दूसरों को खुश रखने की मजबूरी यानी वेंडी सिंड्रोम से ऐसे उबरें

14 नवम्बर, 2018
वेंडी सिंड्रोम की समस्या तब होती है जब आप किसी के लिये अपना सबकुछ दे देते हैं और बदले में आपको कुछ नहीं मिलता। जबकि आप कहीं ज्यादा पाने के हक़दार हैं।

वेंडी सिंड्रोम की जड़ें साइकोलॉजी से जुड़ी हुई हैं। यह डाइग्नोग्स्टिक साइकोलॉजी मैनुअल में कोई मान्यता प्राप्त बीमारी नहीं है। फिर भी यह कुछ ऐसे पहलुओं से जुड़ा है जिनके क्लिनिकल आयामों के रूप में व्यक्त किया जा सकता है और जिनके ईलाज की जरूत होती है।

खुद को केवल दूसरों की देखभाल करने में ही लगा देना धीरे-धीरे खुद की बर्बादी का कारण बनता है। आत्म-सम्मान की कमी या हद से ज्यादा शारीरिक और मानसिक थकान आपको आसानी से डिप्रेशन तक ले जा सकती है।

क्लासिकल लिटरेचर में हमें कई भरोसेमंद आर्किटाइप मिलते हैं जो इस वास्तविक व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।

वेंडी सिंड्रोम, “पीटर पैन सिंड्रोम,” “ओथेलो सिंड्रोम,” या “एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम” – ये सभी उन बीमारियों, समस्याओं और व्यवहारों के बारे में बताते हैं जिनमें  काल्पिनिक बातें सच्ची हो जाती हैं।

अब आप आसानी से यह कह सकते हैं, आज के इस आर्टिकल का टॉपिक उन सबमें से सबसे आम सिंड्रोम है।

कई बार तो, बहुत सी महिलाएं इसे अपने अन्दर पैदा कर लेती हैं। इसलिये नहीं कि वे मजबूर होती हैं, बल्कि इसलिये क्योंकि उन्होंने पीढ़ियों तक इसे देखा है और वे इसे महसूस करती हैं।

वह आदमी जो दूसरों की परवाह करता है, प्यार करता है और उनकी मदद के लिये हमेशा हाजिर रहता है, उसकी नजर में खुद को कुर्बान कर देना प्यार करने का एक खास तरीका होता है। हालांकि कभी-कभी हम कुछ चीजों को आसानी से भूल जाते हैं : जो देता है उसे पाने का हक़ भी है।

यहीं से भावनात्मक मतभेद और उदासी की समस्याएं शुरू होती हैं। आज हम आपको इसके बारे में सोचने का प्रस्ताव देते हैं।

वेंडी सिंड्रोम, या अपने आपको लगातार वंचित करना

जैसा कि हमने पहले भी बताया है, इस सिंड्रोम की जड़ें साइकोलॉजी से जुड़ी हैं। इसके लक्षण बिल्कुल साफ़ होते हैं:

आप समझते हैं कि प्यार करना सबसे पहले दूसरे आदमी के लिये खुद को हाजिर करना है।

  • इस तरह के रिश्ते लंबे समय तक अच्छा चल सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप प्यार को कितना समझते हैं।
  • शुरुआत आप बिल्कुल परेशान नहीं होते कि दूसरे आपकी उतनी परवाह नहीं करते, जितनी आप उनकी करते हैं। आप केवल यह जानते हैं कि आपके साथी को आपका प्यार महसूस होता है और वह खुश है। बस इसी तरह आप अच्छा महसूस करते हैं।
  • आप ऐसी चीजें करते हैं जिससे आपके आस-पास के लोग गुस्सा न हों या परेशान न हों। आप खुद की परेशानियों को भूलकर बाहरी परेशानियों के लिए लड़ते हैं।
  • हालांकि, धीरे-धीरे आपको महसूस होता है, दूसरे लोग आपकी हर कोशिश को देखते हैं और ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे आप “मामूली” चीजें करते हैं। यह उस बिंदु तक पहुंच सकता है जहां वे अत्याचारी और रौब जमाने वाले हो जाते हैं।

अगर आप अभी वेंडी सिंड्रोम का सामना कर रहे हैं, तो उन खास पहलुओं पर ध्यान दीजिये जिन्हें आपको बदलने की जरूरत है।

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2-वेंडी-पीटर पैन-

प्यार का मतलब कुर्बानी नहीं है: प्यार देने और पाने के लिये होता है

बहुत से लोग इस सोच के साथ बड़े होते हैं कि प्यार में रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए आपको कुछ कुर्बानियां देनी पड़ेंगी। अगर आप किसी को चाहते हैं, तो आपको कई चीजें “बर्दाश्त” करनी पड़ेंगी।

