर से बताएं, जिस शोक के रास्ते पर कोई चलता है वह बहुत ही निजी, कच्चा और कठिन होता है।

कोई विशिष्ट तकनीक नहीं है जो हर किसी के लिए काम करती हो। क्योंकि हर कोई अपने तरीके से दर्द को समझता है। इसका मतलब है, इसे उस तरीके से सँभालने की ज़रूरत है जो सबसे अच्छा हो और सबसे ज्यादा राहत दे।

लेकिन, आप कम से कम इन रणनीतियों का उपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: जीवन की नयी शुरुआत किसी भी उम्र में कैसे करें

अपने विचारों पर काबू पाना

जब आप किसी को खो देते हैं, तो आपका दिमाग जवाब नहीं देता है। आप केवल महसूस कर पाते हैं। सारे विचार जैसे भावनायें, भय और चिंता एकसाथ गड्ड-मड्ड हो जाते हैं।

  • आपको अपने विचारों को नियंत्रित करने की जरूरत है। उन्हें पहचानें ताकि आप अपनी भावनाओं को मुक्त कर सकें।

  • अपने विचारों पर काबू पाने का मतलब है, जो कुछ भी हुआ उसके लिए आप स्वयं को दोष नहीं देते हैं, या जो हुआ उसके लिए  अन्य लोगों को जिम्मेदार मानने का प्रयत्न नहीं करते हैं। जो व्यक्ति चला गया है, उसके बारे में सोच-सोच कर दर्द को और अधिक न बढ़ाएँ।

आपको अपने नुकसान को कबूल करने और उस पर रोकर अपने दिल को हल्का करने की ज़रूरत है।

नियंत्रित फैंटेसी

यह तकनीक बहुत से लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। अलविदा कहने में सुविधा के लिए, कल्पना करना बहुत उपयोगी और हल्का महसूस कराने वाला हो सकता है।

  • अंतरंग और अकेले होने के लिए एक जगह खोजें। सुनिश्चित करें कि आप आराम महसूस कर रहे हैं और गहराई से सांस ले रहे  हैं।

  • फिर अपने दिमाग को खाली करें और केवल एक चीज़ पर ध्यान दें: आपका प्रियजन, वह व्यक्ति जिसे आप अभी खो चुके हैं।

  • उन्हें बंद आँखों से देखने की कल्पना करें, लेकिन शांति से मुस्कुराते हुए शांति से उनके बारे में सोचें। यह वह क्षण है जब आप उनसे बात करते हैं।

उन सभी चीजों के बारे में बातें करने के लिए उनके साथ एक आंतरिक वार्तालाप कायम करें जो आपको उनसे कहना है। उन्हें याद दिलाएं कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं, फिर उन्हें आराम से जाने दें।

शोक के प्रबंधन के लिए तकनीकें

दिन-प्रतिदिन अपने जख्मों को ठीक करने की कोशिश करें

तो अब आप स्वीकार कर चुके हैं कि वह व्यक्ति अब आपके साथ नहीं है। आपने मानसिक रूप से उनसे अलविदा कहा है … तो अब क्या?

अब आपको गैरमौजूदगी के घावों और जिस तनहा जिंदगी के साथ आपको छोड़ दिया गया है, उन्हें अपने प्रियजन के बिना पुनर्निर्मित करने की आवश्यकता है।

  • यह समझ लें कि यह एक दैनिक संघर्ष होगा। आपको इसका हर दिन फिर से सामना करना होगा। आपको यह समझने की जरूरत है कि आप अकेले नहीं हैं। आपके साथ बहुत सारे लोग हैं जो आपकी मदद करेंगे।

  • फिर से खुश होने के ख्याल से डरिये मत। आपका प्रियजन हमेशा आपके दिल में रहेगा। वह आपके साथ है, और आपको उनके लिए हँसना मुस्कुराना होगा

अपनी जिंदगी को उनकी यादों से भरी श्रद्धांजलि बनाएं। खुद को व्यस्त रखें।, जब भी आपको आवश्यकता हो, उनके लिए रोयें। लेकिन एक बार फिर हंसने से डरें मत।

वह व्यक्ति आपके चेहरे को प्रसन्नता की रोशनी में जगमगाता देखकर बहुत खुश है

  • MALDONADO, E. D. (2012). EL DUELO Y SU PROCESO PARA SUPERARLO. México DF: Asociación.
  • Wortman, C. B., & Boerner, K. (2007). Beyond the Myths of Coping with Loss: Prevailing Assumptions Versus Scientific Evidence.