हेमट्यूरिया: लक्षण और कारण

हेमट्यूरिया एक बैक्टीरियल या वाइरल संक्रमण का संकेत हो सकता है। पर यह ज्यादा गंभीर जटिलताओं जैसे ब्लैडर या प्रोस्टेट कैंसर का भी संकेत भी हो सकता है।
हेमट्यूरिया: लक्षण और कारण

आखिरी अपडेट: 07 जनवरी, 2020

“हेमट्यूरिया” शब्द मूत्र में खून आने को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मेडिकल लफ्ज़ है। मूत्र में ख़ून देखना डरावना हो सकता है। हालांकि कई अलग-अलग बातें इस स्थिति का कारण बन सकती हैं और उनमें से सभी गंभीर नहीं होती हैं।

कभी-कभी खून को नंगी आंखों से देखा जा सकता है। हालाँकि यह सभी मामलों में नहीं होता है। इसलिए डॉक्टर हेमट्यूरिया को दो मुख्य टाइप में बाँटते हैं: ग्रॉस और माइक्रोस्कोपिक। डॉक्टर माइक्रोस्कोपिक हेमट्यूरिया की डायग्नोसिस करने के लिए कुछ मेडिकल टेस्ट की सिफारिश कर सकते हैं।

बहुत से लोग इस मामले में डॉक्टर के पास जाते हैं। इसकी व्यापकता दर आम आबादी का लगभग 16% है। हमने ऊपर बताया है, यह एक इंफेक्शन से लेकर कैंसर तक कई तरह की बीमारियों का लक्षण हो सकता है। इसलिए यह जानना अहम है कि यह क्या है, साथ ही इसके लक्षण और कारण भी।

इस लेख में हम हेमट्यूरिया के सबसे अहम पहलुओं की व्याख्या करेंगे।

हेमटुरिया क्या है?

सामान्य स्थिति में मूत्र में खून नहीं होता है। हेमट्यूरिया को मूत्र में लाल रक्त कोशिकाओं की उपस्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है, जिन्हें कुछ लैब तकनीकों द्वारा देखा जाता है। हेमट्यूरिया इसलिए होता है क्योंकि किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट के दूसरे हिस्से खून की कोशिकाओं को मूत्र से गुजरने देते हैं। ऐसे में मूत्र लाल रंग का हो सकता है या सामान्य भी रह सकता है

यह ग्रॉस (आप खून देख सकते हैं) या माइक्रोस्कॉपिक (आप देख नहीं सकते खून) हेमट्यूरिया के बीच फर्क को दर्शाता है।

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हेमट्यूरिया के मुख्य कारण

कई मामलों में हेमट्यूरिया का विशिष्ट कारण खोजना संभव नहीं होता। वे सबसे आम प्रक्रियाएं जिनके कारण मूत्र में खून आता है, वे हैं:

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन : ये अपेक्षाकृत आम हैं खासकर महिलाओं में। क्योंकि फीमेल यूरेथ्रा एनस के करीब है, और उसमें मौजूद बैक्टीरिया मूत्रमार्ग में आसानी से जा सकते हैं।
  • किडनी में संक्रमण: इस स्थिति को पाइलोनेफ्राइटिस (pyelonephritis) कहा जाता है। बैक्टीरियाखून या यूरिनरी ट्रैक्ट के माध्यम से किडनी तक पहुँच सकते हैं।
  • प्रोस्टेट समस्यायें : जब प्रोस्टेट बढ़ जाता है, जो कि उम्र बढ़ने के साथ होता है, यह यूरेथ्रा को दबाता है। यह मूत्र के फ्लो को रोक सकता है और हेमट्यूरिया का कारण बन सकता है। यही बात प्रोस्टेट के संक्रमण के मामले में भी होती है।
  • मूत्राशय या किडनी स्टोन : यूरिन में मौजूद कुछ मिनरल जमने लगते हैं। वे क्रिस्टल बनाते हैं और छोटे पत्थरों में बदल जाते हैं। जब ये पत्थर मूत्र पथ से गुजरते हैं, तो वे इसे रोक सकते हैं, जिससे मूत्र में खून आ सकता है।
  • कैंसर : हेमट्यूरिया मूत्राशय, प्रोस्टेट या गुर्दे के कैंसर का संकेत हो सकती है। हालांकि यह आमतौर पर एडवांस स्टेज में ही दिखाई देती है, जिससे डायग्नोसिस मुश्किल हो जाता है।
  • ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis) : इस स्थिति की विशेषता छोटी किडनी फ़िल्टर ग्लोमेरुली की सूजन है। डायबिटीज, संक्रमण, खून से जुड़े रोग या दूसरी प्रक्रियाएं इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।
  • एंटीकॉगुलंट्स या कैंसर से लड़ने वाली दवायें जैसी कुछ दवाएं भी इसका कारण बन सकती हैं।

आप देख सकते हैं, कई चीजें हेमट्यूरिया का कारण बन सकती हैं। वैज्ञानिकों ने कड़े व्यायाम के साथ चोट या डिहाइड्रेशन को भी हेमट्यूरिया से जोड़ा है। इसलिए कारण निर्धारित करने के लिए डॉक्टर से मिलना महत्वपूर्ण है।

हेमट्यूरिया के लक्षण

मैक्रोस्कोपिक हेमट्यूरिया लाल या भूरे रंग के मूत्र के रूप में दिखता है। आमतौर पर यह दर्दनाक नहीं है और दूसरे लक्षणों के साथ नहीं उभरता। हालांकि कुछ लक्षण डायग्नोसिस क्या होगी इस बारे में दिशा दे सकते हैं।

उदाहरण के लिए बुखार और पीठ के निचले हिस्से में दर्द किडनी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। यदि हेमट्यूरिया पेशाब के दौरान जलन या दर्द के साथ हो, तो इसका कारण आमतौर पर निचला यूरिनरी ट्रैक्ट होता है। इसके अलावा, बिना लक्षणों वाली लगातार होने वाली हेमट्यूरिया थक्कों के साथ किडनी ट्यूमर के कारण हो सकती है।

इस कारण 40 और उससे अधिक उम्र के पुरुषों के लिए  प्रोस्टेट टेस्ट जरूरी है।

निष्कर्ष

जैसा कि हमने यहां बताया, हेमट्यूरिया कई बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। कुछ मामलों में यह नँगी आँखों से दिखाई नहीं देती है। इसलिए रेगुलर मेडिकल चेकअप कराना जरूरी है। हम मूत्र में खून की मौजूदगी का पता लगाने के लिए नियमित रूप से यूरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

अपने यूरिन पर कड़ी नज़र रखना न भूलें। आपको अपने मूत्र के रंग साथ ही, दिन में उसकी संख्या और किसी भी असामान्य संवेदना पर नजर रखना होगा, क्योंकि किसी भी बदफलाव में किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। यदि आपका कोई सवाल है, तो अपने डॉक्टर से पूछें।

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