आपको यह भी यकीन दिलाया जाता है कि अगर आप “न” भी कहना चाहते हैं तो आपको “हाँ” कहना होगा। आप खुद से ज्यादा दूसरों को प्राथमिकता देने लगते हैं, जो कि दूसरे आदमी का मकसद है।

जब आपके सोचने का तरीका कुछ इस तरह का बन जाता है, तो आप हर एक नए इंसान के बोझ के नीचे दबने लगते हैं:

  • प्यार का मतलब कुर्बानी देना नहीं है। अगर आप सब-कुछ त्याग कर देते हैं, तो आप केवल अपने आपको बलि चढ़ा देंगे।
  • एक प्यार का रिश्ता परिपक्व और जागरूक होना चाहिए। बेशक दोनों पक्षों को देना आना चाहिए, लेकिन पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
  • प्यार का मतलब एक टीम बनाने, अपनी ताकत, दिलचस्पी और जरूरतों का सामंजस्य बनाने से है।
  • वेंडी सिंड्रोम में हमेशा एक आदमी दे रहा होता है और एक ले रहा होता है। एक जीतता है और दूसरा धीरे-धीरे हार जाता है।
  • असल समस्या यह है कि इन सबके बावजूद भी, दूसरे लोगों को इसका एहसास नहीं होता है। रिश्ते की शुरुआत में आपको उनकी परवाह करना, उनके बारे में सोचना, उनकी खुशियों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए हर छोटे-बड़े काम करना अच्छा लगता है।
  • हालांकि, महीनों या वर्षों के बाद आप देखते हैं कि कुछ गड़बड़ है। आखिर में आपको बेकार समझ लिया जाता है।

आप अपने को इस मुश्किल और दुख भरे जाल में नहीं फंसने दे सकते हैं।

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3-इमोशनल रिलेशनशिप

दूसरी तरह के भावनात्मक रिश्तों पर कैसे ध्यान लगायें

हमारी सलाह का पहला और सबसे जरूरी हिस्सा है: आप जो हैं वही बने रहें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसी से कितना प्यार करते हैं। वरना आज नहीं तो कल आपको निराशा, परेशानी, और दुःख का सामना करना पड़ेगा।

देखभाल करना, सुरक्षा करना, समर्पण करना, खुद की जरूरतों को कुर्बान कर देना … ठीक है, लेकिन आपके साथी को भी आपकी देखभाल करनी होगी, समर्पण करना होगा और आपके लिये दूसरी चीजों की कुर्बानी देनी होगी। कुछ कुर्बानियां केवल तभी की जानी चाहिये जब बात छोटी-मोटी चीजों की हो।

  • उन चीजों के लिये अफ़सोस न करें जिनके लिये आप ज़िम्मेदार नहीं हैं।
  • सबसे बड़ा डर यह है कि वेंडी सिंड्रोम वाले लोग गलत रास्तों पर चले जाते हैं। इसे रोकने के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं (आपको कभी भी इसे बहुत ज्यादा नहीं होने देना चाहिये)।
  • आपको अपने को खुश रखना सीखना होगा। अपनी खुद की संगत का मजा लेना चाहिये और यह समझना चाहिये कि अगर आप खुद को अकेले पाते हैं, तो दुनिया खत्म नहीं हो जायेगी।
  • अपनी सोच के पैटर्न को सुधारना सीखें, खासकर उन्हें जो आपको परेशान करते हैं। इससे आपको नए इमोशन पैदा करने में मदद मिलेगी जो आपको और ज्यादा मजबूत बनाते हैं।
  • अगर मैं उनकी और ज्यादा देखभाल करूँ, तो वे मुझे और ज्यादा प्यार करेंगे,” या, ” यह बेहतर होगा  मैं इसे छोड़ दूं जिससे वे देखेंगे कि मैं उन्हें कितना प्यार करती हूं” इस तरह की सोच से दूरी बनाये रखें।
  • किसी दूसरे इंसान पर अपनी सभी उम्मीदों, इच्छाओं और ऊर्जा को थोपना बंद करें। ऐसा केवल एक न्यायसंगत तरीके से करें। ‘आप मेरे प्यार के लायक हैं और मैं आपके सम्मान के लायक हूं।’

याद रखें, प्यार में हमारी एक मर्यादा होनी चाहिए। कभी भी समझौता न करें। अपनी सच्चाई के लिए लड़ना और प्राप्त करना सीखें।

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